22/08/2026
हर इंसान जीवन में सुख, सफलता और समृद्धि चाहता है। लेकिन क्या यही जीवन की आखिरी मंज़िल है?
सद्गुरु साक्षी श्री बताते हैं कि जीवन का अंतिम लक्ष्य केवल बाहरी सफलता या भौतिक समृद्धि नहीं है। सच्ची पूर्णता तब है जब बाहर से जीवन सुख और समृद्धि से भरा हो और भीतर से परम शांति और परम आनंद का अनुभव हो।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शिष्य अपनी श्रद्धा, प्रेम, कृतज्ञता और समर्पण सद्गुरु के चरणों में अर्पित करता है। और गुरु शिष्य को यह वचन देता है कि उसे उसके जीवन की आखिरी मंज़िल तक पहुँचाकर रहेगा।
लेकिन आखिर—
जीवन की आखिरी मंज़िल क्या है?
सच्ची सफलता किसे कहते हैं?
क्या सुख-समृद्धि और परम शांति एक साथ संभव हैं?
गुरु शिष्य को इस अंतिम लक्ष्य तक कैसे ले जाता है?
इस वीडियो में सद्गुरु साक्षी श्री इन्हीं गहरे प्रश्नों का सरल और जीवन बदल देने वाला उत्तर देते हैं।
🙏 गुरु पूर्णिमा का संदेश केवल गुरु को प्रणाम करने का नहीं, बल्कि गुरु के मार्गदर्शन में अपने जीवन को पूर्ण बनाने का है।
गीता पढ़िए नहीं… गीता जीइए।