02/06/2026
ईश्वर/भगवान के सहारे कभी कोई कार्य नही रोके। ये न सुनते है,न बोलते है, न देखते हैं और नहीं कुछ करते है।कल पर या भगवान भरोसे छोड़े गए कार्य सब बर्बाद हो जाते है।उन कार्यों को जो शुरू किए उन्हें ही पूरा करना होगा।ये सब मनुष्यों की इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है कि वह कौन सा कदम उठाएगा।जितने भी धर्म,रीति,रिवाज,मंदिर,मस्ज़िद, गुरुद्वारा, चर्च आदि सब मनुष्यों की क्रियाकलापों की देन है। मनुष्य व जनता ही निर्णय कर सकता है कि उसे अपने ऊपर किसे शासन करने देना है और किसे नहीं।अर्थात जनता की अच्छा बुरा निर्णय उसी के निर्णय का भविष्य होता है।अपनी गलती को न स्वीकार कर ,अपनी कुकर्म को छिपाने का एक अच्छा रास्ता कुछ बुद्धिजीवियों ने बनाया है, जिस पर सारा दोष लगाकर मुक्त होना चाहता।अर्थात निचोड़ यही है कि ईश्वर का मूर्त रूप कुछ बुद्धिजीवियों ने अपना स्वार्थ सिद्धि और दोसरोपण हेतु दिया है।जिसका साक्ष्य प्रमाण है कि कुछ राजाओं/सतारुढ़ शासकों/सामन्तवादों/ताकतवरों/अमीरजादों आदि ने दुनिया पर बेखौफ राज किया है।