भगवान श्री परशुराम सेवक मंडल

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भगवान श्री परशुराम सेवक मंडल ब्राह्मण समाज की एकजुटता, एकता, संप्रभुता, सुरक्षा, समृद्धि, व हितो की रक्षा हेतु संगठित हों कृपया अधिक से अधिक लोगो को जोडने का कर्तव्य निभाएं

नमस्कार 🙏 आप से निवेदन है, कृपया इस हस्ताक्षर अभियान में नाम लिखकर, अभियान को समर्थन दीजिए !श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आं...
18/08/2026

नमस्कार 🙏
आप से निवेदन है, कृपया इस हस्ताक्षर अभियान में नाम लिखकर, अभियान को समर्थन दीजिए !

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन मथुरा में भगवान श्री कृष्ण के प्रकट्य स्थल (केशवदेव मंदिर) की मुक्ति और पुनर्निर्माण से जुड़ा एक प्रमुख धार्मिक व सांस्कृतिक प्रयास है। मथुरा हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर है, श्रीकृष्ण जन्मभूमि का पूर्ण उद्धार हमारा संकल्प है। यह आंदोलन पूरी तरह से न्यायसंगत, शांतिपूर्ण और कानूनी दायरे में रहकर अपनी आस्था को सम्मान दिलाने का मार्ग है। भगवान श्री कृष्ण के जन्मस्थान पर भव्यता और दिव्यता बहाल हो, यही हर सनातनी की इच्छा है। जिस प्रकार अयोध्या में रामलला विराजमान हुए, वैसे ही मथुरा में भी कान्हा का भव्य मंदिर बने।

जय श्री कृष्ण 🚩

मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति व संरक्षण के लिए आगे आए, कदम बढ़ाए

 #दु:ख है कि कुछ  #ब्रह्मद्रोही दुष्ट सवंश विनाश के लिए आतुर हैं! भगवान्  #श्रीकृष्ण घोषणा करते हैं..... #यदा देवेषु वेद...
15/08/2026

#दु:ख है कि कुछ #ब्रह्मद्रोही दुष्ट सवंश विनाश के लिए आतुर हैं! भगवान् #श्रीकृष्ण घोषणा करते हैं.....

#यदा देवेषु वेदेषु गोषु #विप्रेषु साधुषु।
धर्मे मयि च विद्वेषः स वा आशु #विनश्यति।।

जब कोई दुष्ट #व्यक्ति देवता, वेद, गाय, #ब्राह्मण, साधु, धर्म और ईश्वर के प्रति #द्वेष करता है तो समझ लो कि उसके #विनाश का समय बिल्कुल निकट आ गया है।
धनुर्बाणधारी भगवान् श्रीराम कहते हैं......

#मोहि न सोहाइ #ब्रह्म कुल द्रोही.........

#ब्राह्मण कुल से द्रोह करनेवाला मुझे नहीं #सुहाता।

भगवान् #शिव भी कहते हैं.....

#बिप्र द्रोह पावक सो जरई.....

देवराज के वज्र, मेरे विशाल त्रिशूल, काल के दण्ड और विष्णु के विकराल चक्र के मारे जो नहीं मरता; वह दुर्जन #विप्रद्रोह रूपी अग्नि से जल कर समूल भस्म हो जाता है। दुर्दुष्टो! गौ और #ब्राह्मण देश के शृङ्गार हैं, इनके हुङ्कार से बचो। गयादि के #ब्राह्मण अन्त्येष्टिकर्म भी कराना जानते हैं.....
जागो ब्रह्मक्षत्रो! जागो.........

🙇 #जयश्रीसीताराम 🙇

https://c.org/ZRpZBdqVGf
15/08/2026

https://c.org/ZRpZBdqVGf

मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति व संरक्षण के लिए आगे आए, कदम बढ़ाए

जय जय श्री राम
21/06/2026

जय जय श्री राम

 #तुलसीदास जी जब  #रामचरितमानस लिख रहे थे, तो उन्होंने एक चौपाई लिखी:सिय राम मय सब जग जानी,करहु प्रणाम जोरी जुग पानी ॥अर...
13/06/2026

#तुलसीदास जी जब #रामचरितमानस लिख रहे थे, तो उन्होंने एक चौपाई लिखी:

सिय राम मय सब जग जानी,
करहु प्रणाम जोरी जुग पानी ॥

अर्थात: पूरे संसार में श्री #राम का निवास है, सबमें भगवान हैं और हमें उनको हाथ जोड़कर प्रणाम कर लेना चाहिए।

चौपाई लिखने के बाद तुलसीदास जी विश्राम करने अपने घर की ओर चल दिए। रास्ते में जाते हुए उन्हें एक #लड़का मिला और बोला: अरे महात्मा जी, इस रास्ते से मत जाइये आगे एक #बैल गुस्से में लोगों को मारता हुआ घूम रहा है। और आपने तो लाल वस्त्र भी पहन रखे हैं तो आप इस रास्ते से बिल्कुल मत जाइये।

तुलसीदास जी ने सोचा: ये कल का बालक मुझे चला रहा है। मुझे पता है। सबमें राम का वास है। मैं उस बैल के हाथ जोड़ लूँगा और शान्ति से चला जाऊंगा।

लेकिन तुलसीदास जी जैसे ही आगे बढे तभी बिगड़े बैल ने उन्हें जोरदार टक्कर मारी और वो बुरी तरह गिर पड़े।

अब तुलसीदास जी घर जाने की बजाय सीधे उस जगह पहुंचे जहाँ वो रामचरित मानस लिख रहे थे। और उस चौपाई को फाड़ने लगे, तभी वहाँ #हनुमान जी प्रकट हुए और बोले: श्रीमान ये आप क्या कर रहे हैं?

तुलसीदास जी उस समय बहुत गुस्से में थे, वो बोले: ये चौपाई बिल्कुल गलत है। ऐसा कहते हुए उन्होंने हनुमान जी को सारी बात बताई।

हनुमान जी मुस्कुराकर तुलसीदास जी से बोले: श्रीमान, ये चौपाई तो शत प्रतिशत सही है। आपने उस बैल में तो श्री राम को देखा लेकिन उस बच्चे में राम को नहीं देखा जो आपको बचाने आये थे। #भगवान तो बालक के रूप में आपके पास पहले ही आये थे लेकिन आपने देखा ही नहीं।

ऐसा सुनते ही तुलसीदास जी ने हनुमान जी को गले से लगा लिया।

दोस्तों हम भी अपने जीवन में कई बार छोटी छोटी चीज़ों पर ध्यान नहीं देते और बाद में बड़ी समस्या का शिकार हो जाते हैं। ये किसी एक इंसान की परेशानी नहीं है बल्कि ऐसा हर इंसान के साथ होता है। कई बार छोटी-छोटी बातें हमें बड़ी समस्या का संकेत देती हैं आप उनपर विचार करिये फिर आगे बढ़िए।
#रामलला #राम #पंचमुखी #हनुमान जी
#राम #भक्ति

महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका की कथा सनातन धर्म की सबसे प्रेरणादायक और रहस्यमयी कथाओं में से एक मानी जाती है। यह कथा तप,...
11/06/2026

महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका की कथा सनातन धर्म की सबसे प्रेरणादायक और रहस्यमयी कथाओं में से एक मानी जाती है। यह कथा तप, पतिव्रता धर्म, आज्ञापालन और पुनर्जन्म की दिव्य लीलाओं से परिपूर्ण है।

महर्षि भृगु के वंश में जन्मे ऋषि जमदग्नि महान तपस्वी और वेदों के ज्ञाता थे। उनका विवाह राजा रेनु की कन्या रेणुका से हुआ। माता रेणुका इतनी महान पतिव्रता थीं कि प्रतिदिन नदी से बिना पके मिट्टी के घड़े में जल भरकर आश्रम ले आती थीं। उनका सतीत्व ही उस घड़े को टूटने नहीं देता था।

एक दिन नदी तट पर उन्होंने गंधर्वराज चित्ररथ को अपनी पत्नियों के साथ जलक्रीड़ा करते देखा। क्षणभर के लिए उनका मन उस दृश्य की ओर आकर्षित हुआ और उसी क्षण उनका योगबल क्षीण हो गया। जब वे जल लेकर लौटने में विलंब कर बैठीं, तब महर्षि जमदग्नि ने अपने तपबल से सारी घटना जान ली।

क्रोधित होकर उन्होंने अपने पुत्रों को माता का वध करने की आज्ञा दी। बड़े पुत्रों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, परन्तु सबसे छोटे पुत्र भगवान परशुराम ने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए माता रेणुका का सिर धड़ से अलग कर दिया। महर्षि जमदग्नि पुत्र की आज्ञाकारिता से प्रसन्न हुए और वरदान मांगने को कहा। परशुराम ने माता रेणुका तथा अपने भाइयों को पुनर्जीवित करने का वर मांगा। महर्षि ने तपबल से सभी को पुनर्जीवन प्रदान कर दिया।

इसके पश्चात् एक और महान घटना घटी। राजा कार्तवीर्य अर्जुन ने महर्षि जमदग्नि के आश्रम की कामधेनु गाय को बलपूर्वक छीन लिया। विरोध करने पर उसके सैनिकों ने महर्षि जमदग्नि का वध कर दिया। जब भगवान परशुराम लौटे और माता रेणुका को विलाप करते देखा, तब उन्होंने प्रतिज्ञा की कि वे पृथ्वी को अत्याचारी क्षत्रियों से मुक्त करेंगे। इसी प्रतिज्ञा के कारण भगवान परशुराम ने इक्कीस बार पृथ्वी को अधर्मी शासकों से मुक्त किया।

माता रेणुका बाद में देवी रूप में पूजित हुईं। दक्षिण भारत में वे येल्लम्मा, रेणुकाम्बा और एकवीरा देवी के रूप में विख्यात हैं। आज भी लाखों भक्त उन्हें मातृशक्ति और करुणा की अधिष्ठात्री देवी मानकर पूजा करते हैं।

जमदग्नि-रेणुका स्तोत्र

॥ नमो जमदग्नये तुभ्यं तपोमूर्ते महायशः । भृगुवंशप्रदीपाय धर्मसंरक्षणाय च ॥१॥

॥ नमो रेणुकायै देव्या पतिव्रतपरायणायै । शक्तिरूपे जगन्मातः भक्तानां सुखदायिनि ॥२॥

॥ जमदग्नि-रेणुका देवौ परशुरामस्य कारणम् । भक्तरक्षार्थमाविर्भूतौ नमामि चरणौ शुभौ ॥३॥

॥ तपसा तेजसा चैव पावनौ लोकपूजितौ । आशीर्वादं प्रयच्छेतां सर्वसिद्धिप्रदायकौ ॥४॥

प्रार्थना

॥ ॐ जमदग्नि-रेणुकाभ्यां नमः ॥ ॥ ॐ रेणुकाम्बायै नमः ॥ ॥ ॐ भृगुवंशदीप्ताय नमः ॥

जिन घरों में श्रद्धा से महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका का स्मरण किया जाता है, वहां धर्म, तप, पारिवारिक सौहार्द और आध्यात्मिक उन्नति का वास माना जाता है। उनकी कथा हमें सिखाती है कि तप और सत्य का प्रकाश युगों तक संसार को दिशा देता रहता है।

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