स्नेहालया,सामाजिक उत्थान के लिए और विशेषकर समाज के उस दबे पिछड़े तबके के लिए जिसे सामाजिक अछूत मान लिया जाता है, के लिए कम करती है| स्नेहालया का उद्देश्य है कि एक ऐसा समाज का निर्माण किया जाये जहां मानवता ही धर्म हो और समभाव उसकी आत्मा| स्नेहालया में हम उन बच्चों को शिक्षा देते है जो किसी न किसी वजह से उससे मरहूम रह जाते है, हम उनको शिक्षा के रूप में वो धन देते है जिससे वो अपना भविष्य अपने बल पे बन
ा सके. उन्हें किसी के आगे झुकाना न पड़े ,मजबूर न होना पड़े, वो अपनी राहे खुद बनाये और अपनी मंजिले खुद तय करे| जिंदगी कि आपाधापी में और परिस्थितियों के सामने उन बच्चों ने अपने जिन सपनो को समय के साथ ख़त्म कर लिया है, स्नेहालया में हम उन्हें पूरा करने का एक सार्थक प्रयास करते है| हम अपने प्रयास से अगर एक भी जिंदगी बदल सके तो शायद स्नेहालया का एक उद्देश्य पूरा हो जायेगा|
स्नेहालया सिर्फ बच्चो के लिए ही नहीं बल्कि उन महिलाओं के लिए भी काम करती है जिन्होंने अपनी जिंदगी कभी शुरू ही नही की, हमेशा से दूसरो के ऊपर निर्भर रही और घर कि चार दीवारी में न चाहते हुए भी कैद होकर रह गयी है, जिनके अपने लिए कोई सपने ,कोई सोच ही नही है , जो अपना अस्तित्व जानती ही नही है, ऐसी महिलाओं को स्नेहालया रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रदान करके उन्हें आत्मनिर्भर बनाती है,उन्हें भी समाज का एक महत्वपूर्ण अंग बनाती है जहाँ उनकी भी इच्छाओं कि क़द्र हो | कम से कम उन्हें भी ये एहसास हो की जो अनमोल जिंदगी भगवन ने उन्हें दी है जिसे वो सिर्फ काटती आ रही है उसको जीने का हक भी उन्हें है| उनका जन्म सिर्फ अत्याचार सहने के लिए नहीं हुआ है|
एक नारी को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना और उसे उस लायक बनाना कि वो अपने हक के लिए लड़ सके ये भी स्नेहालया का उद्देश्य है| स्नेहालया में हम घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को उचित क़ानूनी सलाह प्रदान करते है और उन्हें मानसिक तौर पर मजबूत बनाते है|