17/08/2026
#देश में निम्न सैकड़ो स्वदेशी कंपनिया हैं लेकिन पतंजलि से ही कुछ लोगों को आपत्ति क्यों है? पतंजलि ही सुर्खियों में क्यों है #
आइए जानें👇👇
1. योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, नेचुरोपैथी और वेलनेस
यदि भारत की जनता योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, नेचुरोपैथी और वेलनेस से जुड़ गई तो लोग बीमार कम होंगे और दवाओं का सेवन कम करेंगे। लोग ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्वतः जागृत होंगे तथा मानसिक और शारीरिक शांति प्राप्त करेंगे।
भोगवाद में और विदेशी कंपनियों के एजेंट के रूप में काम करने वाले लोगों को यह स्वीकार नहीं हो रहा है। क्योंकि वे स्वयं सुबह 8 बजे उठते हैं, उन्हें प्रातःकाल का महत्व क्या पता? मानस कैसे योग से जुड़ेगा? इसलिए उन्हें पतंजलि से दिक्कत है।
2. गुरुकुल और भारतीय शिक्षा व्यवस्था
यदि अपनी समृद्धि से पतंजलि भविष्य में हजारों गुरुकुल खोलकर गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था स्थापित कर देता है तो भारत के बच्चों का मानस भारतीय विचारधारा पर गढ़ जाएगा। वे पश्चिम के उपभोक्ता नहीं बनेंगे और उनके अंदर राष्ट्रीय भावना जागृत होगी।
विदेशी कंपनियों के एजेंट और आयातित संस्कृति को मानने वाले लोगों को यह बात हजम नहीं हो रही है कि पतंजलि आगे क्यों बढ़ रही है।
3. भारतीय शिक्षा बोर्ड
भारतीय शिक्षा बोर्ड, CBSE के समक्ष एक नया केंद्रीय शिक्षा बोर्ड बन गया है। यदि करोड़ों बच्चे भारतीय शिक्षा बोर्ड से पढ़ने लगे तो विद्यार्थियों के मानस में भारतीयता और हमारे पूर्वजों की विचारधारा स्थापित होगी।
बच्चों को हमारे महान गणितज्ञों, वैज्ञानिकों, कलाकारों, खिलाड़ियों, संगीतज्ञों, अर्थशास्त्रियों, राजनीतिशास्त्रियों, न्यायशास्त्रियों तथा भूगोल और विज्ञान के क्षेत्र में भारत द्वारा की गई खोजों और उपलब्धियों की जानकारी मिलेगी।
यदि पतंजलि यह कार्य करेगा तो फिर विदेशी कंपनियों का काम कौन करेगा? जो हम 1000 वर्षों से गुलामी का मानस झेल रहे हैं, उससे मुक्ति मिलने लगेगी। इसलिए विदेशी एजेंटों, कम्युनिस्टों और आयातित संस्कृति को मानने वाले लोगों के लिए पतंजलि समस्या पैदा करेगी। इसलिए पतंजलि का विरोध करो।
4. जैविक खेती
पतंजलि देशभर में जैविक खेती को विस्तार देना चाहता है। यदि पूरे देश में जैविक खेती हो गई तो अमेरिका और इंग्लैंड की कंपनियाँ भारत में कैसे साम्राज्य स्थापित करेंगी? लोग स्वस्थ होने लगेंगे और बीमारियाँ कम होंगी, तो लोग दवाओं का सेवन कम करेंगे। इसलिए पतंजलि से दिक्कत है।
5. पतंजलि ग्लोबल यूनिवर्सिटी
दिल्ली-फरीदाबाद क्षेत्र में पतंजलि भारत की सबसे बड़ी स्वदेशी यूनिवर्सिटी बनाने जा रहा है—पतंजलि ग्लोबल यूनिवर्सिटी।
पूर्णतः व्यापारिक मानस रखने वाले लोगों को इससे भी दिक्कत है, क्योंकि वहाँ सदाचार, योग, यज्ञ और भारतीय ज्ञान परंपरा का गुणगान होगा। आयातित संस्कृति, विदेशी कंपनियों के एजेंट और गुलामी की मानसिकता रखने वाले लोगों को यह बात पसंद नहीं है कि पतंजलि समृद्ध बने। इसलिए पतंजलि का विरोध हो रहा है।
👉 अतः सनातन संस्कृति की पूर्ण प्रतिष्ठा के कार्य जो सपना विवेकानंद का था, दयानंद का था, महर्षि अरविंदो का था, लाखों शहीदों का था वह तो केवल दान से, भिक्षा मांगने से पूर्ण होगा नहीं, सरकार इस कार्य के लिए पतंजलि को पैसा देगी नहीं क्योंकि इन कार्य को करने से वोट नहीं मिलते वोट के लिए तो फ्री की रेवड़ी बांटनी होती है।, उल्टा पतंजलि गोमूत्र बेचने पर 18% GST देना पड़ता है 🥲
अतः उसके लिए बिजनेस करना पड़ेगा, समृद्ध बनना पड़ेगा।। और धर्म स्थापना हेतु आचार्य चाणक्य का अर्थशास्त्र पढ़ना पड़ेगा।
👉 वित्तेन रक्ष्यते धर्मो विद्या योगेन रक्ष्यते।
मृदुना रक्ष्यते भूपः सत्स्त्रिया रक्ष्यते गृहम्॥
भावार्थ - आचार्य चाणक्य नीति श्लोक में स्पष्ट कहां है कि धर्म और धर्म के बीच केवल अर्थ खड़ा है पैसा खड़ा है। इस पृथ्वी लोक में पैसे की गति यदि सात्विक लोगों के हाथ में रहती है तो सत्य राज्य, समाज में प्रतिष्ठित हो जाता है। और यदि पैसे कि शक्ति, अर्थ दुष्ट लोगों के हाथ में होता है तो अधर्म, अनीति समाज में फैल जाता है।