29/07/2026
संजय मल्होत्रा
एक छोटे शहर के मेधावी छात्र से भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर बनने तक का प्रेरक सफर
भारत में लाखों युवा बड़े सपने देखते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही अपनी मेहनत, प्रतिभा और ईमानदारी के दम पर इतिहास रच पाते हैं। संजय मल्होत्रा उन चुनिंदा व्यक्तित्वों में से एक हैं, जिन्होंने राजस्थान के छोटे से शहर बीकानेर से निकलकर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर बनने तक का प्रेरणादायक सफर तय किया।
बीकानेर की गलियों से उड़ान
राजस्थान के बीकानेर में जन्मे संजय मल्होत्रा बचपन से ही शांत स्वभाव, अनुशासित और पढ़ाई में बेहद मेधावी थे। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय, बीकानेर से पूरी की। वे हर कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते थे और अपने शिक्षकों व सहपाठियों के बीच एक होनहार छात्र के रूप में पहचाने जाते थे। आज भी उनके पुराने मित्र उनकी सादगी और तेज बुद्धि की मिसाल देते हैं।
IIT से UPSC तक का शानदार सफर
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर से कंप्यूटर साइंस में बी.टेक. की डिग्री प्राप्त की। इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने एक सुरक्षित करियर चुनने के बजाय देश सेवा का रास्ता चुना और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी शुरू कर दी।
साल 1989 में उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा में पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया। इसके बाद वे राजस्थान कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बने।
सीखने की ललक कभी नहीं रुकी
प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी और अमेरिका की प्रतिष्ठित प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी में मास्टर डिग्री प्राप्त की। उनका मानना था कि सीखना कभी नहीं रुकना चाहिए और बेहतर ज्ञान ही बेहतर निर्णयों की नींव बनता है।
परिवार हमेशा रहा सबसे बड़ी ताकत
कठिन प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बावजूद संजय मल्होत्रा ने अपने परिवार को हमेशा प्राथमिकता दी। उनकी पत्नी डॉ. शमीला मल्होत्रा हर कदम पर उनकी मजबूत साथी रहीं।
प्रिंसटन में अध्ययन के दौरान भी वे सप्ताहांत अपने परिवार के साथ बिताते, बच्चों के साथ समय गुजारते और जीवन के छोटे-छोटे सुखद पलों का आनंद लेते थे। उनके करीबी बताते हैं कि इतने ऊँचे पदों पर पहुँचने के बाद भी वे आज भी उतने ही सरल, विनम्र और जमीन से जुड़े हुए हैं।
33 वर्षों की सेवा और सबसे बड़ी जिम्मेदारी
तीन दशकों से अधिक समय तक बिजली, वित्त, कराधान और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी विभागों में उत्कृष्ट सेवाएँ देने के बाद दिसंबर 2024 में उन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक का 26वाँ गवर्नर नियुक्त किया गया।
यह खबर जैसे ही उनके पुश्तैनी घर बीकानेर पहुँची, पूरे परिवार, मित्रों और शहर में खुशी की लहर दौड़ गई। जिस बेटे ने कभी बीकानेर के एक साधारण स्कूल से पढ़ाई शुरू की थी, वही आज भारत की मौद्रिक नीति और वित्तीय व्यवस्था की सबसे बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहा था।
युवाओं के लिए प्रेरणा
संजय मल्होत्रा की कहानी हमें यह सिखाती है कि सफलता का रास्ता किसी बड़े शहर या विशेष सुविधाओं से नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन, निरंतर सीखने की इच्छा और ईमानदारी से बनता है।
बीकानेर के एक साधारण घर से निकलकर भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर बनने तक का उनका सफर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास निरंतर हों, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती।