18/04/2026
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आज दिल बहुत भरा हुआ है… ❤️
सावित्रीबाई फुले पाठशाला के बच्चों का 10वीं और 12वीं का रिज़ल्ट आ गया है — और गर्व की बात यह है कि **सभी बच्चे अच्छे नंबरों से पास हुए हैं।**
लेकिन यह सिर्फ एक रिज़ल्ट नहीं है… यह उन अनगिनत संघर्षों की जीत है, जो हर बच्चे ने चुपचाप झेले हैं।
यहाँ पढ़ने वाले बच्चे ज्यादातर दलित, आदिवासी और गरीब परिवारों से आते हैं।
किसी के सिर पर पिता का साया नहीं है,
किसी की माँ मजदूरी करके घर चला रही है,
कुछ ऐसे भी बच्चे हैं जिनकी पढ़ाई शादी या मजबूरी के कारण बीच में छूट गई थी…
लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी — 2 साल बाद फिर से किताबें उठाईं।
अगर सच कहूँ, तो हर बच्चे की अपनी एक संघर्ष भरी कहानी है… और वही कहानी आज सफलता बनकर सामने आई है।
जब ये बच्चे 9वीं से 10वीं में आए थे, तब हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती थी —
**न तो हमारे पास 10वीं का शिक्षक था, न ही पर्याप्त संसाधन।**
लेकिन हमने हार नहीं मानी…
हमने बच्चों के साथ मिलकर एक योजना बनाई।
हमने “Book Self” और प्रेरणादायक फिल्में देखीं,
हमने यह तय किया कि “हमारे पास भले ही कुछ न हो… लेकिन हमारे हौसले कम नहीं हैं।”
इन बच्चों ने साबित कर दिया कि
**संसाधनों की कमी नहीं, इरादों की ताकत मायने रखती है।**
इस यात्रा में हमारे साथ खड़े रहे —
ओम राठौर और अमित राजपूत,
जिन्होंने अपनी पढ़ाई के बीच से समय निकालकर इन बच्चों को पढ़ाया।
और बच्चों ने भी…
सिर्फ पढ़ाई ही नहीं की,
बल्कि संविधान, लैंगिक समानता जैसे मुद्दों पर स्कूलों में जाकर जागरूकता का काम भी किया।
इतनी सारी जिम्मेदारियों के बीच भी —
**एक भी बच्चा असफल नहीं हुआ।**
आज मैं गर्व से उन बच्चों के नाम लेना चाहती हूँ, जिन्होंने यह इतिहास रचा —
निखिल जाटव, अजय आदिवासी, रानी आदिवासी, मानव, रोहन, नंदनी, अजय, लोकेश, रक्षा, हेमा, रागिनी…
आप सभी सिर्फ पास नहीं हुए हैं,
आपने यह साबित किया है कि
**संघर्ष कभी भी सपनों से बड़ा नहीं होता।**
आज सच में लगता है कि हम सावित्रीबाई फुले पाठशाला के उस मकसद को पूरा कर पा रहे हैं,
जिसके लिए यह छोटी सी शुरुआत की थी…
यह सिर्फ बच्चों की जीत नहीं है,
यह विश्वास की जीत है…
यह उम्मीद की जीत है… ✨
दिल से सलाम इन सभी बच्चों को…
और उन सभी को, जो इस सफर में साथ रहे।
#नींव_शिक्षा_जनकल्याण_समिति_