RWF Riza wellness foundation

RWF Riza wellness foundation This is official page Health & wellness awareness ex.Disability,TB.Cancer,Hiv. Intoxication etc.

03/03/2026

RIZA WELLNESS FOUNDATION
Health Awareness Tips

अक्सर दवाएँ बंद करने से कोलेस्ट्रॉल फिर बढ़ जाता है, खासकर अगर दवा लाइफस्टाइल के साथ मिलकर LDL को कंट्रोल कर रही थी।

👉 ऐसा क्यों होता है?

1️⃣ स्टैटिन (Statins)
जैसे Atorvastatin और Rosuvastatin
ये दवाएँ लिवर में कोलेस्ट्रॉल बनने की प्रक्रिया को कम करती हैं।
➜ दवा बंद करते ही लिवर फिर से पहले की तरह LDL बनाना शुरू कर सकता है।

2️⃣ एज़ेटिमाइब (Ezetimibe)
Ezetimibe आंत से कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को कम करती है।
➜ बंद करने पर शरीर फिर से ज्यादा कोलेस्ट्रॉल अवशोषित कर सकता है।

3️⃣ PCSK9 inhibitors
जैसे Alirocumab
ये LDL को खून से हटाने में मदद करते हैं।
➜ इंजेक्शन बंद करने पर LDL तेजी से बढ़ सकता है।

👉 कितने समय में बढ़ सकता है?

कुछ लोगों में 2–4 हफ्तों में LDL फिर से ऊपर जाने लगता है।
2–3 महीनों में पुराना स्तर वापस आ सकता है (अगर लाइफस्टाइल में बदलाव नहीं है)।

👉 क्या कभी दवा बंद की जा सकती है?

हाँ, लेकिन केवल डॉक्टर की सलाह से, खासकर अगर:
आपने वजन कम किया हो
डाइट और एक्सरसाइज़ नियमित हो
LDL पहले से हल्का ही बढ़ा था
हार्ट डिज़ीज़ का रिस्क कम है
अगर पहले हार्ट अटैक, स्टेंट, या ब्लॉकेज रहा है, तो अक्सर दवा लंबे समय तक चलती है।

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RIZA WELLNESS FOUNDATION                  HEALTH AWARENESS TIPS डायबिटीज में बार-बार तेज भूख लगने को पॉलीफेजिया (Polypha...
22/02/2026

RIZA WELLNESS FOUNDATION
HEALTH AWARENESS TIPS

डायबिटीज में बार-बार तेज भूख लगने को पॉलीफेजिया (Polyphagia) कहते हैं। आज जानेंगे इसे पहचानने के आसान संकेत और कंट्रोल करने के वैज्ञानिक तरीके।”

🧠 पॉलीफेजिया होती क्यों है?

ऊर्जा की कमी का भ्रम: खून में शुगर ज्यादा रहती है, पर इंसुलिन ठीक से काम न करने पर कोशिकाएँ ग्लूकोज़ इस्तेमाल नहीं कर पातीं। दिमाग को लगता है शरीर भूखा है।
कैलोरी लॉस: ज्यादा शुगर पेशाब से निकलती है → शरीर और ऊर्जा मांगता है।
शुगर का उतार-चढ़ाव: हाई से लो होने पर अचानक तेज भूख लगती है।

🔎 लक्षण कैसे पहचानें?

खाना खाने के तुरंत बाद भी भूख लगना
बार-बार मीठा या हाई-कार्ब खाने की इच्छा
ज्यादा खाने के बावजूद थकान या वजन घटना
साथ में ये लक्षण भी दिख सकते हैं: ज्यादा प्यास (Polydipsia), बार-बार पेशाब (Polyuria), धुंधला दिखना

🚩 कब सावधान हों?

अगर ये भूख कई दिनों तक लगातार रहे, या ऊपर के लक्षण साथ हों, तो ब्लड शुगर और HbA1c चेक कराना सही रहता है।

🎥 “डायबिटीज में अगर खाना खाने के बाद भी पेट खाली-खाली लगे, तो इसे पॉलीफेजिया कहा जाता है। इसका मतलब है—शरीर को ऊर्जा नहीं मिल रही।

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#डायबिटीज

RIZA wellness foundation               Health Awareness Tips अक्सर जब किसी को पहली बार डायबिटीज (शुगर) का पता चलता है, त...
21/02/2026

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Health Awareness Tips

अक्सर जब किसी को पहली बार डायबिटीज (शुगर) का पता चलता है, तो रिएक्शन सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि भावनात्मक भी होती है।

🧠 पहली भावनात्मक प्रतिक्रिया

1️⃣ हैरानी या विश्वास न होना
“मुझे कैसे हो गई?” — क्योंकि शुरुआती लक्षण कई बार हल्के होते हैं।

2️⃣ चिंता या डर
लोग तुरंत जटिलताओं (आँख, किडनी, दिल) के बारे में सोचने लगते हैं।

3️⃣ गिल्ट या आत्म-दोष
खान-पान या लाइफस्टाइल को लेकर खुद को दोष देना आम है।

4️⃣ उलझन और सवालों की बाढ़
क्या खाना है, दवा कब लेनी है, जीवन कैसे बदलेगा—ये सबसे बड़े सवाल बन जाते हैं।

🩺 शुरुआती शारीरिक फीलिंग्स

बार-बार प्यास लगना
ज्यादा पेशाब आना
कमजोरी या थकान
अचानक भूख बढ़ना
कभी-कभी धुंधला दिखना

🎯 मरीज को क्या महसूस करवाना चाहिए

अगर परिवार में किसी को नया-नया पता चला हो, तो सबसे सही संदेश यही है:
“यह मैनेज होने वाली बीमारी है।” सही डाइट, नियमित चेक-अप (HbA1c), और तनाव कम रखने से कंट्रोल संभव है — घबराहट से ज्यादा फायदा जानकारी से होता है।

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RIZA wellness foundation                        Health Awareness Tips कब्ज से बचने के लिए रोज़ की छोटी-छोटी आदतें बहुत फ...
19/02/2026

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Health Awareness Tips

कब्ज से बचने के लिए रोज़ की छोटी-छोटी आदतें बहुत फर्क डालती हैं।

💧 1. पानी पर्याप्त पिएँ
दिनभर में 8–10 गिलास (मौसम और गतिविधि के हिसाब से)। सुबह खाली पेट गुनगुना पानी आंतों की मूवमेंट को एक्टिव करता है।

🥗 2. फाइबर बढ़ाएँ (धीरे-धीरे)
फल: पपीता, सेब, अमरूद
सब्जियाँ: भिंडी, गाजर, पालक
साबुत अनाज: ओट्स, दलिया
बीज: अलसी/चिया (कम मात्रा से शुरू)
फाइबर मल को नरम बनाता है। फाइबर पाचन के लिए फायदेमंद है।

🚶 3. रोज़ हल्की एक्सरसाइज़
30 मिनट वॉक या योग (पवनमुक्तासन, भुजंगासन) आंतों की गति सुधारते हैं।

⏰ 4. नियमित टॉयलेट रूटीन
रोज़ एक ही समय पर जाएँ, जल्दीबाज़ी या दबाव न बनाएं। प्राकृतिक संकेत (urge) को न रोकें।

🍽️ 5. खाने की आदतें सुधारें
धीरे-धीरे चबाकर खाएँ
देर रात भारी खाना न लें
बहुत ज्यादा जंक/तला-भुना कम करें

☕ 6. कैफीन और प्रोसेस्ड फूड सीमित
ज्यादा चाय-कॉफी और पैकेज्ड स्नैक्स डिहाइड्रेशन और कब्ज बढ़ा सकते हैं।

🧴 7. जरूरत पड़े तो मेडिकल सलाह
अगर 2–3 हफ्ते से ज्यादा समस्या रहे, पेट दर्द/खून दिखे या वजन तेजी से घटे—डॉक्टर से दिखाएँ।

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#कब्ज

RIZA wellness foundation                     Health Awareness Tips नींद कम होने पर वजन बढ़ना सिर्फ थकान की वजह से नहीं ह...
19/02/2026

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नींद कम होने पर वजन बढ़ना सिर्फ थकान की वजह से नहीं होता — इसके पीछे शरीर के हार्मोन, मेटाबॉलिज़्म और आदतों में बदलाव काम करते हैं।

1️⃣ भूख बढ़ाने वाले हार्मोन बिगड़ जाते हैं
नींद की कमी से
घ्रेलिन (Ghrelin) → भूख बढ़ाता है (यह बढ़ जाता है)
लेप्टिन (Leptin) → पेट भरने का संकेत देता है (यह घट जाता है)
परिणाम: ज़रूरत से ज्यादा भूख लगती है, खासकर मीठा और तला-भुना खाने का मन करता है।

2️⃣ इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता
कम नींद से शरीर में इंसुलिन रेज़िस्टेंस बढ़ता है।
मतलब:
खाया हुआ ग्लूकोज़ ऊर्जा बनने के बजाय फैट के रूप में जमा होने लगता है।

3️⃣ तनाव हार्मोन (कॉर्टिसोल) बढ़ जाता है
नींद पूरी न होने पर शरीर “स्ट्रेस मोड” में चला जाता है।
कॉर्टिसोल बढ़ने से:
पेट के आसपास चर्बी जमा होने की प्रवृत्ति बढ़ती है
शरीर फैट स्टोर करने लगता है

4️⃣ ऊर्जा कम = गतिविधि कम
जब नींद कम होगी तो
शरीर थका रहेगा
शारीरिक गतिविधि कम होगी
कैलोरी खर्च कम होगी
यह सीधा वजन बढ़ाने की दिशा में ले जाता है।

5️⃣ देर रात खाने की आदत
जागने का समय बढ़ेगा → खाने के मौके बढ़ेंगे।
देर रात का खाना अक्सर हाई-कैलोरी होता है और आसानी से फैट में बदलता है।

✔️ वजन कंट्रोल के लिए नींद कितनी जरूरी?

ज्यादातर लोगों के लिए 7–9 घंटे की नियमित नींद वजन संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।

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Riza Wellness Foundation                            Health Awareness Tips फाइबर = बेहतर डाइजेशन + वेट कंट्रोल + शुगर बैल...
18/02/2026

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Health Awareness Tips

फाइबर = बेहतर डाइजेशन + वेट कंट्रोल + शुगर बैलेंस। सीधे काम की बातें:

🟢 फाइबर पेट के लिए क्यों फायदेमंद है?

1️⃣ आंतों की सफाई और आसान मल त्याग
फाइबर पानी सोखकर मल को नरम और भारी बनाता है → कब्ज कम होती है, पेट हल्का रहता है।

2️⃣ अच्छे बैक्टीरिया को भोजन
फाइबर आंतों के “गुड बैक्टीरिया” का फूड है। ये बैक्टीरिया पाचन एंजाइम और इम्युनिटी को मजबूत करते हैं → गैस और सूजन घटती है।

3️⃣ पाचन की गति संतुलित
फाइबर खाना धीरे-धीरे पचने देता है → एसिडिटी कम, लंबे समय तक पेट भरा महसूस होता है।

4️⃣ ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल
घुलनशील फाइबर (ओट्स, दालें) शुगर के तेजी से बढ़ने को रोकता है और कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है — दिल और डायबिटीज रिस्क घटता है।

5️⃣ आंतों की सेहत की सुरक्षा
नियमित फाइबर से आंतों की लाइनिंग हेल्दी रहती है और लंबे समय में कई पाचन समस्याओं का खतरा कम होता है।
हेल्थ गाइडलाइंस भी पर्याप्त फाइबर लेने की सलाह देती हैं — जैसे World Health Organization।

🍎 आसान भारतीय फाइबर सोर्स
फल: सेब, अमरूद, नाशपाती
सब्जियाँ: भिंडी, गाजर, हरी पत्तेदार
अनाज: ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस
दालें और चना
बीज: अलसी, चिया

🎬 “फाइबर पेट की झाड़ू है — जितना नियमित लेंगे, पाचन उतना साफ और शरीर उतना हल्का।”

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17/02/2026

RIZA wellness foundation
Health Awareness Tips

याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें : जो आपको हमेशा स्वस्थ और सेहतमंद रखेंगी :-

1. तेज सिर र्दर्द से छुटकारा पाने के लिए सेब को छिल कर बारीक काटें। उसमें थोड़ा सा नमक मिलाकर सुबह खाली पेट खाएं।

2. (Periods) में दर्द से छुटकारा पाना के लिए ठंडे पानी में दो-तीन नींबू निचोड़ कर पिये।

3. शरीर पर कहीं जल गया हो, तेज धूप से त्वचा झुलस गई हो, त्वचा पर झुर्रियां हों या कोई त्वचा रोग हो तो कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता हैं।

4. मक्खन में थोड़ा सा केसर मिलाकर रोजाना लगाने से काले होंठ भी गुलाबी होने लगते हैं।

5. मुंह की बदबू से परेशान हों तो दालचीनी का टुकड़ा मुंह में रखें। मुंह की बदबू तुरंत दूर हो जाती हैं।

6. बहती नाक से परेशान हों तो युकेलिप्टस(सफेदा) का तेल रूमाल में डालकर सूंघे। आराम मिलेगा।

7. कुछ दिनों तक नहाने से पहले रोजाना सिर में प्याज का पेस्ट लगाएं। बाल सफेद से काले होने लगेंगे।

8. चाय पत्ती के उबले पानी से बाल धोएं, इससे बाल कम गिरेंगे।

9. बैंगन के भरते में शहद मिलाकर खाने से अनिद्रा रोग का नाश होता है। ऐसा शाम को भोजन में भरता बनाते समय करें।

10. संतरे के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर दिन में तीन बार एक-एक कप पीने से गर्भवती की दस्त की शिकायत दूर हो जाती हैं।

11. गले में खराश होने पर सुबह-सुबह सौंफ चबाने से बंद गला खुल जाता हैं।

12. सवेरे भूखे पेट तीन चार अखरोट की गिरियां निकालकर कुछ दिन खाने मात्र से ही घुटनों का दर्द समाप्त हो जाता हैं।

13. ताजा हरा धनिया मसलकर सूंघने से छींके आना बंद हो जाती हैं।

14. प्याज का रस लगाने से मस्सो के छोटे–छोटे टुकड़े होकर जड़ से गिर जाते हैं।

15. प्याज के रस में नींबू का रस मिलाकर पीने से उल्टियां आना तत्काल बंद हो जाती हैं।

16. गैस की तकलीफ से तुरंत राहत पाने के लिए लहसुन की 2 कली छीलकर 2 चम्मच शुद्ध घी के साथ चबाकर खाएं फौरन आराम होगा।

17. मसालेदार खाना खाएं मसालेदार खाना आपकी बंद नाक को तुरंत ही खोल देगा।

18. आलू का छिलका आपकी त्वचा पर ब्लीच की तरह काम करता है। इसे लगाने से आपकी काली पड़ी त्वचा का रंग सुधरता है। इसलिए आज के बाद आलू के छिलके को फेके नहीं बल्कि उनका इस्तेमाल करें।

19. यदि आपको अकसर मुंह में छाले होने की शिकायत रहती है तो रोज़ाना खाना खाने के बाद गुड को चूसना ना भूलें। ऐसा करने छाले आपसे बहुत दूर रहेंगे।

20. पतली छाछ में चुटकी भर सोडा डालकर पीने से पेशाब की जलन दूर होती ह

21. प्याज और गुड रोज खाने से बालक की ऊंचाई बढती हैं।

22. रोज गाजर का रस पीने से दमें की बीमारी जड़ से दूर होती हैं।

23. खजूर गर्म पानी के साथ लेने से कफ दूर होता हैं।

24. एक चम्‍मच समुद्री नमक लें और अपनी खोपड़ी पर लगा लें। इसे अच्‍छी तरह से मसाज करें और ऐसा करते समय उंगलियों को गीला कर लें। बाद में शैम्‍पू लगाकर सिर धो लें। महीने में एक बार ऐसा करने से रूसी नहीं होगी।

25. अगर आपके नाखून बहुत कड़े हैं तो उन्‍हे काटने से पहले हल्‍के गुनगुने पानी में नमक डालकर, हाथों को भिगोकर रखें। और 10 मिनट बाद उन नाखूनों को काट दें। इससे सारे नाखून आसानी से कट जाएंगे।

26. शरीर में कहीं गुम चोट लग जाए या नकसीर आए तो बर्फ की सिकाई बहुत फायदेमंद होती हैं।

27. अगर कोई कीड़ा-मकोड़ा काट ले, तो तुरंत कच्चे आलू का एक पतला टुकड़ा काटकर उस पर नमक लगाकर कीड़े के काटे हुए स्थान पर 5-7 मिनट तक रगड़ें।जलन और दर्द गायब हो जाएगा।

28. बवासीर से छुटकारा पाने के लिए सुबह खाली पेट 2 आलू-बुखारे खाए

29. दांत के दर्द से छुटकारा पाने के लिए अदरक का छोटा सा टुकड़ा चबाएं। दर्द तुरंत दूर हो जाएगा....

पोस्ट स्वास्थ्य जानकारी हेतु कृपया शेयर फालो जरूर करें धन्यवाद,,।।।


17/02/2026

Riza Wellness Foundation
Health Awareness Tips

रिपोर्ट हाथ में आते ही कई मरीजों का चेहरा उतर जाता है — “डॉक्टर साहब, मेरा कोलेस्ट्रॉल 210 और Triglyceride 180 आ गया है… क्या मुझे हार्ट अटैक का खतरा है?”
ऐसा ही एक मरीज घबराया हुआ मेरे पास आया। उम्र करीब 38 वर्ष थी और चेहरे पर डर साफ दिख रहा था।
उसने कुर्सी पर बैठते ही कहा — “डॉक्टर साहब, मैं तो ठीक-ठाक था, बस हल्की गैस और थकान थी। लैब वाले ने बोला लिपिड बढ़ा है, अब क्या होगा? क्या दवा जिंदगी भर खानी पड़ेगी?” उसकी आवाज में वही डर था जो आजकल इंटरनेट पढ़कर बहुत से लोगों में आ जाता है।

मैंने उसकी रिपोर्ट देखी — Total cholesterol थोड़ा सा बढ़ा था, Triglyceride भी सीमा से थोड़ा ऊपर, बाकी सब सामान्य।
मैंने मुस्कुराकर कहा — “आपको बीमारी नहीं, सिर्फ चेतावनी मिली है।”
फिर धीरे-धीरे उसकी दिनचर्या पूछी — देर रात खाना, मीठा ज्यादा, काम के बाद कोई व्यायाम नहीं, वीकेंड पर तला-भुना और कभी-कभी शराब। असली कारण रिपोर्ट में नहीं, जीवनशैली में छिपा था।
मैंने कहा — “अगर अभी सुधार कर लिया तो दवा की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।”

मरीज अक्सर पूछते हैं —
👉 “डॉक्टर साहब, थोड़ा सा बढ़ा है तो भी इतना खतरनाक है क्या?”
मैं उन्हें बताता हूँ —
• थोड़ा बढ़ना तुरंत जानलेवा नहीं होता
• यह शरीर का अर्ली वार्निंग सिग्नल है
• असली जोखिम तब होता है जब यह सालों तक बढ़ा रहे या साथ में डायबिटीज, BP, मोटापा भी हो

आज की सबसे बड़ी समस्या बीमारी से ज्यादा panic है। लैब रिपोर्ट में एक नंबर लाल होते ही लोग मान लेते हैं कि हार्ट अटैक बस आने वाला है। जबकि सच यह है कि शरीर हमें समय रहते संकेत देता है, ताकि हम संभल जाएँ।

✅ सच्चाई:
थोड़ा बढ़ा cholesterol या triglyceride बीमारी नहीं, बल्कि मौका है —
खानपान, वजन, नींद और दिनचर्या सुधारने का।
जो लोग इस संकेत को समझ लेते हैं, वे अक्सर बिना दवा के भी सामान्य हो जाते हैं।

🔥 Lipid Profile Test:-
Lipid Profile Test खून की एक महत्वपूर्ण जाँच है, जो आपके शरीर में वसा (cholesterol और triglycerides) की मात्रा बताती है। इससे हृदय रोग, स्ट्रोक और ब्लॉकेज के खतरे का अंदाज़ा लगाया जाता है। आजकल कम उम्र में भी हार्ट अटैक बढ़ने के कारण यह टेस्ट बहुत जरूरी माना जाता है।
🔬 Lipid Profile में कौन-कौन से पैरामीटर होते हैं और उनकी Normal Range

🍁 Total Cholesterol (कुल कोलेस्ट्रॉल)
• Normal: < 200 mg/dL
• Borderline: 200–239 mg/dL
• High: ≥ 240 mg/dL

🍁 LDL Cholesterol (Bad Cholesterol)
धमनियों में जमकर ब्लॉकेज बनाता है।
• Optimal: < 100 mg/dL
• Near optimal: 100–129 mg/dL
• Borderline high: 130–159 mg/dL
• High: 160–189 mg/dL
• Very high: ≥ 190 mg/dL

🍁 HDL Cholesterol (Good Cholesterol)
दिल की सुरक्षा करता है, जितना ज्यादा उतना अच्छा।
• Low (खतरनाक):
• पुरुष: < 40 mg/dL
• महिलाएं: < 50 mg/dL
• Protective: ≥ 60 mg/dL

🍁 Triglycerides (TG)
खून में फैट का एक और रूप, ज्यादा होने पर फैटी लिवर और हार्ट रोग का खतरा।
• Normal: < 150 mg/dL
• Borderline: 150–199 mg/dL
• High: 200–499 mg/dL
• Very high: ≥ 500 mg/dL

🍁 VLDL (Very Low Density Lipoprotein)
• Normal: 5–40 mg/dL

❤️ यह टेस्ट क्यों जरूरी है
• हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा पहले से पता चलता है
• धमनियों में चर्बी जमने (Atherosclerosis) का संकेत देता है
• डायबिटीज, मोटापा, हाई BP वालों में खास जरूरी
• फैटी लिवर और मेटाबोलिक सिंड्रोम का जोखिम बताता है
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि LDL जितना ज्यादा होगा, उतना ही ब्लॉकेज का खतरा बढ़ेगा, जबकि HDL ज्यादा होने पर सुरक्षा मिलती है।

⚠️ कितना ज्यादा हो जाये तो भी तुरंत खतरा नहीं होता?
👉 Total Cholesterol
• 200–220 mg/dL तक कई लोगों में तुरंत खतरा नहीं होता, अगर HDL अच्छा हो और LDL कम हो।
👉 LDL
• 100–130 mg/dL तक Low-risk व्यक्ति में अक्सर सुरक्षित माना जाता है।
• लेकिन यदि डायबिटीज, BP, धूम्रपान या फैमिली हिस्ट्री हो तो यही स्तर भी जोखिम बढ़ा सकता है।
👉 Triglycerides
• 150–200 mg/dL तक lifestyle सुधार से ठीक हो सकता है, तुरंत हार्ट अटैक का खतरा नहीं।
• ≥ 500 mg/dL होने पर पैंक्रियाटाइटिस (अग्नाशय की सूजन) का खतरा बढ़ जाता है।
👉 HDL
• कम HDL सबसे बड़ा छिपा खतरा है — बाकी सब ठीक होने पर भी जोखिम बढ़ सकता है।

🩺 किन लोगों को नियमित टेस्ट कराना चाहिए
• 30 वर्ष के बाद हर 1–2 साल में
• डायबिटीज / BP / मोटापा वाले
• परिवार में हार्ट रोग का इतिहास
• धूम्रपान या शराब लेने वाले
• बैठे-बैठे काम करने वाले

🔥 Triglyceride:- Bad Cholesterol
Triglyceride (TG) खून में पाया जाने वाला एक प्रकार का फैट है, जो शरीर को ऊर्जा देता है। लेकिन जब इसकी मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो यह धीरे-धीरे दिल, लिवर और अग्न्याशय (pancreas) को नुकसान पहुँचाने लगता है। आजकल जंक फूड, मीठा, शराब और बैठे-बैठे जीवन के कारण यह तेजी से बढ़ रहा है।

🔬 Triglyceride की Normal Range और खतरे का स्तर
• Normal: < 150 mg/dL → सुरक्षित
• Borderline High: 150–199 mg/dL → सावधानी जरूरी
• High: 200–499 mg/dL → हार्ट रोग का खतरा बढ़ता
• Very High: ≥ 500 mg/dL → बहुत खतरनाक

⚠️ कितना खतरनाक है —
🫀 1) दिल और ब्लॉकेज का खतरा
ज्यादा TG धमनियों में फैट जमा होने (Atherosclerosis) को बढ़ाता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है।
👉 खासकर जब HDL कम और LDL ज्यादा हो।
🔥 2) 500 mg/dL से ऊपर — गंभीर खतरा
• अग्नाशय की सूजन (Pancreatitis) का खतरा
• अचानक तेज पेट दर्द, उल्टी, ICU तक की स्थिति
🧠 3) मेटाबोलिक सिंड्रोम का संकेत
TG ज्यादा होने का मतलब अक्सर साथ में:
• मोटापा
• डायबिटीज
• फैटी लिवर
• हाई BP
भी हो सकते हैं।

❗ कितना ज्यादा हो जाये तो भी तुरंत खतरा नहीं
• 150–200 mg/dL → तुरंत जानलेवा नहीं, lifestyle सुधार से ठीक हो सकता है
• 200–300 mg/dL → चेतावनी, भविष्य में हार्ट रोग का जोखिम
• ≥ 500 mg/dL → खतरनाक, इलाज जरूरी
• ≥ 1000 mg/dL → मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति

🧪 किन कारणों से बढ़ता है
• ज्यादा मीठा, चीनी, कोल्ड ड्रिंक
• मैदा और तला हुआ खाना
• शराब
• मोटापा
• डायबिटीज
• व्यायाम की कमी
• रात में देर से खाना

🥗 कैसे कम करें
• रोज 30–45 मिनट चलना
• वजन कम करना
• चीनी और मिठाई बंद
• शराब से दूरी
• ओमेगा-3 (अलसी, अखरोट, मछली)
• रात का खाना हल्का

Triglyceride धीरे-धीरे नुकसान करने वाला “साइलेंट खतरा” है। रिपोर्ट में थोड़ा बढ़ा हो तो डरने की जरूरत नहीं, लेकिन ज्यादा बढ़ा हो तो नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।



16/02/2026

RIZA wellness foundation
Health Awareness Tips

दिल की बीमारियों के “मुख्य कारण” के रूप में उच्च रक्तचाप (High BP) और धूम्रपान इसलिए माने जाते हैं क्योंकि ये दोनों सीधे-सीधे दिल और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाते हैं — धीरे-धीरे और चुपचाप।

1️⃣ उच्च रक्तचाप (High BP) क्यों खतरनाक है

लगातार ज्यादा प्रेशर का मतलब — दिल को हर धड़कन पर ज़्यादा मेहनत।
शरीर में क्या होता है:

धमनियों की अंदरूनी परत (endothelium) को माइक्रो-डैमेज
धमनियाँ सख्त और संकरी होने लगती हैं
दिल की मांसपेशी मोटी हो जाती है (Left Ventricular Hypertrophy)
दिल को ऑक्सीजन कम मिलने लगती है

परिणाम: 👉 हार्ट अटैक
👉 हार्ट फेल्योर
👉 स्ट्रोक का जोखिम
👉 किडनी और आँखों पर असर
High BP को “silent killer” इसलिए कहते हैं क्योंकि लक्षण देर से दिखते हैं — ठीक वैसे ही जैसे आपने सीने के दर्द के अलावा हार्ट अटैक के संकेतों पर चर्चा की थी।

2️⃣ धूम्रपान दिल को कैसे नुकसान पहुँचाता है

सिगरेट का धुआँ सिर्फ फेफड़ों को नहीं, पूरे सर्कुलेशन सिस्टम को प्रभावित करता है।

मुख्य नुकसान:
निकोटीन → रक्तचाप और दिल की धड़कन बढ़ाता है
कार्बन मोनोऑक्साइड → खून की ऑक्सीजन क्षमता घटाती है
टॉक्सिन्स → धमनियों में प्लाक (cholesterol जमा) बढ़ाते हैं
खून गाढ़ा होकर थक्का बनने की प्रवृत्ति बढ़ती है

सीधा परिणाम: 👉 धमनियाँ ब्लॉक
👉 अचानक हार्ट अटैक का खतरा कई गुना

3️⃣ जब दोनों साथ हों तो खतरा कई गुना
High BP + Smoking = धमनियों को डबल डैमेज
यानी बीमारी जल्दी, ज्यादा गंभीर और कम उम्र में।

4️⃣ “लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप और धूम्रपान — ये दोनों दिल की नलियों को अंदर से कमजोर करते हैं। यही कारण है कि ज्यादातर हार्ट अटैक इन्हीं जोखिमों से जुड़े होते हैं।”

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16/02/2026

Riza Wellness Foundation
Health Awareness Tips

दिल की धड़कन का कभी तेज (Palpitation) और कभी धीमा महसूस होना आम बात है — लेकिन वजह समझना ज़रूरी है।
“कई लोग सोचते हैं कि अचानक तेज धड़कन मतलब हार्ट अटैक… लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। असली वजह क्या है और कब खतरे की घंटी बजती है — आज हम साफ समझेंगे।”

इसे सरल कारण + चेतावनी संकेत के फॉर्मेट में समझिए 👇

❤️ सामान्य कारण (ज्यादातर मामलों में)

1️⃣ तनाव और घबराहट
एंग्जायटी या डर में शरीर “फाइट या फ्लाइट” मोड में चला जाता है → धड़कन तेज।

2️⃣ कैफीन और चाय-कॉफी
ज्यादा चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक → हार्ट रेट बढ़ सकता है।

3️⃣ डिहाइड्रेशन (पानी की कमी)
शरीर में पानी कम होने पर ब्लड वॉल्यूम घटता है → दिल तेजी से पंप करता है।

4️⃣ कमज़ोरी या खून की कमी
ऑक्सीजन कम मिलने पर दिल ज्यादा काम करता है → धड़कन तेज महसूस होती है।

5️⃣ हार्मोनल बदलाव
थायरॉइड गड़बड़ी, बुखार, या महिलाओं में हार्मोनल बदलाव → रेट ऊपर-नीचे।

6️⃣ अचानक पोज़िशन बदलना
लेटे से तुरंत खड़े होने पर BP बदलता है → धड़कन महसूस हो सकती है।

⚠️ गंभीर कारण (इन्हें नज़रअंदाज़ न करें)

1️⃣ दिल की धड़कन बहुत अनियमित रहना
2️⃣ सीने में दर्द, चक्कर, सांस फूलना साथ में होना
3️⃣ आराम की स्थिति में भी लगातार तेज धड़कन
4️⃣ धड़कन बहुत धीमी और कमजोरी महसूस होना
ऐसे लक्षण हों तो चेकअप ज़रूरी है।

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#हार्टअटैक

14/02/2026

Riza Wellness Foundation
Health Awareness Tips

👉 नमकीन और चटपटा खाने से सीधे-सीधे शुगर (डायबिटीज) नहीं होती,
लेकिन बार-बार और ज्यादा मात्रा में खाने से डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।

अब समझिए कैसे —

🔹 1. नमकीन खाने से क्या होता है?
नमकीन (चिप्स, भुजिया, पकौड़ी, समोसा आदि) में आमतौर पर:

ज्यादा रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट (मैदा)
ज्यादा तेल और ट्रांस फैट
ज्यादा नमक
ज्यादा कैलोरी
👉 इससे वजन बढ़ता है
👉 पेट की चर्बी बढ़ती है
👉 शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ती है
और यही चीजें आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज का कारण बन सकती हैं।

🔹 2. चटपटा और मसालेदार खाना?

मसाले खुद शुगर नहीं बढ़ाते।
लेकिन समस्या तब होती है जब:
बहुत ज्यादा तला-भुना खाना हो
सॉस/चटनी में छुपी हुई चीनी हो
फास्ट फूड और प्रोसेस्ड खाना ज्यादा हो

🔹 3. असली कारण क्या है?

डायबिटीज के मुख्य कारण:

मोटापा
कम शारीरिक गतिविधि
ज्यादा मीठा और रिफाइंड कार्ब
फैमिली हिस्ट्री
तनाव और गलत लाइफस्टाइल
नमकीन खुद शुगर नहीं बनाता, लेकिन गलत खान-पान और मोटापा शुगर की जमीन तैयार करते हैं।

🔹 अगर पहले से शुगर है तो?

ज्यादा नमकीन खाने से:
ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है
किडनी पर असर पड़ सकता है
वजन बढ़कर शुगर कंट्रोल खराब हो सकता है

✅ क्या करें?

घर का बना हुआ कम तेल वाला खाना खाएं
तली चीजें हफ्ते में 1 बार से ज्यादा नहीं
पैकेट वाले स्नैक्स कम करें
रोज 30 मिनट चलना जरूरी

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14/02/2026

Riza Wellness Foundation
Health Awareness Tips

मोटापा (Obesity) तब होता है जब शरीर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो जाता है। यानी जितनी ऊर्जा (कैलोरी) हम खाते हैं, उससे कम खर्च करते हैं — तो बची हुई ऊर्जा चर्बी बनकर जमा होती रहती है।👇👇👇👇👇👇

🔹 मोटापा होने के मुख्य कारण

1️⃣ ज्यादा कैलोरी वाला खाना
तला-भुना, मीठा, जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक
बार-बार स्नैकिंग
👉 शरीर खर्च कम करता है, जमा ज्यादा करता है

2️⃣ शारीरिक गतिविधि की कमी
लंबे समय तक बैठना
एक्सरसाइज न करना
स्क्रीन टाइम ज्यादा
👉 कैलोरी बर्न नहीं होती

3️⃣ हार्मोनल गड़बड़ी
थायरॉइड कम काम करना (Hypothyroidism)
इंसुलिन रेजिस्टेंस (जो आपने शुगर के संदर्भ में पूछा था)
👉 शरीर फैट जल्दी जमा करता है

4️⃣ नींद की कमी
कम नींद से भूख बढ़ाने वाले हार्मोन बढ़ जाते हैं
👉 ज्यादा खाने की इच्छा

5️⃣ तनाव (Stress)
स्ट्रेस हार्मोन cortisol बढ़ता है
👉 पेट पर चर्बी जमा होने लगती है

6️⃣ आनुवंशिक कारण (Genetics)
परिवार में मोटापा होने पर जोखिम ज्यादा

7️⃣ कुछ दवाइयाँ
स्टेरॉयड, कुछ मानसिक स्वास्थ्य दवाएँ
👉 वजन बढ़ा सकती हैं

🔹 शरीर में क्या होता है?

फैट कोशिकाएँ (fat cells) बड़ी हो जाती हैं
इंसुलिन का असर कम हो सकता है
डायबिटीज, BP, किडनी और जोड़ों की समस्या का खतरा बढ़ता है

🔹 मेडिकल मानक क्या कहते हैं

World Health Organization के अनुसार मोटापा सिर्फ दिखने की समस्या नहीं, बल्कि क्रॉनिक बीमारी है जो कई अन्य रोगों का कारण बन सकती है।

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#मोटापा

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