02/08/2026
एक बार समुद्र पार करके सीता माता की खोज करने का कठिन कार्य सामने आया, तो सभी वानर चिंतित हो गए।�
तब जाम्बवान ने हनुमान जी को उनकी छिपी हुई शक्ति का स्मरण कराया।�
भगवान राम का नाम लेते ही हनुमान जी के भीतर अपार साहस और आत्मविश्वास जाग उठा।�
उन्होंने एक ही छलांग में विशाल समुद्र को पार करने का निश्चय किया।�
मार्ग में अनेक बाधाएँ आईं, लेकिन वे रामभक्ति के बल से आगे बढ़ते रहे।�
लंका पहुँचकर उन्होंने माता सीता को भगवान राम का संदेश सुनाया और उनका विश्वास बढ़ाया।�
हनुमान जी ने सीता माता को राम की मुद्रिका देकर आश्वस्त किया कि प्रभु शीघ्र ही उन्हें मुक्त कराएँगे।�
वापस लौटकर उन्होंने भगवान राम को सीता माता का समाचार दिया।�
उनकी निष्ठा, साहस और समर्पण से भगवान राम अत्यंत प्रसन्न हुए।�
यह कथा हमें सिखाती है कि जब हम अपने कर्तव्य को श्रद्धा, आत्मविश्वास और ईश्वर के विश्वास के साथ निभाते हैं, तब असंभव लगने वाले कार्य भी संभव हो जाते हैं। 🙏🚩🌺�