19/07/2026
यूपी पुलिस दारोगा भर्ती 2026 परिणाम:
450+ यादवों का चयन
यादवों की योग्यता और विरोधियों के प्रोपेगेंडा का पर्दाफाश!**
दोस्तो पिछले कई सालों से एक सुनियोजित और बेशर्म प्रोपेगेंडा के तहत यादव समाज को विलेन बनाने की कोशिश की जा रही है। सत्तादल और उसकी सहयोगी पार्टियों के आईटी सेल ने यह झूठ फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि यादवों को नौकरियां सिर्फ 'पर्ची' सिस्टम या समाजवादी पार्टी की सरकार होने की वजह से मिलती थीं, या फिर यादव OBC वर्ग में 'दूसरों का हिस्सा खा रहे हैं'।
लेकिन यूपी पुलिस दारोगा भर्ती 2026 के नतीजे ने इन सभी झूठे आरोपों के मुंह पर एक करारा तमाचा हैं। आंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते, आइए तथ्यों के आइने में इस ओछी राजनीति की सच्चाई देखते हैं:
**आंकड़ों पर एक नज़र:**
अनारक्षित और आरक्षित मिलाकर कुल सीटें 4242 जिसमें से लिस्ट में यादव उपनाम वाले 388 कैंडिडेट है ,अब ये हम सब को मालूम है कि यूपी में भी सभी यादव अपने नाम के पीछे यादव नहीं लगाते कुछ लोग सिंह, कुमार उपनाम लगाते है या कुछ कोई उपनाम ही नहीं लगाते। ऐसे कैंडिडेट यूपी में बड़े आराम से 20% से 35% के बीच में होते है लेकिन हम निम्न स्तर पर 20% ही और जोड़ ले तो कुल चयनित यादवों की संख्या 465 हो जाती है। इस तरह देखा जाए तो लगभग 11% यादव चयनित होये है।
आपको बताते चले कि यूपी में यादवों की कुल आबादी लगभग 10-11% ही है।
अब थोड़ा और बारीकी से जानकारी निकालते है। ये तो आप सबको पता होगा की यादवों को भर्ती में अनारक्षित वर्ग और OBC वर्ग में ही मुकाबला करने का मौका मिलता है। इन दोनों वर्ग में कुल सीटों की संख्या 2848 है ,मतलब की यादवों के लिए सिर्फ 2848 सीटो पे ही मुकाबला करने का मौका था
अनारक्षित (General) सीटें:1705 में से 230 पर यादव चयनित (13.50%)
OBC सीटें:1143 में से 235 पर यादव चयनित (20.58%)
कुल चयन: 2848 में से 465 पर यादव चयनित (16.32%)
इन आंकड़ों को देखकर क्या आपको लगता है? क्या यादव विरोधियो को लगता है कि यादव सबका हिस्सा खा रहे है जैसे की IT CELL और कुछ मंदबुद्धि नेता जैसे ओम प्रकाश राजभर, संजय कुमार निषाद, पूजा पाल, पल्लवी पटेल आरोप लगाते और जातिय नफ़रत के बीज बोते है।
झूठ नंबर 1: "यादव OBC में दूसरों का हिस्सा खा रहे हैं"
सच्चाई:यह सबसे बड़ा और सफेद झूठ है। यूपी की कुल OBC आबादी में यादवों की हिस्सेदारी लगभग 20% है। वे प्रदेश में OBC वर्ग की सबसे बड़ी जाति हैं।अब SI के नतीजे देखिए—OBC के लिए आरक्षित 1143 सीटों में से यादवों को 235 सीटें मिली हैं, जो कि 20.58% है।
सवाल यह है की जब OBC वर्ग के भीतर यादवों की आबादी ही 20% है और उनका चयन 20.58% हुआ है, तो यादव किसी और का हिस्सा कहाँ से खा रहे हैं? जितनी आबादी है लगभग उतनी ही प्रतिशत भर्ती हो रहे है।
झूठ नंबर 2: "सपा सरकार में पर्ची से नाम जुड़ते थे"
सच्चाई:आज उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार नहीं है। आज कोई 'पर्ची' नहीं चल रही है और न ही कोई सिफारिश काम आ रही है। फिर भी सामान्य (General/UR) वर्ग की 1705 सीटों में से 230 (13.50%)सीटों पर यादव युवाओं ने विशुद्ध मेरिट (Merit) के दम पर अपनी जगह बनाई है। यह 13.50% का आंकड़ा यूपी में यादवों की कुल आबादी (11%) से भी ज्यादा है।यह साबित करता है कि यादव समाज के युवा आरक्षण के मोहताज नहीं हैं; वे ओपन कॉम्पिटिशन में जनरल सीटों पर भी अपनी योग्यता का लोहा मनवा रहे हैं। यूपी का जातिवाद मुख्यमंत्री आदित्य सिंह बिष्ट और उनके सहयोगी यादवों से नफ़रत के कारण जो 10 साल से यादवों पर पर्ची और सैफई की लिस्ट का झूंठा आरोप लगाते थे उन सबके मुंह पर जोरदार थप्पड़ लगा है।
**निष्कर्ष:**
यह डेटा उन राजनीतिक दलों और नफरती तत्वों के लिए एक सीधा और कड़वा जवाब है जो अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए एक पूरे समाज को बदनाम करते हैं। यादव समाज के युवाओं ने अपनी मेहनत, पसीने और लगन से यह मुकाम हासिल किया है।जो लोग बेशर्मी से यादवों को विलेन बनाने के एजेंडे में लगे हैं, उन्हें अब समझ जाना चाहिए कि **प्रतिभा किसी सत्ता या पर्ची की मोहताज नहीं होती। मेरिट अपना रास्ता खुद तय करती है!** जो मेहनत करेगा वो आगे निकलेगा।
और अंत में एक संदेश विरोधियों को " यादवों से जलो नहीं ,उनसे मुकाबला करो क्योंकि यादवों को मिटाने वाला ना सतयुग में पैदा हुआ, ना त्रेतायुग, ना द्वापर युग में और कलयुग वालो की तो औकात ही क्या है?"
दादा कृष्ण की जय।
जय यादव जय माधव।