10/04/2026
रेवती की कहानी वाकई साहस की मिसाल है।
2020 के सथानकुलम (थूथुकुडी, तमिलनाडु) कस्टोडियल टॉर्चर केस में, जहां पिता पी. जयराज (58) और बेटे जे. बेनिक्स (31) को कोविड लॉकडाउन नियम तोड़ने के आरोप में थाने में बेरहमी से पीटा गया, उनकी मौत हो गई।
रेवती (हेड कांस्टेबल, उस समय कांस्टेबल) ड्यूटी पर थीं और उन्होंने अपनी आंखों से देखी क्रूरता का सच बयान किया।
क्या हुआ था उस रात?
पुलिस ने जयराज और बेनिक्स को थाने में घंटों बेरहमी से मारा —
कपड़े उतरवाए, निजी अंगों पर वार किए, लाठियां डालीं, खून बहने पर खुद साफ करवाया।
शराब पीकर बार-बार पीटते रहे। पोस्टमॉर्टम में पूरे शरीर पर गंभीर चोटें और खून से सनी लुंगियां मिलीं।
पुलिस ने सबूत मिटाने की कोशिश की — स्टेशन साफ किया, सीसीटीवी हटाया, धमकियां दीं।
लेकिन रेवती ने मजिस्ट्रेट से कहा: “मैं सब बताऊंगी, लेकिन मेरी दो छोटी बेटियों की सुरक्षा और नौकरी की गारंटी दो।”
उन्होंने बताया कि कैसे अधिकारी (इंस्पेक्टर श्रीधर, एसआई बालकृष्णन, रघुगणेश आदि) पीटते रहे, चीखें सुनाई दीं, पानी देने की कोशिश भी की गई लेकिन रोका गया।
बाद में उन्होंने जांच में मदद की — दीवारों की दरारों, फर्श और फर्नीचर से बचे डीएनए सबूत इकट्ठा करने में सीबीआई को सहयोग किया।
धमकियां, लालच और अपमान सहते हुए भी वह टिकी रहीं।फैसला और उसकी अहमियतअप्रैल 2026 में मदुरै की अदालत ने नौ पुलिसकर्मियों को हत्या और सबूत नष्ट करने का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई (रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस माना गया)।
साथ में 1.4 करोड़ रुपये मुआवजे का आदेश भी। यह फैसला सीबीआई जांच, हाईकोर्ट के हस्तक्षेप और रेवती जैसी गवाहों की बहादुरी का नतीजा है।
दसवें आरोपी की पहले ही मौत हो चुकी थी।
रेवती ने अपने ही साथियों के खिलाफ खड़े होकर आम आदमी के लिए लड़ाई लड़ी। एक साधारण महिला कांस्टेबल, दो बच्चों की मां, जिसके हाथ “बंधे” थे फिर भी conscience ने उन्हें रोक नहीं पाया।
जेठ की दुपहरी में “रेवती” बनना वाकई आसान नहीं था — लेकिन उन्होंने किया।
सच्ची पुलिसकर्मी की ताकतपुलिस व्यवस्था पर बार-बार सवाल उठते हैं, कस्टोडियल डेथ के मामले आते रहते हैं।
लेकिन रेवती जैसी लोग याद दिलाते हैं कि वर्दी में भी ईमानदारी और न्याय की किरणें बची हुई हैं।
उन्होंने न सिर्फ बयान दिया, बल्कि सबूत जुटाने में सक्रिय भूमिका निभाई। बिना उनकी गवाही के शायद यह केस भी कई अन्य कस्टोडियल मौतों की तरह दब जाता।
रेवती को सलाम।
ऐसी महिलाओं की वजह से आम आदमी को कानून और संविधान पर भरोसा बना रहता है।
नोट: यह केस “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” माना गया, लेकिन फांसी की सजा हाईकोर्ट में अपील पर अंतिम रूप लेगी।
न्याय की प्रक्रिया लंबी होती है, लेकिन इस फैसले ने पुलिस में सुधार और जवाबदेही की मांग को फिर मजबूत किया है।
साहस की ऐसी कहानियां याद रखनी चाहिए — ताकि और लोग प्रेरित हों।
#भ्रष्टाचार_निरोधक_जांच_ब्यूरो