31/01/2026
🏠 एक ईंट दुनिया में, एक महल जन्नत में... क्या आप तैयार हैं? 🏠
भाइयों और बहनों / अज़ीज़ दोस्तों,
गौर से देखिये इन तस्वीरों/वीडियो को। यह सिर्फ मिट्टी और ईंटों से खड़ी हो रही दीवारें नहीं हैं; यह हमारे दीन की बुनियाद है, यह हमारे बच्चों का मुस्तक़बिल (भविष्य) है।
हम एक ऐसे इलाके में मदरसा तामीर (निर्माण) कर रहे हैं जहाँ के मासूम बच्चों की आँखों में कुरआन पढ़ने की तड़प तो है, लेकिन सर पर एक पक्की छत नहीं। आप देख सकते हैं कि काम शुरू हो चुका है, बुनियादें भरी जा चुकी हैं, मजदूर पसीना बहा रहे हैं, लेकिन मंज़िल अभी दूर है।
हमें क्यों सोचना चाहिए?
हम अपने रहने के लिए आलीशान घर बनाते हैं, दुनियावी चीज़ों पर हज़ारों खर्च कर देते हैं। लेकिन जब बात अल्लाह के घर की आती है, इल्म-ए-दीन के मरकज़ की आती है, तो हमारे हाथ क्यों रुक जाते हैं?
यह मदरसा इन गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि एक उम्मीद की किरण है। यहाँ से पढ़कर निकलने वाला हर एक 'हाफ़िज़-ए-कुरआन' आपके लिए, मेरे लिए और पूरी उम्मत के लिए 'सदक़ा-ए-जरिया' बनेगा। जब हम इस दुनिया में नहीं होंगे, तब भी इन बच्चों की तिलावत का सवाब हमारी कब्रों तक पहुँचता रहेगा।
🏗️ अभी मदद की सख्त ज़रूरत है:
काम को जारी रखने के लिए हमें सीमेंट, ईंटें, रेत, सरिया और मजदूरों की उजरत (मज़दूरी) के लिए फ़ंड की ज़रूरत है। अगर आज हमने हाथ पीछे खींच लिए, तो यह दीवारें अधूरी रह जाएंगी।
🤲 आपसे गुज़ारिश:
यह मत सोचिये कि "मेरे थोड़े से देने से क्या होगा"। बूँद-बूँद से ही दरिया बनता है।
आप एक ईंट का खर्चा उठा सकते हैं।
आप एक बोरी सीमेंट स्पोंसर कर सकते हैं।
या अपनी हैसियत के मुताबिक जो भी बन पड़े, अपना हिस्सा ज़रूर डालें।
अल्लाह के नबी (ﷺ) ने फरमाया है: "जिसने अल्लाह के लिए मस्जिद (या दीन का कोई घर) बनाई, अल्लाह उसके लिए जन्नत में घर बनाएगा।"
आइये, 'आमीन फाउंडेशन — इस्लामिक रिलीफ सेंटर' के साथ मिलकर इस नेकी के काम को पूरा करें। अपनी आख़िरत संवारने का यह सुनहरा मौका हाथ से जाने न दें।
👇 डोनेट करने के लिए यहाँ क्लिक करें / विवरण नीचे देखें 👇
https://www.islamicrelief.center/masjid.html
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