04/09/2026
एक सन्यासी जिसकी हत्या कृष्ण जन्माष्टमी के दिन 2008. में चर्च प्रेरित गुंडों ने की इसलिये कि उसके रहते धर्मांतरण नहीं हो पा रहा था घर वापसी शुरू हो गई थी
स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती (1924/1926 – 23 अगस्त 2008) ओडिशा के जनजातीय और वनवासी क्षेत्र कंधमाल में सक्रिय एक प्रमुख हिंदू संन्यासी, वेदांत के प्रकांड विद्वान और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेता थे। उन्हें समाज सेवा और स्थानीय आदिवासियों के बीच उनके अधिकारों और संस्कृति की रक्षा के लिए जाना जाता है।
उनके जीवन परिचय, धर्मांतरण के खिलाफ कार्य और उनकी हत्या का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है:
संक्षिप्त जीवन परिचय
जन्म: उनका जन्म ओडिशा के तालचेर (कंधमाल जिला) के गुरुजंग गांव में हुआ था।
सन्यास: शुरुआत में वह एक गृहस्थ थे, लेकिन बाद में उन्होंने समाज कल्याण के संकल्प के लिए गृहस्थ जीवन त्याग दिया और हिमालय जाकर कठिन आध्यात्मिक साधना की।
कर्मभूमि: वर्ष 1965-68 के दौरान वे ओडिशा लौटे और कंधमाल जिले के चकापाद गांव को अपनी कर्मस्थली बनाया। उन्होंने वहां वीरूपाक्ष पीठ में अपना आश्रम स्थापित किया।
सामाजिक कार्य: उन्होंने आदिवासियों और वंचित समाज के उत्थान के लिए कई गुरुकुल, संस्कृत विद्यालय, अस्पताल और जलेसपट्टा में 'शंकरचार्य कन्या आश्रम' (बालिकाओं के लिए आवासीय विद्यालय) की स्थापना की। उन्होंने स्थानीय लोगों को आधुनिक कृषि और गोपालन से भी जोड़ा
धर्मांतरण और संस्कृति रक्षा पर कार्य
कंधमाल के जनजातीय इलाकों में ईसाई मिशनरियों द्वारा बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे धर्मांतरण (मतांतरण) अभियानों से स्वामी जी काफी व्यथित थे। उन्होंने इसके खिलाफ एक मजबूत मोर्चा खोला:
घर वापसी अभियान: उन्होंने उन हजारों आदिवासियों की हिंदू धर्म में 'घर वापसी' कराई, जिन्हें बहला-फुसलाकर या किसी लालच में धर्मांतरित किया गया था।
सांस्कृतिक चेतना: उन्होंने गजपति और कंधमाल जिलों में बड़े पैमाने पर रथयात्राएं और पदयात्राएं आयोजित कीं ताकि जनजातीय समाज अपनी मूल संस्कृति, परंपराओं और देवी-देवताओं (धरनी पेनु) के प्रति जागरूक रह सके।
गोहत्या का विरोध: वे ओडिशा में अवैध गोहत्या और मवेशियों की तस्करी के खिलाफ बहुत मुखर थे और इसके लिए उन्होंने कई आंदोलन और भूख हड़तालें कीं
हमले और निर्मम हत्या
धर्मांतरण विरोधी गतिविधियों के कारण स्वामी लक्ष्मणानंद लगातार मिशनरियों और कुछ उग्रवादी संगठनों के निशाने पर आ गए थे। उन पर 1970 से 2