Bwise WGSAT -NGO to Empower

Bwise WGSAT -NGO to Empower NGO is registered with an objective to reach out to more and more underprivileged and needy part of the society .

Who have been striving and far from basic need and hygiene . It is in line with our Facebook group "Women Ghar Se Asma Tak""Power of 52000"

कुछ अपने मन की कहें कुछ सबके मन की सुन आओ अकेलेपन की सुनी से डगर को खूबसूरत सभी के साथ के फूलों से महकाएजब कोई सुनने वाल...
13/05/2026

कुछ अपने मन की कहें कुछ सबके मन की सुन आओ अकेलेपन की सुनी से डगर को खूबसूरत सभी के साथ के फूलों से महकाए

जब कोई सुनने वाला नहीं होगा और जब कुछ कहने वाला नहीं होगा तो कैसे संवाद होगा कैसे विचारों का आदान-प्रदान होगा

हमेशा की तरह इस बुधवार पेठ डॉक्टर भारत रावत जी के नेतृत्व में हमारी यह ऑनलाइन मीटिंग संपन्न हुई जिसमें अपने दिल की बात सपने अपने अपने विषय के साथ कहीं बहुत को सीखा बहुत कुछ समझा बहुत कुछ जाना इसलिए सभी वरिष्ठ को सभी को बहुत-बहुत साधुवाद करते धन्यवाद करते हैं इसीलिए समय का कोई भरोसा नहीं है जब भी समय मिले आपको जो कोई दिल की बात कहना चाहे आप जरूर से रुक कर सुनिए और आपको कोई ऐसा मिल जाए जो आपकी बात सुन सकता है तो उसे अपने मन का गुबार जरूर से दूर कर लीजिए

आज तपती हुई सड़क पर चलते-चलतेएक छोटी सी चिड़िया से भेंट हो गई।वह एक छोटी कटोरी के पास बैठकर पानी पी रही थी।लेकिन आश्चर्य...
13/05/2026

आज तपती हुई सड़क पर चलते-चलते
एक छोटी सी चिड़िया से भेंट हो गई।

वह एक छोटी कटोरी के पास बैठकर पानी पी रही थी।
लेकिन आश्चर्य यह था कि
उसकी आँखों से मोतियों जैसे आँसू भी गिर रहे थे।

मैंने पूछा —
“इतनी प्यारी चिड़िया…
तुम पानी भी पी रही हो
और साथ में आँसू भी बहा रही हो?
इससे तो तुम्हें और प्यास लगेगी…”

चिड़िया हल्के से मुस्कुराई और बोली —

“मैं इस संसार का नियम देख रही हूँ।
लोग लेते तो बहुत हैं…
पर लौटाना भूल जाते हैं।

मैं सोचती हूँ,
दो बूंद पानी यहाँ से लूँ
तो दो बूंद अपनी आँखों से वापस गिरा दूँ…
ताकि हिसाब बराबर रहे।
कटोरा फिर भर जाए,
और मेरा मन भी।”

फिर उसने आसमान की ओर देखा और कहा —

“आज जब मैं उड़ रही थी,
मेरी ही परछाईं मुझसे पूछ रही थी —
कहाँ गईं वे पेड़ों की घनी छायाएँ?

पहले इतने विशाल वृक्ष हुआ करते थे
कि मेरी छाया धरती पर दिखाई ही नहीं देती थी।
हम सब पक्षी उन्हीं शाखाओं पर बैठकर गाते थे।
हमारी आवाज सुनकर
मनुष्य भी धरती माँ की गोद में आकर बैठ जाता था।

लेकिन अब…
चारों ओर सीमेंट है,
ब्रिज हैं,
दौड़ती हुई मशीनें हैं।
दिन-रात सड़कों पर भागती आवाजें हैं।
एक अजीब सा सन्नाटा है
जो शोर के बीच भी अकेलापन दे जाता है।”

उसकी आँखें नम हो गईं…

“हम मानते हैं कि समय आगे बढ़ता है।
विकास भी जरूरी है।
लेकिन विकास के साथ
जीवन ही मरने लगेगा,
साँसें कम पड़ जाएँगी,
पेड़ खत्म हो जाएँगे,
पानी सूख जाएगा…
यह किसी ने नहीं सोचा था।”

फिर वह चिड़िया उड़ने लगी…
लेकिन जाते-जाते
मनुष्य को एक गहरी सीख दे गई —

“जो इस धरती से लिया है,
उसे इसी धरती को लौटाना सीखो।

पानी लिया है — तो जल बचाओ।
छांव ली है — तो पेड़ लगाओ।
प्रकृति से प्रेम लिया है —
तो प्रकृति को जीवित भी रखो।

क्योंकि जीवन का तंत्र
लेने से नहीं,
लौटाने से चलता है…” 🌿

देशहित में छोटे-छोटे संकल्प भी बड़े बदलाव ला सकते हैं मा. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा दिए गए ये 8 संकल्प के...
12/05/2026

देशहित में छोटे-छोटे संकल्प भी बड़े बदलाव ला सकते हैं

मा. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा दिए गए ये 8 संकल्प केवल अपील नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और मजबूत भारत की दिशा में जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश हैं।

आइए, हम सभी मिलकर राष्ट्रहित में अपनी भूमिका निभाए...

 #बोगनवेलिया यह कागज जैसे पतले फूल Bougainvillea (बोगनवेलिया) का है। इसे बहुत ही आसानी से रोपण किया जा सकता है। आओ जानें...
12/05/2026

#बोगनवेलिया

यह कागज जैसे पतले फूल Bougainvillea (बोगनवेलिया) का है। इसे बहुत ही आसानी से रोपण किया जा सकता है। आओ जानें -

🌱 बोगनवेलिया का रोपण करने के लिए तेज धूप वाली जगह चुनें।
बोगनवेलिया को रोज़ना कम से कम 5–6 घंटे तेज धूप चाहिए। तभी ये तेजी से ग्रोथ कर पायेगा।

अच्छी मिट्टी तैयार करें अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी लें। तभी इसका जड़ जल्दी से फैलेगा।
मिट्टी में गोबर की खाद और रेत मिलाना लाभदायक होता है। इसका विशेष ध्यान रखें।

बोगनवेलिया कटिंग से पौधा लगाएं 6–8 इंच लंबी स्वस्थ शाखा काटकर मिट्टी में लगाएं।
पानी सीमित दें। नहीं तो जड़ सड़ सकता है। इसके कटिंग में चीरा लगाकर पानी में हफ्ते भर रखने से भी जड़ विकसित हो जाता है। मिट्टी सूखने पर ही पानी दें।

महीने में 1/2 बार जैविक खाद डालें ताकि फूल ज्यादा आएं।

सूखी और अतिरिक्त शाखाएं काटने से नए फूल तेजी से आते है। इसे समय समय पर छांटते रहें।

अगर आपको यह पोस्ट पसंद आया हो तो कृपया वृक्ष लगाओ वृक्ष बचाओ आंदोलन के पेज को लाइक फालो एवं शेयर अवश्य करें। धन्यवाद आपका 🙏🌹

#बोगनवेलिया #वृक्षलगाओवृक्षबचाओ

🌿 तुलसी माता का पौधा उपहार में देना — केवल पौधा नहीं, संस्कृति, स्वास्थ्य और शुभभावना का आदान-प्रदानभारत की परंपरा में त...
11/05/2026

🌿 तुलसी माता का पौधा उपहार में देना — केवल पौधा नहीं, संस्कृति, स्वास्थ्य और शुभभावना का आदान-प्रदान
भारत की परंपरा में तुलसी केवल एक पौधा नहीं मानी गई,
उसे “तुलसी माता” का सम्मान दिया गया है।
घर के आंगन में तुलसी का होना केवल धार्मिक आस्था नहीं,
बल्कि स्वास्थ्य, पर्यावरण, सकारात्मक ऊर्जा और परिवारिक संस्कारों का प्रतीक भी माना गया है।
मातृ दिवस, जन्मदिन, विवाह, गृहप्रवेश या किसी शुभ अवसर पर
तुलसी का पौधा उपहार में देना
एक बहुत सुंदर, जीवंत और अर्थपूर्ण परंपरा बन सकती है। 🌱
🌸 तुलसी माता की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता
भारत में हजारों वर्षों से तुलसी का विशेष महत्व रहा है।
आयुर्वेद, पुराणों और भारतीय जीवनशैली में तुलसी को
“जीवनदायिनी” और “पवित्रता का प्रतीक” माना गया है।
प्राचीन समय में लगभग हर घर के आंगन में तुलसी चौरा होता था।
सुबह-शाम दीप जलाना, जल अर्पित करना और तुलसी के पास बैठना
केवल पूजा नहीं था—
वह परिवार को प्रकृति, अनुशासन और सकारात्मकता से जोड़ने का माध्यम था।
तुलसी को “विष्णुप्रिय” कहा गया,
लेकिन उसका महत्व केवल धर्म तक सीमित नहीं रहा।
आयुर्वेद में तुलसी को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने,
श्वसन तंत्र को मजबूत करने और वातावरण को शुद्ध रखने वाला पौधा माना गया।
🌿 तुलसी का पौधा उपहार में देने से क्या होता है?
1. 🌱 स्वास्थ्य का संदेश जाता है
तुलसी उपहार देना मतलब सामने वाले को कहना—
“आप स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें, खुश रहें।”
यह केवल सजावट नहीं,
बल्कि स्वास्थ्य और प्रीवेंटिव केयर का प्रतीक है।
2. 🌸 रिश्तों में सकारात्मकता बढ़ती है
जब हम किसी को जीवित पौधा देते हैं,
तो हम केवल वस्तु नहीं देते—
हम देखभाल, प्रेम और जीवन बांटते हैं।
तुलसी का पौधा रिश्तों में अपनापन और आत्मीयता बढ़ाता है।
3. 🌍 पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैलता है
एक पौधा देना मतलब
प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाना।
तुलसी वातावरण को शुद्ध करने में सहायक मानी जाती है
और घर में हरियाली और ताजगी लाती है।
4. 🕊️ मानसिक शांति और आध्यात्मिक भाव बढ़ते हैं
तुलसी के पास बैठना, जल देना, दीपक जलाना—
मन को शांत और स्थिर करने वाली प्रक्रिया मानी गई है।
यह व्यक्ति को प्रकृति और अपने भीतर की शांति से जोड़ती है।
5. 👨‍👩‍👧 बच्चों में संस्कार विकसित होते हैं
जब बच्चे पौधों की सेवा करते हैं,
तो उनमें जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और प्रकृति प्रेम बढ़ता है।
तुलसी का पौधा परिवार को “पालन और संरक्षण” का भाव सिखाता है।
6. 🌿 उपहार की नई और अर्थपूर्ण संस्कृति बनती है
आज के समय में लोग प्लास्टिक, शोपीस या केवल औपचारिक वस्तुएं देते हैं।
लेकिन तुलसी का पौधा एक ऐसा उपहार है
जो बढ़ता भी है, जीवित भी रहता है
और रोज़ सकारात्मक स्मृति देता है।
🌸 तुलसी बांटने से समाज में क्या परिवर्तन आ सकता है?
घर-घर हरियाली बढ़ेगी
लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होंगे
प्रीवेंटिव हेल्थ की सोच बढ़ेगी
पर्यावरण संरक्षण मजबूत होगा
भारतीय संस्कृति से जुड़ाव बढ़ेगा
बच्चों में संवेदनशीलता और अनुशासन आएगा
रिश्तों में दिखावे की जगह आत्मीयता बढ़ेगी
🌿 संदेश
यदि हर शुभ अवसर पर
एक पौधा, एक तुलसी, एक हरियाली का संकल्प बांटा जाए—
तो केवल घर नहीं,
पूरा समाज स्वस्थ, सुंदर और संवेदनशील बन सकता है।
तुलसी माता का पौधा
केवल मिट्टी में उगता पौधा नहीं…
यह भारतीय संस्कृति, स्वास्थ्य, प्रेम और प्रकृति का जीवंत आशीर्वाद है। 🙏🌱

मां के प्रति सम्मान केवल अपनी मां और अपने बच्चों तक सीमित नहीं होना चाहिए।यदि हमारा प्रेम केवल “मेरी मां”, “मेरा परिवार”...
11/05/2026

मां के प्रति सम्मान केवल अपनी मां और अपने बच्चों तक सीमित नहीं होना चाहिए।
यदि हमारा प्रेम केवल “मेरी मां”, “मेरा परिवार”, “मेरे बच्चे” तक ही सीमित रह जाए,
तो कहीं न कहीं वह एक सीमित और स्वार्थ से जुड़ा प्रेम बन जाता है।
सच्चा मातृभाव तब जागृत होता है
जब मन मां की भावना से ओतप्रोत हो जाता है…
जब मन में भक्ति, करुणा और संवेदना का स्रोत बहने लगता है।
तब हमें केवल अपनी मां ही नहीं,
बल्कि समाज की हर मां में अपनी मां दिखाई देने लगती है—
मां भारती…
मां धरती…
मां वसुंधरा…
हर जाति, हर धर्म, हर वर्ग की मां…
सबमें वही ममता, वही त्याग, वही करुणा दिखाई देने लगती है।
और तब समाज का हर बच्चा भी अपना ही बच्चा प्रतीत होता है।
उनके सुख-दुख, सुरक्षा, संस्कार और भविष्य के प्रति
मन स्वयं कर्तव्यबद्ध हो जाता है।
फिर इंसान केवल अपने घर तक सीमित नहीं रहता—
वह समाज को मुस्कान देने निकल पड़ता है।
घर से बाहर निकलते समय
कम से कम किसी एक चेहरे पर मुस्कान छोड़ने का प्रयास करता है। 🌸
जो हमारे घरों में कार्य करने आती हैं,
हमारी गृह सहायिकाएं, सफाई कर्मी, श्रमिक बहनें—
उनसे केवल “मालिक और नौकर” का संबंध नहीं,
बल्कि सम्मान, संवेदना और आत्मीयता का रिश्ता बनना चाहिए।
हम अक्सर कुछ लोगों को छोटा समझकर
अपने आपको बड़ा सिद्ध करने का प्रयास करते हैं,
लेकिन वह महानता नहीं…
वह हमारा अहंकार है।
मानवीयता तो तब है
जब हम हर व्यक्ति के सम्मान को समझें,
हर मां को आदर दें,
हर श्रमिक के श्रम को प्रणाम करें।
समाज की हर मां को खुशी देने का प्रयास करें।
जो बच्चे आपके आसपास हैं,
जो भविष्य में आपके साथ विश्वास से जुड़े हैं,
उन्हें भी अपने बच्चों समान स्नेह, संस्कार और आशीर्वाद देने का प्रयास करें।
यही मातृभाव है।
यही मानवता है।
यही सच्ची संस्कृति है। 🌿🙏

बताते चले आपने क्या क्या किया??? या कुछ नहीं???केवल वही जो रोज करते हैं?????? मातृ दिवस पर हम क्या-क्या कर सकते हैं 🌸मात...
11/05/2026

बताते चले आपने क्या क्या किया??? या कुछ नहीं???
केवल वही जो रोज करते हैं??????



मातृ दिवस पर हम क्या-क्या कर सकते हैं 🌸

मातृ दिवस केवल “शुभकामनाओं” का दिन नहीं,
बल्कि मां, मातृत्व, परिवार, समाज, प्रकृति और स्वयं के प्रति जिम्मेदारी को महसूस करने का अवसर है।
इस दिन हम छोटे-छोटे कार्यों से बहुत बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।
मातृ दिवस पर किए जा सकने वाले सुंदर कार्य 🌿
माता को प्रणाम करना
माता का चरण वंदन करना
माता का चरण पूजन करना
माता से प्रेमपूर्वक बातचीत करना
माता के साथ बैठकर पुरानी यादें सुनना
माता को धन्यवाद कहना
माता को समय देना
माता के हाथ का भोजन प्रेम से खाना
माता को अपने हाथों से भोजन बनाकर खिलाना
माता को तुलसी का पौधा भेंट करना
माता को कोई औषधीय पौधा उपहार में देना
पौधारोपण करना
“एक मां – एक पौधा” संकल्प लेना
घर के बुजुर्गों का सम्मान करना
वृद्धाश्रम जाकर माताओं से मिलना
अकेली वृद्ध माताओं के साथ समय बिताना
जरूरतमंद माताओं को साड़ी या वस्त्र देना
निर्धन बच्चों की माताओं की सहायता करना
पक्षियों के लिए दाना-पानी रखना
मूक प्राणियों के लिए पानी की व्यवस्था करना
गौसेवा करना
पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेना
प्लास्टिक कम उपयोग करने का निर्णय लेना
माता धरती को स्वच्छ रखने का संकल्प लेना
परिवार के साथ मिलकर योग करना
माता-पिता के स्वास्थ्य परीक्षण करवाना
प्रीवेंटिव हेल्थ चेकअप करवाना
नियमित व्यायाम का संकल्प लेना
माता के साथ सुबह की सैर करना
माता को डिजिटल ज्ञान सिखाना
माता की पसंद का गीत सुनना
परिवार के साथ बिना मोबाइल समय बिताना
बच्चों को संस्कारों की कहानियां सुनाना
बच्चों से अच्छे से बैठकर बात करना
बच्चों को मां के संघर्ष बताना
बच्चों को सेवा और सम्मान का महत्व सिखाना
परिवार में धन्यवाद बोलने की आदत डालना
माता के लिए हस्तलिखित पत्र लिखना
माता की पुरानी तस्वीरों का कोलाज बनाना
माता के साथ भजन या प्रार्थना करना
घर में सकारात्मक वातावरण बनाना
माता के अधूरे सपनों पर चर्चा करना
माता को आराम का दिन देना
घर के कामों में सहयोग करना
रसोई का कार्य स्वयं संभालना
किसी जरूरतमंद महिला की मदद करना
महिलाओं के स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम करना
रक्तदान शिविर में भाग लेना
समाज सेवा गतिविधियों में भाग लेना
बेटियों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना
महिलाओं की शिक्षा को समर्थन देना
किसी बच्ची की पढ़ाई में सहायता करना
परिवार में मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा करना
क्रोध और कटु शब्दों से बचने का संकल्प लेना
परिवार में प्रेमपूर्ण संवाद बढ़ाना
माता को हंसाने की कोशिश करना
घर के हर सदस्य का सम्मान करना
परिवार के साथ ध्यान और मेडिटेशन करना
पानी बचाने का संकल्प लेना
भोजन की बर्बादी रोकना
जरूरतमंदों को भोजन वितरण करना
मातृशक्ति सम्मान कार्यक्रम आयोजित करना
समाज की प्रेरणादायक माताओं को सम्मानित करना
किसी बीमार माता की सेवा करना
अस्पताल में मरीजों को फल वितरण करना
स्वच्छता अभियान में भाग लेना
बेटी-बचाओ और महिला सुरक्षा पर जागरूकता फैलाना
माता-पिता को तनावमुक्त जीवन देने का प्रयास करना
स्वयं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना
अपने जीवन में संतुलन, सेवा और संस्कार लाने का संकल्प लेना
संदेश 🌸
मातृ दिवस केवल एक दिन नहीं…
यह मां के त्याग, प्रेम, धैर्य, शक्ति और संस्कारों को महसूस करने का अवसर है।
यदि हर परिवार
मां का सम्मान,
प्रकृति का संरक्षण,
स्वास्थ्य का ध्यान
और समाज सेवा का भाव अपनाए—
तो सच में एक विकसित, संवेदनशील और सुंदर भारत का निर्माण होगा।
सभी माताओं को हृदय से प्रणाम। 🙏🌿

10/05/2026

मां का संकल्प

हमारी सुभद्राबाई…जो वर्षों से हमारे घर में बर्तन-सफाई का कार्य करते हुए केवल काम नहीं, बल्कि अपने स्नेह, अपनत्व और आशीर्...
10/05/2026

हमारी सुभद्राबाई…
जो वर्षों से हमारे घर में बर्तन-सफाई का कार्य करते हुए केवल काम नहीं, बल्कि अपने स्नेह, अपनत्व और आशीर्वाद से हमारे जीवन का हिस्सा बन गई हैं।
अभी-अभी उनकी बेटी का विवाह हुआ।
कुछ वर्ष पहले कोविड काल में उनके पति उन्हें छोड़कर चले गए थे। जीवन के इतने बड़े संघर्षों के बीच भी उन्होंने साहस नहीं छोड़ा और अपनी बेटी को प्रेम, संस्कार और मेहनत से आगे बढ़ाया।
जब हमें पता चला कि बेटी की शादी हो गई और उन्होंने हमें निमंत्रण नहीं दिया, तो हमने उनसे बहुत प्रेम से पूछा —
“आपने हमें बुलाया क्यों नहीं? हम आपके साथ इस खुशी में शामिल होना चाहते थे…”
उनकी आँखों और शब्दों में झिझक थी…
शायद उन्हें लगा कि हम वहाँ आकर सहज महसूस नहीं करेंगे।
शायद समाज ने उन्हें यह विश्वास ही नहीं दिया कि रिश्ते दिल से भी बनते हैं, केवल स्थिति और पैसों से नहीं।
तब हमने मन में संकल्प लिया कि यह छोटा-बड़ा, ऊँच-नीच और भेदभाव की दीवार टूटनी चाहिए।
हमने उनसे कहा —
“अगर शादी में नहीं बुलाया, तो अब मिठाई तो अपने हाथों से खिलाइए…”
फिर वह बहुत प्रेम से मिठाई बनाकर लाईं…
अपने हाथों की मेहनत, अपने मन का स्नेह और एक माँ का अपनापन उसमें मिला हुआ था।
हमने भी उसे पूरे सम्मान और प्रेम से ग्रहण किया।
आज जो भी हमारे जीवन में सहयोग करता है…
जो हमारे घर, हमारे परिवार और हमारे मन को संभालने में भागीदार बनता है…
वह केवल “काम करने वाला” नहीं होता, वह हमारे सम्मान और परिवार का हिस्सा होता है।
माँ केवल वह नहीं जो हमें जन्म दे…
माँ वह भी होती है जो दूसरों के बच्चों को प्रेम दे, आशीर्वाद दे, चिंता करे और अपने स्नेह से जीवन को स्पर्श करे।
और शायद यही हमारे भारत की सबसे सुंदर संस्कृति है —
जहाँ हर मातृशक्ति में माँ का स्वरूप देखा जाता है,
जहाँ चरण वंदन केवल व्यक्ति का नहीं, उसके त्याग, श्रम, करुणा और मातृत्व का किया जाता है।
सभी मातृशक्तियों को सादर चरण वंदन। 🙏

10/05/2026

मां और मातृत्व

माता चरण वंदना माता के लिए माता के द्वारा बच्चों के द्वारा और सेवा कार्य मातृ दिवस उपलक्ष्य में बच्चों को सफलता संस्कारो...
10/05/2026

माता चरण वंदना माता के लिए माता के द्वारा बच्चों के द्वारा और सेवा कार्य मातृ दिवस उपलक्ष्य में बच्चों को सफलता संस्कारों परंपरा के साथ-साथ सीखने चले जाकर सेवा कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण मूल्यवान है और हमारे जीने का आधार है

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