समाज में बन्धु भाव जाग्रत करने हेतु। संघ स्थापना काल से ही इसके लिए विभिन्न सेवा गतिविधियां चल ही रही थी। पर उसे संगठित स्वरूप् मिला संघ संस्थापक प.पू. डॉ. केषव बलिराम हेडगेवार की जन्मषती 1989 से। विधिवत संघ के कार्य विभागों में सेवा विभाग का सृजन हुआ। श्री सूर्यनारायण राव पहले अखिल भारतीय सेवा प्रमुख बने। अपने प्रान्त में भी यह कार्य उस समय के खण्डवा विभाग प्रचारक श्री बाजमुकुन्दजी झा करते थे। का
र्य प्रारम्भ करने के लिए प्रान्त भर में डॉ. हेडगेवार जन्मषती वर्ष में सेवा निधि एकत्र की गई, हर जिले में जो सेवा निधि एकत्र होकर आई उसके ब्याज का उपयोग सेवा कार्य करने के लिए किय जाता। प्रान्तीय अधिकारियों की चिन्ता और प्रवास के कारण समूचे प्रान्त में वातावरण बनने लगा खण्डवा में वाहक ाबने श्री दि.मा. कुलकर्णी, डोंगरे बाबूजी, भागीरथजी कुमरावत। डॉ. बसंतलाल झंवर ने विकलांग आश्रम के लिए जमीन दी। धीरे धीरे विकलांग आश्रम ने स्वरूप ग्रहण किया। 50 अषक्त बच्चे उस केन्द्र में आकर रहने और बढ़ने लगे। रतलाम में प्रारंभ करने वाले थे श्री मांगीलालजी कटारिया, रामभाऊ शौचेख् स्वर्गीय श्री कैलाष बरमरेचा, रामचन्द्र टेलर, शाजापुर में व्याख्याता श्री सक्सेनाजी, उज्जैन में श्री लक्ष्मीनारायण शर्मा, तुलसीराम मास्टर साहब, हीरानन्दजी लद्दाणी। इन्दौर में कमान संभाली श्री नारायणदासजी साबू, तात्या जोषी, समीरमलजी संघवी, विष्णुजी मोघे ने।
अब लगने लगा था कि कार्य गति पकड़ रहा है। हिसाब किताब, रख रखाव आदि के लिए सेवा भारती संगठन बना। जगह जगह सेवा भारती के नाम से समितियों कही ट्रस्ट बना। जगह-जगह सेवा भारती के नाम से समितियां कहीं ट्रस्ट पंजीकृत हुए। जुलाई 1991 में संघ के अखिल भारतीय अधिकारी श्रद्धेय भाऊरावजी देवरस प्रांतीय बैठक में भोपाल पधारे। सारे कार्यों का वृत्त सुनकर संतोष व्यक्त किया, पर अपने देष में वनवासी कार्य की आवष्यकता बताते हुए देषभर में फेले हुए वनवासी क्षेत्र की समस्याओं कठिनाईयों, वहां चल रहे मतांतरण, शोषण का चित्र प्रस्तुत किया और कहा आपके प्रान्त में भ्ज्ञी अपर्याप्त वनवासी क्षेत्र है। जोन से पहले मुझे एक जिले का विषेषकर झाबुआ में कार्य प्रारम्भ करना है, उसका ब्ल्यू प्रिंट चाहिए।
समय का नितान्त अभाव था, पर अपने अधिकारी की आज्ञा मानकर रात्रि में उस समय के प्रांत प्रचारक शरदजी, कार्यवाहक ईसराजी, सेवा प्रमुख श्री बालमुकुन्दजी झा, विभाग प्रचारक श्रीराम आरावकर, अक्षरषः रात्रि जागरण कर प्रातः होने पर प्रथाम सत्र में सबके सामने कार्य योजना प्रस्तुत कर दी। श्रद्धेय भाऊरावजी को इतने में ही समाधान नहीं था, उन्होंने कहा योजना तो बहुत अच्छी है पर क्रियांवित करने वाला प्रमुख कौन रहेगा। श्री शरद जी ने पास बैठे हुए श्री राजारामजी तिवारी (रतलाम) को हाथ पकड़कर उठा दिया और कहा, प्रोफेसर डॉ राजाराम तिवारी छुट्टी लेकर ये काम करेंगे। डॉ. राजारामजी तिवारी झाबुआ जिले की थांदला तहसील के भीमकुंड ग्राम में मुख्यालय बनाकर रहने लगे और आस पास के क्षेत्र में एकल विद्यालय प्रारंभ कर दिए। हाई स्कूल पास वनवासी को प्रषिक्षण देकर अपने ही ग्राम में विद्यालय चलाना धीरे-धीरे क्षेत्र में एकल विद्यालय के माध्यम से व्यापक सम्पर्क और जन-जागरण हुआ। प्रान्त में अन्य वनवासी अंचलों में धीरे-धीरे एकल विद्यालय प्रारम्भ हुए पानसेमल (बड़वानी), बुरहानपुर, खण्डवा, खरगोन, रतलाम में एकल का व्यापक कार्य प्रारम्भ हो गया। पर यह तो प्रारम्भ था, कार्यकर्ताओं को विश्राम कहां केवल झाबुआ जिले में ही 342 एकल विद्यालयों में लगभग 12000 वनवासी बच्चे प्रतिदिन जग सिर मौर बनायें भारत का गान करने लगे। मालवा प्रान्त में खण्डवा, खरगोन, बड़वानी, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, रतलाम, बुरहानपुर जिले वनवासी जिले है, इनसे लगे महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थासन के कई जिलों को मिलाकर देष का सबसे बड़ा वनवासी अंचल बनता है। अब सेवा भारती की पहल के कारण वनवासी का स्वाभिमान भी जागृत हुआ, उसे लगा कि हमारी पीठ पर भी हाथ रखने वाला हमको गले लगाने वाला समाज देर से ही सही हमारी चिन्ता तो करने लगा है, परिणामतः सब दूर उत्साह का वातावरण बनने लगा। अपेक्षाकृत बहुत कम संसाधनों के पश्चात भ्ज्ञीक्षेत्र के वनवसी बंधुओं का अपार स्नेह और आत्मीयता सेवा भारती को मिला स्थानीय रहवासियों का मन भी जुड़ा और बड़े परिमाण में सेवा भारती के कार्यकर्ता भी निकलने लगे। इस उत्साह को और द्विगुणित करने के लिए योजना बनी हिन्दू संगूम की। लगभग 3500 कार्यकर्ताओं ने इस कार्य के लिए न्यूनतम 7 दिवस का समय दिया इन्हें धर्मवीर कहा गया धर्मज्ञवीरों में आधे से अधिक वनवासी ही थे।, इस अन्तराल में 2485 गांवों के सवा तीन लाख घरों में देवालय की सथापना की गई। 28 लाख बन्धुओं ने गले में हनुमानजी का लाकेट को श्रद्धा से पहना। 26 दिसम्बर से 6 जनवरी तक गांव गांव में धर्म जागरण यात्राऐं निकाली गई।