06/05/2026
संरक्षण के दावे बनाम ज़मीनी सच्चाई!
कुलपहाड़ में ऐतिहासिक धरोहरों पर बुलडोजर के निशान, सवालों के घेरे में पूरा तंत्र
📍 महोबा | कुलपहाड़
✍️ विशेष रिपोर्ट | The Fourth Pillar
एक तरफ महोबा जिलाधिकारी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण, पर्यटन विकास और विरासत बचाने के संदेश देती दिखाई देती हैं। निरीक्षण की तस्वीरें साझा होती हैं, अधिकारियों को निर्देश दिए जाते हैं, संरक्षण की बातें लिखी जाती हैं।
लेकिन दूसरी तरफ कुलपहाड़ में जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे इन दावों की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं।
🚨 आरोप बेहद गंभीर
◆ कुलपहाड़ के बड़े तालाब के बंधान और उसके पास स्थित पुरानी संरचनाओं को लेकर स्थानीय नागरिकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि—
◆ बंधान के पास जेसीबी से खुदाई कराई गई
◆ ऐतिहासिक ढांचे को नुकसान पहुंचा
◆ रात में भी कथित रूप से मशीनें चलती रहीं
◆ सरकारी भूमि और धरोहर क्षेत्र पर कब्जे की तैयारी की जा रही है
GPS टैग वाली तस्वीरें, मलबे के ढेर, टूटी दीवारें और स्थानीय लोगों के प्रार्थना पत्र अब पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ले आए हैं।
📸 तस्वीरें क्या कहती हैं?
एक ओर DM Mahoba के फेसबुक पेज पर “Heritage Conservation” की पोस्टें दिखाई देती हैं।
दूसरी ओर उसी जिले में—
🧱 ध्वस्त संरचनाएं
🚜 जेसीबी मशीनें
🏚️ मलबे में बदलती विरासत
🌊 कमजोर होता तालाब का बंधान
यह विरोधाभास अब स्थानीय लोगों के बीच बड़ा सवाल बन चुका है।
🧾 स्थानीय लोगों का सीधा आरोप
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि—
“धरोहर बचाने की बातें कैमरों तक सीमित हैं, जमीन पर इतिहास मिटाया जा रहा है।”
लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते रोक नहीं लगी तो आने वाले समय में—
◆ तालाब का बंधान टूट सकता है
◆ जलभराव और जनहानि का खतरा बढ़ सकता है
◆ पूरी ऐतिहासिक पहचान मिट सकती है
⚖️ बड़ा सवाल प्रशासन से
यदि प्रशासन धरोहर संरक्षण को लेकर गंभीर है तो—
❓ खुदाई किस अनुमति से हुई?
❓ जिम्मेदार कौन है?
❓ सरकारी भूमि पर गतिविधियों की निगरानी कहाँ थी?
❓ क्या भूमाफियाओं को संरक्षण मिल रहा है?
🔥 सोशल मीडिया पर बढ़ता आक्रोश
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा तेज है कि—
“क्या अब धरोहरों की सुरक्षा सिर्फ पोस्ट और फोटोशूट तक सीमित रह गई है?”
📢 जनता की मांग
✔ पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच
✔ धरोहर क्षेत्र का सीमांकन
✔ अवैध खुदाई और कब्जों पर रोक
✔ जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों पर कार्रवाई
✔ तालाब और बंधान की तकनीकी जांच
🧠 विशेष टिप्पणी
इतिहास केवल किताबों में नहीं बचता,
उसे ज़मीन पर भी बचाना पड़ता है।
यदि विरासत के नाम पर सिर्फ निरीक्षण की तस्वीरें बचीं और जमीन पर धरोहरें मलबा बनती रहीं, तो आने वाली पीढ़ियां सवाल जरूर पूछेंगी—
“जब इतिहास टूट रहा था… तब जिम्मेदार लोग कहाँ थे?”
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