Shaheen Educational And Research Foundation

Shaheen Educational And Research Foundation Education, Research work and Human Service.

पुरे देशवासियों को ईद मुबारक़
21/03/2026

पुरे देशवासियों को ईद मुबारक़

آج کے  روزنامہ منصف اخبار ( 15/03/26 ) میں شائع ریسرچ اسکالر و کالم نگار انجینئر عفان نعمانی  کا کالمبحرِ ظلمات میں دوڑا...
15/03/2026

آج کے روزنامہ منصف اخبار ( 15/03/26 ) میں شائع ریسرچ اسکالر و کالم نگار انجینئر عفان نعمانی کا کالم
بحرِ ظلمات میں دوڑا دیئے گھوڑے ہم ہم نے
बह़र ए ज़ुल्मात में दौड़ा दिए घोड़े हमने.
Bahr-e-zulmaat mein dauDa diye ghoDe hum ne

جب مسلمانوں کے خلاف نفرت، پروپیگنڈا، امتیازی سلوک، اور سماجی-سیاسی دباؤ مسلسل بڑھ رہا ہے، تب UPSC جیسے انتہائی سخت اور مقابلہ والے امتحان میں مسلم طلبہ کی کامیابی — خاص طور پر حالیہ UPSC CSE 2025 میں — ایک زندہ ثبوت ہے کہ "بحرِ ظلمات" میں بھی گھوڑے دوڑائے جا سکتے ہیں۔ یہ کامیابیاں بتاتی ہیں کہ نفرت اور مخالفت کے باوجود علم، محنت، خودی اور اللہ پر توکل سے کوئی بھی "بحرِ ظلمات" عبور کیا جا سکتا ہے۔ اقبال کا یہی پیغام ہے کہ مسلمانوں کو اپنی تاریخی جرات کو زندہ رکھنا ہے، نہ کہ حالات سے مایوس ہو کر بیٹھ جانا۔ یہ منظر دیکھ کر دل خوش ہوتا ہے کہ نئی نسل انہی اشعار کی روح کو زندہ کر رہی ہے۔اور کئی چیزوں کی طرف ہم نے آج کے روزنامہ منصف کے کالم میں توجہ مبذول
کرائی ہے،
When hatred, propaganda, discrimination, and socio-political pressure against Muslims are constantly increasing, the success of Muslim students in a very tough and competitive exam like UPSC — especially in the recent UPSC CSE 2025 — serves as living proof that horses can be raced even in the “ocean of darkness”. These successes demonstrate that despite hatred and opposition, any “ocean of darkness” can be crossed with knowledge, hard work, self-reliance, and trust in Allah. This is the message of Iqbal: Muslims must keep their historical courage alive and not become discouraged by the situation. It is heartwarming to see this scene where the new generation is reviving the spirit of these very poems. Furthermore, we have highlighted many points in today’s column of the Daily Munsif.

The forthcoming era will be characterized by advancements in artificial intelligence. The nation that attains excellence...
03/03/2026

The forthcoming era will be characterized by advancements in artificial intelligence. The nation that attains excellence in this domain and places an emphasis on software and technological development will assume a leading role globally.

Engineer Affan Nomani 's latest column was published today in the Munsif Daily, Hyderabad (India's largest-circulated Ur...
15/02/2026

Engineer Affan Nomani 's latest column was published today in the Munsif Daily, Hyderabad (India's largest-circulated Urdu daily).

Engineer Nomani has sought to shed light on the role of Muslims in science and education, from the past to the present.

In his column, he has discussed why we should learn from the scientific discoveries of Hasan Ibn al-Haitham, Abū Mūsā Jābir ibn Ḥayyān, Ibn Sina, Muhammad ibn Musa al-Khwarizmi, and other heroes of the scientific world.

Wishing You a very happy
25/01/2026

Wishing You a very happy

Many many congratulations
01/11/2025

Many many congratulations

25/10/2025

SERF झारखण्ड प्रमुख डॉ जनाब Juned Alam साहब की अगुवाई में मरहूम हिदायत सर के न्याय के लिए कारगिल चौक गोड्डा पर कैंडल मार्च निकाला गया.

SERF Research scholar Affan Nomani's recent column, "HAQ HAI MAGAR KAHNE DO," is dedicated to Hidayat Ali Sir.  A specia...
23/10/2025

SERF Research scholar Affan Nomani's recent column, "HAQ HAI MAGAR KAHNE DO," is dedicated to Hidayat Ali Sir.

A special thanks to all the editors for selecting it as the lead article.

SERF Seeks Fast-track court trial in Hidayat Sir's Death Case. SERF Jharkhand president requested all peace-loving citiz...
22/10/2025

SERF Seeks Fast-track court trial in Hidayat Sir's Death Case.

SERF Jharkhand president requested all peace-loving citizens to raise their voices for justice for Hidayat Ali.

हक़ है! मगर कहने दो अफ़्फ़ान नोमानी   झारखंड के गोड्डा जिला में, जहाँ जल, जंगल, जमीन व लहराते हरियाली का है संगम और बच्चे ब...
22/10/2025

हक़ है! मगर कहने दो
अफ़्फ़ान नोमानी

झारखंड के गोड्डा जिला में, जहाँ जल, जंगल, जमीन व लहराते हरियाली का है संगम और बच्चे बुनते है सपना, बसा था परसा गांव.
अल्पसंख्यक उच्च विद्यालय से परसा गांव की पहचान जहाँ से न जाने कितने सेकड़ों - हजारों छात्रों को दी देश व विश्व पटल पर पहचान. उसी परसा गांव के निवासी थे गोल्ड मेडलिस्ट हिदायत अली सर. प्रोजेक्ट कन्या विद्यालय के प्रधानाचार्य पद पर आसीन हिदायत सर का नाम ही उनकी पहचान था - हिदायत यानी सही राह दिखानें वाला.

दिल में हजारों बच्चों का बचपन, मृदुभाषी, हसमुख चेहरों से दिलों को जोड़ने वाले, प्रतिभा के धनी, अपने नाम हिदायत - यानी मार्गदर्शन करने वाला, समाज को सही राह दिखानें वाला, समाज की बेहतरी व परिवर्तनशील विचार के हामी, जिससे समाज बदलें...... लेकिन हिंसक समाज ने उन्हें ही निगल लिया.

जमीन को लेकर शुरू हुई आपसी विवाद ने ऐसा उग्र रूप लिया कि उनके अपने ही चाचा व सम्बन्धी ने पीट -पीट कर मार डाला. भीड़ में एक शिक्षक की सांसे थम गई और समाज चुपचाप तमाशा देखता रहा. बीबी अपने पति को बांहों में भरकर चिल्लाते रही लेकिन मरे हुवे उदासीन समाज व प्रशासन ने तत्परता नहीं दिखाई.

दीनी व दुनियावी इल्म का प्रचार - प्रसार करने वाला गांव का इससे पहले नैतिक पतन पहले कभी नहीं देखा गया था. जहाँ एक शिक्षक की हत्या कर दी गई और पंचायत स्तर से लेकर विधानसभा स्तर पर किसी जनप्रतिनिधि का दोषी के खिलाफ कड़ी करवाई व फ़ास्ट ट्रैक अदालती करवाई के तहत पीड़ित परिवार को न्याय दिलवाने की बयान सामने नही आया है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमारा समाज कितना उदासीन हो चुका है?

देश के भविष्य बच्चों को शिक्षा रूपी रौशनी देने वाला प्रकाशरूपी शिक्षक हिदायत सर जैसा दीपक को बुझा दिया गया लेकिन हमारी अंतरात्मा इतनी सुन्न हो गई है कि हम उनके पीड़ित परिवार के न्याय के लिए भी खड़े नहीं हो पा रहे है?

राजनीतिक मुद्दों पर सड़कों पर मशाल लिए आवाज़ उठाने वाले गय्यूर नोज़वानों की खामुशी अफ़सोसजनक है.
एक राजनीतिक मुद्दों पर गर्म खून का मुज़ाहिरा पेश करने वाले समाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ताओं का खून एक शिक्षक की हत्या पर ठंडा क्यों है?

माना कि आपसी जमीनी विवाद वर्षों से था तो क्या किसी की हत्या कर देना उचित है?
आपसी विवाद कहकर एक भाई शिक्षक की हत्या दूसरे भाई हॉस्पिटल में जिंदगी व मौत के बीच सांसे ले रहा है, को अनसुनी कर देना, दर्शाता है कि हमारे अंदर की इंसानियत मर चुकी है.
समाज की उदासीनता, हत्या पर खामुशी..... एक हिंसक समाज बनने की ओर अग्रसर है जिसके जिम्मेदार हम सब है.
इस लेख में अंकित कई बात बहुत कड़वी जरूर है जिससे किसी को तकलीफ हुई तो माज़रत लेकिन हिदायत सर के न्याय के लिए समर्पित है. बात हक़ है! मगर कहने दो.

Dr. Omar M. Yaghi, a proud Saudi national and world-renowned scientist, has won the 2025 Nobel Prize in Chemistry.    🎉 ...
09/10/2025

Dr. Omar M. Yaghi, a proud Saudi national and world-renowned scientist, has won the 2025 Nobel Prize in Chemistry.


🎉 Dr Omar

गुरु एवं शिष्य का संबंध धर्म व दर्शनशास्त्र के सन्दर्भ मेंइंजीनियर अफ्फ़ान नोमानीसीईओ, एसईआरएफ इंडियाभारत के प्रथम उपराष्...
05/09/2025

गुरु एवं शिष्य का संबंध धर्म व दर्शनशास्त्र के सन्दर्भ में

इंजीनियर अफ्फ़ान नोमानी
सीईओ, एसईआरएफ इंडिया

भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और भारतीय दर्शनशास्त्र के प्रखर विद्वान डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितम्बर 1888 ई० को तमिलनाडु के तिरुतनी गांव में हुआ था. डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिन पर प्रत्येक वर्ष 5 सितम्बर को हम भारतवासी शिक्षक दिवस के रूप में मनाते है. असल में हम शिक्षक दिवस क्यों मनाते है?
गुरु का दिन क्यों कहा गया है ? गुरु एवं शिष्य के बीच क्या संबंध है ? उन संबंध के रहस्य को जानना जरुरी है. गुरु शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत भाषा से हुई है. गुरु शब्द दो व्यंजन (अक्षर) गु और रु से मिलकर बना है. गु का अर्थ अज्ञान और रु का अर्थ मिटाना है अर्थात गुरु 'अज्ञानता को मिटाता' है. गुरु शब्द का विकल्प अरबी भाषा को छोड़कर किसी भाषा में नहीं है. अरबी में इसके लिए 'मुअल्लिम' शब्द का प्रयोग किया जाता है. अंग्रेजी में 'टीचर' गुरु शब्द का विकल्प नहीं है. टीचर वह है जो क्लास में आएं और पढ़ाकर चले गए. टीचर का मिलन विद्यार्थी ( शिष्य ) से आत्मा के स्तर पर नहीं होता है. शिष्य और गुरु आत्मा के स्तर पर मिलते है.
गुरु उसको कहते है जो शिष्य की भलाई चाहते हुए शिक्षा प्रदान करते है. भलाई चाहने का संबंध हृदय और आत्मा से होता है. एक प्रकार से गुरु, प्रमात्मा का प्रतिनिधि होता है. जो तेल और बाती का काम करता है. ओर वो ऐसा तेल ओर बाती है जो दिन और रात्री का अंतर किए बिना दीपक को प्रकाशमय करता है. जबकि दुसरी ओर शिष्य और गुरु आशा की किरण और दीपक के समान होता है. इस तरह दोनों समाज के लिए आशा और प्रकाश है. इस्लामी दृष्टिकोण से एक हदीश में आया है की अंतिम ईश्वरीय दुत अर्थात अंतिम पैगम्बर मुहम्मद साहब ने फ़रमाया है की दुनिया लानत (अभिशाप ) और उसकी प्रेतक वस्तु भी अभिशाप है. लेकिन मुअल्लिम ( गुरु ) और शिष्य और उन दोनों से प्रेम करने वाले इस संसार के लिए करुणा और लाभदायक है. हजरत मुहम्मद साहब ने स्वंय को मुअल्लिम ( गुरु ) ही कहा है.
अरबी में पैगंबर मुहम्मद साहब का कथन इस प्रकार है 'इन्नामा बोईस्तो मुअल्लेमन ' अर्थात मुझको खुदा ने मोअल्लिम ( गुरु ) बना कर ही भेजा है. जबकि शिष्य के लिए कहा गया है कि जब कोई छात्र ज्ञान प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील होता है तो उसके लिए हर वस्तु प्रार्थना ( दुआ ) करती है. यहाँ तक कि आसमान व जमीन के बीच में उड़ने वाले परिन्दे और जल में रहने वाली मछलियां भी. सनातन धर्म में भी गोस्वामी तुलसीदास रामचरित मानस में गुरु कि वंदना करते हुए लिखते है कि "मैं उस गुरु महाराज के चरण कमलों को प्रणाम कराता हूँ जो शिष्यों के अंदर पुरे संसार के मख़लूक़ात ( मानव से लेकर चरिंदो परिंदो तक ) से प्रेम उत्पन्न करने कि भाव एवं संस्कारिक गुण का सृजन कराता है". इस तरह संस्कृत के एक श्लोक में गुरु कि वंदना करते हुए कहा गया है कि
'' आज्ञानद्यस्य लोकस्य ज्ञान यज्न शालाकाया, चक्षुरुन्मिलित येन तस्मे श्री गुरुवे नमः ".
अर्थ - " उस सज्जन गुरु को नमस्कार जो अपने शिष्य को अंधकार मयी रूपी कोठरी अर्थात अज्ञानता से निकालकर प्रकाश रूपी ज्ञान का सृजन करें वही सच्चा गुरु है." भारतीय संस्कृति और परंपरा में भी गुरु शिष्य का अति महत्व है. इस परंपरा को बचाने के लिए हर प्रकार का प्रयास करना चाहिए. आज देखा जा रहा है की ये परंपरा दिन प्रतिदिन लुप्त होती जा रही है. आज हम 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाते है. लेकिन यह लाभदायक और स्वच्छ क्रांति उसी वक़्त बरपा कर पाएगा जब हम उसे जीवन का अभिन्न अंग बनाएंगे. कोई भी दिन जो खाना-पूर्ति के लिए कर्मकांड व रस्म-रिवाज के रूप में मनाएंगे तो उसका लाभदायक और प्रभावी परिणाम सामने नहीं आ सकता है. कर्मकांड व रस्म-रिवाज के बजाय हम सही तरीके से इस परंपरा को व्यवहार में लाएँगे तभी उसका समाज व देश पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. आज हमें समाज में जो बिखराव और आपसी दुरी नज़र आती है. यदि हम राधाकृष्णन के मार्ग दर्शन में और उनकी दृष्टि से देखें तो तो दूरियाँ निकटता में परिवर्तित होती नज़र आती है. इसका प्रमाण व्यवहारिक रूप से उनकी पुस्तक भारतीय दर्शन, गीता का हिंदी व्यख्या और अनुवाद, उपनिषद और हमारी विरासत जैसी पुस्तकों से मिलता है. हमें आगे बढ़ने के लिए कुछ पीछे चलकर महात्मा गाँधी, डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन, पंडित सुंदरलाल और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद से भी मिलने की जरुरत है. अतीत से जुड़े बिना उज्जवल भविष्य की बात बेअर्थ है. हम और हमारा समाज उसी वक़्त सही दिशा में जा सकते है जब वर्तमान में खड़े होकर अतीत और भविष्य पर एक समान दृष्टि रखें.
आज का शिक्षक दिवस हमारे लिए ये मार्गदर्शन करता है की हमारी दशा उस वक़्त तक ठीक नहीं होगी जब तक की हम शिक्षा प्राप्त करके अपनी दिशा सही नहीं कर लेते है. शिक्षा के बिना समाज गूँगा, बहरा होकर अंधयारी में भटकता रहेगा. इसका ईलाज केवल ये है कि हम शिक्षा, शिक्षक और विद्यार्थी के महत्त्व को समझें.

लेख़क अफ्फ़ान नोमानी लेक्चरर व रिसर्च स्कॉलर है व साथ ही एसईआरएफ इंडिया से जुड़ें है )

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Hyderabad
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