24/11/2025
देसीपन, दिल और दास्तान के उस काल का अंत,
जिसे धर्मेंद्र जी ने अपने जीवन से सजाया -
उन महान कलाकार को भावभीनी श्रद्धांजलि।
वो सुबह आज भी यादों में ताज़ा है-
हमारे अत्यंत प्रिय धर्मेंद्र जी का आया एक फोन कॉल…
और मानो पूरी टीम में नई चेतना भर गई।
सूरजकुंड मेले का व्यस्त समय था,
हर कोई अपने-अपने काम में डूबा था,
पर उनका बुलावा जैसे सारी थकान को पल में दूर ले गया।
जब हम मिलने निकले थे, मन में कई विचार थे-
पर यह बिल्कुल नहीं सोचा था कि धर्मेंद्र जी हमें
इतनी अपनायत, इतनी सहजता और इतनी उष्मा से मिलेंगे।
उनकी ऊर्जा, उनका स्नेह,
हर बात को ध्यान से सुनने और समझने की उनकी सरल उत्सुकता…
सब कुछ अद्भुत था, मन को छू लेने वाला।
वे बार-बार कहते-
“सड़क पर मत फेंको… बस इतना सा संदेश पहुँचा देना।”
यही उनका संदेश था, और यही आज भी हमारी प्रेरणा है।
हम पाँच मिनट के लिए गए थे, पर कब आधा घंटा बीत गया-
पता ही नहीं चला।
आज जब उस मुलाकात को याद करते हैं,
तो मन उसी प्रेरणा से भर उठता है।
धर्मेंद्र जी ने जिस मिट्टी की खुशबू को परदे तक पहुँचाया,
वो खुशबू हमेशा हमारे दिलों में सांस लेती रहेगी।
उनका आशीर्वाद, उनका प्रेम,
और उनकी सादगी-हमारे हर कदम में जीवित रहेंगे।
धर्मेंद्र जी को हृदय से विनम्र श्रद्धांजलि।
वे हमारे साथ थे, हैं… और हमेशा रहेंगे।