हिसार शहर से 17 किलोमीटर दूर गाँव बाडों पट्टी।एक छोटा सा पिछड़ा गाँव जिसमे डाकखाना,पशु चिकित्सालय, वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भी नही है , पर यहाँ एक ऐसी संस्था है जिसपर पूरे गाँव को गर्व है। वो संस्था है 'मह्रिषी दयानंद योग केंद्र '.यहाँ पर बाड़ों पट्टी और बहबलपुर गाँव के बच्चे -बुढे, लड़के-लड़की सभी सुबह और शाम को योगाभ्यास करते है।इस योग केंद्र से निःशुल्क योग प्रशिक्षण प्राप्त कर योगार्थी न के
वल राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके हैं अपितु देश-विदेश में योग प्रशिक्षण देकर अच्छा पैकेज भी ले रहे हैं।इस योग केंद्र से प्रशिक्षित योगार्थी देश -विदेश में योग का प्रचार प्रसार करने के अलावा बेरोजगारी के दौर में अच्छा और नेक रोजगार भी चला रहे हैं .मह्रिषी दयानंद योग केंद्र,बाड़ों पट्टी में निम्नलिखित गतिविधियाँ संचालित होती हैं-
1. योगासन ,प्राणायाम,ध्यान, शुद्धिक्रिया का प्रशिक्षण।योग स्पर्धाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण।
2. आत्मविश्वास,रचनात्मकता,प्रतिस्पर्धा और कला को बढ़ावा देने हेतु साप्ताहिक सांकृतिक कार्यक्रम। जिसमें बच्चों को कविता,गीत,भजन,भाषण,डांस आदि के माध्यम अपने विचार रखने के लियें मौक़ा मिलता है।बच्चों में उच्च संस्कार सिंचन के लिए आद्यात्मिक वातावरण।
3. समय समय पर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजन और वृक्षों और पर्यावरण के बारे में जागरूकता।उगाये गए पौधों की देखरेख।
4.गाँव वासियों के सहयोग से शत प्रतिशत हिन्दू जनसँख्या वाले गाँव बाड़ों पट्टी में उपस्थित प्राचीन मस्जिद का अनुरक्षण। हिन्दू मुश्लिम एकता की
5.युवा क्लब,बाडों पट्टी के सहयोग से शहीद भगत सिंह पुस्तकालय की देखरेख,साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा।
6. शराब,धुम्रपान,जातपात के भेदभाव न करने के लिए जागरूकता और वातावरण।
7. समय समय पर भारतीय संस्कृति के अनुरूप हवन कार्यक्रम।
एक पिछड़े गाँव,बाड़ों पट्टी में इस अनूठे 'मह्रिषी दयानंद योग केंद्र ' के संस्थापक और संचालक ईश्वर सिंह आर्य है जो स्वयं योगस्पर्धाओं में राष्ट्रीय विजेता है। प्रेक्षाध्यान और योगविज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त ईश्वर सिंह आर्य बाल विकास योजना कार्यालय, हांसी में लेखाकार के पद पर
कार्यरत है।सन 1985 से 'मह्रिषी दयानंद योग केंद्र ' का संचालन कर रहे ईश्वर सिंह आर्य ने योग हॉल जैसी ढांचागत सुविधा ना होने
के बावजूद प्राथमिक पाठशाला के एक छोटे से कमरे में ही योगाभ्यास करवा रहें है। इस कमरे की चाबी मुख्यअध्यापक के सहयोग से 2002 में योग केंद्र की गतिविधियाँ संचालित करने के लिए मिली । उससे पहले तो 1985 से 2001 तक वो गाँव के पास नहर की पगडण्डी पर ही योगाभ्यास करवाते थे।अब तक सेंकडों लड़के,लड़कियों को योग प्रशिक्षण दे चुके है, वर्तमान में 50 लड़के,25 लडकियाँ और 15 वरिष्ठ ग्रामीण यहाँ निःशुल्क योग प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं , छोटे कमरे में जगह की कमी के कारण अभ्यास के लिए तीन या चार शिफ्ट बनानी पड़ती है। इन विपरीत प्रश्तिथियों के बावजूद ईश्वर सिंह आर्य के मार्गदर्शन में इस योग केंद्र के योगार्थियों अनेकों जिला,राज्य,अंतरमहाविद्यालय,अंतर विश्वविध्यालय,राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतें हैं।
योग स्पर्धाओं में हिसार जिले की टीम में लगभग आधे सदस्य इसी योग केंद्र के होते हैं,जबकि हरियाणा की टीम में भी इस योग केंद्र का चयन अनुपात इतना ज्यादा है कि हरियाणा की टीम के अन्य सदस्य इस योग केंद्र के योगियों को 'बाड़ों कंट्री' कहकर बुलाते हैं। 2011 की अंतर विश्वविध्यालय योग स्पर्धा में चैंपियन कुरुक्षेत्र विश्वविध्यालय की छह सदस्यीय टीम में इस योग केंद्र के तीन प्रतिभागी थे।
ईश्वर सिंह आर्य जब 1980 में आठवीं कक्षा में पढ़ते थे तो उनकी मुलाक़ात हरियाणा आर्य युवक परिषद् के प्रधान डॉ सुभाष आर्य से हुई,डॉ आर्य ने उन्हें आर्य समाज के शिविरों के बारे में उन्हें जानकारी दी, आध्यात्मिक स्वभाव के कारण उन्होने 30 नवम्बर 1980 को सार्वभौमिक आर्य युवक परिषद् के तत्त्वाधान में आयोजित ब्रहमचर्य प्रशिक्षण शिविर में पहली बार 17 वर्ष की आयु में योग के बारे में प्रथम जानकारी प्राप्त की।योग में उनका मन इतना लगा की फिर उन्होंने स्वामी इन्द्रवेश,स्वामी अग्निवेश,डॉ सुभाष आर्य, बिरजानंद आदि के साथ वो आर्य समाज के योग शिविरों और अन्य गतिविधियों में बढ़
चढ़कर भाग लेने लगे। उन्होंने आर्य समाज के प्रचार के लिए स्वामी इन्द्रवेश और स्वामी आग्निवेश के साथ हिसार से सोनीपत की पदयात्रा की। 1985 में उन्होंने बाड़ों पट्टी में तीन चार लोगों को योगाभ्यास शुरू करवाया,साल दर साल योगाभ्यासी बढ़ते गए।1991 में जिला और राज्य स्तर की योग स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतने के पश्चात योग स्पर्धाओं के राष्ट्रिय मंच पर कदम रखे,1991 से 1996 तक राष्टीय योग स्पर्धाओं में कोई पदक न जीतने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और कठिन परिश्रम और लगातार अभ्यास से आसनों के सुधार से उन्होंने 1997 में चंडीगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय योग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।1997 से 2011 तक राष्ट्रीय स्तर पर 14 स्वर्ण या रजत पदक जीत चुके हैं। उन्हीं से प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रवीण कुमार वर्मा ने पुर्तगाल और अर्जेंटीना में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और दो रजत पदक जीते।उनके शिष्य कृष्ण वर्मा ने सयुंक्त अरब अमिरात में योग का व्याख्यान दे चुके हैं।बाडों पट्टी गाँव से रामिनवास जांगडा,स्वर्गीय लक्ष्मण योगी,कृष्ण वर्मा, प्रवीण कुमार वर्मा,श्रवण कुमार,दिनेश कुमार,अजय वर्मा,रुकमकेश,दीवान सिंह,कवि दिनेश जांगड़ा,राजेश,सतीश गुरी,कृष्ण इटी,सुनील सरपंच ,सुनील दत्त,अनिल कुमार,विक्रम सिंह,दिनेश वर्मा,रोहित,रजत,सुनील नान्नु,सालिंदर गुरी ,सोनू सिह्मार,प्रमिला,पारुल,संदीप कुमार, धिकताना गाँव से सुमन मालिक,बहबलपुर गाँव से अशोक डावर,दिलबाग,रामनिवास,सोनू वर्मा,सोनू कुमार,संजय कुमार आदि ने ईश्वर सिंह आर्य से योग सीखकर विभिन्न योग प्रतियोगिताओं में पदक जीते हैं।
ईश्वर सिंह आर्य से योग सिखने के पश्चात प्रवीण वर्मा और अजय वर्मा अभी वियतनाम में योग प्रशिक्षक है।कृष्ण कुमार हिसार में योग क्लिनिक के द्वारा जनसेवा कर रहे है,ईश्वर सिंह आर्य से प्रेरणा और प्रशिक्षण लेकर कवि दिनेश जांगड़ा भारतीय वायु सेना में स्वेच्छिक योग प्रशिक्षण दे रहे हैं,राजकमल तेरह वर्ष ईश्वर सिंह आर्य के पास योगाभ्यास करने के पश्चात अभी मुंबई में योग प्रशिक्षक है।बहबलपुर गाँव के रामनिवास राजकीय विद्यालय में योग प्रशिक्षक है,सतीश गुरी और सुनील सरपंच अपनी इंजीनियरिंग की पढाई के दौरान कॉलेज में योग की कक्षाए लेते रहे है,दीवान सिंह ने भी ईश्वर सिंह आर्य से योग प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्ही के मार्गदर्शन में नेचुरोपैथी और योग की चिकित्सा दे रहे है .
बिना किसी सुविधा के मह्रिषी दयानंद योग केंद्र की उपलब्धियों को देखकर बरवाला के वर्तमान विधायक रामनिवास घोडेला ने बाडों पट्टी गाँव में योग हॉल निर्माण के लिए 11 लाख रूपये देने की घोषणा की है।जिससे 'मह्रिषी दयानंद योग केंद्र ' के सभी योगियों की वर्षों पूरानी मांग पूरी होने की उम्मीद जगी है। ग्राम पंचायत बाड़ों पट्टी ने पहले से ही एक एकड़ जमीन योग खिलाडियों के लिए दे रखी है।यदि आशानुरूप सरकार के आर्थिक सहयोग से प्रश्तावित योग हॉल का निर्माण होता है तो शायद ये सम्पूर्ण विश्व में किसी गाँव में बना पहला योग हॉल होगा, जिससे मह्रिषी दयानंद योग केंद्र में योग और अन्य गतिविधियाँ बेहतर और व्यापक स्तर पर चलाई जा सकती है ईश्वर सिंह आर्यपास तक़रीबन 500 धार्मिक और योग से सम्बन्धित पुस्तकों का संग्रह जो सभी योगर्थियों को अध्ययन के लिए उपलब्ध है। ईश्वर सिंह आर्य का कहना है कि योग के कारण न केवल अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त बना रहता है अपितु योग के इस आध्यात्मिक मार्ग से धुम्रपान,शराब,व्यसन आदि से बचकर सच्चरित्र का निर्माण होता है।