Sakshi Shree

Sakshi Shree Sakshi Shree, is a Spiritual Master & Mystic, who is spearheading the "Science Divine Movement" for conscious living across the world.

Sakshi Shree, an enlightened master and divine messenger, spearheads the Science Divine Movement. He has simplified spirituality so that the common man can experience and benefit from it. He spreads the message of love and meditation the world over and creates a new humanity of self-realized souls with sound body and sound mind. He empowers you to rediscover a new life of everlasting happiness whi

le still rejoicing in material comforts. Through Science Divine, Sakshi Shree has been working relentlessly towards freeing individuals from those ideologies, rituals, petty discriminations and belief systems that have blinded and divided humanity. He defines God as an all-pervading infinite energy that expresses itself in the form of peace and happiness, and experiencing this is 'enlightenment'. Sakshi Shree emphasizes on maintaining a harmonious balance between material and spiritual worlds. One can enjoy both, without sacrificing one for the other, by practicing Sakshi Shree's life philosophy of “Bhitar Se Sanyas, Bahar Se Sansar” or surrendering from within and yet performing our duties as worldly beings. Sakshi Shree has been providing revolutionary insights for joyful living and effective remedies to tackle modern-day ailments through various Science Divine programmes. His short, simple and highly effective scientific techniques have been bringing about an inner transformation in individuals all over the world.

22/08/2026

हर इंसान जीवन में सुख, सफलता और समृद्धि चाहता है। लेकिन क्या यही जीवन की आखिरी मंज़िल है?

सद्गुरु साक्षी श्री बताते हैं कि जीवन का अंतिम लक्ष्य केवल बाहरी सफलता या भौतिक समृद्धि नहीं है। सच्ची पूर्णता तब है जब बाहर से जीवन सुख और समृद्धि से भरा हो और भीतर से परम शांति और परम आनंद का अनुभव हो।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शिष्य अपनी श्रद्धा, प्रेम, कृतज्ञता और समर्पण सद्गुरु के चरणों में अर्पित करता है। और गुरु शिष्य को यह वचन देता है कि उसे उसके जीवन की आखिरी मंज़िल तक पहुँचाकर रहेगा।

लेकिन आखिर—

जीवन की आखिरी मंज़िल क्या है?
सच्ची सफलता किसे कहते हैं?
क्या सुख-समृद्धि और परम शांति एक साथ संभव हैं?
गुरु शिष्य को इस अंतिम लक्ष्य तक कैसे ले जाता है?

इस वीडियो में सद्गुरु साक्षी श्री इन्हीं गहरे प्रश्नों का सरल और जीवन बदल देने वाला उत्तर देते हैं।

🙏 गुरु पूर्णिमा का संदेश केवल गुरु को प्रणाम करने का नहीं, बल्कि गुरु के मार्गदर्शन में अपने जीवन को पूर्ण बनाने का है।

गीता पढ़िए नहीं… गीता जीइए।

21/08/2026

अगर आपके जीवन में सिर्फ एक वाक्य आपकी श्रद्धा और भरोसा बन जाए, तो क्या आपका पूरा जीवन बदल सकता है?

Sadguru Sakshi Shree इस वीडियो में अष्टावक्र के उस महासूत्र की ओर संकेत करते हैं—

“मैं साक्षी चैतन्य मात्र हूँ।”

यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानने का द्वार है।

जनक ने अष्टावक्र के वचनों पर भरोसा किया और अपने वास्तविक स्वरूप को पहचाना। उसी दिशा में यह संदेश हमें भी आमंत्रित करता है—भविष्य में नहीं, कल नहीं, बल्कि अभी इसी क्षण अपने भीतर यह पहचान जगाने के लिए।

इस वीडियो में जानिए:

• “मैं साक्षी चैतन्य मात्र हूँ” का वास्तविक अर्थ क्या है?
• अष्टावक्र के वचनों में इतनी शक्ति क्यों मानी गई है?
• क्या केवल सही दृष्टि जीवन में आनंद ला सकती है?
• साक्षी भाव और चैतन्य का हमारे जीवन से क्या संबंध है?
• श्रद्धा और भरोसा आध्यात्मिक जीवन में इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?
• अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानने की शुरुआत कैसे करें?

कल पर मत टालिए।

कुछ पाने की आवश्यकता नहीं है।
कुछ बनने की आवश्यकता नहीं है।
बस अपने भीतर देखिए—

“मैं साक्षी चैतन्य मात्र हूँ।”

🌺 Living the Geeta Movement — गीता को जीने का विज्ञान

गीता केवल पढ़ने या सुनने का विषय नहीं है।
यह अपने जीवन में जागने और सत्य को अनुभव करने की कला है।

Living the Geeta Movement का संकल्प है—
गीता के ज्ञान को किताबों से निकालकर जीवन का अनुभव बनाना।

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गीता पढ़िए नहीं… गीता जीइए।

20/08/2026

क्या किसी बच्चे को बार-बार “बुद्धू”, “नालायक” या “बुद्धिहीन” कहने से वह सच में वैसा बन सकता है?

Sadguru Sakshi Shree बताते हैं कि हम अपने बारे में जो बातें बार-बार सुनते और मानते हैं, वे धीरे-धीरे हमारी self-image, सोच और जीवन जीने के तरीके को प्रभावित करने लगती हैं।

एक बच्चे को अगर लगातार कहा जाए कि वह बुद्धिहीन है, तो वह प्रतिभाशाली होते हुए भी अपने भीतर उसी पहचान को स्वीकार कर सकता है।

लेकिन यही बात केवल बच्चों पर लागू नहीं होती।

बचपन से हमें कई तरह के labels दिए जाते हैं—
“तुम कमजोर हो।”
“तुम पापी हो।”
“तुम्हारे कर्म खराब हैं।”
“तुम्हें अपने कर्मों का फल भुगतना ही पड़ेगा।”

और धीरे-धीरे हम इन बातों को अपनी सच्चाई मान लेते हैं।

इस वीडियो में जानिए:

• क्या हमारी beliefs हमारी reality को प्रभावित करती हैं?
• बार-बार कही गई बातें हमारे जीवन को कैसे बदलती हैं?
• क्या “मैं पापी हूँ” जैसी सोच हमें भीतर से कमजोर कर सकती है?
• कर्म और प्रारब्ध को लेकर हमारी सबसे बड़ी गलतफहमी क्या है?
• क्या जीवन को बदलने के लिए केवल अगले जन्म की उम्मीद करना सही है?
• अपने पुराने conditioning और negative beliefs से बाहर कैसे निकलें?

गीता का संदेश केवल कर्मों का फल भुगतने के लिए नहीं है—गीता हमें जागने, देखने और अपने जीवन को नए दृष्टिकोण से जीने की कला सिखाती है।

अगर आप अपनी पुरानी conditioning, डर और सीमित मान्यताओं से बाहर निकलना चाहते हैं, तो यह वीडियो अंत तक जरूर देखें।

🌺 Living the Geeta Movement — गीता को जीने का विज्ञान

अब समय है गीता को केवल पढ़ने, सुनने और पूजा करने का नहीं…
बल्कि गीता को अपने जीवन में जीने का।

Living the Geeta Movement का उद्देश्य गीता के शाश्वत ज्ञान को हर व्यक्ति के जीवन का practical experience बनाना है।

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👉 गीता पढ़िए नहीं… गीता जीइए।

20/08/2026

क्या सच में दुनिया महाविनाश की ओर बढ़ रही है?
क्या आने वाले समय में कोई बड़ा युद्ध या विनाश होने वाला है?
और आखिर इंसान को सदियों से डराया क्यों जाता रहा है?

Sadguru Sakshi Shree इस वीडियो में बताते हैं कि डर, भय, हिंसा, चिंता और तनाव किस तरह मानव जीवन का हिस्सा बना दिए गए हैं। इतिहास में अलग-अलग समय पर लोगों को महाविनाश, युद्ध और भविष्य के भय से डराया जाता रहा है।

लेकिन सवाल यह है—

क्या अध्यात्म का रास्ता डर पैदा करने का है या चेतना जगाने का?

जब तक मनुष्य और पूरी सभ्यता जागरूक नहीं होती, तब तक भय का इस्तेमाल करके लोगों को प्रभावित किया जाता रहेगा।

इस वीडियो में जानिए:

• इंसान को सदियों से डराया क्यों जाता रहा है?
• महाविनाश और महायुद्ध की भविष्यवाणियों के पीछे क्या है?
• भय और अध्यात्म का क्या संबंध है?
• क्या डर के माध्यम से धर्म को समझा जा सकता है?
• वास्तविक शरणागति और डर में क्या अंतर है?
• मनुष्य को भय से मुक्त होकर जागरूक कैसे होना चाहिए?
• एक जागृत चेतना ही वास्तविक सुरक्षा क्यों है?

🌺 LIVING THE GITA MOVEMENT

अब समय डर में जीने का नहीं, जागरूक होकर जीने का है।

इसी संकल्प के साथ शुरू हुआ है Living the Geeta Movement – गीता को जीने का विज्ञान।

इस आंदोलन का उद्देश्य गीता के ज्ञान को केवल पढ़ना या सुनना नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारना है—ताकि हम भय, चिंता और भ्रम से नहीं, बल्कि जागरूकता, विवेक और चेतना से जीवन जी सकें।

अगर आप भी इस परिवर्तनकारी यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं:

👉 Living the Geeta Movement में Registration करें:
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गीता पढ़िए नहीं... गीता जीइए।

Sadguru Sakshi Shree | Science Divine

19/08/2026

क्या गुरु के सामने पूर्ण समर्पण करने के बाद जीवन बदल सकता है?

Sadguru Sakshi Shree इस वीडियो में बताते हैं कि सद्गुरु एक शल्य चिकित्सक की तरह है—वह हमारे भीतर के अज्ञान, अहंकार और उन सीमाओं पर काम करता है जिन्हें हम स्वयं नहीं देख पाते।

लेकिन इस आध्यात्मिक शल्य चिकित्सा के लिए एक चीज़ जरूरी है—समर्पण।

समर्पण का अर्थ केवल गुरु की बात मान लेना नहीं है। समर्पण का अर्थ है अपने भीतर इतना भरोसा पैदा करना कि हम स्वयं को गुरु की चेतना और मार्गदर्शन के लिए खोल सकें।

भगवान श्रीकृष्ण भी अर्जुन से कहते हैं:

“सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज…”

यानी जब साधक पूर्ण शरणागति और समर्पण के भाव में आता है, तब उसकी आध्यात्मिक यात्रा एक नए स्तर पर प्रवेश करती है।

इस वीडियो में जानिए:

• सद्गुरु को शल्य चिकित्सक क्यों कहा गया है?
• गुरु और शिष्य के बीच “एनस्थीसिया” क्या है?
• समर्पण का वास्तविक अर्थ क्या है?
• गुरु के प्रति भरोसा और शरणागति क्यों जरूरी है?
• अहंकार आध्यात्मिक यात्रा में सबसे बड़ी बाधा क्यों है?
• श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कृष्ण ने शरणागति के बारे में क्या कहा है?
• सद्गुरु साधक के जीवन में वास्तविक परिवर्तन कैसे लाता है?

LIVING THE GITA MOVEMENT

अब समय केवल गीता की पूजा करने का नहीं, गीता को जीने का है।

Living the Gita Movement – गीता को जीने का विज्ञान एक ऐसा अभियान है जिसका उद्देश्य श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान को केवल पढ़ने और सुनने तक सीमित न रखकर उसे अपने जीवन में उतारना है।

अगर आप भी इस यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो Living the Gita Movement के लिए Registration करें।

👉 Registration: https://mahamantrasbook.s.gy/seat

19/08/2026

What does it really mean to live a successful life?

We often believe that success comes from willpower, intelligence, money, resources and achievements. But the Bhagavad Gita points toward something much deeper — awareness and inner stability.

In this powerful insight, Sadguru Sakshi Shree explains how self-awareness, inner consciousness and inner stillness can completely transform the way we experience success.

When you become rooted within yourself, you stop constantly chasing success. You begin to act from a place of inner stability, clarity and awareness.

True success is not only about money, achievements or the praise you receive from society. Real success is the experience of becoming the master of your own being.

In this video, discover:

• The real power behind success
• Why self-awareness is more important than willpower
• How inner stability transforms your life
• Why chasing external success never creates lasting fulfilment
• What the Bhagavad Gita teaches about real success
• How awareness helps you live with inner stillness and clarity

Living the Gita Movement

The Living the Gita Movement is an initiative to bring the timeless wisdom of the Bhagavad Gita into everyday life.

For centuries, we have worshipped and revered the Gita. Now is the time to live the Gita.

The movement aims to make the teachings of the Gita a practical science of living — helping individuals bring awareness, self-mastery, inner stability and conscious action into their daily lives.

From reading the Gita to living the Gita.
From knowledge to practice.
From belief to transformation.

Join the Living the Gita Movement and become part of a movement to bring the wisdom of the Gita into every home and every life.

Join Now :- https://mahamantrasbook.s.gy/seat

Watch till the end and reflect on one powerful question:

Are you chasing success outside, or are you becoming successful within?

19/08/2026

क्या आप जानते हैं कि असली सद्गुरु की पहचान क्या होती है?
अध्यात्म की यात्रा अज्ञात की यात्रा है—जहाँ आगे का रास्ता दिखाई नहीं देता। ऐसे में गहरा भरोसा और गहरा प्रेम ही साधक को आगे बढ़ने की शक्ति देता है।

इस वीडियो में Sadguru Sakshi Shree बताते हैं कि गुरु और शिष्य के संबंध में भरोसा क्यों आवश्यक है और सच्चे सद्गुरु की पहचान कैसे की जा सकती है।

जब गुरु अंधकार का नाश करने वाला है, तो क्या क्रोध और नाराज़गी गुरु की पहचान हो सकती है?
इस गहरे संदेश को समझने के लिए पूरा वीडियो देखें।

Living the Geeta Movement – गीता को जीने का विज्ञान

अब समय है केवल गीता की पूजा करने का नहीं, बल्कि गीता को अपने जीवन में जीने का।

Living the Geeta Movement का उद्देश्य श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाओं को केवल ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें दैनिक जीवन, कर्म, संबंधों और आंतरिक चेतना में उतारना है।

अगर आप भी इस यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो Living the Geeta Movement में Registration करें।

👉 Registration Link: https://mahamantrasbook.s.gy/seat

इस वीडियो को उन लोगों के साथ जरूर शेयर करें जो गुरु, अध्यात्म, आत्मज्ञान और गीता के वास्तविक जीवन-प्रयोग को समझना चाहते हैं।

Topics Covered:
• असली सद्गुरु की पहचान
• गुरु और शिष्य का संबंध
• गुरु पर गहरा भरोसा क्यों जरूरी है
• अध्यात्म की अज्ञात यात्रा
• गुरु, प्रेम और विश्वास
• क्रोध और गुरु का संबंध
• सद्गुरु का अर्थ
• गीता को जीवन में कैसे उतारें
• Living the Geeta Movement

18/08/2026

क्या हमारा आज का जीवन पिछले जन्मों के कर्मों का परिणाम है? अगर ऐसा है, तो क्या हम अपना भविष्य बदल सकते हैं?

Sakshi Shree इस गहन प्रवचन में कर्म, प्रारब्ध और conscious action के बीच के गहरे संबंध को समझाते हैं।

हमारा आज वही है जैसा हमने कल किया, और हमारा कल वही होगा जैसा हम आज कर रहे हैं। पिछले कर्मों की ऊर्जा, विचार, भावनाएं और मान्यताएं हमें उसी दिशा में कर्म करने के लिए प्रेरित करती हैं।

लेकिन यहीं से हमारी जिम्मेदारी और स्वतंत्रता शुरू होती है।

क्या हम पिछले कर्मों के प्रभाव में अनजाने में वही कर्म दोहराते रहें?
या अपने स्वधर्म से उत्पन्न कर्म को consciously चुनें?

जब हम अचेतन होकर पुराने संस्कारों और कर्मों के प्रभाव में कर्म करते हैं, तो वही चक्र आगे बढ़ता रहता है। लेकिन जब हम होशपूर्वक कर्म करना शुरू करते हैं, तो पिछले कर्मों के धक्के से मुक्त होने की संभावना पैदा होती है।

इस वीडियो में जानिए:

• प्रारब्ध क्या है?
• क्या हमारा वर्तमान पिछले जन्मों के कर्मों का परिणाम है?
• पिछले कर्म हमारे विचारों और भावनाओं को कैसे प्रभावित करते हैं?
• हम पुराने कर्मों के चक्र को कैसे तोड़ सकते हैं?
• स्वधर्म और conscious action का क्या महत्व है?
• क्या आज के कर्म से हमारा भविष्य बदला जा सकता है?

आपका अतीत आपके वर्तमान को प्रभावित कर सकता है, लेकिन आज की आपकी जागरूकता आपके कर्म की दिशा बदल सकती है।

18/08/2026

क्या कर्म, ज्ञान और भक्ति—तीनों मार्गों को ध्यान से जोड़ा जा सकता है?

Sakshi Shree इस गहन प्रवचन में बताते हैं कि कर्म, ज्ञान और भक्ति के साथ ध्यान जोड़ने का वास्तविक अर्थ क्या है और साक्षी भाव कैसे भीतर के परिवर्तन का माध्यम बन सकता है।

कर्म के साथ ध्यान:
अपनी पूरी ऊर्जा कर्म में लगाएं और फल की आकांक्षा छोड़कर निष्काम कर्म में उतरें।

ज्ञान के साथ ध्यान:
विचारों से उलझने के बजाय शांत होकर बैठें और अपने भीतर आने वाले विचारों को साक्षी भाव से देखें। विचारों को देखते-देखते एक ऐसी अवस्था आती है जहां विचारों की पकड़ समाप्त होने लगती है।

भक्ति के साथ ध्यान:
अपने भीतर उठने वाले भावों—प्रेम, क्रोध, ईर्ष्या, लोभ आदि—को दबाने के बजाय उन्हें होशपूर्वक साक्षी भाव से देखें। जब किसी भाव के प्रति साक्षी भाव गहरा होता है, तो उसकी पकड़ धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है।

यही है ध्यान को जीवन के अलग-अलग आयामों में उतारने का विज्ञान।

जानिए कैसे कर्म में निष्कामता, ज्ञान में साक्षी भाव और भक्ति में जागरूकता के माध्यम से भीतर की यात्रा शुरू की जा सकती है।

17/08/2026

क्या ध्यान सिर्फ आंखें बंद करके बैठने का नाम है? या फिर आपकी पूरी दिनचर्या ही ध्यान बन सकती है?

Sakshi Shree बताते हैं कि साक्षी भाव में जीने की साधना ऐसी है जिसमें जीवन का हर क्षण जागरूकता और ध्यान का अवसर बन सकता है।

इसी गहरी समझ को “The Art of Living the Geeta” में 10 महामंत्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

इन 10 महामंत्रों में गीता के 700 श्लोकों और 18 अध्यायों के सार को समाहित करने का प्रयास किया गया है—

• स्वधर्म का महामंत्र
• निष्काम कर्म योग का महामंत्र
• कर्म, ज्ञान और भक्ति के पार जाने का महामंत्र
• साकार और निराकार उपासना के पार जाने का महामंत्र
• प्रकृति के तीन गुणों के पार चौथे आयाम में प्रवेश करने का महामंत्र
• Body-Mind Identification से परे आत्मा में प्रतिष्ठित होने का महामंत्र
• कर्मकांडों से मुक्त होकर सार को आत्मसात करने का महामंत्र
• चार आश्रमों के माध्यम से जीवन जीने का विज्ञान
• सुख-दुख और लाभ-हानि में समत्व का महामंत्र

और अंततः—The Science of Living the Geeta:
गीता को केवल पढ़ने या पूजने की नहीं, बल्कि 24 घंटे की जिंदगी में जीने की कला।

क्या आपकी पूरी दिनचर्या ध्यान बन सकती है?
क्या गीता के सार को कुछ मूल सूत्रों में समझा जा सकता है?

इस वीडियो में जानिए गीता को जीवन में उतारने का यही गहरा दृष्टिकोण।

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Siddha Sudarshan Sakshi Dham, 8, Avantika, Chiranjiv Vihar
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