20/11/2024
तुम जैसे गए वैसे भी जाता नहीं कोई :
हज़रत सय्यद अफ़ज़ल मियां बरकाती (आईपीएस, साबिक़ एडीजी भोपाल) के जवानसाल साहबज़ादे, हज़रत सय्यद बरकात हैदर (नायब तहसीलदार, ग्वालियर, म.प्र.) आज सुबह अलीगढ़ में हरकत-ए-क़ल्ब बंद हो जाने के सबब इंतक़ाल फरमा गए।
انا للہ وانا الیہ رجعون
बरकात मियां, हज़रत अमीन-ए-मिल्लत सय्यद अमीन मियां क़ादरी (सज्जादानशीन, खानकाह बरकातिया, साबिक़ प्रोफ़ेसर व सदर शोबा-ए-उर्दू, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी), रफ़ीक़-ए-मिल्लत सय्यद नजीब हैदर मियां बरकाती (सज्जादानशीन, खानकाह बरकातिया), और शरफ़-ए-मिल्लत सय्यद अशरफ मियां बरकाती (साबिक़ चीफ़ इनकम टैक्स कमिश्नर) के भतीजे थे।
बरकात मियां की पैदाइश 10 सितंबर 1995 को मारहरा शरीफ़ में हुई। इब्तिदाई तालीम खानकाह बरकातिया से हासिल करने के बाद 'अल-बरकात पब्लिक स्कूल, अलीगढ़' में दाख़िला लिया। इसके बाद भोपाल के IEHE, नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी और जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली से आला तालीम हासिल की।
2018 में 'काउंसिल टू सिक्योर जस्टिस' से वाबस्ता हुए। इसी दौरान 16 दिसंबर 2020 को उनके वालिद सय्यद अफ़ज़ल मियां बरकाती (उस वक्त के एडीजी, भोपाल) इंतक़ाल फरमा गए।
दिसंबर 2021 में बरकात मियां ग्वालियर, मध्य प्रदेश में नायब तहसीलदार के ओहदा पर फ़ाइज हुए। इसी के साथ एग्ज़ीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ऑफ़िसर भी हुए।
अभी उनकी मुलाज़मत के तीन साल भी पूरे नहीं हुए थे कि अचानक दाग़-ए-मुफ़ारकत दे गए।
बरकात मियां इंतिहाई मुश्फ़िक़ और मुनकसिरुल मिज़ाज शख़्सियत के मालिक थे। बचपन से ही बेहद ज़हीन-ओ-फ़तीन, सरगर्म और मुतहर्रिक थे। क़ौम को उनसे बहुत सी उम्मीदें वाबस्ता थीं, लेकिन उनके चले जाने से उन उम्मीदों की रोशनी मद्धम हो गई।
चार साल पहले उनके वालिद के इंतक़ाल का ज़ख़्म अभी भरा भी नहीं था कि अब सय्यद बरकात मियां भी हमसे बिछड़ गए। उनके इंतक़ाल से खानकाह बरकातिया, मारहरा शरीफ़ के दर-ओ-दीवार अश्कबार हैं।
हज़रत अमीन-ए-मिल्लत, रफ़ीक़-ए-मिल्लत, शरफ़-ए-मिल्लत और अहल-ए-खानदान व मुरीदीन के इस ग़म को अल्फ़ाज़ में बयां करना मुश्किल है। इमाम कॉन्सिल ऑफ ग्वालियर मरहूम के अहले खाना से ताज़ियत का इज़हार करते हैं।
"जाने वाला तो रहेगा बरसों,
दिल के करीब, आंख से ओझल।"
दुआ है कि अल्लाह तआला अपने हबीब-ए-पाक (ﷺ) के सदक़े में सय्यद बरकात मियां की बेमिसाल मग़फ़िरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए और उनके अहल-ए-खानदान, मुरीदीन और चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।
शरीक-ए-ग़म:
इमाम कॉन्सिल ऑफ ग्वालियर
20 नवंबर 2024