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पौराणिक कथा के अनुसार, जब सभी देवता महिषासुर के अत्याचारों से परेशान हो गए, तब ब्रह्मा, विष्णु और शिव ने अपने तेज से मां...
01/10/2025

पौराणिक कथा के अनुसार, जब सभी देवता महिषासुर के अत्याचारों से परेशान हो गए, तब ब्रह्मा, विष्णु और शिव ने अपने तेज से मां सिद्धिदात्री को उत्पन्न किया। ऐसी मान्यता यह भी है कि भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कठिन साधना की, जिससे उन्हें देवी से अणिमा, महिमा, गरिमा जैसी आठ सिद्धियां प्राप्त हुईं। इसके बाद भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हो गया था और वह अर्धनारीश्वर कहलाए।

🌸 शुभ नवमी 🌸

पौराणिक मान्यता के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कई हजार वर्षों तक कठोर तप किया. इस तप के दौरा...
01/10/2025

पौराणिक मान्यता के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कई हजार वर्षों तक कठोर तप किया. इस तप के दौरान उन्होंने जल और अन्न का सेवन नहीं किया, जिसके कारण उनका शरीर काला हो गया. मां पार्वती की तपस्या से प्रभावित होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया. महादेव ने तपस्या के समय उनके शरीर के काले पड़ने के कारण उन्हें गंगा जल से शुद्ध किया, जिसके परिणामस्वरूप उनका शरीर पुनः चमकदार हो गया. गंगा जल के प्रभाव से उनका रंग सफेद हो गया, जिससे उन्हें महागौरी के नाम से जाना जाने लगा.

🌸 शारदीय नवरात्रि आठवें दिन की शुभकामनाएं 🌸

पौराणिक कथाओं के अनुसार, राक्षस शुंभ और निशुंभ ने अपने साथी दैत्य चंड, मुंड और रक्तबीज की मदद से देवताओं को पराजित कर दि...
29/09/2025

पौराणिक कथाओं के अनुसार, राक्षस शुंभ और निशुंभ ने अपने साथी दैत्य चंड, मुंड और रक्तबीज की मदद से देवताओं को पराजित कर दिया था और तीनों लोकों पर अपनी सत्ता स्थापित कर ली थी. इस अराजकता और अत्याचार से त्रस्त होकर इंद्र और अन्य देवताओं ने देवी दुर्गा से प्रार्थना की. तभी माता ने अपने उग्र स्वरूप, देवी चामुंडा, को धारण किया और दुष्टों का संहार किया. विशेष रूप से माता काली ने चंड, मुंड और रक्तबीज का वध कर संपूर्ण जगत में शांति और संतुलन स्थापित किया. मां काली, देवी दुर्गा का सबसे उग्र रूप हैं. उन्हें नकारात्मक शक्तियों और बुरी ऊर्जा का नाश करने वाली देवी माना जाता है। वे अपने भक्तों के जीवन से अंधकार और भय को दूर करती हैं और उन्हें सुरक्षा, साहस और मानसिक शांति प्रदान करती हैं.

🌸 शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन की शुभकामनाएं 🌸

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वनमीकथ नामक महर्षि के पुत्र कात्य से कात्य गोत्र की उत्पत्ति हुई. इसी गोत्र में आगे चलकर मह...
29/09/2025

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वनमीकथ नामक महर्षि के पुत्र कात्य से कात्य गोत्र की उत्पत्ति हुई. इसी गोत्र में आगे चलकर महर्षि कात्यायन का जन्म हुआ. उनकी कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने मां भगवती को पुत्री के रूप में प्राप्त करने की इच्छा से कठोर तपस्या की. उनकी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर मां भगवती प्रकट हुईं और वचन दिया कि वे उनके घर पुत्री रूप में अवतरित होंगी.

इसी बीच तीनों लोकों पर महिषासुर नामक दैत्य ने अत्याचार बढ़ा दिए. उसके आतंक से परेशान देवताओं ने ब्रह्मा, विष्णु और महादेव से सहायता मांगी. तब त्रिदेव के तेज से प्रकट होकर मां ने महर्षि कात्यायन के घर जन्म लिया. पुत्री के रूप में अवतरित होने के कारण वे कात्यायनी नाम से प्रसिद्ध हुईं.

कहते हैं कि महर्षि कात्यायन ने सबसे पहले तीन दिनों तक उनकी पूजा की. इसके बाद देवी ने संसार को महिषासुर, शुंभ-निशुंभ और अन्य राक्षसों के अत्याचारों से मुक्त कराया. इस प्रकार मां कात्यायनी को महिषासुरमर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है.

🌸 शारदीय नवरात्रि के छठे दिन की शुभकामनाएं 🌸

स्कंदमाता की कथा के अनुसार, तारकासुर नामक एक दैत्य ने ब्रह्माजी से वरदान मांगा कि उसकी मृत्यु केवल भगवान शिव के पुत्र के...
27/09/2025

स्कंदमाता की कथा के अनुसार, तारकासुर नामक एक दैत्य ने ब्रह्माजी से वरदान मांगा कि उसकी मृत्यु केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों हो, और शिव के विवाह न करने के कारण उसने अहंकार में तीनों लोकों में अत्याचार करना शुरू कर दिया। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव और मां पार्वती के विवाह से कार्तिकेय का जन्म हुआ। जब कार्तिकेय बड़े हुए, तो मां पार्वती ने स्कंदमाता का रूप धारण किया और कार्तिकेय को युद्ध के लिए प्रशिक्षित कर तारकासुर का वध करने के लिए तैयार किया, जिसके बाद कार्तिकेय ने तारकासुर का अंत किया।

🌸 शारदीय नवरात्रि के पांचवें की शुभकामनाएं 🌸

तृतीया तिथि दो दिन होने के कारण आज चौथे स्वरूप माँ कूष्मांडा जी की पूजा की जाएगी।एक पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब सृष्टि...
26/09/2025

तृतीया तिथि दो दिन होने के कारण आज चौथे स्वरूप माँ कूष्मांडा जी की पूजा की जाएगी।

एक पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब सृष्टि का अस्तित्व तक नहीं था और चारों ओर घोर अंधकार व्याप्त था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य शक्ति और मंद मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण इन्हें सृष्टि की आदि-स्वरूपा और आदिशक्ति कहा जाता है। उनका निवास स्थान सूर्यमंडल के मध्य लोक में माना गया है। यहां निवास करने की क्षमता और सामर्थ्य केवल मां कूष्मांडा में ही है।

मां कूष्मांडा का तेज और कांति स्वयं सूर्य के समान दैदीप्यमान है। उनकी आभा से समस्त लोक प्रकाशित हो जाते हैं। मान्यता है कि मां कूष्मांडा की उपासना करने से भक्तों के समस्त रोग-शोक, कष्ट और दुख दूर हो जाते हैं। साथ ही जीवन में आयु, यश, बल, आरोग्य और समृद्धि की वृद्धि होती है।

🌸 शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन की शुभकामनाएं 🌸

मां चंद्रघंटा की कथा के अनुसार, महिषासुर नामक दैत्य के आतंक से देवता परेशान थे। देवताओं की विनती पर ब्रह्मा, विष्णु और म...
24/09/2025

मां चंद्रघंटा की कथा के अनुसार, महिषासुर नामक दैत्य के आतंक से देवता परेशान थे। देवताओं की विनती पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश के क्रोध से निकली ऊर्जा से मां चंद्रघंटा का अवतार हुआ। माता को भगवान शिव का त्रिशूल, विष्णु का चक्र, इंद्र का घंटा और सिंह सहित कई दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्राप्त हुए। मां चंद्रघंटा ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई और तीनों लोकों में शांति स्थापित की.

इस प्रकार, मां दुर्गा ने न केवल महिषासुर के आतंक से मुक्ति दिलाई, बल्कि यह संदेश भी दिया कि जब-जब अधर्म और अत्याचार बढ़ेगा, तब-तब दिव्य शक्ति धर्म और सत्य की रक्षा के लिए अवश्य अवतरित होगी।

🌸 शारदीय नवरात्रि की तीसरे दिन की शुभकामनाएं 🌸

मां ब्रह्मचारिणी की कथा के अनुसार, वह हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्मीं और शैलपुत्री कहलाई. भगवान शिव को पति के रूप में...
23/09/2025

मां ब्रह्मचारिणी की कथा के अनुसार, वह हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्मीं और शैलपुत्री कहलाई. भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की, जिससे उन्हें 'ब्रह्मचारिणी' या 'तपश्चारिणी' नाम मिला. उन्होंने वर्षों तक केवल फल-फूल और शाक खाए, और बाद में निर्जल-निराहार रहकर तप किया, जिससे उनका शरीर क्षीण हो गया. उनकी इस कठिन तपस्या से सभी देवता और ऋषि-मुनि प्रभावित हुए और भविष्यवाणी की कि उनकी मनोकामना पूर्ण होगी. उनकी कथा से हमें धैर्य, त्याग और मन की एकाग्रता का महत्व सीखने को मिलता है.

मां ब्रह्मचारिणी की कथा हमें सिखाती है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए और धैर्य, आत्म-संयम व समर्पण से जीवन की हर कठिनाई को पार किया जा सकता है.

🌸शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन की शुभकामनाएं🌸

वंदे वांछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥ ✨️मां शैलपुत्री नवदुर्गा के नौ रूपों में ...
22/09/2025

वंदे वांछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥ ✨️

मां शैलपुत्री नवदुर्गा के नौ रूपों में पहला रूप हैं. सती के पिता, प्रजापति दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया, लेकिन शिवजी को निमंत्रण नहीं भेजा. सती अपने पति के अपमान को सहन न कर सकीं और दक्ष के यज्ञ में गईं. दक्ष ने शिव का अपमान किया, जिससे सती बहुत आहत हुईं. उन्होंने यज्ञ की अग्नि में कूदकर स्वयं का बलिदान कर दिया. शिवजी को जब यह पता चला, तो उन्होंने क्रोध में यज्ञ को विध्वंस कर दिया. इसके बाद सती ने अगले जन्म में हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया, और इसी कारण वे हिमावती या शैलपुत्री कहलाईं.

शैलपुत्री का विवाह भी भगवान शंकर से हुआ। शैलपुत्री शिवजी की अर्द्धांगिनी बनीं। इनका महत्व और शक्ति अनंत है।

🌸 शारदीय नवरात्र के पहले दिन की शुभकामनाएं 🌸

🌸🙏 ॥ Shree Ganeshay Namah ॥ 🙏🌸With utmost devotion and joy, we invite you and your family to be a part of our grand cele...
28/08/2025

🌸🙏 ॥ Shree Ganeshay Namah ॥ 🙏🌸

With utmost devotion and joy, we invite you and your family to be a part of our grand celebration of “Leo Lions Ke Rajaa” – Ganpati Bappa’s divine presence with us. ✨

✨ Maha Aarti & Mahaprasad ✨
📅 Thursday, 28th August 2025
🕗 8:00 pm onwards
📍 Greenwood Juniors School, B/h Fiesta Party Plot, Gandhidham

🌊 Ganpati Visarjan 🌊
📅 Friday, 29th August 2025
🕔 5:00 pm onwards
📍 Same Venue

🌼 Feel blessed by joining hands in prayers, singing Aartis together, and receiving Bappa’s divine blessings through Mahaprasad with your family. 🌼

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