05/07/2026
हमारे गाँव गोलाबड़ी का मातवन । वहाँ पहुँचकर मन अत्यंत आनंद और गर्व से भर गया। बचपन की यादें ताज़ा हो गईं। एक समय था जब इस स्थान पर केवल एक ही पेड़ हुआ करता था और गाँव के बच्चे शाम को उसी की छाँव में खेलते थे।
आज वही स्थान घने पेड़ों से हरा-भरा होकर प्रकृति की सुंदर मिसाल बन चुका है। इस परिवर्तन को देखकर एहसास हुआ कि सामूहिक प्रयास और प्रकृति के प्रति समर्पण से असंभव भी संभव बनाया जा सकता है।
इस अवसर पर हमारे बड़े पापा बापूसिंह जी भूरिया भी मातावन में मिले। उन्होंने बताया कि किस प्रकार गाँव के लोगों को एकजुट कर इस परंपरागत मातावन के संरक्षण और विकास का संकल्प लिया गया। उनका संदेश था कि यदि हम सभी अपने पारंपरिक मातावनों की रक्षा करेंगे, तो हमारे गाँव सदैव हरे-भरे और समृद्ध बने रहेंगे।
आज इसी मातावन की शीतल छाँव में गाँव के लोग बैठकर ग्राम विकास, पर्यावरण संरक्षण और समृद्धि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करते हैं। यह स्थान अब केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि गाँव की एकता, संस्कृति और जागरूकता का केंद्र बन गया है।
आज मैं और मेरे भाई सूरज भूरिया इस प्रेरणादायक परिवर्तन के साक्षी बने। एक समय की बंजर भूमि को हरियाली से लहलहाते देखकर मन अत्यंत प्रसन्न हुआ।
परमार्थ की सबसे बड़ी शक्ति है—प्रकृति और समाज के लिए मिलकर किया गया निस्वार्थ प्रयास। आइए, हम सभी अपने गाँव के मातावनों और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण का संकल्प लें, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस हरियाली और सुखद वातावरण का आनंद ले सकें।
गोलाबड़ी का युवा
संजय भूरिया
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