संयुक्त अहीर रेजिमेंट मोर्चा

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परम् श्रद्धेय धरती पुत्र आदरणीय नेताजी मुलायम सिंह यादव जी की पुण्यतिथि पर शत शत नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि।। #नेता_जी...
10/10/2026

परम् श्रद्धेय धरती पुत्र आदरणीय नेताजी मुलायम सिंह यादव जी की पुण्यतिथि पर शत शत नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि।।
#नेता_जी_अमर_रहे🙏🙏

शहीदों को पार्थिव शरीर को घर पहुंचाने वाले देश के पूर्व रक्षामंत्री, उ.प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पद्मविभूषण से सम्मा...
10/10/2026

शहीदों को पार्थिव शरीर को घर पहुंचाने वाले देश के पूर्व रक्षामंत्री, उ.प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पद्मविभूषण से सम्मानित नेताजी मुलायम सिंह यादव जी की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर नमन।

आपकी नीतियां सदैव हम सभी का मार्गदर्शन करेंगी।

#मुलायम_सिंह_यादव

गांधी जयंती पर विशेषमोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा गांधी का सफ़र तय कराने वाला अहीर। बद्री अहीर।वो बद्री अहीर जो दक्षिण ...
02/10/2026

गांधी जयंती पर विशेष

मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा गांधी का सफ़र तय कराने वाला अहीर। बद्री अहीर।

वो बद्री अहीर जो दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह से चंपारण सत्याग्रह तक बापू संग रहे
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दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह के दौरान एक बिहारी ने महात्मा गांधी को उस समय एक हजार पौंड का भारी भरकम दान दिया था. महात्मा गांधी की आर्थिक मदद करने वाले शख्स का नाम था बद्री अहीर. वे दक्षिण अफ्रीका में गांधी के सत्याग्रह में जेल की सजा भुगत चुके थे. महात्मा गांधी जब 1917 में चंपारण पहुंचे तो बद्री दक्षिण अफ्रीका से गांधी का साथ देने यहां भी पहुंच गये थे.

बद्री। मिस्टर पोलक नहीं थे और न चंपारण के शुक्ल जी, वह दक्षिण अफ्रीका के अब्दुल्ला की तरह कारोबारी भी नहीं थे. वह तो बिहार के अनाम सत्याग्रही थे. गांधी जब 1917 में चंपारण पहुंचे, तो बद्री अहीर भी दक्षिण अफ्रीका से बेतिया-मोतिहारी पहुंच गये. 26 जुलाई, 1917 को महात्मा गांधी और उनके साथी बेतिया गये थे. उस दिन निलहे और मोतिहारी कोठी के मालिक इरविन की गवाही हुई थी. गवाही दोपहर एक बजे तक चली. उसी दिन चार बजे की ट्रेन से महात्मा गांधी और उनके साथी बेतिया रवाना हुए.

तब के कानपुर से छपने वाले अखबार ‘प्रताप’ ने 20 अगस्त, 1917 के अपने अंक में लिखा - महात्मा गांधी के साथ श्रीयुत् बद्री अहीर भी थे, जो दक्षिण अफ्रीका की लड़ाई में उनके साथ शामिल थे.

महात्मा गांधी ने अपनी आत्मकथा में जिन महत्वपूर्ण लोगों को याद किया है, उनमें बदरी अहीर भी शामिल हैं.गांधी जी को जब अफ्रीका में निरामिषहारी गृह के लिए पैसों की जरूरत पड़ी, तो पैसों के साथ बद्री खड़े थे. उन्होंने कहा - ‘भाई, इन पैसों का क्या? मैं कुछ ना जानूं. मैं तो आपको ही जानता हूं.’ बद्री के पैसे में से गांधी ने हजार पौंड निरामिषहारी गृह के लिए ले लिये थे.

महात्मा गांधी ने बद्री को इस तरह याद किया है - यह मुवक्किल विशाल हृदय का विश्वासी था. वह पहले गिरमिट में आया था. उसका नाम बद्री था. उसने सत्याग्रह में बड़ा हिस्सा लिया था.

वह जेल भी भुगत आया था.महात्मा गांधी ने अपनी आत्मकथा में बदरी की चर्चा चरित्रवान हिंदुस्तानी के रूप में की है. इन लोगों ने अपने दुखों को मिटाने के लिए स्वतंत्र व्यापारी वर्ग के मंडल से भिन्न एक मंडल की स्थापना की थी. उनमें कुछ बहुत शुद्ध हृदय के उदार भावना वाले हिंदुस्तानी थे. उनमें से प्रायः बिहार-यूपी जैसे प्रदेशों से और दक्षिण के तमिल, तेलगु प्रदेश से इकरारनामों के अनुसार आये थे.

महात्मा गांधी ने लिखा है - बद्री से मेरा बहुत परिचय हो गया था. उन्होंने सत्याग्रह में सबसे आगे रह कर हिस्सा लिया. उन्होंने एक अतिशय प्रिय नाम खोज लिया था. वे मुझे ‘भाई’ कह कर पुकारने लगे. दक्षिण अफ्रीका में अंत तक मेरा यही नाम रहा. जब ये गिरमिट मुक्त हिंदुस्तानी मुझे भाई कहकर पुकारते थे, तब मुझे उसमें खास मिठास की अनुभूति होती थी.

चंपारण के एसपी ने बद्री अहीर के बारे में शाहाबाद के एसपी को लिखा - हेतमपुर का बद्री अहीर, थाना जगदीशपुर, जिला शाहाबाद (अब भोजपुर) वह दक्षिण अफ्रीका में गांधी के साथ था. अभी (चंपारण) आया है। सरकार यह जानना चाहती थी कि बदरी की पारिवारिक पृष्ठभूमि कैसी थी.



कहां गया वो बिहार का जमा घटिया मंत्री और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की जात वाला भगवान सिंह कुशवाहा जो यादवों को बदमाश, माफ...
30/09/2026

कहां गया वो बिहार का जमा घटिया मंत्री और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की जात वाला भगवान सिंह कुशवाहा जो यादवों को बदमाश, माफिया, लुटेरा, लुच्चा, लफंगा बोल रहा था।

ये देख कैसे देश सेवा में शहीद हुए 3 वीर अहीरों की लाश मिली है 45 दिनों बाद। अब तू बता तेरी जात ने भारत के लिए कितनी कुर्बानी दी है??कितने भर्ती है फौज में ,कितने गैलेंट्री मेडल हासिल किये, कितने बैटल हॉनर , थिएटर हॉनर जीते जंग के मैदान में???

हर हफ्ते देश सेवा में एक अहीर शहीद हो जाता है। तू क्या ही है यादवों के इतिहास के सामने?

अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली में 14 अगस्त 2026 को आई अचानक बाढ़ के दौरान देश की सेवा में तैनात तीन वीर अग्निवीर जवान—आदित्य कुमार यादव, विनोद यादव और कुंदन कुमार यादव लापता हो गए थे।

लंबी तलाश और डीएनए जांच के बाद इन वीर सपूतों की पहचान हुई। देश की रक्षा और सेवा करते हुए इन जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

वीर अग्निवीर जवान आदित्य कुमार यादव — वैशाली, बिहार के सैदपुर रजौली गांव के निवासी थे।
वीर अग्निवीर विनोद यादव — औरैया, उत्तर प्रदेश के सराय अमिलिया गांव के निवासी थे।
वीर अग्निवीर कुंदन कुमार यादव — भोजपुर, बिहार के जनेसरा गांव के निवासी थे।

इन वीर जवानों की शहादत ने परिवारों को गहरा दुःख दिया, लेकिन पूरे देश को उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान पर गर्व है।

मातृभूमि की सेवा में जीवन समर्पित करने वाले इन तीनों वीर अहीर सपूतों को कोटि-कोटि नमन।
आपका बलिदान सदैव याद रखा जाएगा।

भारत माता के वीर सपूत अमर रहें।
जय हिंद | जय जवान


उत्तरप्रदेश के राेहित यादव ने एशियन गेम्स में 84.35 मीटर जेवलिन थ्रो मे जीता ब्रोंज मैडल, देश के खाते में आया एक ओर पदक ...
29/09/2026

उत्तरप्रदेश के राेहित यादव ने एशियन गेम्स में 84.35 मीटर जेवलिन थ्रो मे जीता ब्रोंज मैडल, देश के खाते में आया एक ओर पदक

बधाई व शुभकामनाएं

26/09/2026

🔥 Rao Tularam Ateli Half Marathon 🔥

The race is getting closer… and the excitement is building! 🏃‍♂️🏃‍♀️

*Race : Sunday 5am, 27th September*
Venue : Om Marriage Palace & Resorts, Ateli (Mahendergarh)

1857 की क्रांति के महानायक अमर वीर शहीद राज नायक राव तुलाराम जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि कोटि नमन
23/09/2026

1857 की क्रांति के महानायक अमर वीर शहीद राज नायक राव तुलाराम जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि कोटि नमन

राजा राव तुलाराम अमर रहे।राव तुलाराम जी के शहीदी दिवस पर विशेष श्रद्धांजलि भाईयो आज का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्ष...
23/09/2026

राजा राव तुलाराम अमर रहे।

राव तुलाराम जी के शहीदी दिवस पर विशेष श्रद्धांजलि

भाईयो आज का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। आज हम उस महान योद्धा, उस वीर सपूत की 200वीं जयंती मना रहे हैं, जिसने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। हम बात कर रहे हैं भारत के शेर, रेवाड़ी के राजा, महान स्वतंत्रता सेनानी राव तुलाराम जी की।

🚩 आरंभिक जीवन और सत्ता का दायित्व
राव तुलाराम जी का जन्म रेवाड़ी राज परिवार में हुआ था, लेकिन उनका जीवन फूलों की सेज नहीं, बल्कि काँटों का ताज था। नियति ने बहुत छोटी उम्र में ही उनके कंधों पर राज सिंहासन का भार डाल दिया। पिता की मृत्यु के बाद, एक किशोर बालक ने जिस परिपक्वता और साहस के साथ सत्ता संभाली, उसने यह सिद्ध कर दिया था कि यह बालक आगे चलकर इतिहास रचेगा। उनमें बचपन से ही नेतृत्व के गुण और देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी थी।

⚔️ अंग्रेजों के खिलाफ सुनियोजित विद्रोह का शंखनाद
1857 की क्रांति केवल एक तात्कालिक आक्रोश का परिणाम नहीं थी, बल्कि कई जगहों पर यह एक सुनियोजित रणनीति थी, और राव तुलाराम इसके प्रमुख सूत्रधारों में से एक थे। वे अंग्रेजों की विस्तारवादी और शोषणकारी नीतियों को भली-भांति समझते थे। उन्होंने चुपचाप अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाई, हथियार जुटाए और जनता को एकजुट किया। जैसे ही क्रांति का बिगुल बजा, राव तुलाराम ने रेवाड़ी क्षेत्र से अंग्रेजी शासन को उखाड़ फेंका और खुद को स्वतंत्र घोषित कर दिया। उनकी संगठनात्मक क्षमता अद्भुत थी।

🔥 नसीबपुर का ऐतिहासिक युद्ध:

1857 की सबसे भीषण लड़ाई।इतिहास गवाह है कि 16 नवंबर 1857 को नारनौल के पास नसीबपुर के मैदान में जो युद्ध हुआ, वह प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की और अविभाजित भारत की सबसे बड़ी और सबसे खूनी लड़ाइयों में से एक था। यह कोई छोटी-मोटी झड़प नहीं थी, बल्कि एक महायुद्ध था।

राव तुलाराम और उनके भाई गोपाल देव के नेतृत्व में लगभग 5000 वीरों ने अंग्रेजों और उनके सहयोगियों की विशाल और आधुनिक सेना का सामना किया। नसीबपुर की धरती उस दिन वीरों के रक्त से लाल हो गई थी। राव तुलाराम की सेना ने अदम्य साहस का परिचय दिया। अंग्रेजी कमांडर भी उनकी वीरता देखकर दंग रह गए थे। भले ही संसाधनों की कमी के कारण इस युद्ध का परिणाम अपेक्षित नहीं रहा, लेकिन इस युद्ध ने अंग्रेजों की कमर तोड़ दी थी और यह साबित कर दिया था कि भारतीय वीर अपनी मिट्टी के लिए किस हद तक जा सकते हैं।

।। संघर्ष की निरंतरता और मातृभूमि के लिए अंतिम सांस तक प्रयास ।।

नसीबपुर के युद्ध के बाद भी राव तुलाराम का मनोबल नहीं टूटा। वे जानते थे कि यह संघर्ष लंबा चलेगा। वे भूमिगत हो गए और देश के अन्य हिस्सों, विशेषकर राजस्थान में जाकर, तात्या टोपे और अन्य क्रांतिकारी नेताओं के साथ मिलकर संघर्ष जारी रखा। उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

जब उन्हें लगा कि देश के भीतर से अंग्रेजों को हराना मुश्किल हो रहा है, तो उन्होंने एक दूरदर्शी कदम उठाया। वे विदेशी सैन्य सहायता प्राप्त करने के लिए एक कठिन और जोखिम भरी यात्रा पर निकल पड़े। रूस के जार से मिलने की कोशिश में वे ईरान गए और फिर अफगानिस्तान के शासकों से मदद की गुहार लगाई। उनका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग से भारत को आजाद कराना था।

देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए विदेश से सैन्य सहायता का प्रयास करने वाले वो अविभाजित भारत के प्रथम राजदूत थे, उनके बाद ऐसा दूसरा व्यक्ति नेता जी सुभाष चंद्र बोस थे।

दुर्भाग्यवश, काबुल (अफगानिस्तान) में लगभग 38 वर्ष की छोटी उम्र में आज ही के दिन यानी कि 23 सितंबर 1863 को, मातृभूमि की आजादी का सपना अपनी आँखों में लिए, यह महान योद्धा हमेशा के लिए सो गया। वे अपनी मातृभूमि पर वापस नहीं लौट सके, लेकिन उनकी शहादत ने स्वतंत्रता की जो अलख जगाई, वह कभी नहीं बुझी। काबुल में वहां के रहा शेर अली खान के शाही फरमान अनुसार उनके अंतिम संस्कार के दिन पूरे काबुल बाजार को बंद रखा गया, फौज़ द्वारा शाही अंदाज में इनको गर्जती तोपो के द्वारा सलामी दी गई, अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए जिसकी भीड़ लगभग 2 किलोमीटर की दूरी तक फैली हुई थी। अंतिम यात्रा की अगुवाई अफगान राजा के दोनों बेटे और राव तुलाराम के अंतर्राष्ट्रीय मिशन में लगातार उनके साथ रहे 6 भारतीय सहयोगी कर रहे थे। उनका अंतिम संस्कार श्मशान खत्रियां जो पेशावर रोड पर था वहां किया गया।

25 नवंबर 1863 को अंग्रेजों की नजरों से बचाकर काबुल से उनके सहयोगियों द्वारा लाई गई राव तुलाराम की राख को त्रिवेणी संगम इलाहाबाद(प्रयागराज) में गंगा में अर्पित किया गया।

🙏 नमन है ऐसे वीर को 🙏

आज, इनके शहीदी, आइए हम उस महापराक्रमी राजा राव तुलाराम को नमन करें। उनका जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, अगर हौसला बुलंद हो तो बड़ी से बड़ी ताकतों से भी टकराया जा सकता है।

उनका त्याग, उनका बलिदान और उनकी वीरता आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।

जय हिन्द! जय भारत! राव तुलाराम अमर रहें! 🇮🇳




दिल्ली विश्वविद्यालय के 6 कॉलेजों में यादव बने अध्यक्ष।सभी विजेता यादवों को बहुत-बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ!
21/09/2026

दिल्ली विश्वविद्यालय के 6 कॉलेजों में यादव बने अध्यक्ष।
सभी विजेता यादवों को बहुत-बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ!


19/09/2026

जब जब ABVP डरती है पुलिस को आगे करती है।

दिल्ली विश्वविद्यालय चुनाव में ज्वाइंट सेक्रेटरी की लड़ाई में जो 20 नंबरी तरीके विशेष यादव को हराकर ABVP के तुच्छ कैंडिडेट को जिताया गया उसके खिलाफ धरने पर बैठे भाई विशेष यादव और उनके समर्थकों को अब दिल्ली पुलिस जबरदस्ती धरने से हटा रही है। लेकिन लोग अब भी डटे हुए है।



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