Satya Foundation

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19/05/2026
सीता राम 🌸🌸
19/05/2026

सीता राम 🌸🌸

सीताराम 🙏🏻
18/05/2026

सीताराम 🙏🏻

“अगर विश्वास सच्चा है तोComment में ‘सीता राम’ जरूर लिखना ❤️🙏और ये पोस्ट उस इंसान तक Share करनाजो अभी अपने बुरे समय से ल...
17/05/2026

“अगर विश्वास सच्चा है तो
Comment में ‘सीता राम’ जरूर लिखना ❤️🙏
और ये पोस्ट उस इंसान तक Share करना
जो अभी अपने बुरे समय से लड़ रहा है ✨”

सीता राम 🚩🌸
16/05/2026

सीता राम 🚩🌸

🌸जय जय राम सियाराम 🌸🙌🏼
16/05/2026

🌸जय जय राम सियाराम 🌸🙌🏼

🌸यह घटना तब की है जब डैनियल गोल्डमैन पहली बार भारत आए थे। वे एक मनोवैज्ञानिक थे, इसलिए उनका मन काफी तार्किक था और वे हर ...
12/05/2026

🌸यह घटना तब की है जब डैनियल गोल्डमैन पहली बार भारत आए थे। वे एक मनोवैज्ञानिक थे, इसलिए उनका मन काफी तार्किक था और वे हर चीज को संदेह की नजर से देखते थे।
जब वे महाराज जी के आश्रम पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि लोग बाबा के पैर छू रहे हैं और रो रहे हैं। डैनियल को यह सब थोड़ा अजीब लगा। उनके मन में विचार आया, "क्या यह व्यक्ति वाकई में कोई संत है या सिर्फ एक साधारण इंसान जिसे लोगों ने भगवान बना दिया है? क्या इन्हें वाकई कुछ पता भी है?"
महाराज जी ने अचानक डैनियल को अपने पास बुलाया और उनसे एक ऐसा सवाल पूछा जिसने उनके होश उड़ा दिए।
महाराज जी ने मुस्कुराते हुए पूछा:
"तुम रात को बिस्तर पर लेटे हुए क्या सोच रहे थे?"
डैनियल सन्न रह गए। पिछली रात वे अकेले में अपने भविष्य, अपनी प्रेमिका और अपने करियर को लेकर बहुत ही निजी और उलझे हुए विचार सोच रहे थे, जिसके बारे में उन्होंने किसी को नहीं बताया था।
महाराज जी ने उनके मन के उन गुप्त विचारों को शब्द-ब-शब्द दोहरा दिया। डैनियल को तुरंत समझ आ गया कि यहाँ कोई 'मनोविज्ञान' काम नहीं कर रहा, बल्कि यह एक ऐसी सत्ता है जो समय और स्थान से परे है। उनकी तार्किकता धरी की धरी रह गई और वे महाराज जी के अनन्य भक्त बन गए।
कहानी का सार
नीम करोली बाबा अक्सर अपने विदेशी भक्तों से कहते थे— "सब एक है" (All is one)। वे किसी धर्म या सीमाओं में विश्वास नहीं करते थे। उनके लिए अमेरिका से आया कोई प्रोफेसर और कैंची धाम का कोई साधारण मजदूर, दोनों एक समान थे।
महाराज जी की शिक्षाओं के तीन मुख्य स्तंभ थे:
Love everyone (सबको प्रेम करो)
Serve everyone (सबकी सेवा करो)
Remember God (ईश्वर को याद करो)🙌🏼🙏🏼

बिना पूछे सभी सवालों के उत्तर दिए— १९६४ में श्री एम०डी० गण्डा स्टेट बैंक के कानपुर हेड ऑफिस में थे। इसी वर्ष १४ नवम्बर क...
06/05/2026

बिना पूछे सभी सवालों के उत्तर दिए

— १९६४ में श्री एम०डी० गण्डा स्टेट बैंक के कानपुर हेड ऑफिस में थे। इसी वर्ष १४ नवम्बर के दिन उन्हें अपने सहकर्मी श्री दीक्षित के घर बाबा के दर्शन हुए। उस समय बाबा ने श्री गण्डा से कहा, “तेरे घर आऊँगा।” और उठ कर चले गए। श्री गण्डा इतने प्रभावित थे कि अपनी कार बाबा की कार के पीछे लगा दी लेकिन बाबा की कार इतनी तेजी से चली गई कि वह पीछे छूट गए। लेकिन बाबा के दर्शन की लालसा बराबर बनी रही।

कुछ समय बाद बाबा लखनऊ पहुँचे। श्री गण्डा को पता लगा। वे अपनी पत्नी को साथ लेकर लखनऊ उनकी भाभी के घर गए और बाबा के बारे में खोजबीन शुरू कर दी। पता लगा महाराजजी सूरजनारायण मेहरोत्रा के घर हैं। दूसरे दिन श्री गण्डा अपनी पत्नी और उनकी भाभी के साथ श्री मेहरोत्रा के घर गए। बाबा ऊपर के कमरे में विराजमान थे और भक्तों की भीड़ लगी थी। गण्डा और उनके साथ के लोग बाहर ही खड़े थे। जब सभी भक्त चले गए तो बाबा ने इन लोगों को कमरे में बुलाया। सबसे पहले बाबा ने श्री गण्डा से कहा, “तू जो चाहता है माँग ले।” श्री गण्डा ने केवल आशीर्वाद की कामना की, फलस्वरूप उनके ऊपर बाबा की कृपा हमेशा बनी रही। वे फिर भाभी से बोले, “तू अपने पति के बारे में व्यर्थ चिन्ता किया करती है, चिन्ता छोड़ दे सब ठीक हो जाएगा।” अन्त में वे श्री गण्डा की पत्नी से बोले, “तू पहले से ही सोच कर आई है। पूछ, क्या पूछना चाहती है।” लेकिन वे चुप रहीं। बाबा ने बार-बार कुरेदा, फिर भी कुछ नहीं बोलों तो बाबा ने कहा, “अच्छा, तेरे घर आकर मिलेंगे, तब बताना।”

कुछ दिनों बाद कानपुर में डॉ० दीक्षित के घर महाराजजी का आगमन हुआ। श्री गण्डा वहाँ से बाबा को अपने घर ले गए। महाराजजी के स्वागत की तैयारी बाहरी कमरे में की गई थी किन्तु वे उधर मुड़े भी नहीं और बोले, “तेरे कमरे (पूजा-गृह) में बैठेंगे।” फिर वे आगे-आगे चलने लगे जैसे इस घर से सुपरिचित हों। श्री गण्डा का परिवार उनके पीछे था। बाबा जाकर पूजागृह में बैठ गए। श्री गण्डा की पत्नी को बुलवाया। उनकी पत्नी आकर बाबा के सामने बैठीं, तो उन्होंने सवाल किया, “क्या पूछना चाहती है ?” वे आज भी चुपचाप बैठी रहीं।

फिर बाबा ने उनके मन में आए प्रश्नों का उत्तर देना शुरू किया और दस मिनट तक बोलते ही रहे। अन्त में बोले, “यदि कुछ रह गया हो तो बताओ।” वे स्वभावतः चुप रहीं लेकिन उनके मुख-मण्डल पर सन्तोष की लकीरें उभर आई थीं और भीतर से काफी प्रसन्न दिखाई दे रही थीं। महाराजजी बोले, “किसी साधु को आगे ऐसे परेशान मत करना।”

जब बाबा चले गए तो श्री गण्डा ने अपनी पत्नी से पूछा कि बाबा ने सभी प्रश्नों का उत्तर दिया तो उन्होंने सकारात्मक जवाब दिया। फिर तो पूरा परिवार बाबा का परम भक्त हो गया।

25/04/2026

゚viralシ Deepakk Panwar

11/04/2026

゚viralシ

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