DaanvaPench Foundation

DaanvaPench Foundation Daanv Pench Foundation, is a Non Frofit Organisation for women who are financially not well to help them in the term of law. Will never charge to anyone.

Any one in india can contact us for help. Mail us - [email protected] "SAHYOG SANSKAR SANSTHA" is a social organization which takes initiative in uplifting society in terms of education and health issues. In today's time, our needs and expectations towards our lives has stopped us for being sensitive towards people, who are not in a situation to arrange bread for themselves. So with the help o

f "Sahyog Sanskar Sanstha" our intention is to make people aware about their responsibilities towards social upliftment. To make them incline voluntarily towards what they can do for the people who need more care from us. "Sahyog Sanskar Sanstha" gives wings to the aspiration to those who want a better life for themselves and for their kids.

09/08/2026

जज साहब ने क़ानून को बचा लिया । ऐसे जजों से क़ानून जीवित है । देखिये वीडियो और शेयर करिये ।

01/08/2026

क्या आपके साथ भी ऐसा होता है ?

जानें अपना क़ानून ।

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14/07/2026

क्या ऐसा सम्भव है ?

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10/07/2026

Ek pita ko Sahab ne khoob fatkara |

समाचार - माननीय मुम्बई हाईकोर्ट ने कल अपने एक अहम फ़ैसले में यह निर्देश दिया । माननीय कोर्ट ने कहा कि यदि सेवा के आधार प...
10/07/2026

समाचार -

माननीय मुम्बई हाईकोर्ट ने कल अपने एक अहम फ़ैसले में यह निर्देश दिया । माननीय कोर्ट ने कहा कि यदि सेवा के आधार पर कोई पुत्र / पुत्री माता पिता की सम्पत्ति ट्रांसफ़र करवा लेता है और समय के साथ सेवा नहीं करता है तो कोर्ट उस ट्रांसफ़र हुई सम्पत्ति को रद्द कर सकता है ।

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⚖️  इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस प्रवीण कुमार गिरी की पीठ ने झांसी के अतिरिक्त प्रधान जज, फैमिली कोर्ट श्री हरिशचंद्र से ...
10/07/2026

⚖️ इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस प्रवीण कुमार गिरी की पीठ ने झांसी के अतिरिक्त प्रधान जज, फैमिली कोर्ट श्री हरिशचंद्र से यह स्पष्ट करने को कहा है कि जब रिकॉर्ड पर यह तथ्य मौजूद था कि तलाक के बाद पत्नी ने दूसरा विवाह कर लिया है, तब भी पहले पति को पत्नी के लिए ₹10,000 प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश किस आधार पर पारित किया गया।

मामले के अनुसार, 30 जुलाई 2025 को झांसी फैमिली कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच तलाक की डिक्री पारित की थी। इसके लगभग एक महीने बाद पत्नी ने दूसरा विवाह कर लिया। पति का दावा है कि पत्नी ने अपने शपथपत्र में स्वयं पुनर्विवाह की जानकारी दी थी और CrPC की धारा 125 के तहत चल रही गुजारा भत्ता की कार्यवाही में उसने इस संबंध में आपत्ति भी दर्ज कराई थी। इसके बावजूद फैमिली कोर्ट ने पत्नी के लिए ₹10,000 प्रतिमाह और पुत्र के लिए ₹5,000 प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश पारित कर दिया।

इस आदेश को चुनौती देते हुए पति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया और कहा कि वह अपने पुत्र के भरण-पोषण की राशि देने को तैयार है तथा उसका भुगतान भी कर रहा है, लेकिन पुनर्विवाह कर चुकी पत्नी को पहले पति से गुजारा भत्ता देने का आदेश कानून के अनुरूप नहीं है। उल्लेखनीय है कि CrPC की धारा 125 के अनुसार, तलाकशुदा महिला तभी गुजारा भत्ता पाने की पात्र होती है, जब तक उसने दूसरा विवाह न किया हो।

सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रवीण कुमार गिरी ने फैमिली कोर्ट के जज श्री हरिशचंद्र से स्पष्टीकरण मांगा है और मामले में पत्नी को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 21 जुलाई तय की है।

📌Case Title: Rajesh Chaturvedi vs. State of U.P. and Anr. | Criminal Revision No. 3561 of 2026

💬 इस मामले पर आपकी क्या राय है? क्या पुनर्विवाह के बाद पहले पति से गुजारा भत्ता मिलना चाहिए? अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताएं।

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10/07/2026

समझिये । क्या है ?

लाल घेरे में महोदय को ध्यान से देखिए, इनका नाम अविनाश पाण्डेय है। 2015 बैच के आईपीएस (IPS) अधिकारी हैं और वर्तमान में वर...
09/07/2026

लाल घेरे में महोदय को ध्यान से देखिए, इनका नाम अविनाश पाण्डेय है। 2015 बैच के आईपीएस (IPS) अधिकारी हैं और वर्तमान में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के पद पर मेरठ जिले की कमान संभाल रहे हैं। आमतौर पर इनको एक तल्ख़ मिजाजी और चिड़चिड़ा (Short Tempered) व्यक्ति के रूप में भी जाना जाता है।

बुधवार को मेरठ में प्रदर्शन कर रहे कुछ लोगों को एसएसपी साहब ने दौड़ा-दौड़ाकर थप्पड़ मारा। इतना ही नहीं, वैन में घुसकर लोगों को जमकर पीटा और फिर लाठीचार्ज करवा दिया। यह तो वहां मौजूद सैकड़ों प्रदर्शन कर रहे लोगों और मीडिया के सामने की घटना थी, न जाने उन प्रदर्शनकारियों के साथ कप्तान साहब ने अंदर क्या-क्या जुल्म किया होगा?

ऐसे पुलिस के विरूद्ध माननीय कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेना चाहिये ।

07/07/2026

Agar apke contact me koi aise jhel rha hai to forward kriye ye reel | kanoon | Daanvpench |

पुलिस मुठभेड़ में पैरों में गोली मारने पर हाईकोर्ट खफा — सजा देना न्यायपालिका का कामइलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस मुठभेड़ों...
06/07/2026

पुलिस मुठभेड़ में पैरों में गोली मारने पर हाईकोर्ट खफा — सजा देना न्यायपालिका का काम

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस मुठभेड़ों में आरोपियों के पैरों में गोली मारने की बढ़ती घटनाओं पर सख्त नाराजगी जताई है। जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने कहा कि किसी भी आरोपी को सजा देने का अधिकार सिर्फ न्यायपालिका के पास है, पुलिस के पास नहीं।

यह टिप्पणी कोर्ट ने राजू उर्फ राजकुमार की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए की, जिसे सशर्त जमानत दे दी गई। कोर्ट ने पाया कि हाल में छोटे अपराधों जैसे चोरी या लूट के मामलों में भी पुलिस मुठभेड़ दिखाकर आरोपियों के पैरों में गोली मार रही है, और इस मामले में किसी पुलिसकर्मी को चोट न आना संदेह पैदा करता है।

कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद और डीजीपी राजीव कृष्णा को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तलब किया, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के सख्त पालन का भरोसा दिलाया।

हाईकोर्ट ने पीयूसीएल बनाम महाराष्ट्र राज्य फैसले का हवाला देते हुए निर्देश दिए कि मुठभेड़ में मौत या गंभीर चोट पर तुरंत एफआईआर दर्ज हो, स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए, और मुठभेड़ के तुरंत बाद पुलिसकर्मियों को कोई पुरस्कार या पदोन्नति न दी जाए।

कोर्ट ने चेतावनी दी कि इन निर्देशों की अनदेखी पर पुलिस अधिकारी अवमानना के जिम्मेदार होंगे।

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Ghaziabad
201005

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