13/09/2024
_*सवाल:– वक्फ बोर्ड की ज़मीन क्या है ? मुसलमानों को यह ज़मीन क्या अल्पसंख्यक होने की वजह से दी गई है ?*_
*वक्फ बोर्ड के बारे में कई सवालों से भरी पोस्ट पढ़ने को मिलती हैं।
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*जवाब:–* अक्सर "मुस्लिम नफरत" की राजनीति करने वाले गिरोह, झूठ के द्वारा नफरत फैला कर अपना एजेंडा हासिल करने के लिए नए नए झूठ फैलाते रहते हैं। उसी कड़ी के तहत वे वक्फ बोर्ड के खिलाफ कई झूठे इल्ज़ाम लगाते है जैसे :–
▪️ यह सरकारी अनुदान से चलता है?
▪️सरकारी और दूसरे लोगो की ज़मीन हड़प कर वक्फ बोर्ड बनाया गया है?
▪️ इन संपत्तियों को कब्जा कर डबल कर लिया गया और यह धर्मांतरण का कार्य करती है?
▪️क्या लोकतांत्रित देश में मजहबी आधार पर ऐसा बोर्ड और कानून बनाना उचित है?
▪️ साथ ही यह भी कह दिया जाता है की अन्य धर्म की संपत्ति से जुड़े मामलों पर तो सिविल कोर्ट सुनवाई कर लेता है जबकि अगर किसी वक्फ की संपत्ति का विवाद हो तो वह केवल ट्रिब्यूनल कोर्ट में ही सुनी जाती है?
_*इन सब सवालो के जवाब जानने से पहले यह जान लेना चाहिए की वक्फ सम्पत्ति , मुस्लिम समाज की निजी सम्पत्ति है जो की मुस्लिम समाज जनों के द्वारा समाज को ही दान (वक्फ) की हुई है। ना की यह संपत्ति किसी सरकार, राजा या किसी और ने समाज को दी है।*_
✅ इस्लाम में मुस्लिमो को यह स्पष्ट आदेश है की वो अपनी हलाल (वैधानिक/जायज़/legal) कमाई में से गरीबों और जरूरतमंदो (needy) का भी ख्याल रखें। और इसके लिए अपनी सालाना Income में से 2.5% हर साल ज़कात के रूप में दान करें जो की हर सामर्थ्य (हैसियत) रखने वाले पर अनिवार्य है। इसके अलावा भी कुरान में 32 बार charity यानी दान का जिक्र/उल्लेख है। यानी ज़कात के अलावा भी और अधिक से अधिक दान करने की शिक्षा/तालिम दी गई है।
🔺 कुरान के आदेश के अनुसार और नैतिक/Moral रूप से भी हर मुस्लिम अपनी हैसियत Status के अनुसार दान देता है! और यह दान– रुपए–पैसे, अनाज यानी खाद्य सामग्री, कपड़े, दवाइयां, चल–अचल संपत्ति या किसी भी रूप में हो सकता है।
✅ *Waqf Board क्या है और इसकी जरूरत क्यों ..?*
जब इतनी बड़ी आबादी दान देती है तो यह स्वाभाविक है की उसकी निगरानी के लिए भी कोई संस्था हो, ताकि जनहित में उसका इस्तेमाल किया जा सके। Waqf Bord ऐक ऐसी ही संस्था है। जो मुस्लिम समाज के द्वारा दान कि गई संपत्तियों का रख रखाव करती है। जिसे आज़ादी के बाद "वक्फ अधिनियम 1954" के तहत बनाया गया।
✅ Waqf Board को सरकार की तरफ से कोई अनुदान या सैलरी नहीं मिलती । जबकि waqf board समाजिक कार्य के लिए जैसे स्कूल, कॉलेज, अस्पताल या अन्य सामाजिक कार्यों के लिए जमीन देता हे। और जो भी संस्था या व्यक्ति उस पर कुछ कार्य करते हैं। जैसे स्कूल–कॉलेज या अस्पताल खोलते हैं तो संबंधित कार्यालय की जो प्रोसेस होती है उसके अनुसार भुगतान या अनुदान ले और दे सकता हैं।
✅ इसके अलावा झूठ के द्वारा नफरत फैला कर अपना एजेंडा हासिल करने वाले और एक और झुठ फैलाते है कि *एक ही धर्म के लोगो के लिए इस तरह की संस्था क्यों और उनके लिए अलग से कानून क्यों है..?*
तो दरअसल इस तरह का झूठ फैलाने वाले जानते है की उनकी जो audience है उनकी मानसिक शक्ति झूठ सुना और पढ़ा–पढ़ा कर ब्लॉक कर दी गई है की अब वो जो पढ़ते हैं उसे बिना जांचे और सच जानने की कोशिश करे बगैर बस आंख बंद कर सही मान लेते हैं। जबकि देश में सिर्फ मुस्लिमो के लिए ही ऐसी कोई संस्था नही हे बल्कि गैर मुस्लिमो के लिए भी *न्यास बोर्ड या धर्म न्यास बोर्ड* है जो की Trust, मंदिरो, धर्मशाला या अन्य वो सभी धार्मिक और सामाजिक प्रतिक/निशान की देख रेख और वक्फ बोर्ड की तरह ही दूसरे काम करती हैं।
✅ इसके अलावा यह कहना की *लोकतांत्रिक देश में इस तरह की संस्था का क्या काम..?*
तो हमे यह पता होना चाहिए की लोकतंत्र का अर्थ ही यही होता है की हर धर्म, समाज, जाती और वर्ग के लोगो का आजादी से अपनी परंपराओं custom को मानने, रक्षा करने और उसे बड़ाने का अधिकार होता है।
✅ *क्या सिर्फ मुस्लिम समाज के लिए ही वक्फ संपत्ति के लिए अलग से सुनवाई होती है..?*
सीधे तौर पर ऐसा कहना सही नहीं हे। क्योंकि धार्मिक न्यास Board जिसके रख रखाव की जिम्मेदारी कलेक्टर/कामिशनर/ADM की होती है। और संविधान मे अन्य धर्मों के लोगो के अपने custom यानी रीति रिवाज के अनुसार अलग से कई सुविधाएं दी गई है और जिन सबका उल्लेख यहां करना संभव नही है।
✅ अगला झूठ जो फैलाया जा रहा है की सिर्फ "13 वर्षों में दोगुनी से भी ज्यादा हो गई वक्फ बोर्ड की जमीन!" और क्या सरकारी जमीनों को कब्जा कर बड़ाया जाता है?
ऐसा कुछ भी नही हुआ है। दरअसल 2009 से सभी आंकड़ों का digitalization का काम शुरू किया गया। इससे पहले चाहे सरकारी record हो या किसी और संस्था का रिकॉर्ड सभी कागज़ की फाइलों में हुआ करता था । लेकिन 2009 के बाद से सभी रिकॉर्ड्स को digital format capture किया जाना शुरू हुआ। इसी तरह waqf संपत्तियों की भी जब geo mapping की गई और पूरे देश से सभी रिकॉर्ड्स को Centralise किया गया तो Acctual Data सामने आया! जिसे तोड़ मरोड़ कर झूठ फैलाने वालो ने इस्तेमाल किया। और धर्मांतरण की बात तो इसकी कोई हकीकत ही नही है।
🔺 वक्फ सम्पत्ति हमेशा ही वक्फ (यानी समाज के लिए दान की गई) की होती है उसे खरीदा या बेचा नहीं जा सकता है।
लेकिन जबकि डाटा का degitilisation ना होने के कारण वक्फ की कई संपत्तियों पर सरकारी और अर्ध सरकारी निर्माण हुए।
यही नही पूरे देश में भू माफिया या वे आश्रित लोग जिनको कुछ समय के लिए सम्पत्ति इस्तेमाल के लिए दि थी उन्होंने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर कब्ज़ा किया है।
आज आप किसी भी शहर के मुख्य एरिया में चले जाएं तो वहां आपको वक्फ बोर्ड पर बनी कोई ना कोई इमारत ज़रूर मिलेगी। और वक्फ की ज़मीन के बारे में गलतफहमियां फैलाने वाले लोगो और इन Propaganda को फंडिंग भी इसी तरह के भू माफिया और भ्रष्टों से मिलती है। जिन्होंने या तो अरबों रुपयों की वक्फ की ज़मीन हड़प रखी है या किसी ज़मीन को हड़पने की फिराक में हैं।
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