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(Exploring Advaita, Veganism & Climate Action 🌿)

16/03/2026

आज का बोधकार्य ~ 16/03/2026

विषय ~ The climate cost of the war machine

1️⃣ राजनीतिक लोगों में कोई भी इस विषय पर काम नहीं करता है लेकिन बातें तो लगभग कर ही देता है ऐसे ही जुमलों पर विश्वास करके हम ऐसे लोगों को सरकार में चुनते हैं , उतनी ही सच्चाई इसमें है कि हम खुद अपने देश की सैन्य ताकत को मजबूत होते देखना चाहते हैं और गर्व से खुश होते हैं परिणाम जलवायु पर पड़ता है।
2️⃣ दुनियां की सरकारें सैन्य ताकत पर जो $2.7 ट्रिलियन खर्च करती हैं , उतनी आवश्यकता वास्तव में है नहीं, ये सिर्फ मनुष्य के भीतर बैठा खोखलापन और अज्ञात भय को ढकने की कोशिश है।
3️⃣ बिल्कुल ये मनुष्य के उपभोग प्रधान जीवनशैली और सुरक्षा की मांग ही उस व्यवस्था को बनाए रखती है जो पर्यावरण के विनाश का कारण बनती है ।

16/03/2026

लोकधर्म ने उल्टे अर्थ बनाए हैं जैसे कि सीधे ही काटे जाते हैं
या उल्टी उंगली से घी निकलता है जबकि सच्चाई ये नहीं है
भोलापन स्वभाव है इसलिए शिव को भोलेनाथ कहा जाता है,
शिव ही भोलेपन के द्योतक हैं, और शिव ही अहंकार से मुक्ति के प्रतीक हैं।
किसी से अगर प्रेम करना हो तो उसे सोते हुए देख लेना , सुंदर लगेगा ।

ये तस्वीर गूगल gemini ai से निर्मित है, मैं ऐसे प्रयोग करता रहता हूं, आधुनिकता सीखते रहो... खुद को आगे बढ़ाते रहो
16/03/2026

ये तस्वीर गूगल gemini ai से निर्मित है, मैं ऐसे प्रयोग करता रहता हूं, आधुनिकता सीखते रहो... खुद को आगे बढ़ाते रहो

12/03/2026
09/03/2026
जगत के प्रति भोग का संबंध होगा, तो बंधन मिलेगा और करुणा का संबंध होगा तो मुक्ति ...
06/03/2026

जगत के प्रति भोग का संबंध होगा, तो बंधन मिलेगा और करुणा का संबंध होगा तो मुक्ति ...

अहंकार सोचता है कि मैं मरने के बाद भी रहूंगा , फिर वो कहता है कि मैं तो आत्मा हूं जो कभी नहीं मर सकता |                 ...
02/03/2026

अहंकार सोचता है कि मैं मरने के बाद भी रहूंगा , फिर वो कहता है कि मैं तो आत्मा हूं जो कभी नहीं मर सकता |
~ रोहित कुमार

आचार्य जी को सामने से सुनना यानी समय का रूक सा जाना ।कब समय बीत जाता है पता भी नहीं चलता।और जब सत्र छूटता है तो बेचैनी ह...
01/03/2026

आचार्य जी को सामने से सुनना यानी समय का रूक सा जाना ।कब समय बीत जाता है पता भी नहीं चलता।और जब सत्र छूटता है तो बेचैनी हो जाती है।हर बार कुछ न कुछ टूटता है।आचार्य जी के अर्न्तबोध की प्रखरता ऐसी है कि शब्द फूटते ही सूत्र बन जाते हैं जीवन की।और हम उन्हीं मोतियों को समेटने तो जाते हैं लेकिन उतनी ही जितना पात्र लिए गए होते हैं।फिर भी जो थोड़े-बहुत हाथ लगे वो ही जीवन बन जाए फिर तो बात ही बन जाए।
धन्यवाद 🙏

posted by Ashish Tripathi geeta community app

सच जानते हैं फिर भी झूठ में जीते हैं "गजब"
28/02/2026

सच जानते हैं फिर भी झूठ में जीते हैं "गजब"

हम हमेशा मृत्यु से मुंह मोड़ते हैं, क्योंकि अहम की चाह होती है न मरना |~ आचार्य प्रशांत
27/02/2026

हम हमेशा मृत्यु से मुंह मोड़ते हैं, क्योंकि अहम की चाह होती है न मरना |
~ आचार्य प्रशांत

तुम और कुछ नहीं, सिर्फ मिट्टी से उठे हो आखिर में इसी में समा जाओगे।     #आचार्यप्रशांत
26/02/2026

तुम और कुछ नहीं, सिर्फ मिट्टी से उठे हो आखिर में इसी में समा जाओगे।

#आचार्यप्रशांत

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