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04/04/2026
04/04/2026

मेरे नए फ़ॉलोअर्स का स्वागत है! आपसे जुड़ना मेरे लिए खुशी की बात है! Prince Kumar, Abhi Abhi

14/03/2026

, कल शाम की चाय के बाद सोचने लगा और फिर ख्याल आया कि 😘

1. कांग्रेस सरकार जाने के बाद मुंबई में फिर कोई हाजी़ मस्तान, करीम लाला, दाऊद इब्राहिम पैदा क्यों नहीं हुआ ?

2. बसपा सरकार जाने के बाद मायावती के जन्मदिन पर उसे हीरे, ताज, नोटों से क्यों नहीं तौला गया ?

3. यूपी में योगी जी के सीएम बनने के बाद अब अतीक अहमद, आजम खान, मुख्तार अंसारी जैसा बाहुबली क्यों नहीं पैदा हुआ है ?

4. मोदी के आने के बाद , पी.चिदंबरम अपने बंगले के गमलों में 6 करोड़ की गोभी क्यों नहीं उगा पा रहा है ??

5. आजकल सुप्रिया सुले अपनी दस एकड़ जमीन में 670 करोड़ की फसल क्यों नहीं उगा पाती हैं ?

6. हरियाणा में कांग्रेस की सरकार चले जाने के बाद रोबर्ट वाड्रा ने वहाँ कोई जमीन क्यों नहीं खरीदी ?

7. यूपी से सरकार चले जाने के बाद अखिलेश यादव ने सैफई महोत्सव क्यों नहीं मनाया ?

8. यस बैंक के मालिक राणा कपूर को ढाई करोड़ की पेंटिंग बेचने के बाद, प्रियंका गांधी ने फिर कोई पेंटिंग क्यों नहीं बेची ?

9. ए.के.एंटनी ने अपनी पत्नी के हाथ की पेंटिंग सरकार को 28 करोड़ में बेचने के बाद अपनी पत्नी से फिर कोई पेंटिंग क्यों नहीं बनवाई ?

10. यूपीए के दस वर्षीय (2004-14) शासनकाल में सोनिया अपनी "अज्ञात" बीमारी के इलाज के लिये प्रत्येक छ:माह के अन्तराल पर "अज्ञात" देश को नियमित रुप से जाती थी. वह रहती दिल्ली में है, पर उसकी उडा़न हमेशा केरल के एयरपोर्ट से होती थी और उसके लगेज में 4-5 बडे़-बडे़ ट्रंक हमेशा हुआ करते थे. किसी प्रकार की सिक्योरिटी-चेक का सवाल ही नहीं था, क्योंकि वह उस समय भारत की "सुपर पीएम" थी. 2014 में सत्ता परिवत्तॆन के बाद आश्चयॆजनक रुप से सोनिया की "अज्ञात" बीमारी उड़न छू कैसे हो गई ?

कल फिर कडक चाय पिऊंगा और फिर सोंचूँगा! आप भी एक बार इस बारे में जरूर सोचना!! प्रश्न वाकई गंभीर हैं...

13/03/2026

लेकिन कैथरीन के सीने के भीतर उस समय ठंडी हवा सनसनाकर चल रही थी। उसके बैग की गहराई में छिपा एक फ्रांसीसी पासपोर्ट था, जिसकी तहों में इज़राइल की धूल छिपी थी।

हाँ, आपने सही सुना। यह कैथरीन एक बड़ा ऑपरेशन पूरा करके अपने देश इज़राइल लौटने वाली थी।

इमिग्रेशन अधिकारी ने जब पासपोर्ट पर मुहर लगाई, तो कैथरीन को लगा जैसे वह लंबी सांस लेना भी भूल गई है। विमान में सीट से टिककर जब वह बादलों के ऊपर उड़ने लगी, तो उसने मन ही मन कहा—

“अलविदा तेहरान, तुम्हारे सारे गुप्त राज अब मेरे पास हैं। सब चले जाएंगे मेरे गुप्त ठिकाने पर। मुझे भरोसा करके तुमने गलती कर दी, ऐ खामेनी!”

इन गुप्त बातों को जानने का मौका हमें नहीं मिलेगा। किसी दूसरे के मन की खबर तो हमें वैसे भी नहीं मिलती। लेकिन कैथरीन के मन का अंदाजा लगाया जा सकता है।

एक प्रसिद्ध व्यक्ति ने कहा था—
“जहाँ तर्क खत्म होता है, वहीं से मोसाद की चालाकी शुरू होती है।”
शायद यह बात कैथरीन के लिए ही कही गई थी।

कैथरीन पेरेज़ शकदम का जन्म फ्रांस में एक कट्टर यहूदी परिवार में हुआ था। बचपन से ही उसकी आँखों में तेज बुद्धिमत्ता की चमक थी। लेकिन किस्मत उसे एक अजीब मोड़ पर ले आई।

लंदन में पढ़ाई के दौरान उसकी मुलाकात एक ईरानी मूल के मुस्लिम युवक से हुई। प्रेम हुआ और फिर शादी भी हो गई। कैथरीन ने इस्लाम कबूल कर लिया।

लेकिन क्या यह आध्यात्मिक आकर्षण था—या मोसाद के ट्रेनिंग सेंटर में सीखा हुआ एक बेहतरीन अभिनय? शायद दूसरा ही सच था।
शुरुआत में वह खुद को सुन्नी मुस्लिम बताती थी। उसने जल्दी ही पाँच वक्त की नमाज़ सीख ली। आसपास के लोगों के सामने नमाज़ पढ़ना उसे पसंद था।

धीरे-धीरे वह शिया इस्लाम की गहरी शिक्षाओं में उतर गई। करबला की त्रासदी पर उसके लेख पढ़कर कट्टर शिया आलिमों की भी आँखें भर आती थीं।

वह एक प्रसिद्ध “इस्लामिक स्कॉलर” बन गई। विभिन्न वेबसाइटों पर इस्लाम पर लिखे उसके लेख लोगों को भावुक कर देते थे।
लेकिन पर्दे के पीछे तेल अवीव के खुफिया दफ्तर में कोई और खेल चल रहा था—जिसे किसी ने नहीं पहचाना।
2009 से 2011 के बीच उसने ईरान के राजनीतिक और बौद्धिक हलकों में अपनी जगह बनानी शुरू की।
और 2012 के बाद उसका प्रभाव साफ दिखाई देने लगा।
ईरान सरकार को लगा—एक पश्चिमी महिला अगर इस्लाम से प्रेरित होकर खामेनी के विचारों का प्रचार कर रही है, तो इससे बड़ी ताकत क्या होगी!
तेहरान के बंद दरवाजे उसके लिए खुलने लगे।

वह Khame nei.ir जैसे संवेदनशील वेबसाइटों पर नियमित लेख लिखने लगी।

धीरे-धीरे आयतुल्लाह खामेनी के करीबी लोगों और यहाँ तक कि IRGC के वरिष्ठ जनरलों के घरों तक उसका आना-जाना हो गया।
कैथरीन जानती थी—जानकारी हासिल करने का सबसे आसान रास्ता इंसान की भावनाओं और कमजोरियों को छूना है।

यहीं से शुरू हुआ उसके जीवन का सबसे विवादास्पद अध्याय—
“मुताह” (अस्थायी विवाह)।
ईरानी शिया कानून में “मुताह” विवाह की अनुमति है। कैथरीन ने इसे हथियार की तरह इस्तेमाल किया।
कहा जाता है कि उसने एक-एक करके लगभग 100 से ज्यादा प्रभावशाली ईरानी अधिकारियों के साथ अस्थायी विवाह या शारीरिक संबंध बनाए।

उसकी सुंदरता और बुद्धिमत्ता के जाल में कई लोग फँस गए।
इनमें ईरानी संसद सदस्य, सरकारी अधिकारी और यहाँ तक कि परमाणु परियोजना से जुड़े लोग भी शामिल थे। उनकी बातचीत से इज़राइल को ईरान के गुप्त परमाणु ठिकानों की जानकारी मिल गई।
वह एक चलती-फिरती ब्लैक होल बन चुकी थी—जो ईरान के राज्य के रहस्यों को खींचकर बाहर ले जा रही थी।
2021 के अंत में रहस्य खुलने लगा। ईरान की खुफिया एजेंसी को शक हुआ कि उनकी प्रिय कैथरीन असल में इज़राइल की “ट्रोजन हॉर्स” है।

लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
कैथरीन चुपचाप ईरान छोड़ चुकी थी।
फ्रांस पहुँचकर उसने Times of Israel में एक लेख लिखकर सनसनी फैला दी।
उसने दावा किया—

“मैं कभी मुसलमान बनी ही नहीं थी। यह सिर्फ मेरा मिशन था। हर जिक्र में मैं अल्लाह नहीं बल्कि ‘याहवेह’ का नाम लेती थी—लेकिन किसी को पता ही नहीं चला।”

इस खुलासे के बाद ईरान प्रशासन गहरे शर्मिंदगी में डूब गया।
खामेनी की वेबसाइट से उसके सभी लेख हटा दिए गए।
कई अधिकारियों की गुप्त जांच शुरू हुई।

कहा जाता है कि कई सैन्य और राजनीतिक अधिकारियों को पद से हटा दिया गया। कुछ पर देशद्रोह के आरोप भी लगे।

सबसे बड़ा झटका धार्मिक नेताओं को लगा—क्योंकि उनमें से कई ने कैथरीन को “पवित्र महिला” कहा था।

इस घटना के बाद ईरान ने अपनी सुरक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव किए।
विदेशी महिलाओं और पत्रकारों की जांच कई स्तरों पर होने लगी।
डिजिटल सुरक्षा को मजबूत किया गया और महत्वपूर्ण दस्तावेज फिर से कागज़ी रूप में रखने शुरू किए गए।

कैथरीन शकदम भले ही चली गई हो, लेकिन वह ईरान के खुफिया इतिहास में ऐसा घाव छोड़ गई जिसे भरने में दशकों लग सकते हैं।
तेहरान की गलियों और सरकारी गलियारों में आज भी एक सवाल गूंजता है—

कहीं किसी और नाम से कोई दूसरी “कैथरीन” तो नहीं छिपी है?
और आखिर में एक सवाल—

क्या भारत में भी ऐसा कोई व्यक्ति है, जिस पर आपको शक हो

वापी गुजरात
08/03/2026

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rajkot dam gujrat
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26/02/2026

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20/02/2026

*भारत के आजादी के भयावहता की एक तस्वीर*
लाखों ऐसी बहने जो सोने चाँदी के बरतनों में खाना खाती थी जिनके कोमल पैर कभी जमीं पर नहीं पड़े थे उन्हें 7 दिनों तक नंगा करके पाकिस्तान में घुमाया गया जहाँ भीड़ एक बार शुरू होती तो एक एक लड़की से 12 से 15 लोग रेप करते और 7 वे दिन सिर्फ़ 3 लड़कियां ज़िंदा बची उन्ही को काट के पकाकर उस भीड़ ने खाया तुम्हारे पूर्वजों को आजादी का ये नजराना मिला था और तुम इसे आजादी कहते हो । किसी घर में कोई मर जाता है तो उस दिन का त्योहार नहीं मनाया जाता जिस दिन लाखों लोग मर गए और लाखों के घर छिन गए उस दिन आप मनाओ आजादी का जश्न ।
अमृतसर में हिन्दुओ और सिखों की लाशों से भरी ट्रैन आती थी लिखा रहता था, "ये आज़ादी का नजराना"
पहली ट्रेन पाकिस्तान से (15.8.1947)😢
अमृतसर का लाल इंटो वाला रेलवे स्टेशन अच्छा खासा शरणार्थियों कैम्प बना हुआ था । पंजाब के पाकिस्तानी हिस्से से भागकर आये हुए हज़ारों हिन्दुओ-सिखों को यहाँ से दूसरे ठिकानों पर भेजा जाता था ! वे धर्मशालाओं में टिकट की खिड़की के पास, प्लेट फार्मों पर भीड़ लगाये अपने खोये हुए मित्रों और रिश्तेदारों को हर आने वाली गाड़ी मै खोजते थे...
15 अगस्त 1947 को तीसरे पहर के बाद स्टेशन मास्टर छैनी सिंह अपनी नीली टोपी और हाथ में सधी हुई लाल झंडी का सारा रौब दिखाते हुए पागलों की तरह रोती-बिलखती भीड़ को चीरकर आगे बढे...थोड़ी ही देर में 10 डाउन, पंजाब मेल के पहुँचने पर जो द्रश्य सामने आने वाला था,उसके लिये वे पूरी तरह तैयार थे....मर्द और औरतें थर्ड क्लास के धूल से भरे पीले रंग के डिब्बों की और झपट पडेंगे और बौखलाए हुए उस भीड़ में किसी ऐसे बच्चे को खोजेंगे, जिसे भागने की जल्दी में पीछे छोड़ आये थे !
चिल्ला चिल्ला कर लोगों के नाम पुकारेंगे और व्यथा और उन्माद से विहल होकर भीड़ में एक दूसरे को ढकेलकर-रौंदकर आगे बढ़ जाने का प्रयास करेंगे ! आँखो में आँसू भरे हुए एक डिब्बे से दूसरे डिब्बे तक भाग भाग कर अपने किसी खोये हुए रिश्तेदार का नाम पुकारेंगे! अपने गाँव के किसी आदमी को खोजेंगे कि शायद कोई समाचार लाया हो ! आवश्यक सामग्री के ढेर पर बैठा कोई माँ बाप से बिछडा हुआ कोई बच्चा रो रह होगा, इस भगदड़ के दौरान पैदा होने वाले किसी बच्चे को उसकी माँ इस भीड़-भाड़ के बीच अपना ढूध पिलाने की कोशिश कर रही होगी....
स्टेशन मास्टर ने प्लेट

16/02/2026

हाथों में भीमराव, गले में तीन कीलों के क्रॉस पर टंगा इशू ईसाई मिशनरी लॉकेट.... और इसलिए इन्हें आजादी चाहिए ब्राह्मणवाद से क्योंकि ब्राह्मण सनातन के मजबूत स्तंभ है।

09/02/2026

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Gorakhpur

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