इस भारत देश का निर्माण ही क्षत्रियों के द्वारा दान की गई रियासतो के एकीकरण से संभव हुआ है।। कुल मिलाकर इस देश के संसाधनों पर जहां पहला हक हमारा होना चाहिए था।
वहीं इस देश में क्षत्रिय समाज का पतन कर देने के लिए आजादी के बाद से ही तमाम राजनैतिक पार्टियां, मीडिया हाउस, संघ संगठन बहुत जोरो से प्रयासरत है। अन्य जातियों व धर्मो के लिए विपक्ष को अक्सर विधवा विलाप करते हुए देखा जाता है लेकिन क्षत्रिय समा
ज के लिए नहीं , क्यूंकि हमारे खिलाफ एजेंडा कोई नया खेल नहीं बल्कि आजादी के समय से चल रहे हैं, आज जो विपक्ष है पहले यही सत्ता पक्ष हुआ करता था, मुख्य नींव इन्हीं की डाली हुई हो सकती है। जिसको rss जैसे संगठन अब उनके अनुसार आगे बढ़ा रहे हैं।
कहीं न कहीं सभी राजनैतिक दलों की सोच है कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था तभी सफल होगी जब राजतंत्र की शासक जाति क्षत्रिय का पतन हो जाए।।
विभिन्न मीडिया हाउसेस में पत्रकार,रिपोर्टर, एंकर इत्यादि राजनैतिक दलों के बिठाए गए तोता हुआ करते हैं, शायद इसलिए क्षत्रिय समाज की वहां कोई जगह नहीं है।। और हमारे समाज के करोड़पति, पूंजीपतियों को समाज से मतलब नहीं है जो समाज के उत्थान के लिए स्वतंत्र मीडिया हाउस खोलने की सोचे -
किसी अन्य पर क्यों दोष डालें जब क्षत्रिय ही गुलामी/अंधभक्ति, हिंदुत्व प्रेम का चोला धारण करके अपने खिलाफ चल रहे किसी भी एजेंडा को पहचानने में नाकामयाब हो गया है।
क्षत्रिय अब अपने हक की लड़ाई लड़ने से अधिक साधुता शांत बैठकर खुद का पतन देखने में समझता है या क्षत्रिय समाज अभी तक समझ ही नहीं पाया है कि राजनीतिक पार्टियों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को धीरे धीरे क्षत्रिय विरोधी बना दिया है।
हमारी नसमझी का मुख्य कारण है कि समाज कल्याण की भावना से प्रेरित हमारे समाज में मुख्य बौद्धिक वर्ग (मीडिया/ लेखक ) है ही नहीं, जो समाज की आवाज जोरो से गगनचुंबी करें। बौद्धिक वर्ग के नाम पर जो भी है समाज में वो राजनैतिक दलों के नेता है, जिनका मुख्य उद्देश्य समाज को पार्टी की विचारधारा से जोड़कर राजनीतिक लाभ लेना होता है।
ऐसा नहीं है कि हमारे समाज के सभी नेता समाज के उत्थान के लिए कार्य नहीं करना चाहते है, कुछ नेता कार्य करना चाहते है लेकिन उनकी पार्टियों की विचारधारा उन्हें इसके लिए अनुमति नहीं देती।
कहीं न कहीं प्रत्येक राजनैतिक दल में आजादी के बाद से ही एक ऐसी लॉबी रही है जिसका मुख्य उद्देश्य क्षत्रिय विरोधी लहर बनाकर रखना होता है।।
इसलिए क्षत्रिय समाज के लोगो को समझना चाहिए कि किसी पार्टी की हार जीत से ज्यादा जरूरी समाज का हित है, एवं समाज कल्याण पर चित केंद्रित करना चाहिए। किसी भी राजनैतिक पार्टी/संगठन की विचारधारा से ज्यादा तवज्जो सामाजिक हितों को देना चाहिए।। समाज का मुख्य उद्देश्य समाज की युवा पीढ़ी को शिक्षित बनाना होना चाहिए जिससे युवाओं में अपना हित अहित समझने की क्षमता विकास हो सके।।
जय मां भवानी
जय क्षात्र धर्म