18/06/2020
आपदा में अवसर क्या है
आज जो बेरोजगारी बड़े पैमाने पर उत्पन्न हुई है उसे मिटाने के लिए सरकार को चाहिए कि वह मार्केट को कम समय खोलने की बजाए 24 घंटे उसे खोलें उसके 2 फायदे हैं
1-पहला जब मार्केट से 24 घंटे खुला रहेगा तो लोगों में जल्दी नहीं रहेगी
और लोगों में पैनिक भी नहीं रहेगा और सोशल डिस्टेंसिंग को भी आसानी से मेंटेन किया जा सकेगा
अभी क्या हो रहा है हमारी आबादी है लाखों -करोड़ों में और सभी को अपना काम 5 से 6 घंटों में निपटाना है तो भीड़ तो बढ़ेगी परंतु यदि इस समय सीमा को 24 घंटे कर दिया जाए तो आबादी अपने काम को आसानी से कार्य कर सकती है इससे भीड़ भी कम होगी और लोग अपनी सुविधानुसार काम कर सकेंगे ।
और जो अनइंप्लॉयमेंट उत्पन्न हुआ है उसे मार्केट की एक से दो शिफ्ट बढ़ाकर कंपनसेट/ समायोजित काफी हद तक किया जा सकता है
दूसरा फायदा वर्तमान में सरकार ने मार्केट खोलने की जो समय सीमा है वह 3 से 4 या 5 घंटे की रखी है परंतु सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जो यह समय सीमा है वह अपने आप में विरोधाभास है सोशल डिस्टेंसिंग के साथ।
एक तरफ जहां पहले शहरों की बढ़ती आबादी के कारण 12 घंटे के मार्केट में भी भीड़ कम नहीं होती थी आज उसी भीड़ को 4 घंटे मैं पूरा किए जाने की कोशिश है जो कि संभव ही नहीं है
नहीं सोशल डिस्टेंसिंग पॉसिबल है उन लोगों की जल्दबाजी क्योंकि हर व्यक्ति चाहता है उसका काम जल्दी से जल्दी और यही जल्दबाजी कम काम के घंटों में लोगों पर भारी पड़ सकती है
सामान्य सा उदाहरण है सप्लाई वर्सेस डिमांड
यदि समय की सप्लाई कम है डिमांड ज्यादा है
तो हमें समय की सप्लाई भी बनानी पड़ेगी
यदि किसी शहर की आबादी की जल की आपूर्ति 8 इंच के पाइप से की जाती हो
और अब उसे 2 इंच की पाइप से आपूर्ति की जाए तो संभव ही नहीं है
परंतु यदि आपूर्ति 16 इंच के पाइप से की जाए तो आपूर्ति सामान्य बनी रहेगी, आपूर्ति पूरी हो पाएगी।
सामान्य स ज्ञान है।
इससे रोजगार और सोशल डिस्टेंसिंग जैसी चीजें दोनों ही उद्देश्यों की पूर्ति की जा सकती हैं।
एक इस आपदा में एक बात निकल कर आई कि बड़े महानगरों जहां पर आबादी का घनत्व अत्यधिक है वहां यह समस्या बहुत विकराल बनकर उभरी है अन्य शहरों की तुलना जिसे मुंबई दिल्ली कोलकाता अहमदाबाद बेंगलुरु,
इस समस्या से निजात पाने के लिए सरकार को चाहिए कि छोटे शहरों को कस्बों को एक निश्चित आबादी तक डेवलप करें ताकि छोटी जगह पर भी रोजगार एवं इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं उपलब्ध हो जावे एवं छोटे शहरों के लोगों को भी रोजगार के लिए कहीं दूसरे बड़े शहरों में ना जाना पड़े।
कुल मिलाकर 3 फायदे
1- मार्केट को 24 घंटे खोलकर जो बेरोजगारी उत्पन्न हुई है उसे एक अतिरिक्त शिफ्ट में समायोजित एवं एडजस्ट काफी हद तक किया जा सके।
2- आज जो लोगों में पैनिक की सिचुएशन है और जो जल्दबाजी है कम कार्य सीमा के घंटों में अपना काम निपटाने की,
और जो सोशल डिस्टेंसिंग को मेंटेन करने में सबसे बड़ी बाधा है उसे आसानी से दूर किया जा सके।
3- छोटे शहरों और कस्बों को एक निश्चित आबादी के घनत्व तक सुविधा युक्त बनाया जाए व्यापार उद्योग केवल ऐसे ही क्षेत्रों में विकसित किए जाएं ताकि नए क्षेत्रों को भी मौका मिल सके एवं लोगों को पलायन करके दूसरे क्षेत्रों में रोजगार के लिए ना जाना पड़े।
यह मेरी निजी राय है