Imams council of Gwalior

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22/02/2026

📈📄एनुअल रिपोर्ट📊📑

Assalamualaikum Warahmatullah

आप मदरसा निज़ामिया (अल्लामा फ़ाउंडेशन) को पिछले पाँच सालों से अपनी मुहब्बतों से नवाज़ते आ रहे हैं। अल्हम्दुलिल्लाह! आपकी दुआओं की बदौलत हम पूरी कोशिश के साथ दीन व मिल्लत की ख़िदमत अंजाम दे पा रहे हैं।

काफ़ी अरसे से ग्वालियर में एक ऐसे मॉडर्न मदरसे की शदीद ज़रूरत महसूस की जा रही थी, जहाँ तलबा हिफ़्ज़, क़िरात के साथ-साथ मॉडर्न एजुकेशन भी हासिल कर सकें, और उनके क़ियाम व तआम का भी बेहतरीन इंतज़ाम हो।

अल्हम्दुलिल्लाह मदरसा तामीर चुका है। लिहाज़ा, इस साल बादे रमज़ान मदरसा निज़ामिया में हॉस्टल का भी मुकम्मल इंतज़ाम किया जा रहा है। यानी तलबा के रहने, खाने और तालीम के लिए एक मुनासिब और बेहतर माहौल फ़राहम किया जाएगा। इसके लिए हम तमाम अहले - ख़ैर हज़रात से तआवुन की अपील करते हैं।

मोहसिन ख़ान क़ादरी ग्वालियरी
+91 7388419856
बानी :- मदरसा निजामिया, ग्वालियर
डायरेक्टर :- अल्लामा फाउंडेशन, ग्वालियर

शहर काज़ी अब्दुल अज़ीज़ क़ादरी,ग्वालियर के द्वारा शहर की विभिन्न ईदगाहों एवं मस्जिदों में ईद उल फ़ितर की होने वाली नमाज़ की ...
30/03/2025

शहर काज़ी अब्दुल अज़ीज़ क़ादरी,ग्वालियर के द्वारा शहर की विभिन्न ईदगाहों एवं मस्जिदों में ईद उल फ़ितर की होने वाली नमाज़ की समय सूची जारी।

01/03/2025

आलम ए इस्लाम को रमज़ान की पुरख़ुलूस मुबारकबाद ❤️

09/02/2025

मुसलमानों को इन दो मूवमेंट पर काम करने की सख़्त जरूरत है।

पहला:- इमामों को अच्छा नजराना यानी कम से कम
20,000 ₹ साथ ही (सम्मानपूर्वक) खाना, रहना

दूसरा :- शादियां मस्जिद में हों।

17/01/2025

तुम सब एक इंसान की औलाद हो और तुम में से ज़्यादा बेहतर वो है जिसे अल्लाह का ज़्यादा खौफ हो।

13/01/2025

🥹🥹🥹

07/01/2025

अल फातिहा

उर्स ग़रीब नवाज़ के मौके पर अपने घरों, दुकानों पर फातिहा ख्वानी का एहतिमाम ज़रूर करे।

हज़रत ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह, जिन्हें ख़्वाजा गरीब नवाज़ के लक़ब से नवाज़ा गया, हिंदुस्तान के सबसे बड...
06/01/2025

हज़रत ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह, जिन्हें ख़्वाजा गरीब नवाज़ के लक़ब से नवाज़ा गया, हिंदुस्तान के सबसे बड़े सूफ़ी बुज़ुर्गों में से एक हैं। आप सिलसिला-ए-चिश्तिया के रौशन चराग़ हैं। आपने 12वीं सदी में अजमेर शरीफ़ को अपना का मरकज़ बनाया।

आपने इंसानियत, मोहब्बत और बराबरी का दर्स दिया। आपकी शख्सियत की ख़ास बात यह थी कि आप हर तबक़े के लोगों से मोहब्बत और नेक सुलूक फरमाते थे। मजबूरों और बेबसों की मदद आपकी ज़िंदगी का अहम हिस्सा थी, और यही वजह है कि आपको "गरीब नवाज़" कहा गया।

आज आपकी दरगाह अजमेर शरीफ़ में एक ऐसा मुक़द्दस मक़ाम है, जहां हर मज़हब, मिल्लत और ज़बान के लोग शिद्दत-ए-अक़ीदत से हाज़िरी देते हैं। आपका पैग़ाम आज भी पूरी दुनिया को अमन और भाईचारे का सबक़ देता है।

तुम जैसे गए वैसे भी जाता नहीं कोई :हज़रत सय्यद अफ़ज़ल मियां बरकाती (आईपीएस, साबिक़ एडीजी भोपाल) के जवानसाल साहबज़ादे, हज...
20/11/2024

तुम जैसे गए वैसे भी जाता नहीं कोई :

हज़रत सय्यद अफ़ज़ल मियां बरकाती (आईपीएस, साबिक़ एडीजी भोपाल) के जवानसाल साहबज़ादे, हज़रत सय्यद बरकात हैदर (नायब तहसीलदार, ग्वालियर, म.प्र.) आज सुबह अलीगढ़ में हरकत-ए-क़ल्ब बंद हो जाने के सबब इंतक़ाल फरमा गए।
انا للہ وانا الیہ رجعون

बरकात मियां, हज़रत अमीन-ए-मिल्लत सय्यद अमीन मियां क़ादरी (सज्जादानशीन, खानकाह बरकातिया, साबिक़ प्रोफ़ेसर व सदर शोबा-ए-उर्दू, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी), रफ़ीक़-ए-मिल्लत सय्यद नजीब हैदर मियां बरकाती (सज्जादानशीन, खानकाह बरकातिया), और शरफ़-ए-मिल्लत सय्यद अशरफ मियां बरकाती (साबिक़ चीफ़ इनकम टैक्स कमिश्नर) के भतीजे थे।

बरकात मियां की पैदाइश 10 सितंबर 1995 को मारहरा शरीफ़ में हुई। इब्तिदाई तालीम खानकाह बरकातिया से हासिल करने के बाद 'अल-बरकात पब्लिक स्कूल, अलीगढ़' में दाख़िला लिया। इसके बाद भोपाल के IEHE, नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी और जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली से आला तालीम हासिल की।

2018 में 'काउंसिल टू सिक्योर जस्टिस' से वाबस्ता हुए। इसी दौरान 16 दिसंबर 2020 को उनके वालिद सय्यद अफ़ज़ल मियां बरकाती (उस वक्त के एडीजी, भोपाल) इंतक़ाल फरमा गए।
दिसंबर 2021 में बरकात मियां ग्वालियर, मध्य प्रदेश में नायब तहसीलदार के ओहदा पर फ़ाइज हुए। इसी के साथ एग्ज़ीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ऑफ़िसर भी हुए।

अभी उनकी मुलाज़मत के तीन साल भी पूरे नहीं हुए थे कि अचानक दाग़-ए-मुफ़ारकत दे गए।

बरकात मियां इंतिहाई मुश्फ़िक़ और मुनकसिरुल मिज़ाज शख़्सियत के मालिक थे। बचपन से ही बेहद ज़हीन-ओ-फ़तीन, सरगर्म और मुतहर्रिक थे। क़ौम को उनसे बहुत सी उम्मीदें वाबस्ता थीं, लेकिन उनके चले जाने से उन उम्मीदों की रोशनी मद्धम हो गई।

चार साल पहले उनके वालिद के इंतक़ाल का ज़ख़्म अभी भरा भी नहीं था कि अब सय्यद बरकात मियां भी हमसे बिछड़ गए। उनके इंतक़ाल से खानकाह बरकातिया, मारहरा शरीफ़ के दर-ओ-दीवार अश्कबार हैं।

हज़रत अमीन-ए-मिल्लत, रफ़ीक़-ए-मिल्लत, शरफ़-ए-मिल्लत और अहल-ए-खानदान व मुरीदीन के इस ग़म को अल्फ़ाज़ में बयां करना मुश्किल है। इमाम कॉन्सिल ऑफ ग्वालियर मरहूम के अहले खाना से ताज़ियत का इज़हार करते हैं।

"जाने वाला तो रहेगा बरसों,
दिल के करीब, आंख से ओझल।"

दुआ है कि अल्लाह तआला अपने हबीब-ए-पाक (ﷺ) के सदक़े में सय्यद बरकात मियां की बेमिसाल मग़फ़िरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए और उनके अहल-ए-खानदान, मुरीदीन और चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

शरीक-ए-ग़म:
इमाम कॉन्सिल ऑफ ग्वालियर
20 नवंबर 2024

ऐसा भी होता है क्या ? मस्ज़िद कमिटी के मेंबर भी हो और बे नमाज़ी भी ?😥 पंज वक्ता नमाज़ी ही को मस्जिद कमेटी में होना चाहिए।
01/11/2024

ऐसा भी होता है क्या ? मस्ज़िद कमिटी के मेंबर भी हो और बे नमाज़ी भी ?😥 पंज वक्ता नमाज़ी ही को मस्जिद कमेटी में होना चाहिए।

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