भगवान श्री परशुराम सेवक मंडल

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जय जय श्री राम
21/06/2026

जय जय श्री राम

 #तुलसीदास जी जब  #रामचरितमानस लिख रहे थे, तो उन्होंने एक चौपाई लिखी:सिय राम मय सब जग जानी,करहु प्रणाम जोरी जुग पानी ॥अर...
13/06/2026

#तुलसीदास जी जब #रामचरितमानस लिख रहे थे, तो उन्होंने एक चौपाई लिखी:

सिय राम मय सब जग जानी,
करहु प्रणाम जोरी जुग पानी ॥

अर्थात: पूरे संसार में श्री #राम का निवास है, सबमें भगवान हैं और हमें उनको हाथ जोड़कर प्रणाम कर लेना चाहिए।

चौपाई लिखने के बाद तुलसीदास जी विश्राम करने अपने घर की ओर चल दिए। रास्ते में जाते हुए उन्हें एक #लड़का मिला और बोला: अरे महात्मा जी, इस रास्ते से मत जाइये आगे एक #बैल गुस्से में लोगों को मारता हुआ घूम रहा है। और आपने तो लाल वस्त्र भी पहन रखे हैं तो आप इस रास्ते से बिल्कुल मत जाइये।

तुलसीदास जी ने सोचा: ये कल का बालक मुझे चला रहा है। मुझे पता है। सबमें राम का वास है। मैं उस बैल के हाथ जोड़ लूँगा और शान्ति से चला जाऊंगा।

लेकिन तुलसीदास जी जैसे ही आगे बढे तभी बिगड़े बैल ने उन्हें जोरदार टक्कर मारी और वो बुरी तरह गिर पड़े।

अब तुलसीदास जी घर जाने की बजाय सीधे उस जगह पहुंचे जहाँ वो रामचरित मानस लिख रहे थे। और उस चौपाई को फाड़ने लगे, तभी वहाँ #हनुमान जी प्रकट हुए और बोले: श्रीमान ये आप क्या कर रहे हैं?

तुलसीदास जी उस समय बहुत गुस्से में थे, वो बोले: ये चौपाई बिल्कुल गलत है। ऐसा कहते हुए उन्होंने हनुमान जी को सारी बात बताई।

हनुमान जी मुस्कुराकर तुलसीदास जी से बोले: श्रीमान, ये चौपाई तो शत प्रतिशत सही है। आपने उस बैल में तो श्री राम को देखा लेकिन उस बच्चे में राम को नहीं देखा जो आपको बचाने आये थे। #भगवान तो बालक के रूप में आपके पास पहले ही आये थे लेकिन आपने देखा ही नहीं।

ऐसा सुनते ही तुलसीदास जी ने हनुमान जी को गले से लगा लिया।

दोस्तों हम भी अपने जीवन में कई बार छोटी छोटी चीज़ों पर ध्यान नहीं देते और बाद में बड़ी समस्या का शिकार हो जाते हैं। ये किसी एक इंसान की परेशानी नहीं है बल्कि ऐसा हर इंसान के साथ होता है। कई बार छोटी-छोटी बातें हमें बड़ी समस्या का संकेत देती हैं आप उनपर विचार करिये फिर आगे बढ़िए।
#रामलला #राम #पंचमुखी #हनुमान जी
#राम #भक्ति

महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका की कथा सनातन धर्म की सबसे प्रेरणादायक और रहस्यमयी कथाओं में से एक मानी जाती है। यह कथा तप,...
11/06/2026

महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका की कथा सनातन धर्म की सबसे प्रेरणादायक और रहस्यमयी कथाओं में से एक मानी जाती है। यह कथा तप, पतिव्रता धर्म, आज्ञापालन और पुनर्जन्म की दिव्य लीलाओं से परिपूर्ण है।

महर्षि भृगु के वंश में जन्मे ऋषि जमदग्नि महान तपस्वी और वेदों के ज्ञाता थे। उनका विवाह राजा रेनु की कन्या रेणुका से हुआ। माता रेणुका इतनी महान पतिव्रता थीं कि प्रतिदिन नदी से बिना पके मिट्टी के घड़े में जल भरकर आश्रम ले आती थीं। उनका सतीत्व ही उस घड़े को टूटने नहीं देता था।

एक दिन नदी तट पर उन्होंने गंधर्वराज चित्ररथ को अपनी पत्नियों के साथ जलक्रीड़ा करते देखा। क्षणभर के लिए उनका मन उस दृश्य की ओर आकर्षित हुआ और उसी क्षण उनका योगबल क्षीण हो गया। जब वे जल लेकर लौटने में विलंब कर बैठीं, तब महर्षि जमदग्नि ने अपने तपबल से सारी घटना जान ली।

क्रोधित होकर उन्होंने अपने पुत्रों को माता का वध करने की आज्ञा दी। बड़े पुत्रों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, परन्तु सबसे छोटे पुत्र भगवान परशुराम ने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए माता रेणुका का सिर धड़ से अलग कर दिया। महर्षि जमदग्नि पुत्र की आज्ञाकारिता से प्रसन्न हुए और वरदान मांगने को कहा। परशुराम ने माता रेणुका तथा अपने भाइयों को पुनर्जीवित करने का वर मांगा। महर्षि ने तपबल से सभी को पुनर्जीवन प्रदान कर दिया।

इसके पश्चात् एक और महान घटना घटी। राजा कार्तवीर्य अर्जुन ने महर्षि जमदग्नि के आश्रम की कामधेनु गाय को बलपूर्वक छीन लिया। विरोध करने पर उसके सैनिकों ने महर्षि जमदग्नि का वध कर दिया। जब भगवान परशुराम लौटे और माता रेणुका को विलाप करते देखा, तब उन्होंने प्रतिज्ञा की कि वे पृथ्वी को अत्याचारी क्षत्रियों से मुक्त करेंगे। इसी प्रतिज्ञा के कारण भगवान परशुराम ने इक्कीस बार पृथ्वी को अधर्मी शासकों से मुक्त किया।

माता रेणुका बाद में देवी रूप में पूजित हुईं। दक्षिण भारत में वे येल्लम्मा, रेणुकाम्बा और एकवीरा देवी के रूप में विख्यात हैं। आज भी लाखों भक्त उन्हें मातृशक्ति और करुणा की अधिष्ठात्री देवी मानकर पूजा करते हैं।

जमदग्नि-रेणुका स्तोत्र

॥ नमो जमदग्नये तुभ्यं तपोमूर्ते महायशः । भृगुवंशप्रदीपाय धर्मसंरक्षणाय च ॥१॥

॥ नमो रेणुकायै देव्या पतिव्रतपरायणायै । शक्तिरूपे जगन्मातः भक्तानां सुखदायिनि ॥२॥

॥ जमदग्नि-रेणुका देवौ परशुरामस्य कारणम् । भक्तरक्षार्थमाविर्भूतौ नमामि चरणौ शुभौ ॥३॥

॥ तपसा तेजसा चैव पावनौ लोकपूजितौ । आशीर्वादं प्रयच्छेतां सर्वसिद्धिप्रदायकौ ॥४॥

प्रार्थना

॥ ॐ जमदग्नि-रेणुकाभ्यां नमः ॥ ॥ ॐ रेणुकाम्बायै नमः ॥ ॥ ॐ भृगुवंशदीप्ताय नमः ॥

जिन घरों में श्रद्धा से महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका का स्मरण किया जाता है, वहां धर्म, तप, पारिवारिक सौहार्द और आध्यात्मिक उन्नति का वास माना जाता है। उनकी कथा हमें सिखाती है कि तप और सत्य का प्रकाश युगों तक संसार को दिशा देता रहता है।

03/06/2026
28/04/2026

जय दादा परशुराम 🚩🚩

पावन अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर, 7 चिरंजीवियों में से एक , भगवान नारायण के छठे अवतार भगवान  श्री परशुराम जंयती की हार्द...
19/04/2026

पावन अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर, 7 चिरंजीवियों में से एक , भगवान नारायण के छठे अवतार भगवान श्री परशुराम जंयती की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई 🙌🙌🙌🙏🙏


परशुं धृतवान् रामो, जमदग्निसुतो महान्।
क्षत्रियाणां विनाशाय, धर्मसंस्थापनाय च ।।

#परशुरामजी #भगवानपरशुराम #जयश्रीराम

14/04/2026

भारतीय संस्कृति में गौ माता का स्थान अत्यंत पूजनीय और सम्माननीय रहा है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है— “गावो विश्वस्य मातरः” अर्थात गौ समस्त विश्व की माता है।
गौ माता केवल एक पशु नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और जीवन का आधार है। प्राचीन समय से ही हमारे ऋषि-मुनियों ने गौ सेवा को सबसे बड़ा धर्म बताया है। गौ माता हमें दूध देती है, जिससे दही, घी, मक्खन जैसे अनेक पोषक पदार्थ बनते हैं। यही नहीं, गौमूत्र और गोबर भी औषधि एवं खेती के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
हमारे देश की अर्थव्यवस्था भी एक समय गौ आधारित थी। जैविक खेती में आज भी गोबर खाद और गौमूत्र का महत्व बढ़ता जा रहा है, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहती है और स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहता है।
धार्मिक दृष्टि से भी गौ माता का महत्व बहुत अधिक है। हिन्दू धर्म में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास गौ माता में माना जाता है। इसलिए गौ सेवा करना, वास्तव में ईश्वर की सेवा करने के समान माना गया है।
लेकिन आज के समय में गौ माता की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। सड़कों पर भटकती गौ माता, प्लास्टिक खाती हुई दिखाई देती है, जो हमारे समाज के लिए एक शर्म की बात है। हमें इस दिशा में सोचने और कार्य करने की आवश्यकता है।
हम सभी का कर्तव्य है कि गौ माता की रक्षा करें, उनकी सेवा करें और समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाएं। अगर हर व्यक्ति थोड़ा-थोड़ा प्रयास करे, तो हम गौ माता को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन दे सकते हैं।
अंत में, मैं यही कहना चाहूँगा— “जिस देश में गौ माता का सम्मान होता है,
वह देश सदैव उन्नति के मार्ग पर चलता है।”
🙏🙏जय गौ माता🙏🙏
#विक्रान्त #शर्मा

With श्री वासुदेव गौधाम सेवा ट्रस्ट रजि. – I just got recognized as one of their top fans! 🎉
14/04/2026

With श्री वासुदेव गौधाम सेवा ट्रस्ट रजि. – I just got recognized as one of their top fans! 🎉

10/04/2026

🐄 पंचगव्य की महिमा 🐄
भारतीय सनातन परंपरा में पंचगव्य का विशेष महत्व बताया गया है। गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर से निर्मित पंचगव्य को शुद्धता, आरोग्यता और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है।
यह केवल एक धार्मिक तत्व नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, प्रकृति और स्वास्थ्य से जुड़ा एक अमूल्य उपहार है। हमारे ऋषि-मुनियों ने इसे शरीर और वातावरण की शुद्धि के लिए उपयोगी बताया है।
आज आवश्यकता है कि हम अपनी परंपराओं को समझें, अपनाएं और गौ सेवा के माध्यम से इस धरोहर को आगे बढ़ाएं।
🙏 गौ माता की सेवा – मानवता की सेवा 🙏

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