08/09/2026
बौद्ध परपंरा में बुद्ध की वंदना इन शब्दों से की जाती है:-
"इति पि सो भगवा
अरहं, सम्मासम्बुद्धो,
विज्जाचरणसंपन्नो,
सुगतो, लोकविदु,
अनुत्तरो पुरिसदम्मसारथी,
सत्था देवमनुस्सानं
बुद्धो भगवति ॥"
'इति पि सो भगवा' का अर्थ है वह जो सभी प्राणियों के उत्पन्न होने और नष्ट होने की प्रतिक्रिया को पूरी तरह जानता है।
'अरहं' वह जिसने अपने सभी शत्रुओं को नष्ट कर दिया है। यहां शत्रु कोई व्यक्ति नहीं है बल्कि हमारे भीतर के शत्रु हैं जैसे राग, द्वेष और मोह। बुद्ध वो हैं जिनके भीतर न लालच बचा न नफ़रत न अहंकार और न अज्ञान।
'सम्मासंबुद्धो' का अर्थ है अतिवाद से दूर मध्यम मार्ग। बुद्ध ने न तो भोग में डूबने को सही कहा ओर न कठोर तपस्या को। उन्होंने खोजा मध्यम मार्ग। 'संबुद्धो'
का अर्थ है अपने बल पर जागा हुआ। किसी इश्वर या अलौकिक शक्ति ने उन्हें ज्ञान नहीं दिया। उन्होंने स्वयं दुःख से मुक्ति का मार्ग खोजा और कहलाए सम्मासंबुद्धो।
'विज्जाचरणसंपन्नो' विज्जा का अर्थ है यथार्थ ज्ञान। चरण का अर्थ है धम्म का आचरण। बुद्ध केवल ज्ञानवान नहीं थे। उन्होंने जो जाना उसे जीया भी। क्रोद्ध को यदि बुरा कहा तो उससे मुक्त होकर दिखाया। इसीलिए उन्हें कहा गया विज्जाचरणसंपन्नो।
'सुगतो लोकविदु' सुगतो का अर्थ है जो सही मार्ग पर चला और सही मंजिल तक पहुंचा। लोकविदु का अर्थ है वह जो इस संसार को जैसा है वैसा जानता है।
'अनुत्तरो पुरिसदम्मसारथी' अर्थात मनुष्यों को साधने वाला सबसे श्रेष्ठ सारथी। बुद्ध ने किसी को डराया नहीं न ही किसी को जबरन बदला। उन्होंने बिना भेदभाव के सभी को मन को साधने की कला सिखाई।
'सत्था देवमनुस्सानं' का अर्थ है कि बुद्ध केवल मनुष्य के ही नहीं देवों के भी गुरू कहे गए क्योंकि सत्य किसी एक लोक तक सीमित नहीं होता।
'बुद्धो भगवति' बुद्धो का अर्थ है जो जाग चुके हैं। भगवाति जो करूणा और प्रज्ञा से पूर्ण हैं।
बुद्ध की वंदना बुद्ध की पूजा करना नहीं है क्योंकि बुद्ध कोई देवता नहीं हैं। हम बुद्ध को वंदना इसलिए करते हैं क्योंकि बुद्ध हमें विष्वास दिलाते हैं कि यदि एक मनुष्य जाग सकता है तो हम सब भी जाग सकते हैं। बुद्ध की वंदना डर, लालच या आस्था से नहीं बल्कि समझ से होती है। बुद्ध की वंदना केवल शब्दों का उच्चारण नहीं है। यह एक जागे हुए जीवन के प्रति नमन है...!!!
डॉ. अमृतपाल कौर...🌷🌲🌷