11/01/2026
से
*श्री रामचरितमानस (बालकांड)*
*दोहा (4) चौपाई (2)*
बंदउँ संत असज्जन चरना । दुखप्रद उभय बीच कछु बरना ॥ बिछुरत एक प्रान हरि लेहीं। मिलत एक दुख दारुन देहीं ॥
मैं संतों और असंतों दोनों के चरणों की वन्दना करता हूँ; दोनों ही दुःख देनेवाले हैं, परन्तु उनमें एक सकारात्मक पक्ष यह है कि एक (संत) तो बिछुड़ते समय प्राण हर लेते हैं और दूसरे (असंत) मिलते हैं तब दारुण दुःख देते हैं। #श्रीरामचरितमानस #सतसंग #पाठ #महाराज 🙏💫🕉️💖