05/09/2025
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर नागरिकों के साथ भेदभाव को रोकता है और राज्य को महिलाओं, बच्चों, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों,अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए विशेष प्रावधान करने का अधिकार देता है, जिसमें आरक्षण शामिल है. यह अनुच्छेद सार्वजनिक स्थानों और सुविधाओं तक समान पहुंच की गारंटी देता है और सकारात्मक कार्रवाई की भी अनुमति देता है.
मुख्य बिंदु:
भेदभाव का निषेध (अनुच्छेद 15(1)):
राज्य किसी भी नागरिक के साथ धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता है.
समान पहुँच (अनुच्छेद 15(2)):
नागरिकों को दुकानों, सार्वजनिक रेस्तरां, होटलों, मनोरंजन के स्थानों, सड़कों और सार्वजनिक जल सुविधाओं तक पहुँचने से नहीं रोका जा सकता.
महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान (अनुच्छेद 15(3)):
राज्य महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष कल्याणकारी और सुरक्षात्मक उपाय कर सकता है.
सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए प्रावधान (अनुच्छेद 15(4)):
राज्य सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए विशेष प्रावधान कर सकता है.
सकारात्मक कार्रवाई:
यह अनुच्छेद सकारात्मक कार्रवाई या आरक्षण की अनुमति देता है, जो सामाजिक रूप से वंचित वर्गों को ऊपर उठाने के लिए है.
आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण:
हालिया संशोधनों ने शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए आरक्षण का भी प्रावधान किया है.