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नई आमद: "तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठा : पंडित विद्यानिवास मिश्र की साहित्य साधना"
05/03/2026

नई आमद: "तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठा : पंडित विद्यानिवास मिश्र की साहित्य साधना"

प्रतिष्ठित साहित्यकार आदरणीय  #गीताश्री जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं !!
31/12/2025

प्रतिष्ठित साहित्यकार आदरणीय #गीताश्री जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं !!

 :  #बंधक (उपन्यास) #लेखक : वरिष्ठ साहित्यकार Kshama Kaul  जी  : नब्बे में भारत में एक हौलनाक, लज्जास्पद राजनीतिक घटना घ...
11/11/2025

: #बंधक (उपन्यास)
#लेखक : वरिष्ठ साहित्यकार Kshama Kaul जी

:
नब्बे में भारत में एक हौलनाक, लज्जास्पद राजनीतिक घटना घटी। कश्मीर में हिंदू जिनोसाइड। इस समय के आसपास जो बच्चे जन्मे थे वे अकथनीय संकटों, भयानक कष्टों और अभावों में टैंटों में पले। ये युवा हुए तो सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया। २००६ ईस्वी में तत्कालीन प्रधानमंत्री ने एक पैकेज की घोषणा की जिस पर अमानवीय, असंवैधानिक, डरावनी शर्तें रखी गई और जिसके नाम पर इन्हें अभिशप्त जीवन जीने को बाध्य किया गया। इन्हें तड़पाया गया और वह क्रूरता और अधिकार हनन का यह क्रम जारी है....इस की बहुपक्षीय पड़ताल करता है उपन्यास " बंधक"।

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 #भारत_का_सांस्कृतिक_स्वभाव (  #राजभाषा_गौरव_सम्मान_2024 से सम्मानित कृति)लेखक: वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय Neerja Madhav  ...
16/09/2025

#भारत_का_सांस्कृतिक_स्वभाव
( #राजभाषा_गौरव_सम्मान_2024 से सम्मानित कृति)
लेखक: वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय Neerja Madhav जी।

:
सत्य की खोज एक सनातन और अंतहीन यात्रा है और इस यात्रा की साक्षी बनी रही है हमारी भारतीय संस्कृति। यही साक्षी भाव इतिहास की आधार भूमि बना। इतिहास लेखन सत्य का ज्ञान प्राप्त करने के लिए एक पवित्र और शोधपरक कर्म है। देश और विश्व की राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक प्रकृति किस कालखंड में क्या रही है, यह जानने के लिए हमें इतिहास का अध्ययन करना पड़ता है। दूसरे मानव समूहों के स्वभाव, सभ्यता, शक्ति और कमजोरियों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए हम दूसरे देशों का भी इतिहास पढ़ते हैं। मानव विकास की प्रारंभिक यात्रा से लेकर 21वीं सदी आते-आते इतिहास लेखन के साथ कई तरह के विवाद जुड़ते चले गए। कहीं तिथियों और कालखंड के साथ जानबूझकर की गई भयंकर भूलें, तो कभी तथ्यों के साथ छेड़छाड़। कभी किसी विशेष विचारधारा के प्रभाव में इतिहास लेखन ने अपना दुष्प्रभाव नई पीढ़ियों पर छोड़ा तो कभी किसी अतिवाद ने इतिहास के पन्नों को अपने रंग में रंगा। इतिहास लेखक की दृष्टि यदि किंचित भी राष्ट्र विरोधी है तो वह त्रुटिपूर्ण या आंशिक सत्य ही इतिहास में देता है और हम सब जानते हैं कि खंडित दृष्टिकोण से लिखे गए छिन्न-भिन्न इतिहास का भविष्य की पीढ़ियों पर बुरा प्रभाव कुछ अधिक ही पड़ता है। यदि सत्य के साथ कोई रोचक और राष्ट्र विरोधी काल्पनिक तथ्य जोड़ दिया जाए तो उसे उत्सुकता वश लोग अधिक पढ़ते हैं और उस विचारधारा से दुष्प्रभावित भी अधिकांश हो जाते हैं। इसीलिए किसी भी राष्ट्र के इतिहास लेखक को निष्पक्ष और राष्ट्रनिष्ठ होना पहली शर्त है, अन्यथा वह राष्ट्र के विध्वंस की नींव डाल सकता है अपने इतिहास लेखन के द्वारा। इतिहास लेखन मात्र लेखन की एक विधा नहीं है अपितु अतीत का निर्माण है। यह निर्माण मजबूत और राष्ट्र के हित का होना चाहिए।

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वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय नीरजा माधव Neerja Madhav  जी को उनकी महत्वपूर्ण कृति  #भारत_का_सांस्कृतिक_स्वभाव पर  #भारत_सरका...
21/08/2025

वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय नीरजा माधव Neerja Madhav जी को उनकी महत्वपूर्ण कृति #भारत_का_सांस्कृतिक_स्वभाव पर #भारत_सरकार_राजभाषा_विभाग का " #राजभाषा_गौरव_सम्मान_2025" मिलने की हार्दिक बधाई.

प्रलेक प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह महत्वपूर्ण कृति आप अमेजॉन से प्राप्त कर सकते हैं :

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आदरणीय वरिष्ठ साहित्यकार मदन मोहन समर जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं!!Ch Madan Mohan Samar प्रलेक प्रकाशन  से प्रका...
06/08/2025

आदरणीय वरिष्ठ साहित्यकार मदन मोहन समर जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं!!
Ch Madan Mohan Samar

प्रलेक प्रकाशन से प्रकाशित मदन मोहन समर जी की पुस्तकें :
१) जीवन में कुछ और बहुत है:
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२) पानी की परत:
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  :  #रामबहादुर_राय_चिंतन_के_आयाम लेखक : वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक प्रो. Kripashankar Chaubey  जी •◾हिंदी पत्रकारिता में ...
27/06/2025

: #रामबहादुर_राय_चिंतन_के_आयाम
लेखक : वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक प्रो. Kripashankar Chaubey जी

•◾हिंदी पत्रकारिता में ऐसे व्यक्तित्व कम होते गये हैं, जिन्हें युवा पीढ़ी अपने आदर्श के रूप में सामने रख सके। परंतु 'रोल मॉडल' का अकाल भी नहीं पड़ा है। सामाजिक सरोकारों की पत्रकारिता के प्रतिनिधि हस्ताक्षर के रूप में श्री रामबहादुर राय हमारे सामने हैं। जनसत्ता, नवभारत टाइम्स, प्रथम प्रवक्ता, यथावत आदि पत्र-पत्रिकाओं में उनका जनपक्षधर पत्रकारी स्वरूप हमारे सामने है। सहज-सरल भाषा, सुरुचिपूर्ण शैली और तथ्यों की प्रामाणिकता उनके नीर-क्षीर विवेक के परिचायक हैं। उजली पत्रकारिता के साथ-साथ उनका लेखक रूप भी गहरे तक प्रभावित करता है। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर एवं विश्वनाथ प्रताप सिंह की जीवनियाँ जिस अंदाज में उन्होंने लिपिबद्ध की हैं, वह हिंदी में विरल प्रयोग है। आचार्य कृपलानी के कृतित्व को उन्होंने बड़ी प्रामाणिकता के साथ विस्मृति में खोने से बचाया है। स्वाधीनता के अमृतकाल में भारतीय संविधान पर बहस और पुनरीक्षण का ठोस आधार उनकी पुस्तक 'भारतीय संविधान-अनकही कहानी' ने रचा है। वे सादा जीवन उच्च विचार का साकार स्वरूप हैं। समावेशी स्वभाव और मानवीय संवेदना से संपृक्त आचार-विचार श्री रामबहादुर राय को सबका अपना बनाता है। इस समूची भाव-भूमि पर गहन अध्येता और लेखक प्रो. कृपाशंकर चौबे ने यह पुस्तक लिखी है। निश्चित ही नयी पीढ़ी के पत्रकारों तथा सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ताओं के लिए यह कृति सीख-सिखावन की सार्थक भूमिका निभायेगी।
- विजयदत्त श्रीधर (संस्थापक-संयोजक , सप्रे संग्रहालय)
Vijay Dutt Shridhar जी

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प्रतिष्ठित कवि आदरणीय निखिलेश्वर वर्मा जी Nikhileshwar Verma  जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।प्रलेक प्रकाशन  द्वारा...
18/06/2025

प्रतिष्ठित कवि आदरणीय निखिलेश्वर वर्मा जी Nikhileshwar Verma जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।

प्रलेक प्रकाशन द्वारा प्रकाशित निखिलेश्वर जी की पुस्तक
#कोई_राह_बाहर_निकलती_है
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कोई राह बाहर निकलती है
निखिलेश्वर प्रसाद वर्मा के लिए कविता लिखना एक सात्विक कर्म है। वह शायद चर्चा का साधन भी इसीलिए नहीं है। लगभग आधी सदी बाद उनके दूसरे संग्रह का प्रकाशन तो यही संकेत करता है। यूँ उनकी कविताएँ कभी-कभार पत्र-पत्रिकाओं में छपती रही हैं, लेकिन एक स्थान पर एक साथ उनकी छिहत्तर गहन भावबोध में पगी कविताओं को देखना और उनके साथ होना सुखद विस्मय है। अपनी रचनात्मक यात्रा में दूर तक अकेले चले एक संवेदनशील कवि की सिद्धि का प्रमाण है पाठक की भाव-समृद्धि करने वाली ये प्रौढ़, परिपक्व रचनाएँ।
संवेदना के महीन तंतुओं से मिलकर निखिलेश्वर की कविता बनती है। बाहर घट रही घटनाओं का अंतर्मन पर जो सूक्ष्म प्रभाव होता है, उसे पकड़ने की कोशिश उनकी कविताओं में दिखती है। कविता उनके लिए तात्कालिक प्रतिक्रिया का माध्यम नहीं। वे बड़े फ्रेम में चीजों को देखते हैं। पेशे से वह चिकित्सक हैं तो उतावली वे कविता रचना में भी नहीं दिखाते, बस समय की नब्ज पर धीमे से अपनी अंगुली रखते हैं और देशकाल-परिस्थिति के विषय में अपनी राय, अपना मंतव्य बनाते हैं। उनकी कविताएँ पाठक की चेतना पर धीमी दस्तक की तरह हैं, जैसे सोए बच्चे को प्यार से जगाया जाता है। पाठक जागता है और नई आँखों से जगत-व्यापार को देखने लगता है जिसमें 'हरी दूबों के पालने' अभी बचे हुए हैं, जिसमें 'एक बाड़ा विहीन धरती का चित्र' सामने है। वहीं डरे-सहमें बच्चे हैं, मुर्दा के पास सोने की कामना करती तेरह साल की बच्ची है। जहाँ धरती पर एक ही तरह का मौसम लाने को उद्धत लोग हैं, और जहाँ छाँव की तलाश करता लकड़हारा है।
निखिलेश्वर प्रसाद वर्मा की कविताएँ पाठक को यह बोध कराने में सफल दिखती हैं कि कैसे उसके अंदर की ऋजुता का, उसकी कोमल लेकिन अमूल्य भाव संपदा का हरण हो रहा है, कैसे जीवन में नमी लगातार कम पड़ती जा रही है, आँखें जिसका स्थाई आश्रय हैं। कवि धीमे से लेकिन दृढ़तापूर्वक आगाह करता है कि 'जिंदा शरीर में मुर्दा साँसें ज्यादा बड़ी त्रासदी हैं'। वास्तव में निखिलेश्वर की इन सॉफ्ट कविताओं में वर्तमान युग के संत्रास को अभिव्यक्ति मिली है। कवि स्वयं को हादसे के लिए तैयार करता है। बाजार का कसता शिकंजा उसे आतंकित करता है जो किसी 'निचुड़े प्लास्टिक की बोतल की तरह/ फेंक देता है आदमी को/ सड़क किनारे'। कवि स्वयं युद्धरत है उनसे, जो 'धरती पर एक ही तरह का मौसम लाना चाहते हैं'।
निखिलेश्वर प्रसाद वर्मा मूलतः प्रेम और औदात्य के कवि हैं। उनके यहाँ 'शहद में डूबी प्यास, 'पारे की बूँद-सी चाहत', 'गिलहरी घड़ियाँ', 'युद्धग्रस्त देश में परियाँ' जैसे अद्भुत बिम्ब मिलते हैं। उनके यहाँ संस्मृतियों का रंगीन शामियाना तना है, जैसे एक व्यामोह-सा रचा हुआ है जिसके चलते 'कदम तो चलते हैं पीछे/ सफर आगे का तय होता है'।
संग्रह की अंतिम कविता 'जेठ की दोपहर' में वर्तमान सभ्यता की इतनी कम शब्दों में ऐसी प्रखर आलोचना अत्यंत विरल है। यह याद रह जाने वाला रूपक है - 'तपता आकाश/ धरती रही दरक/ सुस्ताने के लिए/ छाँव की तलाश में/ लकड़हारा/ ढूंढ़ रहा दरख्त'। Sheo Dayal (वरिष्ठ साहित्यकार)

नई_आमद:  #गीत_उत्तरा_फाल्गुनी लेखक : वरिष्ठ साहित्यकार  nath mishra जी Book overview :साहित्य यदि समाज का दर्पण है तो गी...
03/05/2025

नई_आमद: #गीत_उत्तरा_फाल्गुनी
लेखक : वरिष्ठ साहित्यकार nath mishra जी

Book overview :
साहित्य यदि समाज का दर्पण है तो गीत हीरे की वह अंगूठी है, जिसमें पूरा युग सूक्ष्म रूप में प्रतिबिंबित होता है। वैदिक मंत्रों में ज्ञान-विज्ञान के गूढ़ अर्थ बीज रूप में समाहित हैं। जैसे आम के बीज में उसके वृक्ष की जड़, शाखा, मंजरी और फल सभी सूक्ष्म रूप में उपस्थित रहते हैं, वैसे ही वैदिक मंत्रों में भी विज्ञान के वितान से लेकर अध्यात्म के रहस्य तक सँजोए हुए हैं। आपके तप, चिन्तन- मनन से उन रहस्यों का साक्षात्कार होता है। उपन्यास की तरह बड़ा कलेवर न होने के कारण गीत विस्तार से अपने समय को आँक नहीं सकता , लेकिन अपने युग की सारी बातों को सलीके से समेट सकता है।जैसे मंत्रों में शब्दार्थ सिकुड़कर बैठते हैं,वैसे ही गीतों में व्यंजना शक्ति-सम्बलित अर्थ वामन रूप में उपस्थित होते हैं। आवश्यकता उनके डिकोड करने की है, जिसके लिए व्याख्याता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। पिछला एक दशक भारतीय समाज के लिए ऐतिहासिक रहा है जिसमें एक ओर कोरोना की विभीषिका ने नागरिकों को घरबंदी का स्वाद चखा दिया और ऐसी स्थिति उत्पन्न कर दी कि सारे रिश्ते- नाते चकनाचूर हो गए । दूसरी ओर सनातन धर्म के पुनर्जागरण ने हिंदू समाज को जीवित होने का एहसास कराया और स्वतंत्रता को सुसंस्कृत धरातल पर उतरने की ऊर्जा प्रदान की। काशी का विश्वनाथ मंदिर , अयोध्या का राम मंदिर और प्रयागराज का महाकुंभ उस दृष्टि से हमारे जीवन की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं हैं, जिन्हें सदियाँ याद कर गर्वित होंगी। पिछली आधी सदी के युगीन परिवर्तनों ने मेरे गीतों को भी प्रभावित किया है।'उत्तरा फाल्गुनी' के गीत मेरे प्रारंभिक गीतों से बिल्कुल अलग, कहीं -कहीं ज्यादा नमकीन भी लगेंगे। यह स्वाभाविक भी है क्योंकि समय के अनुसार अनुभव बदलते हैं और कविता की संरचना में अनुभव की विशेष भूमिका होती है। कविता आत्मा की सूक्ष्म अभिव्यक्ति है और गीत उस अभिव्यक्ति का चरमोत्कर्ष। वस्तुतः छंदों के सांचे में ढली कविता का सर्वांगीण सौन्दर्य ही रसिकों को रिझाता है। भारतीय जन उसी कविता को अंगीकार करते हैं जो श्रद्धा-विश्वास जगाती है,जो जीवन में 'नव गति नव लय ताल छंद नव' देती है। ………. : "बुद्धिनाथ मिश्र"

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नई आमद :  #दोज़ख़_की_हूरें लेखक : वरिष्ठ साहित्यकार Renuka Tiwari  #पुस्तकांश:जब चार चौराहे के पास एक व्यस्ततम रोड को पार...
26/04/2025

नई आमद : #दोज़ख़_की_हूरें
लेखक : वरिष्ठ साहित्यकार Renuka Tiwari

#पुस्तकांश:
जब चार चौराहे के पास एक व्यस्ततम रोड को पारकर एक बड़े से लोहे की गेट के पास रूकी, तो मुझे जेल की सलाखों की याद आई, जिनमें कैदियों को कैद रखा जाता है। तो क्या कोई आश्रय गृह कैदखाना हीं होता है। जहाँ से कोई भाग ना सके या अपनी मर्जी से आ जाना सके। आने से पहले फोन करके मैंने वहाँ की संचालिका से अनुमति ले ली थी। गेट के पास पहुँचकर मैंने कॉल किया। अच्छा आप रिर्पोटर मैडम बोल रही हैं, आ जाइए ना मैडम, ऐ दिनेस जाकर जल्दी से गेट खोल दो।

गेट खुला और जो शक्ल नज़र आया, वह बेहद हीं खतरनाक दिख रहा था। बिलकुल गुंडों जैसा। जिसको देखकर इंसान भीतर से थोड़ा घबरा जाऐ। उसने बिना आँखें मिलाए हुए कहा आ जाइऐ साहब। उसने मैडम नहीं साहब कहा मुझे। शायद सबको साहब कहते कहते आदत हो गई है। स्कूटी हिऐं छोड़ दीजिए, हम लगा देते है। मैं अंदर बढ़ने लगी।

आइए मैडम जी वेलकम है आपका। एक मझोले कद की गोरी सी औरत सिल्क की साड़ी पहने मेरी ओर आने लगी। साड़ी पहनने का जो तरीका था. ......

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 :  #गाथा_पंचकन्या लेखक: वरिष्ठ साहित्यकार Renu "Anshul"  जी।महाभारत एवं रामायण की पांच पंचकन्याएं जिन्होंने इतिहास रचा।...
25/04/2025

: #गाथा_पंचकन्या
लेखक: वरिष्ठ साहित्यकार Renu "Anshul" जी।

महाभारत एवं रामायण की पांच पंचकन्याएं जिन्होंने इतिहास रचा।
अहल्य, कुंती, मंदोदरी, तारा, पांचाली जिनके त्याग, समर्पण एवं संघर्ष की कहानी है रामायण और महाभारत।
इन पांच स्त्रियों के जीवन पर आधारित महाउपन्यास "गाथा पंचकन्या" का स्वागत कीजिए.

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