अखिल भारतीय शाक्य समाज

अखिल भारतीय शाक्य समाज सामाजिक समानता और आधुनिक भारत-निर्मा?

लोग मौत से डरते हैं, लेकिन तार्किक और वैज्ञानिक सच्चाई यह है कि मौत के बाद की अवस्था बिल्कुल वैसी ही है जैसी जन्म से पहल...
21/04/2026

लोग मौत से डरते हैं, लेकिन तार्किक और वैज्ञानिक सच्चाई यह है कि मौत के बाद की अवस्था बिल्कुल वैसी ही है जैसी जन्म से पहले थी। जन्म से पहले अरबों साल तक आपका वजूद नहीं था, और कोई तकलीफ नहीं हुई। मौत कोई डरावना अंत नहीं, बल्कि उसी शांत, चेतनाशून्य 'अस्तित्वहीन' अवस्था में वापस लौटना है।

#ब्रह्मांडज्ञान #जीवनमृत्यु

सुरेंद्र कुशवाहा जी का यूँ अचानक से  इस दुनियां से चले जाना हमारे शाक्य, कुशवाहा, मौर्य, सैनी... समाज के लिए अपूरणीय क्ष...
11/04/2026

सुरेंद्र कुशवाहा जी का यूँ अचानक से इस दुनियां से चले जाना हमारे शाक्य, कुशवाहा, मौर्य, सैनी... समाज के लिए अपूरणीय क्षति है.. आपके जैसा समर्पण और आपके जैसी ऊर्जा बिरले लोगों में ही देखने को मिलती है।

आपने समाज के लिए बहुत कुछ किया.. आपको न भूल पाएंगे.... आप इस संसार की असीम ऊर्जाओं में उच्च स्थान पऱ उपस्थित रहेंगे, हमारी यादों में भी..विनम्र श्रद्धांजलि... 💐💐💐

'ईरान को जानेंगे तो होश उड़ जाएंगे!'    मे.ज. (रि.) यश मोर ने बताया ईरान क्यों झुकने को तैयार नहीं?ईरान के फुटवाल टीम एश...
23/03/2026

'ईरान को जानेंगे तो होश उड़ जाएंगे!'

मे.ज. (रि.) यश मोर ने बताया ईरान क्यों झुकने को तैयार नहीं?

ईरान के फुटवाल टीम एशिया में नंबर 2 पर आती है, वर्ल्ड कप में जापान के बाद क्वालीफाई किया !

IQ लेवल में विश्व में 4th नंबर पर है ईरान

पिछले एशियन गेम्स में कबड्डी में ईरान की महिला एवं पुरुष टीम ने विश्व की टॉप टीमों को हरा दिया था !

ईरान का साक्षरता प्रतिशत 94% है जो विश्व के सबसे ज्यादा साक्षरता वाले टॉप देशों में शामिल है !

ईरान की सरकार में अधिकतर लोग पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी हैं !

ईरान के लोगों में जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण हैं वो शायद एशिया सब कॉन्टमेंट में बहुत अधिक है !

इसीलिए ये मिसाइल बना रहे हैं, और लड़ रहे हैं !
भारत मे अनपढ लोग ज्यादा है इसलिए घंटा बजा रहे है।

भारत एक ऐसा देश है जिसने हजारों आक्रांताओं के हमलों को झेला है और हजारों साल की गुलामी को खत्म करके फिर से आजाद हुआ.. यह...
18/03/2026

भारत एक ऐसा देश है जिसने हजारों आक्रांताओं के हमलों को झेला है और हजारों साल की गुलामी को खत्म करके फिर से आजाद हुआ.. यह भारत की जनता की ही हिम्मत थी और धैर्य था जो फिर से दूसरे देशो के मुकाबले (चीन, जापान इजराइल को छोड़कर ) तेजी से विकास की राह में दौड़ा।

मुसलमान इस तरह की पोस्ट लिखकर तमाम भारतीयों पऱ एहसान जताना चाहते है क्योंकि उनके नये नये पापा बने देश ईरान ने होर्मूज से भारत के जहाजो को आने की इजाजत दे दी है।

पऱ ये लोग ये कैसे भूल जाते है कि इनके इसी देश के लोगों के घरों में बिरयानी भी बनती है तो भारत के बासमती चावलों की बजह है... इनके घर में सेवइयों की मिठास भी भारत की बजह से हो पाती है।

माना कि भारत के मुसलमानो और उनके समर्थक नेताओं को ये सब नहीं दिखेगा। ये सब वोट के खेल की बजह से ऐसे पोस्ट शेयर करके बता रहे है कि भारत में चूल्हे भी ईरान के कारण ही जलते है।

कुंठित मन इससे ज्यादा और क्या सोंच सकता है?

हाँ ये वही कुंठा है जो इन्हे अंदर ही अंदर खाये जा रही है इनको लगता है कि 600 साल तक इनके बाप दादाओं ने भारत को गुलाम बनाये रखा फिर भी भारत से काफिरों को खत्म करने में नाकामयाब रहे.. इस भारत की भूमि ने काफिरों को फिर से उठ खडे होने का अवसर दिया और जो कभी इस भारत के बादशाह होते थे उनकी औलादे आज पंचर जोड़कर अपनी जीविका चला रहे है।

इन्हे अपनी बादशाहत क़ायम न रख पाने का बहुत दुःख है तभी तो ये हमारे देश की कामयाबी को देखकर कुंठित हो जाते है और इसीलिए वो भारत की किसी भी उपलब्धि को देखकर दुःखी हो जाते हैं।

अगर देखा जाये तो हमारे भारत ने ही इस दुनियाँ को जाहिलियत से आजादी दिलाने में सबसे ज्यादा योगदान दिया है। भारत ही था जिसने दुनियां को मानवता का पाठ पढ़ाया.. वरना ये दुनियां तो आपस में हीं लड़ी मरी जा रही थी।

जिस जाहिल कौम को मानवता का पाठ सिखाया गया उसी कौम ने मानवता का पाठ सीखने की बजाय उस सोंच को ही खत्म करने की हर संभव कोशिस की.. बुत(बुद्ध) के दुश्मन बनकर दुनियाँ भर के बुतों को तोड़ने की कसम खा ली.. बुत-परस्ती करने वालों को भी खत्म करने में कोई कसर बांकी न रखी।

ये कौम आपकी क़ामयाबी को देखकर जलन महसूस कर रही है ये कौम यही सोंचकर कुंठित हुई जा रही है कि बार बार मिटाने के बाद भी ये लोग हर बार उठकर खडे क्यों हो जाते है??

ये कौम आपके देश में हो रहे अच्छे कामों से इतनी ख़ुश नहीं होती है जितनी कि किसी मुस्लिम देश की छोटी सी उपलब्धि से.. ये इसलिए दुःखी है कि इन्होने जिस देश में भी कदम रखा उसमे अपने मजहब का परचम लहरा दिया..

ये इसलिए दुःखी है कि इन्होने इजराइल के यहूदियों को इजराइल से भगा दिया था ये फिर से वहाँ पऱ वापस क्यों आ गए.. 1948 में इजराइल ने खुद को ज़ब आजाद घोषित किया था तब सभी मुस्लिम राष्ट्रों ने मिलकर इजराइल पऱ हमला किया था.. इजराइल ने फिर भी अपना बजूद बचाये रखा.. और आज एक मजबूत राष्ट्र के रूप में इनके सामने खड़ा है.. यही इनकी पीड़ा है ये खत्म क्यों नहीं हुआ??

यही पीड़ा इनकी भारत के प्रति है ये अभी भी खड़ा क्यों है हमारा पाकिस्तान तो इससे बहुत पिछड़ता जा रहा है ये इसी तरह मन ही मन मरे जा रहे है.. 😄😄

होली आई रे ..आई रे ..होली आई रे ...😊😊 भुने दाने से होरा भये,       होरा से फिर भई होरी।होरी से फिर होली भई,      बांकी स...
04/03/2026

होली आई रे ..आई रे ..होली आई रे ...😊😊

भुने दाने से होरा भये,
होरा से फिर भई होरी।
होरी से फिर होली भई,
बांकी सब गप्प है कोरी !!

होली किसानों का त्यौहार है कैसे ..आइये जानते है होली क्या है ?

अन्न की पहली फसल के पहली बार इस्तेमाल करने की ख़ुशी में होली का त्यौहार मनाया जाता है ।
होली की तैयारी बसन्त ऋतु के आगमन से ही शुरू हो जाती है । गेंहू ,चने इत्यादि की ताजा फसल की बाली में नये दाने पड़ना , इन दानों (कच्चे होला/होरा) को भूनने के लिए लकड़ी का इंतजाम करना , इकट्ठे होकर आग जलाना, फिर उस आग मे ताजा फसलों के हरे दानों को भूनना, फिर सबके साथ मिलजुलकर खाना , नृत्य करते हुए, ढोल मजीरे के साथ खुशियों के गीत गाते हुए , सामाजिक रूढ़िवादियों को तोड़कर , बुराइयों को भूलकर अच्छाइयों को याद करते हुए, एक दूसरे को रंग-बिरंगे फूल देकर ,सारे गिले शिकवे भूलकर एक दूसरे को गले लगाना , बड़ो से आशीर्वाद प्राप्त करना और छोटो को अच्छे सुझाव देना और अच्छे विचारों का आदान प्रदान करना ..
यही तो रीति है जिसको "होला" (भुने दाने) खाने का त्यौहार अर्थात "होली "कहा जाता है ।

पुराने समय में समण एक दूसरे को फल और फूलों को उपहार के रूप में देने को अच्छा कार्य माना जाता था। फल-फूल देते हुए सारे गिले शिकवे भुलाकर, एकदूसरे के गले लगने का आनन्द ही कुछ और है ।
यही है "होली का त्यौहार" जिसमे चारो तरफ सिर्फ खुशियां ही खुशियाँ दिखती है ।

किसी महिला को जलाकर मारने को अपनी ख़ुशी बताना और उसका सम्बन्ध "होली के पर्व" से जोड़ना, किसानों को उनके मूल महोत्सव से भटकाकर , उन्हें अपनी कहानियों के साथ जोड़कर बताना, बहुत ही घटिया सोंच का परिचय है।
इन लोगों की बातों से भ्रमित न हो और न ही कभी भी ऐसी घटिया कहानियों पर विश्वास करें ।


सभी बड़े ,छोटे, साथी/मित्रो को किसानों के आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ाने वाले और सौम्यता से पुष्प इत्यादि बाँटकर मनाये जाने वाले आदिपर्व होली/होरी की हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं । 💐💐💐

सुखद..आधी रात का समय था रोज की तरह एक बुजुर्ग शराब के नशे में अपने घर की तरफ जाने वाली गली से झूमता हुआ जा रहा था, रास्त...
12/02/2026

सुखद..

आधी रात का समय था रोज की तरह एक बुजुर्ग शराब के नशे में अपने घर की तरफ जाने वाली गली से झूमता हुआ जा रहा था, रास्ते में एक खंभे की लाइट जल रही थी, उस खंभे के ठीक नीचे एक 15 से 16 साल की लड़की पुराने फटे कपड़े में डरी सहमी सी अपने आँसू पोछते हुए खड़ी थी जैसे ही उस बुजुर्ग की नजर उस लड़की पर पड़ी वह रूक सा गया, लड़की शायद उजाले की चाह में लाइट के खंभे से लगभग चिपकी हुई सी थी, वह बुजुर्ग उसके करीब गया और उससे लड़खड़ाती जबान से पूछा तेरा नाम क्या है, तू कौन है और इतनी रात को यहाँ क्या कर रही है...?

लड़की चुपचाप डरी सहमी नजरों से दूर किसी को देखे जा रही थी उस बुजुर्ग ने जब उस तरफ देखा जहाँ लड़की देख रही थी तो वहाँ चार लड़के उस लड़की को घूर रहे थे, उनमें से एक को वो बुजुर्ग जानता था, लड़का उस बुजुर्ग को देखकर झेप गया और अपने साथियों के साथ वहाँ से चला गया लड़की उस शराब के नशे में बुजुर्ग से भी सशंकित थी फिर भी उसने हिम्मत करके बताया मेरा नाम रूपा है मैं अनाथाश्रम से भाग आई हूँ, वो लोग मुझे आज रात के लिए कहीं भेजने वाले थे, दबी जुबान से बड़ी मुश्किल से वो कह पाई...!

बुजुर्ग:- क्या बात करती है..तू अब कहाँ जाएगी..!

लड़की:- नहीं मालूम.....!

बुजुर्ग:- मेरे घर चलेगी.....?

लड़की मन ही मन सोच रही थी कि ये शराब के नशे में है और आधी रात का समय है ऊपर से ये शरीफ भी नहीं लगता है, और भी कई सवाल उसके मन में धमाचौकड़ी मचाए हुए थे!

बुजुर्ग:- अब आखिरी बार पूछता हूँ मेरे घर चलोगी हमेशा के लिए...?

बदनसीबी को अपना मुकद्दर मान बैठी गहरे घुप्प अँधेरे से घबराई हुई सबकुछ भगवान के भरोसे छोड़कर लड़की ने दबी कुचली जुबान से कहा जी! हाँ...!

उस बुजुर्ग ने झट से लड़की का हाथ कसकर पकड़ा और तेज कदमों से लगभग उसे घसीटते हुए अपने घर की तरफ बढ़ चला वो नशे में इतना धुत था कि अच्छे से चल भी नहीं पा रहा था किसी तरह लड़खड़ाता हुआ अपने मिट्टी से बने कच्चे घर तक पहुँचा और कुंडी खटखटाई थोड़ी ही देर में उसकी पत्नी ने दरवाजा खोला और पत्नी कुछ बोल पाती कि उससे पहले ही उस बुजुर्ग ने कहा ये लो सम्भालो इसको "बेटी लेकर आया हूँ हमारे लिए" अब हम बाँझ नहीं कहलाएंगे आज से हम भी औलाद वाले हो गए, पत्नी की आँखों से खुशी के आँसू बहने लगे और उसने उस लड़की को अपने सीने से लगा लिया।

जिहाद की खूबसूरतीजंजीरों में कैद करके ज़ैनब को 750 किमी दूर कूफा (इराक) से दमास्कस (सीरिया) ले जाया गया। ये लंबी यात्रा ...
11/02/2026

जिहाद की खूबसूरती

जंजीरों में कैद करके ज़ैनब को 750 किमी दूर कूफा (इराक) से दमास्कस (सीरिया) ले जाया गया।

ये लंबी यात्रा जंजीरों में कैद बच्चों और महिलाओं पर बहुत भारी पड़ी और कई ने सर्दियों में तड़पकर दम तोड़ दिया। दमास्कस में पहुँचने के बाद उन्हें 72 घंटों तक बाज़ार के चौराहे पर खड़ा रखा गया।

उस समय जंग जीतने वाली फौज हारने वाली फौज के लोगों का कटा हुआ सिर साथ लेकर जाती थी और अपनी जीत का जश्न मनाती थी। इस पूरे सफर में जैनब के साथ उसके भाई हुसैन और अब्बास का कटा हुए सिर साथ लाया गया था।

बाद में यजीद से ज़ैनब ने माँग की थी की उन्हें शहीदों के सिर लौटा दिए जाएं और उन्हें एक घर दिया जाए जहाँ वो मातम मना सकें।।मोहम्मद साहब के गुजर जाने के तीन महीने में ही उनकी बेटी फातिमा की घर में घुसकर निर्मम हत्या कर दी गई थी।

उनके दामाद अली को रमजान में नमाज पढ़ते हुए मारा गया। बड़े नवासे को जहर दिया गया और छोटे नवासे को कर्बला के मैदान में तीन दिन तक भूख और प्यास से तड़पाने के बाद शहीद कर दिया गया।

जैनब मोहम्मद साहब की नवासी थी जो जंजीरों में कैद नए खलिफा यजीद के सामने खड़ी थी। कमाल की बात ये थी जब ये सब हो रहा था उस समय ना अमेरिका बना था, ना इजरायल था, ना हथियार बेचने वाली कंपनियाँ थी और जो ये सब कर रहे थे वो भी कोई गैर नहीं थे।

ये जौहर करती औरतें, तबाह होते विजननगर और देवगिरी, लाशों की बेकद्री, कटे हुए सिरों के पिरामिड ये सब तो भारत में बाद में आया। इस मानसिकता का सबसे पहला पीड़ित मोहम्मद साहब का परिवार ही बना। उधर कर्बला के मैदान में 70 का सामना हजारों से था, इधर चमकौर के युद्ध में 40 का 10 हजार से।

उधर मोहम्मद साहब का परिवार था, इधर गुरू गोविंद सिंह का। उधर शहीद हुसैन का कटा शीश उनकी चार साल की बेटी को खाने की थाल में सजा कर दिया गया, इधर दारा का कटा शीश शाहजहां को खाने की थाल में दिया गया। उधर जैनब यजीद से अपने भाईयों का कटा हुआ शीश माँग रही थी ताकि उनका मातम मनाया जा सके, इधर सोनीपत का कुशाल सिंह दहिया गुरू तेगबहादुर के शीश को ससम्मान वापस आनंदपुर साहिब भेजने के लिए अपना सिर काटकर मुगल सेना को सौंप रहे थे।

उधर शहीद हुसैन की छोटी बेटी को तड़पाया गया, इधर गुरू गोविंद सिंह के छोटे बच्चों को जिंदा दीवार में चूनवा दिया गया। उधर जैनब को कुफा (इराक) से दमास्कस ले जाया गया, इधर बंदा वीर बैरागी को जोकर बनाकर हाथी में लादकर लाहौर से दिल्ली लाया गया, जहाँ उनके मुँह में उनके तीन साल के बच्चे का माँस डाला गया। उधर कर्बला शहीदों के शवों की बेकद्री की गई, इधर गुरू गोविंद सिंह के बच्चों को दाह संस्कार के लिए जमीन सोने के सिक्के लगाकर बेची गई। जो जहालत 7वीं शताब्दी में अरब में थी…

वो 17वी शताब्दी में भारत में भी साफ दिख रही थी। फिर भी यजीद तो शैतान था और औरंगजेब जिंदा पीर।

वैसे यजीद और औरंगजेब में कोई अंतर नहीं है इस्लामिक हूकूमत के खिलाफ जो भी आवाज उठाता है वो काफिर ही माना जाता है और यही गुनाह हुसैन ने भी किया था।

बाकी आप जो बोते है उसे आपके साथ साथ दूसरों को भी काटना पडता है हूजूर ने जो पूरी जिंदगी बोया उनके जाने के बाद उनके परिवार ने काटा और आज भी पूरी दुनिया काट रही है।

#सत्यसनातन

 #सुरसती से  #सरस्वती की परंपरासम्यक काल की जितनी भी शब्दावली है, उसका भावार्थ उस समय के भाषा (पालि) अनुसार ही होगा।सम्य...
28/01/2026

#सुरसती से #सरस्वती की परंपरा

सम्यक काल की जितनी भी शब्दावली है, उसका भावार्थ उस समय के भाषा (पालि) अनुसार ही होगा।

सम्यक काल की पालि भाषा जैसे-जैसे आगे क्रमिक रूप से विकास करती गयी,
वैसे वैसे पालि भाषा का संस्कार (संस्कृत) होते हुए ,
समाज का विकाश कहें या विनाश करते गयी।

आज (14 फरवरी) हिंदी महीना से "माघ पंचमी" है।
आज के दिन वर्तमान #शिक्षण संस्थानों के अंदर शिक्षा देने वाले प्रबुद्ध शिक्षक और शिक्षा लेने वाले होनहार विद्यार्थी,
सभी मिलकर #स्वरसती नाम (अपभ्रंस सरस्वती) की देवी की आराधना करेगें।
लेकिन
इन्ही शिक्षण संस्थानों के प्रबुद्ध शिक्षक और होनहार विद्यार्थी से जब पूछा जाता है कि क्या #नालंदा विश्वविद्यालय जैसे किसी भी शिक्षण संस्थान में सरस्वती नाम की देवी का आराधना का कोई साक्ष्य मिला है?
फिर क्या,
इतना छोटा सा सवाल करने पर दोनो मतावलम्बी के लोग पड़ोसी का बंगला झांकते हुए ब्राह्मण मुगल राजपूत (गठजोड़) काल की लिखी गयी संस्कारित भाषा (संस्कृत) की पुस्तक दिखाने लगते हैं।
अब आपलोग ही बताएं
कि
मुगल काल में स्थापित स्वरसती देवी की पूजा करने से किसको कितना ज्ञान बढ़ा और किसको कितना ज्ञान मिला,
इस सत्य व असत्य की बेतुकी तर्क पर आपलोग स्वयं मंथन करें!
आइए
हम इस #स्वरसती की परंपरा को समझे
कि
इस शब्द और परंपरा का उद्भव कहां व कैसे हुआ?

सम्यक संस्कृति में अष्टांगिक मार्ग के अंदर एक मार्ग का नाम है सम्यक #सती।
इसमे #सती शब्द का अर्थ पालि में #सजगता होता है।

दूसरा सम्यक काल में जो वर्णमाला होती थी उसमें #सुर (स्वर) का काफी महत्व होता था।

यह सुर जन्म से ही प्रत्येक प्राणी को प्रकृति प्रदत्त कुदरतन प्राप्त होता है। जिस वजह से इसका उपयोग पृथ्वीलोक में जन्म से ही सभी प्राणी करता है।
जैसे अ, आ, इ, उ, ए, ओ।

यह प्रकृति प्रदत्त "सुर" को जब मनुष्य "सती" के साथ प्रयोग करता है,
तो
वह सुंदर ध्वनि निकालता है।
#गायक लोग आज भी सुरों का रियाज सती के साथ करता है।
वह #सुरसती कहलाता है।

इसी "सुर" और "सती" को जब संस्कारित भाषा (संस्कृत) में "स्वर" और "सती" के साथ लिखेंगे तो यह "स्वरसती" का रूप लेता है।

लेकिन दुर्भाग्य!
भ्रमवंशियों द्वारा शिक्षण संस्थान का उपयोग आडम्बर-पाखण्ड फैलाने में सबसे ज्यादा किया जाता रहा है।
आइए
हम और आप सभी मिलकर उस दिञभ्रमित शिक्षण संस्थान से इस "सुरसती" (पालि भाषा) यानी "सरस्वती" (संस्कृत में) को भ्रमवंशियों से मुक्त कराए ,
ताकि
समाज के अंदर सभी लोगों का स्वर (सुर) सजगता (सती) के साथ प्रयोग हो,
और
सामंती और अभद्र (गाली-गलौज) स्वर का प्रयोग बंद हो।

लेखनी
(इतिहासकार राजिव पटेल सर)

☸अत्त दीपो भव☸

 #बिग बैंग (महाविस्फोट) की शुरुआत कब और कैसे हुई थी? वर्तमान वैज्ञानिक समझ के अनुसार, हमारा पूरा ब्रह्मांड (observable u...
26/01/2026

#बिग बैंग (महाविस्फोट) की शुरुआत कब और कैसे हुई थी?

वर्तमान वैज्ञानिक समझ के अनुसार, हमारा पूरा ब्रह्मांड (observable universe) लगभग 13.8 अरब साल पहले (13.787 ± 0.020 billion years ago) एक अत्यंत छोटे, अत्यधिक गर्म और अत्यधिक घने बिंदु (जिसे singularity कहते हैं) से शुरू हुआ था। इसे ही बिग बैंग कहते हैं।

बिग बैंग कैसे हुआ? (संक्षिप्त समयरेखा के साथ)

t = 0 (शुरुआत का क्षण)
ब्रह्मांड एक singularity में था — अनंत घनत्व (infinite density) और अनंत तापमान (infinite temperature) की स्थिति।

समय, स्थान, पदार्थ, ऊर्जा — सब कुछ इसी बिंदु से निकला।
"कब से पहले क्या था?" या "यह singularity कहाँ से आई?" — ये सवाल अभी विज्ञान के दायरे से बाहर हैं (क्योंकि समय और स्थान खुद बिग बैंग के साथ शुरू हुए)।

पहले 10⁻⁴³ सेकंड (Planck epoch)
ब्रह्मांड इतना छोटा और गर्म था कि आज के चारों fundamental forces (गुरुत्वाकर्षण, विद्युत-चुंबकीय, strong nuclear, weak nuclear) एक ही unified force में एकीकृत थे।
हमारी वर्तमान भौतिकी के नियम यहाँ काम नहीं करते।

10⁻³⁶ से 10⁻³² सेकंड (Inflation phase)
ब्रह्मांड ने प्रकाश की गति से भी कहीं अधिक तेज (exponentially) फैलाव किया — इसे cosmic inflation कहते हैं।
इससे ब्रह्मांड का आकार अचानक बहुत बड़ा हो गया और छोटी-छोटी क्वांटम fluctuations बड़े पैमाने पर फैल गईं (जो बाद में galaxies बनने का आधार बनीं)।

पहले कुछ मिनट
तापमान ~10 अरब डिग्री सेल्सियस → प्रोटॉन और न्यूट्रॉन बने।
हल्के तत्वों का निर्माण हुआ: हाइड्रोजन (~75%), हीलियम (~25%), बहुत थोड़ा लिथियम और बेरिलियम।
~3,80,000 साल बाद

ब्रह्मांड इतना ठंडा हो गया (~3000 K) कि इलेक्ट्रॉन और नाभिक मिलकर पहले परमाणु बने (recombination)।
प्रकाश अब मुक्त होकर यात्रा कर सका → यही Cosmic Microwave Background (CMB) radiation है, जो आज भी हम देखते हैं।

अरबों साल बाद
गुरुत्वाकर्षण से गैस के बादल → तारे → galaxies → आज का ब्रह्मांड।

मुख्य सबूत जो बिग बैंग को सही ठहराते हैं

ब्रह्मांड का विस्तार (Hubble's law – galaxies दूर जा रही हैं)
Cosmic Microwave Background radiation (बिग बैंग का "afterglow")
हल्के तत्वों (H, He) की सही मात्रा
दूर की galaxies में प्राचीन रासायनिक संरचना

संक्षेप में:
बिग बैंग कोई सामान्य "धमाका" नहीं था जो कहीं खाली जगह में हुआ।
यह हर जगह एक साथ हुआ — क्योंकि ब्रह्मांड खुद ही फैल रहा था। समय और स्थान का जन्म उसी क्षण हुआ।

63 साल की उम्र में नीना गुप्ता ने फिल्म पंचायत के लिए बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड जीत लिया।वहीं सीमा आनंद को उनकी शानदार कहानी...
25/01/2026

63 साल की उम्र में नीना गुप्ता ने फिल्म पंचायत के लिए बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड जीत लिया।

वहीं सीमा आनंद को उनकी शानदार कहानी कहने की कला के लिए बेस्ट स्टोरीटेलर का सम्मान मिला।

जिस उम्र में लोग आराम करने की सोचते हैं, उसी उम्र में ये महिलाएं इतिहास रच रही हैं।

इन्होंने साबित कर दिया कि टैलेंट और मेहनत की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती।

उम्र बढ़ने से सपने छोटे नहीं होते, हौसले और बड़े हो जाते हैं।

आज भारतीय औरतें बुढ़ापे में भी जीत का परचम लहरा रही हैं।

सच में — Age is just a number! 💫

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