02/07/2026
*देश के नाम संदेश:*
*बुद्ध और अशोक की राह पर राष्ट्र रक्षा संघ(RRS) का संकल्प,,, डॉ आशीष मौर्य*
*प्रिय देशवासियों,*
आज हमारा संगठन महामना गौतम बुद्ध और राष्ट्र-निर्माता सम्राट अशोक महान के कालजयी विचारों को आत्मसात कर राष्ट्र रक्षा और जन-कल्याण के लिए पूरी तरह समर्पित है। भारत की यह पावन भूमि शांति, करुणा और अखंडता की प्रतीक रही है। वर्तमान युग में देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है; यह हमारे विचारों, समाज की एकता और नैतिक मूल्यों पर टिकी है। इसी संदर्भ में, राष्ट्र रक्षा संघ देश के नाम अपना मूल संदेश निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं के माध्यम से प्रस्तुत करता है:
*१. करुणा, अहिंसा और सामाजिक न्याय (बुद्ध का मार्ग)*
* करुणा का विस्तार: भगवान बुद्ध ने सिखाया कि घृणा को घृणा से नहीं, बल्कि प्रेम और करुणा से जीता जा सकता है। हमारा संगठन समाज के हर अंतिम व्यक्ति तक इस करुणा को पहुंचाने का संकल्प लेता है .
* सामाजिक समरसता: जाति, वर्ग और संप्रदाय के भेदों को मिटाकर एक सूत्र में बंधना ही सच्ची राष्ट्र रक्षा है। जब समाज का हर वर्ग सुरक्षित और सम्मानित महसूस करेगा, तभी राष्ट्र भीतर से अजेय बनेगा।
.नैतिक आचरण:अष्टांगिक मार्ग और पंचशील के सिद्धांत आज के नागरिक जीवन में सबसे ज्यादा प्रासंगिक हैं। ईमानदारी, सदाचार और मानसिक पवित्रता ही एक मजबूत नागरिक समाज की नींव हैं।
*२. लोक-कल्याणकारी राज्य और धम्म-विजय (सम्राट अशोक का संकल्प)*
* शस्त्र से शास्त्र की ओर: कलिंग युद्ध के बाद सम्राट अशोक ने 'भेरीघोष' (युद्ध की घोषणा) को 'धम्मघोष' (धर्म और नैतिकता की घोषणा) में बदल दिया। राष्ट्र रक्षा संघ का मानना है कि वास्तविक शक्ति विनाश में नहीं, बल्कि सृजन और जनकल्याण में है।
* प्रजा को संतान मानना: अशोक ने अपनी प्रजा को अपनी संतान के समान माना। आज हमारे नेतृत्व और नागरिक चेतना में यही भाव होना चाहिए—जहाँ राज्य का हर संसाधन आम जनता की भलाई, शिक्षा, और स्वास्थ्य के लिए समर्पित हो।
* धार्मिक सहिष्णुता: अशोक के शिलालेख हमें सिखाते हैं कि दूसरे के संप्रदाय और विचारों का सम्मान करने से अपने संप्रदाय की ही उन्नति होती है। वैचारिक मतभेदों के बावजूद राष्ट्रीय एकता को बनाए रखना हमारा परम कर्तव्य है।
*३. अखंड भारत और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद*
* भौगोलिक और सांस्कृतिक एकता: सम्राट अशोक ने भारतीय उपमहाद्वीप को एक प्रशासनिक और सांस्कृतिक धागे में पिरोया था। संघ उसी गौरवशाली विरासत को आधुनिक संदर्भ में सहेजने के लिए संकल्पित है।
* वैश्विक शांति दूत (वसुधैव कुटुंबकम): जैसे अशोक ने बौद्ध धम्म के शांति संदेश को वैश्विक स्तर पर फैलाया, वैसे ही आज भारत को ज्ञान, विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण और शांति के माध्यम से विश्व गुरु की भूमिका निभानी है।
* पर्यावरण और जीव दया: अशोक के शासनकाल में मनुष्यों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी चिकित्सालय बनवाए गए और प्रकृति की रक्षा की गई। हमारी राष्ट्र रक्षा में जल, जंगल, जमीन और बेजुबान जीवों की सुरक्षा भी शामिल है।
हमारा सामूहिक आह्वान
*राष्ट्र रक्षा संघ* RRS देश के युवाओं, बुद्धिजीवियों और प्रत्येक नागरिक से यह आह्वान करता है कि आइए, हम केवल सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिक न बनें, बल्कि अपने भीतर बुद्ध की करुणा और अशोक के न्यायप्रिय शासन के संकल्प को जगाएं। जब हमारा आंतरिक समाज मजबूत, शिक्षित और नैतिक होगा, तो दुनिया की कोई भी ताकत भारत की अखंडता को चुनौती नहीं दे पाएगी।
*जय भारत, अतुल्य भारत नैतिक भारत, अखंड भारत स्वर्णिम भारत,*
*भारत निर्माता की जय*