30/05/2025
आज की नई पीढ़ियों से निवेदन
👏👏👏👏👏👏👏👏बालकों या बालिकाओं को जब भी मन में यह आए कि मुझे अकेले में रहना है या सयन करना है तो उस समय मन की बात ना मानकर स्वयं को अपने माता-पिता या गुरुजनों की नजरों में रखने के प्रयास में रहे इस अभ्यास से बालक या बालिका स्वयं को विभिन्न विकारों से बचा सकता/सकती है क्योंकि अकेले में रहकर ही गलत चिंतन और गलत हरकतें होती हैं जो जीवन को दुख में बना देती हैं राधा राधा