Maa Kamakhya Tantra Jyotish Guha Vigyan Anusandhan Kendra Gwalior

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Maa Kamakhya Tantra Jyotish Guha Vigyan Anusandhan Kendra Gwalior Astrology and Vedic Ritual are Our Seven Generation Old Tradition. Me and my entire family is keepin

नील गगन की ओट में जब अमावस्या की काली छाया ब्रह्मांड को अपने अंक में भर लेती है, तब श्मशान के सन्नाटे और बहती हुई अंतःसल...
06/04/2026

नील गगन की ओट में जब अमावस्या की काली छाया ब्रह्मांड को अपने अंक में भर लेती है, तब श्मशान के सन्नाटे और बहती हुई अंतःसलिला के तट पर "सीर-हली" का विधान जाग्रत होता है। यह केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि महाशक्ति तारा के उस स्वरूप की आराधना है जहाँ वे 'तारिणी' बनकर साधक को भवसागर से पार उतारती हैं, किंतु इस मार्ग की देहली पर पग रखना साक्षात मृत्यु के आलिंगन जैसा है। तंत्र के गुप्त गलियारों में ऐसी मान्यता है कि जब साधक अपने रक्त की शुद्धि और मन की एकाग्रता के साथ माँ तारा के नील विग्रह का ध्यान करता है, तब उसके भीतर से एक सूक्ष्म 'सीर' अर्थात दिव्य हल रेखा निकलती है जो इस लोक और परलोक के मध्य की अदृश्य दीवार को चीर देती है। इस साधना के माध्यम से जब प्रेतात्माओं और उच्च लोकों की सत्ताओं का आह्वान होता है, तो वे भगवती तारा की आज्ञा से बँधकर साधक के सम्मुख उपस्थित होने को विवश हो जाती हैं।
किंतु इस वार्तालाप की शक्ति का गुप्त रहना ही इसकी मर्यादा है, क्योंकि यदि विवेकहीन साधक ने अपनी तृष्णा के वशीभूत होकर इन शक्तियों को सांसारिक स्वार्थों की पूर्ति का माध्यम बनाया, तो माँ तारा का उग्र 'एकजटा' स्वरूप तत्काल प्रकट होकर साधक के मानसिक संतुलन का हरण कर लेता है। यह साधना एक दोधारी तलवार है जहाँ सूक्ष्म जगत की आत्माएं केवल उस साधक के वश में रहती हैं जिसकी आत्मा स्वयं तारा के करुणा भाव में विलीन हो चुकी हो। जो साधक अपनी इंद्रियों पर विजय पाकर इस साधना की गहराई में उतरता है, उसे न केवल मृत आत्माओं का ज्ञान प्राप्त होता है, बल्कि वह ब्रह्मांड के उन रहस्यों को भी सुन पाता है जो सामान्य कर्णों के लिए वर्जित हैं। यही कारण है कि सदियों से सिद्ध पुरुषों ने इसे अति गोपनीय रखा, ताकि केवल वह अधिकारी शिष्य ही इस पथ पर चले जिसने अपनी वासनाओं को तारा के चरणों में समर्पित कर दिया हो, अन्यथा इस मार्ग का अनिष्ट साधक को लोक और परलोक दोनों में कहीं का नहीं छोड़ता।

नाग का तांत्रिक महत्व भारतीय आध्यात्म और तंत्र शास्त्र में अत्यंत प्राचीन और गहरा माना गया है। नाग केवल एक सरीसृप नहीं ह...
01/12/2025

नाग का तांत्रिक महत्व भारतीय आध्यात्म और तंत्र शास्त्र में अत्यंत प्राचीन और गहरा माना गया है। नाग केवल एक सरीसृप नहीं हैं, बल्कि ये कुंडलिनी शक्ति का साक्षात प्रतीक हैं, जो कि प्रत्येक मनुष्य के मूलाधार चक्र में साढ़े तीन फेरे लगाकर सोई हुई अवस्था में रहती है। तांत्रिक साधना का मुख्य उद्देश्य इसी कुंडलित शक्ति रूपी नाग को जागृत करना और उसे सहस्रार चक्र तक पहुंचाना होता है, जिससे साधक को परम ज्ञान (आत्मज्ञान) की प्राप्ति होती है।
​तांत्रिक विधानों में नाग को पृथ्वी तत्व और स्थिरता का प्रतिनिधित्व करने वाला भी माना जाता है।तंत्र विद्या में नाग देवताओं, विशेषकर नागिनियों, की साधना दुर्लभ सिद्धियों और गुप्त शक्तियों को प्राप्त करने के लिए भी की जाती है। इस प्रकार, नाग तांत्रिकों के लिए भय, विष और मृत्यु को पार करके अमरत्व और आध्यात्मिक जागृति प्राप्त करने का एक शक्तिशाली मार्गदर्शक हैं।

07/11/2025

06/11/2025

भैरव और भैरवी तंत्र: शिव और शक्ति का समन्वय
तंत्र एक गहन आध्यात्मिक परंपरा है जो सृष्टि के दो मूल सिद्धांतों, भगवान शिव और उनकी दिव्य शक्ति देवी के समन्वय पर आधारित है। यह जीवन की सफलता (भुक्ति) और परम मुक्ति (मोक्ष) दोनों का मार्ग दिखाता है।
भैरव तंत्र मुख्य रूप से शिव के रौद्र रूप, भैरव, की उपासना पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य कठोर साधना, विशिष्ट ध्यान, और शक्तिशाली मंत्रों के अभ्यास के माध्यम से साधक को भय, द्वैत और सभी बंधनों से मुक्त कर आध्यात्मिक ज्ञान और परम मुक्ति दिलाना है।
इसके समानांतर, भैरवी तंत्र देवी की शक्ति पर केंद्रित है। यह तंत्र दस महाविद्याओं में से एक, देवी भैरवी की पूजा करता है। भैरवी तंत्र शक्ति उपासना, कुंडलिनी जागरण और आंतरिक ऊर्जा के उत्थान पर विशेष बल देता है। इसका लक्ष्य आत्म-नियंत्रण, आंतरिक शक्ति की प्राप्ति, और समस्त बंधनों को काटकर साधक को मुक्ति की ओर ले जाना है।
संक्षेप में, ये दोनों तंत्र, तांत्रिक कर्मकांडों और योगिक क्रियाओं का उपयोग करते हुए, पुरुष सिद्धांत (भैरव) और स्त्री सिद्धांत (भैरवी) के संतुलन को साधते हैं। इन गूढ़ और शक्तिशाली मार्गों पर हमेशा एक योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही चलना अनिवार्य माना गया है।

अहं राष्ट्री संगमनी वसूनां चिकितुषी प्रथमा यज्ञियानाम्।तां मा देवा व्यदधुः पुरुत्रा भूरिस्थात्रां भूर्यावेशयन्तीम्
05/11/2025

अहं राष्ट्री संगमनी वसूनां चिकितुषी प्रथमा यज्ञियानाम्।
तां मा देवा व्यदधुः पुरुत्रा भूरिस्थात्रां भूर्यावेशयन्तीम्

27/10/2025

वार्ताली देवी सिद्ध धर्म की एक पूजनीय देवी हैं, जिन्हें मन और भावनाओं की देवी माना जाता है, और उनकी साधना से भूत, भविष्य और वर्तमान जानने की शक्ति मिलती है। वह कमल पर मुस्कुराते हुए शांत और सुंदर रूप में चित्रित हैं, और उन्हें विभिन्न रंगों जैसे पीला, नीला और गहरा नीला (निर्गुण रूप) से दर्शाया गया है। यह एक दुर्लभ तांत्रिक साधना है, जिसके माध्यम से साधक जीवन के हर पहलू में सफलता, धन, और मानसिक अंतर्दृष्टि प्राप्त कर सकता है। इनके विभिन्न रूप हैं, जिनमें पीत वार्ताली और नील वार्ताली (गहरा नीला रंग) मुख्य हैं। जीवन के हर पहलू में सफलता प्रदान करती हैं। मन और भावनाओं की देवी होने के कारण अंतर्दृष्टि और अंतर्ज्ञान प्रदान करती हैं। साधकों को भूत, भविष्य और वर्तमान की जानकारी प्राप्त करने में मदद करती हैं। दुःख और दरिद्रता का नाश होता है।

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