जिला हिसार में युवाओं द्वारा चलाया जा रहा मिशन 'एक रुपया-एक रोटी' आज परिचय का मोहताज नहीं है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई आज इस मिशन का दीवाना है पर यह सब इतना असान नहीं था। आसान नहीं होता दिसंबर की कड़कड़ाती सर्दी में पानी से लबालब नहर में से कूदकर रात को साढ़े तीन बजे गाय को जिंदा बाहर निकालना। सीवर के खुले मेनहोल जिनमें जहरीली गैस के भय से सफाई कर्मचारी भी कई बार अंदर जाने से हिचकिचाते ह
ैं, लेकिन जान की परवाह किए बिना युवाओं की यह टीम बेहिचक सीवर व गंदे नालों से गायों को बाहर निकालकर उपचार करवाती है। आसान नहीं होता सारी रात तस्करों से मुकाबला करते हुए सैकड़ों गऊओं और बैलों की जान बचाना। पर यह सब कुछ आसान हो गया है तो युवाओं के हौसले व हिम्मत से क्योंकि हिम्मत करने वालों की कभी हार नहीं होती।
कई बार छोटी घटनाएं जीवन के लक्ष्य तक बदलने के लिए पर्याप्त होती हैं। ऐसी ही एक हृदय विदारक घटना ने गौ-सेवार्थ मिशन 'एक रुपया-एक रोटी की शुरुआत की। हुआ यूं कि दिसंबर 2008 में छात्र नेता संपत सिंह अपने छात्र-सम्मेलन की तैयारियों के लिए हिसार शहर में पोस्टर लगवा रहे थे। रात के डेढ़ बजे नहर के साथ-साथ बने बाई पास पर सुनसान रास्ते में आवारा कुत्ते एक जिंदा बछड़े का शिकार कर रहे थे और उसे नोंच रहे थे। बछड़े की चित्कार सुनकर संपत ने अपने छात्र दोस्तों के साथ मिलकर उस बछड़े को कुत्तों के चंगुल से तो बचा लिया परंतु कुत्तों ने उस बछड़े का मांस काट खाया था और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि घायल बछड़े की जान कैसे बचाई जाए। रात को इतनी ठंड थी और धुंध के कारण सब कुछ गीला पड़ा था। छात्रों ने अपने पोस्टर जलाकर कुछ सेंक किया परंतु बछड़े की हालत में कोई सुधार नहीं हुआद्ध रात को लगभग ढाई बजे बछड़े को गाड़ी में डालकर एक पशु चिकित्सक दोस्त के पास लेकर गए और प्राथमिक उपचार कराया परंतु उसे रखने की जगह न होने के कारण हिसार की प्रतिष्ठित गौशाला का द्वार भी खटखटाया परंतु गऊशाला के द्वार से कोई सहायता नहीं मिली और यहीं से विचार आया कि जब तक जन-जन की भावना गऊ सेवा और गऊ रक्षा के प्रति जागृत नहीं होगी तब तक गऊओं का इसी तरह बुरा हाल रहेगा और जन-जन को गऊ सेवा की आस्था से जोडऩे के लिए अभियान गौ-सेवार्थ मिशन 'एक रुपया-एक रोटी' की शरूआत कर दी। शुरूआती साल में संपत सिंह एवं उनकी टीम ने रजिस्टर्ड संस्था आदर्श के बैनर तले काम किया, परंतु जब दायरा बहुत बड़ गया तो 'एक रूपया-एक रोटी नामक संस्था को रजिस्टर्ड करवाया गया।
मिशन को अकेले लेकर चले संपत सिंह आज अकेले नहीं हैं बल्कि युवाओं की छोटी-छोटी कई टीमें इस मिशन के लिए काम कर रही हैं। शहर के कोने-कोने में कार्यरत ये टीमें महज एक टेलीफोन कॉल पर बीमार व दुर्घटनाग्रस्त गाय के पास पहुंच जाती हैं और प्राथमिक उपचार करके गऊ-आश्रम में भेज देती हैं जहां उनका नियमित उपचार किया जाता है। यह मिशन अब तक हजारों की संख्या में बेसहारा, बीमार और दुर्घटनाग्रस्त गायों की सेवा करके आशीष प्राप्त कर चुका है।
गऊ-आश्रम के लिए 1000 गज जगह स्वामी सुखदेवानंद द्वारा इस्तेमाल करने के लिए दी गई थी, परंतु अब यह जगह छोटी पडऩी शुरु हुई तो गऊ माता की कृपा, मिशनरियों की मेहनत और जनता का प्यार रंग लाया और आज धांसू की गाय की पंचायत ने गौ-सेवार्थ मिशन एक रुपया-एक रोटी को साढ़े छह एकड़ जमीन गऊ आश्रम निर्माण के लिए उपलब्ध करवाई। उद्देश्य के अनुसार यह मिशन आम आदमी का मिशन बनता जा रहा है। मिशन के संस्थापक सम्पत सिंह का मानना है कि जब तक किसी मिशन या आंदोलन के साथ आम आदमी का जुड़ाव नहीं होता तब तक वह मिशन या आंदोलन सफलता के चरम तक नहीं पहुंचता। अत: 'एक रुपया-एक रोटी मिशन का ध्येय आम आदमी से लेकर बड़े उद्योगपतियों तक को गऊ सेवा में आस्था के लिए एक सूत्र में पिरोना है। इसके साथ ही यह सूत्र है गौभक्ति का, यह बंधन है गौ सेवा का और यह प्रतिज्ञा है गौ-रक्षा की। गौ-सेवार्थ मिशन 'एक रुपया-एक रोटी कोई धार्मिक संगठन नहीं है बल्कि संकल्प है एक मानव का दूसरे मानव को गौ माता के सम्मान के लिए जागरूक करने का। क्योंकि यह मिशन बेरोजगार युवाओं और छात्रों द्वारा चलाया जा रहा है इस मिशन को कई बार धन व संसाधनों की दिक्कतें जरूर आती हैं परंतु युवा टीम इन दिक्कतों के बावजूद पूरी लगन व आस्था से गऊ सेवा करती है और हर समय गौ-सेवा के लिए तत्पर रहते हैं।
मिशनरियों की इसी आस्था व लगन को देखकर हरियाणा कुरुक्षेत्र गौशाला ने बिना किसी शुल्क के मिशन द्वारा लाई जाने वाली गायों को गौशाला में लेने की अनुमति प्रदान की। हरियाणा कुरुक्षेत्र गौशाला के इस सहयोग के बाद तो मिशन कार्यकर्ताओं का उत्साह दौगुना हो गया तथा मिशन कार्यकर्ताओं ने नगर परिषद के सहयोग से शहर के विभिन्न क्षेत्रों से बेसहारा गायों को गौशाला पहुंचाना शुरू कर दिया। बेसहारा गायों को उठाने में मिशन के सामने सबसे बड़ी समस्या उन गायों के स्वामी थे जो दूध निकालने के बाद अपनी गायों को शहर में घूमने के लिए खुला छोड़ देते थे। मिशन ने इस मामले में खतरे को भांपते हुए गाय उठाने के समय पुलिस प्रशासन से सहयोग की अपील की। पुलिस प्रशासन ने भी मिशन का पूर्ण सहयोग करते हुए गाय उठाने के समय अपनी उपस्थिति कायम रखी।
सन् 2009 में जिले में शुरूआत हुई गौसेवार्थ मिशन 'एक रूपया-एक रोटी की। मिशन के अध्यक्ष संपत सिंह ने दिन-रात एक करके गायों की रक्षा के लिए काम करना शुरू किया और जल्द ही मिशन जिले के हर व्यक्ति की जुबान पर चढ़ गया। बीमार एवं घायल गायों का मौके पर ही इलाज तथा बेसहारा गायों को गौशाला पहुंचाना 'एक रूपया-एक रोटी मिशन का मुख्य ध्येय रहा। 'एक रूपया-एक रोटी मिशन को हिसार जिले में भारी सफलता मिली और बड़ी संख्या में युवाओं ने 'एक रूपया-एक रोटी मिशन की सदस्यता ग्रहण की। यह 'एक रूपया-एक रोटी मिशन के अध्यक्ष संपत सिंह के प्रयासों का ही नतीजा था सड़कों पर आवारा घूमती गाय अब नजर नहीं आती थी। एक फोन कॉल पर मिशन के सदस्य मोके पर पहुंचकर घायल या बीमार गाय का इलाज करवाते हैं। मिशन के अध्यक्ष संपत सिंह एवं उनके साथियों ने मिलकर गौतस्करों पर भी नकेल कसी और बड़ी संख्या में गायों को गौ तस्करों से मुक्त करवाया तथा गौ तस्करों को जेल की सलाखों तक पहुंचाया, परंतु जैसा कि हर अच्छे कार्य के साथ होता है, इस मिशन को भी किसी की नजर लग गई और कुछ स्वार्थी एवं घटिया स्तर के लोगों ने 'एक रूपया-एक रोटी मिशन को बदनाम करने की साजिश रची।
असामाजिक तत्व कहें या फिर गाय माता के दुश्मन इन लोगों ने गौ सेवक संपत सिंह एवं मिशन को बदनाम करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया और मिशन के अध्यक्ष संपत सिंह पर अनेक अनाप-शनाप आरोप लगाए। परंतु कहते हैं कि सच्चाई के आगे झूठ कभी टिक नहीं पाता और इस संपत सिंह एवं एक रूपया-एक रोटी मिशन को बदनाम करने वाले लोग अपनी साजिश में नाकाम साबित हुए और सच्चाई जनता के सामने आ गई। गौसेवक संपत सिंह पर बैलों की तस्करी करने का आरोप लगाया गया, परंतु न्यायालय में दूध का दूध और पानी का पानी हो गया तथा संपत सिंह पर लगे सभी आरोप बेबुनियाद एवं मनगढंत पाए गए। अब एक बार फिर से 'एक रूपया-एक रोटी मिशन दुगने उत्साह से अपने काम में लग गया है। संपत सिंह कहते हैं कि उनका एकमात्र ध्येय गौसेवा है और गौसेवा के दौरान आने वाली हर बाधा को पार करेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें अपनी जान भी क्यों न गंवानी पड़े। गौ-सेवा से कितना पुण्य मिलता है, सिर्फ गौभक्त ही महसूस कर सकता है। अत: आम आदमी से पुरजोर अपील है कि 'एक रुपया-एक रोटी मिशन का संदेश जन-जन तक पहुंचाएं तथा बेसहारा, भूखी, बीमार व दुर्घटनाग्रस्त गौवंश की सेवा में योगदान करके गऊ माता का आशीष प्राप्त करें।
गौरक्षा के साथ-साथ गौसेवार्थ मिशन एक रूपया-एक रोटी ने समाज में फैली बुराईयों के प्रति लोगों को जागरूक करने का भी बीड़ा उठाने का फैसला किया है। इसी कड़ी में 'गौपुत्र सेना का गठन किया गया है, जो गौसेवा, गौ-रक्षा, कन्या भू्रण हत्या, पर्यावरण, भ्रष्टाचार, गरीब एवं जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा, रक्तदान, असहाय एवं बूढ़े-बुजुर्ग लोगों की सेवा, दुर्घटनाग्रस्त, लाचार, बीमार व बेसहारा लोगों की सहायता करने के लिए हमेशा तत्पर रहेगी।