Samraat Vikramaditya Parmar Foundation,India

Samraat Vikramaditya Parmar Foundation,India Samraat Vikramaditya Parmar is a emperor of Parmars...
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सम्राट विक्रमादित्य-:)¤ विक्रमादित्य का नाम उनके जन्म से पहले ही भगवान शिव ने रख दिया था।¤ विक्रमादित्य परमार वंश के 8वे...
19/03/2026

सम्राट विक्रमादित्य-:)
¤ विक्रमादित्य का नाम उनके जन्म से पहले ही भगवान शिव ने रख दिया था।
¤ विक्रमादित्य परमार वंश के 8वें राजा थे।
¤ विक्रमादित्य ने मात्र 20 वर्ष की उम्र में ही शकों को पूरे एशिया से खदेड़ दिया था।
¤ विक्रमादित्य भारत और एशिया को स्वतंत्र करवाने के बाद वे खुद राजगद्दी पर नहीं बैठे बल्कि अपने बड़े भाई भृर्तहरी को राजा बनाया पर पत्नी से मिले धोखे ने भृर्तहरी को सन्यासी बना दिया और उसके बाद जब भृर्तहरी के पुत्रों ने भी राजसिंहासन पर बैठने से मना कर दिया तब विक्रमादित्य को ही राजसिंहासन पर बैठना पड़ा।
¤ विक्रमादित्य का राज्याभिषेक दीपावली के दिन हुआ था।
¤ विक्रमादित्य ने शकों पर विजय हासिल कर विश्व के प्रथम कैलेंडर विक्रम संवत की स्थापना की थी।
¤ विक्रमादित्य ने अश्वमेध यज्ञ किया था और चक्रवर्ती सम्राट बने थे।
¤ विक्रमादित्य के शासन में वर्तमान भारत, चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, जापान, अफगानिस्तान, म्यांमार. श्री लंका, इराक, ईरान, कुवैत, टर्की, मिस्त्र, अरब, नेपाल, दक्षिणी कोरिया, उत्तरी कोरिया, इंडोनेशिया, अफ्रिका और रोम शामिल थे। इसके अलावा अन्य देश संधिकृत थे।
¤ विक्रमादित्य पहले राजा थे जिन्होंने अरब पर विजय हासिल की थी।
¤ विक्रमादित्य का युग स्वर्ण युग कहलाया।
¤ विक्रमादित्य के समय इस पूरी पृथ्वी पर एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं था जिसके ऊपर एक रुपये का भी कर्जा हो।
¤ विक्रमादित्य एकलौते ऐसे राजा थे जिन्होंने अपनी प्रजा का कर्ज खुद उतारा था।
¤ विक्रमादित्य जैसा न्याय कोई दूसरा नहीं कर पाता था उनके दरबार से कोई निराश होकर नहीं जाता था।
¤ सम्राट विक्रमादित्य ईसा मसीह के समकालीन थे।
¤ विक्रमादित्य ने ईसा मसीह के जन्म के समय अपने दरबार से दो ज्योतिषी ईसा मसीह का भाग्य जानने के लिये भेजे थे।
¤ विक्रमादित्य ने रोम के राजा जुलियस सीजर को युद्ध में हराकर बंदी बनाकर उज्जैन की गलियों में घुमाया था।
¤ विक्रमादित्य के न्याय से प्रभावित होकर देवराज इन्द्र ने उन्हें 32 पुतलियों वाला सिंहासन भेंट में दिया था। जो ग्यारह सौ वर्ष बाद इन्हीं के वंशज राजा भोज को मिला था।
¤ विक्रमादित्य के आगे सिकंदर तो बौना ही था।
¤ विक्रमादित्य ने उज्जैन में महाकाल अयोध्या में राम जन्म भूमि और मथुरा में कृष्ण जन्म भूमि का निर्माण कराया था।
¤ विक्रमादित्य तब तक भोजन नहीं करते थे जब तक उनकी प्रजा भोजन न कर ले।
¤ विक्रमादित्य ने ही नवरत्नों की शुरुआत की थी। कालीदास और वराह मिहिर विक्रमादित्य के ही दरबारी थे।
¤ उस युग में भगवान राम और भगवान कृष्ण के बाद अगर किसी का नाम आता था तो वो चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य का था।

06/03/2026
सादर आमंत्रित 🙏🙏
06/03/2026

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सम्राट विक्रमादित्य परमार द्वार
22/01/2026

सम्राट विक्रमादित्य परमार द्वार

राजा भोज ने लिया महमूद गजनवी से सोमनाथ मंदिर का बदला 🚩गुजरात में जब महमूद गजनवी (971-1030 ई.) ने सोमनाथ का ध्वंस किया तो...
14/01/2026

राजा भोज ने लिया महमूद गजनवी से सोमनाथ मंदिर का बदला 🚩

गुजरात में जब महमूद गजनवी (971-1030 ई.) ने सोमनाथ का ध्वंस किया तो इतिहासकार ई. लेनपूल के अनुसार यह दु:खद समाचार शिव भक्त राजा भोज तक पहुंचने में कुछ सप्ताह लग गए। तुर्की लेखक गरदिजी के अनुसार उन्होंने इस घटना से क्षुब्द होकर सन् 1026 में गजनवी पर हमला किया और वह क्रूर हमलावर सिंध के रेगिस्तान में भाग गया।

तब राजा भोज ने हिंदू राजाओं की संयुक्त सेना एकत्रित करके गजनवी के पुत्र सालार मसूद को बहराइच के पास एक मास के युद्ध में मारकर सोमनाथ का बदला लिया और फिर 1026-1054 की अवधि के बीच भोपाल से 32 किमी पर स्थित भोजपुर शिव मंदिर का निर्माण करके मालवा में सोमनाथ की स्थापना कर दी।

विख्यात पुराविद् अनंत वामन वाकणकर ने अपनी पुस्तक 'द ग्लोरी ऑफ द परमाराज आफ मालवा' में 'कोदंड काव्य' के आधार पर तुरूष्को (तुर्को) पर भोजराज की विजय की पुष्टि की है। यही कारण था कि बाद के काल में मालवा पर भी मुस्लिम आक्रांताओं का लगातार आक्रमण होता रहा और खासकर धार एवं भोपाल को योजनाबद्ध निशाने पर लिया ।

चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य महाराज की जय हो…
03/01/2026

चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य महाराज की जय हो…

नगर भोपाल भोजपाल प्रवेश द्वार *राजा विक्रमादित्य द्वार* फंदा भोपाल के भूमिपूजन मे सभी समाजिक लोगों का स्वागत वंदन अभिनंद...
12/12/2025

नगर भोपाल भोजपाल प्रवेश द्वार *राजा विक्रमादित्य द्वार* फंदा भोपाल के भूमिपूजन मे सभी समाजिक लोगों का स्वागत वंदन अभिनंदन है

हमारे गौरवशाली इतिहास के महापुरुष चक्रवर्ती सम्राट राजा विक्रमादित्य हमारे राष्ट्र गौरव है हम सब सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हैं |

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जय हो
15/11/2025

जय हो

09/07/2025
जय हो महाराजा…
30/05/2025

जय हो महाराजा…

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209622

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