Bhartiya Swadeshi Peeth Trust

Bhartiya Swadeshi Peeth Trust आओ राजीव भाई के सपनों का भारत बनाएँ ,!

🚨 जब अभिनेता मुकेश खन्ना के प्रश्न का उत्तर दिया!! क्या ब्रह्मा, विष्णु और महेश किसी कंपनी के CEO, CFO और अकाउंटेंट हैं?...
09/07/2026

🚨 जब अभिनेता मुकेश खन्ना के प्रश्न का उत्तर दिया!! क्या ब्रह्मा, विष्णु और महेश किसी कंपनी के CEO, CFO और अकाउंटेंट हैं? 'धन' और मां लक्ष्मी के उपयोग का वह कड़वा सच जो आपकी आत्मा हिला देगा! 🚩

अक्सर आधुनिक मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वाले लोग त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की तुलना किसी कॉर्पोरेट कंपनी से करते हैं। वे कहते हैं— "भगवान को भी सृष्टि चलाने के लिए एक टीम की जरूरत पड़ती है; ब्रह्मा क्रिएटर हैं, विष्णु CEO/ऑपरेटर हैं और शिव CFO/डिस्ट्रॉयर हैं।"

जब अभिनेता मुकेश खन्ना के सामने इसी सीधे प्रश्न का उत्तर दिया गया, तो सनातन ज्ञानपीठ के श्री योगेश मिश्रा जी ने इस बचकानी कॉर्पोरेट सोच का खंडन करते हुए त्रिमूर्ति और मां लक्ष्मी (धन) के उपयोग का ऐसा ऐतिहासिक विश्लेषण किया, जो पाखंड की सारी जड़ें हिला देगा।

मुकेश खन्ना जी के सामने खुले इस सनातन दर्शन के 4 ऐतिहासिक खुलासे, बिल्कुल योगेश जी के सटीक शब्दों में:

1. ब्रह्मा, विष्णु, महेश कोई 'कॉर्पोरेट टीम' नहीं हैं:
योगेश जी स्पष्ट करते हैं कि सनातन ज्ञानपीठ भ्रांतियों का उन्मूलन करती है। ब्रह्मा, विष्णु और महेश असल में भारत की तीन प्राचीन संस्कृतियों का संबोधन हैं— ब्रह्म संस्कृति, वैष्णव संस्कृति और शैव संस्कृति! भारतीय समाज में इन तीनों ही जीवन शैलियों को मान्यता दी गई, इसीलिए हम इन तीनों का नाम एक साथ लेते हैं। ये किसी फैक्ट्री के मैनेजर नहीं हैं।

2. वैष्णव संस्कृति का वह ऐतिहासिक 'समुद्र मंथन एग्रीमेंट':
अगर ये तीनों एक ही हैं, तो विष्णु जी ने असुरों के साथ समुद्र मंथन का जो लिखित 'एग्रीमेंट' किया था (कि जो भी मुनाफा/रत्न निकलेगा, वह बराबर बंटेगा), उसका आदर क्यों नहीं हुआ?
14 रत्नों में से असुरों को कुछ नहीं मिला; शिव ने असुरों को बचाने के लिए हलाहल विष पी लिया। और जब असल प्रॉफिट (अमृत) निकला, तो विष्णु जी खुद मोहिनी रूप धरकर, लहंगा-चुनरी पहनकर लोटा लेकर भाग गए! जब किसी समाज की संयुक्त प्रगति में दैत्य-दानव सहयोग कर रहे थे, तो एग्रीमेंट तोड़कर सारा प्रॉफिट खुद रख लेना छल की पराकाष्ठा थी।

3. शिव का असली 'योग्यता सिद्धांत' (मंथन की जरूरत ही क्या है?):
भगवान शिव छल और छीना-झपटी के इस मंथन को नहीं मानते। शिव का दर्शन कहता है— "मंथन की जरूरत ही क्या है? तुम अपने भीतर ऐसी योग्यता पैदा करो कि प्रकृति और ईश्वर तुम्हें वह सुख देने के लिए बाध्य हो जाएं!" हम खुद को योग्य बनाने के बजाय सिर्फ भिखारियों की तरह ईश्वर से मांगना शुरू कर देते हैं।

4. मां लक्ष्मी और 'कागज के टुकड़ों' का सबसे कड़वा सवाल:
मुकेश खन्ना जी के सामने योगेश जी ने यहाँ समाज से सबसे बड़ा तार्किक सवाल पूछा:

"क्या आप अपनी मां, पत्नी, बहन या बेटी को लेकर कभी किसी शराब के ठेके पर जाएंगे? जुआघर जाएंगे? वैश्यालय जाएंगे? नहीं न! तो अगर धन 'मां लक्ष्मी' का ही मूर्त रूप है, तो दीपावली पर पूजा करके मांगे गए वो नोट शराब के ठेके और जुआघर कैसे पहुंच जाते हैं? या तो साफ कह दो कि यह मां लक्ष्मी नहीं, सिर्फ कागज के टुकड़े हैं! और अगर मां माना है, तो मां को लेकर वैश्यालय मत जाओ!"

हमारे जीवन में दरिद्रता और संघर्ष इसीलिए है क्योंकि हमारे भीतर 'व्यक्तिगत दोष' हैं। हम धन की उच्च ऊर्जा को संभालने का सामर्थ्य ही पैदा नहीं करना चाहते।

🚨 पूरा वीडियो देखने के लिए लिंक नीचे 'पहले कमेंट' (First Comment) में पिन कर दिया गया है! तुरंत क्लिक करें और खुद सुनें यह कड़वा सच! 👇🤯

🚨 चिल्लाकर मंत्र बोलने से कुछ नहीं होगा! श्री कृष्ण 14 अध्याय तक बड़बड़ाते रहे, अर्जुन को कुछ समझ नहीं आया! 'मंत्र विज्ञ...
06/07/2026

🚨 चिल्लाकर मंत्र बोलने से कुछ नहीं होगा! श्री कृष्ण 14 अध्याय तक बड़बड़ाते रहे, अर्जुन को कुछ समझ नहीं आया! 'मंत्र विज्ञान' का सबसे कड़वा सच! 🚩

अक्सर यूट्यूब के तथाकथित गुरु हमें सिखाते हैं कि "मंत्रों को ऊंचे स्वर (ध्वनि) में बोलने से कंपन और ऊर्जा पैदा होती है, जिससे लाभ मिलता है।" लेकिन क्या यह सच है? सनातन ज्ञानपीठ के श्री योगेश मिश्रा जी ने मंत्र जप, फ्रीक्वेंसी और मन की शक्ति का ऐसा कड़वा और वैज्ञानिक विश्लेषण किया है, जो पाखंड की नींव हिला देगा।

आइए जानते हैं इस वीडियो के 5 ऐतिहासिक और तार्किक खुलासे, बिल्कुल उन्हीं के सटीक शब्दों में:

1. मोबाइल टावर और खराब रिसीवर का विज्ञान:
मान लीजिए आपका मोबाइल खराब है, लेकिन टावर पूरी फ्रीक्वेंसी और ऊर्जा दे रहा है; तो क्या आपके मोबाइल में नेटवर्क आएगा? बिल्कुल नहीं! क्योंकि ऊर्जा रिसीव करने वाला 'रिसीवर' खराब है। ठीक यही स्थिति मंत्रों की है। आप जिस उद्देश्य और फ्रीक्वेंसी से मंत्र बोल रहे हैं, क्या सुनने वाला इतना विद्वान है कि उसी भाव में उस ऊर्जा को स्वीकार कर सके?

2. पंडित जी की ढाई घंटे वाली पूजा का सच:
पंडित जी घर आकर ढाई घंटे तक मंत्र बोलते हैं, और जजमान उस दौरान बस यंत्रवत बेलपत्र, दूध, फूल और इत्र चढ़ाता रहता है। पूजा खत्म होने के बाद जजमान एक लाइन नहीं बता सकता कि पंडित जी बोले क्या! जब बोलने वाले और सुनने वाले, दोनों की फ्रीक्वेंसी मेल नहीं खाती, तो इस कर्मकांड का कोई अर्थ नहीं रह जाता।

3. भगवद्गीता का सबसे बड़ा और कड़वा सच:
योगेश जी तार्किक उदाहरण देते हुए कहते हैं— "श्री कृष्ण जैसा महाविद्वान 14 अध्याय तक लगातार ज्ञान देता रहा, लेकिन अर्जुन के कुछ समझ नहीं आया! जब कृष्ण ने देखा कि ऐसे बात नहीं बनेगी, तब 11वें अध्याय के बाद अपना विराट रूप दिखाया। और विराट रूप देखते ही अर्जुन भय से कांपने लगे, उनका गला सूख गया।" जब अर्जुन जैसे पात्र की यह स्थिति थी, तो आज के सामान्य लोगों को सुनाकर क्या हासिल होगा?

4. हम कपोल-कल्पित संसार में जी रहे हैं:
हिंदुओं के पतन का सबसे बड़ा कारण यही है कि हम दिखावे की दुनिया में जीते हैं। कलयुग में मंत्रों की ऊर्जा को सही फ्रीक्वेंसी पर समझने वाला 'सुपात्र' नहीं मिलता। तीन घंटे प्रवचन देने के बाद भी इंसान झाड़ कर चला जाता है। सुपात्र के बिना माइक पर चिल्लाने से सिर्फ अहंकार की संतुष्टि होती है, आध्यात्मिक लाभ नहीं।

5. असली समाधान: मन ही मन जप (मानसिक जप):
हम मंत्र किसके लिए जप रहे हैं? दुनिया को दिखाने के लिए या ईश्वर के लिए? ईश्वर हमारे भीतर, हमारे दिल और मन में बैठा है। इसलिए बाहरी आडंबर और ध्वनि विज्ञान के चक्कर को छोड़कर, अपने विषय को सीधे ईश्वर के समक्ष रखिए। अपने मन के भीतर चुपचाप मंत्र का जप करिए, वह ईश्वर तुरंत सुन लेगा!

🚨 पूरा वीडियो देखने के लिए लिंक नीचे 'पहले कमेंट' (First Comment) में पिन कर दिया गया है! तुरंत क्लिक करें और खुद सुनें यह कड़वा सच! 👇🤯

🚨 राक्षस का असली अर्थ क्या है? समुद्र मंथन का वह कड़वा सच जो आपको कभी नहीं बताया गया! 🚩सनातन ज्ञानपीठ के श्री योगेश मिश्...
02/07/2026

🚨 राक्षस का असली अर्थ क्या है? समुद्र मंथन का वह कड़वा सच जो आपको कभी नहीं बताया गया! 🚩

सनातन ज्ञानपीठ के श्री योगेश मिश्रा जी ने हमारे इतिहास, 'राक्षस' शब्द की उत्पत्ति और 'समुद्र मंथन' के छल का ऐसा ऐतिहासिक और तार्किक विश्लेषण किया है, जो आपकी आंखें खोल देगा।

आइए जानते हैं इस वीडियो के 5 सबसे बड़े और साहसिक खुलासे:

1. 'राक्षस' कौन थे? (रावण की कूटनीति):

प्राचीन काल में वैष्णव समाज अपने नियमों का पालन न करने वालों का हुक्का-पानी बंद करके उन्हें समाज से निकाल देता था।

रावण ने इन बहिष्कृत और पीड़ित लोगों को आश्रय दिया और उनकी 'रक्षा' करने का वचन दिया।

रक्षा करने के इसी वचन के कारण इस संस्कृति के लोगों को 'राक्षस' कहा गया।

इसके पीछे रावण की राजनीतिक चाल थी; वह इन निकाले गए लोगों से वैष्णव साम्राज्यों के कच्चे-चिट्ठे और गुप्त सूचनाएं निकालकर विश्व विजेता बनना चाहता था।

2. रावण की असली लंका 'कुमारी कंदम' है:

आज का श्रीलंका रावण की वास्तविक लंका नहीं है।

असली लंका 'कुमारी कंदम' थी, जो भारत से तीन गुना बड़ा देश था और अफ्रीका से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक फैला था।

आज यह कुमारी कंदम समुद्र में 450 मीटर नीचे डूबा हुआ है।

3. रावण का जन्म श्रीलंका में नहीं हुआ था:

रावण, कुंभकरण, विभीषण और शूर्पणखा का जन्म दिल्ली के पास 'बिसरख' नामक जगह पर हुआ था।

यह स्थान ब्रह्मा जी के पुत्र और रावण के परदादा पुलस्त्य ऋषि का आश्रम है।

4. आधुनिक युग से समानता (धर्मांतरण):

रावण की बहिष्कृत लोगों को अपनाने की यह नीति आज भी प्रासंगिक है।

जिस तरह हिंदू समाज द्वारा दूर किए गए हरिजन और पीड़ित लोगों को ईसाई मिशनरियों ने स्कूल और सुविधाएं देकर उनका धर्मांतरण किया, रावण की रणनीति भी बिल्कुल वैसी ही थी।

5. समुद्र मंथन का सबसे बड़ा छल:

भगवान विष्णु ने असुरों के साथ समुद्र मंथन का 'एग्रीमेंट' किया था कि जो भी रत्न निकलेंगे, वे बराबर बांटे जाएंगे।

लेकिन 14 रत्नों में से असुरों को कुछ नहीं मिला; भगवान शिव ने असुरों की प्रजाति को बचाने के लिए हलाहल विष पी लिया।

जब अमृत निकला, तो विष्णु जी मोहिनी का रूप धरकर, लहंगा-चुनरी पहनकर उसे लेकर भाग गए और एग्रीमेंट तोड़ दिया।

🚨 सबसे कड़वा सच: क्या देवता हमेशा सही और असुर हमेशा गलत थे? इतिहास को हमेशा विजेताओं ने अपने हिसाब से लिखा है! रावण की असली कूटनीति और समुद्र मंथन के इस ऐतिहासिक एग्रीमेंट के टूटने का पूरा तार्किक सच समझने के लिए, नीचे दिए गए लिंक पर तुरंत क्लिक करें! यह वीडियो आपके सोचने का नज़रिया 100% बदल देगा! 👇🤯

🚨 पूरा वीडियो देखने के लिए लिंक नीचे 'पहले कमेंट' (First Comment) में पिन कर दिया गया है! तुरंत क्लिक करें और खुद सुनें यह कड़वा सच! 👇🤯

🚨 हम सब 'शव' हैं, शिव नहीं! 4 करोड़ की Mercedes खरीदने वाले से बड़ा मूर्ख कौन है? अध्यात्म और पैसे का सबसे गहरा सच! 🚩क्य...
29/06/2026

🚨 हम सब 'शव' हैं, शिव नहीं! 4 करोड़ की Mercedes खरीदने वाले से बड़ा मूर्ख कौन है? अध्यात्म और पैसे का सबसे गहरा सच! 🚩

क्या आप जानते हैं कि आपके घर में होने वाले झगड़े, आपकी बीमारी और आपकी गरीबी का असली कारण कोई ग्रह-नक्षत्र नहीं, बल्कि सिर्फ आपके 'सोचने का तरीका' है? सनातन ज्ञानपीठ के श्री योगेश मिश्रा जी ने अध्यात्म और फाइनेंस के गठजोड़ का ऐसा गहरा सच बताया है, जो आपके रोंगटे खड़े कर देगा।

आइए जानते हैं इस वीडियो के 5 सबसे बड़े और कड़वे सबक, बिल्कुल उन्हीं के सटीक शब्दों में:

1. 'शव' से 'शिव' बनने का ईश्वरीय विधान:
योगेश जी कहते हैं— "हम लोग 'शव' हैं, शिव नहीं हैं। क्यों? क्योंकि हम सब में 'ई' (ईश्वर) नहीं जुड़ा है।" जैसे ही हम ईश्वरीय विधान को फॉलो करेंगे, हम शिव बन जाएंगे। ईश्वर का विधान क्या है? यही कि समस्त सुख तुम्हारे लिए है, बस अपने सोचने के तरीके को सही करो।

2. तुम्हारी हर समस्या की जड़ तुम्हारा 'दिमाग' है:
तुम बीमार हो, निर्धन हो, दांपत्य जीवन में कलह है, बच्चों से तालमेल नहीं बन रहा, बहनों से लड़ रहे हो या व्यापार में बवाल हो रहा है— इन सबका सिर्फ एक ही कारण है: "तुम्हारे सोचने का तरीका गलत है!"

3. किसान का साहस और धन का 'अंकुरण विज्ञान':
किसान का साहस देखिए कि वह गेहूं के दाने को मिट्टी में फेंककर वहीं गलने और सड़ने के लिए छोड़ देता है। जब वह सड़ता है, तब एक अंकुर निकलता है जो 1 दाने को 1000 दाना बना देता है।
हमारे अंदर ये तीनों साहस नहीं हैं:

न हम धन को ईश्वर की व्यवस्था पर छोड़ने को तैयार हैं।

न धन को मिट्टी की तरह गलता हुआ देखने का साहस रखते हैं।

और न ही अंकुरित धन को पोषित करने की वृत्ति रखते हैं। तो हम धनवान कैसे होंगे?

4. 4 करोड़ की Mercedes का सबसे कड़वा गणित:
अगर Wagon R में काम चल रहा है, तो 4 करोड़ की Mercedes खरीदने वाले से बड़ा मूर्ख कोई नहीं! योगेश जी बेबाक सलाह देते हुए कहते हैं— "भैया पैसा बचाकर Mercedes के शेयर खरीद लो। 4 साल बाद कार 1 करोड़ की रह जाएगी, लेकिन शेयर 20 करोड़ के हो जाएंगे!"
जब एक दर्शक ने पूछा कि 'सब शेयर खरीदेंगे तो कार कौन खरीदेगा?' इस पर योगेश जी ने कड़वा सच बोला: "दुनिया में बहुत से पागल हैं Mercedes खरीदने वाले, आप मत बनिए! उनको पागल बनने दीजिए और अपने शेयर का दाम बढ़ाने दीजिए।"

5. धन की 'कैमरा ऊर्जा' का सिद्धांत:
हर चीज़ की अपनी ऊर्जा होती है। जैसे ही इंसान की तरफ कैमरा आता है, वह तुरंत 'अलर्ट मोड' में आकर बाल ठीक करने लगता है, वह सहज नहीं रह पाता। बड़े एक्टर कैमरे की ऊर्जा को बर्दाश्त कर लेते हैं, इसलिए वे कैमरे के सामने भी सहज रहते हैं।
उसी तरह धन की भी एक ऊर्जा है। जब ईश्वर धन दे, तो 'एक्टर' की तरह सहज बने रहो। जो आदमी पैसा पाकर 'अलर्ट मोड' (दिखावे और घमंड) में चला जाता है, उसका धन नष्ट हो जाता है!

🚨 चेतावनी: 99% लोग दिखावे के चक्कर में अपनी मेहनत की कमाई को 'लायबिलिटी' (बोझ) में जला रहे हैं और खुद को 'शव' बनाए बैठे हैं। अगर आप भी इस मानसिक गुलामी से निकलकर, यहीं बैठे-बैठे अरबपति बनने की 'दो सबसे बड़ी अवधारणाओं' को समझना चाहते हैं, तो एक सेकंड भी बर्बाद किए बिना तुरंत विडिओ देखें विडिओ लिंक कमेंट बॉक्स में ! 👇🤯

🚨 आपकी जन्म कुंडली 100% गलत हो सकती है! क्या जन्म का समय 'गर्भनाल कटना' है या कुछ और? ज्योतिष का सबसे बड़ा रहस्य! 🚩लोग प...
28/06/2026

🚨 आपकी जन्म कुंडली 100% गलत हो सकती है! क्या जन्म का समय 'गर्भनाल कटना' है या कुछ और? ज्योतिष का सबसे बड़ा रहस्य! 🚩

लोग पंडितों के पास जन्म का समय, स्थान और तारीख लेकर जाते हैं और पंडित कुंडली बना देते हैं। लेकिन भविष्यवाणियां गलत क्यों हो जाती हैं? सनातन ज्ञानपीठ के श्री योगेश मिश्रा जी ने 8 वर्षों तक 40,000 कुंडलियों पर जो शोध किया है, उसने ज्योतिष जगत के सबसे बड़े भ्रम को तोड़ दिया है।

आखिर बच्चे के 'जन्म का सही समय' (Time of Birth) किसे माना जाए? आइए जानते हैं इस वीडियो के सबसे चौंकाने वाले खुलासे:

जन्म के समय पर शास्त्रों का मतभेद
अक्सर लोग अस्पताल की घड़ी देखकर जन्म का समय नोट कर लेते हैं, लेकिन शास्त्रों में इस पर गहरा मतभेद रहा है।

कुछ शास्त्रों ने कहा कि जब डिंब और रज का मिलन (Conception) हो, वह जन्म का समय है।

कुछ ने कहा कि जब मां को पहली बार प्रसव वेदना (Labor pain) हो, वह समय है।

कुछ ने माना कि जब बच्चा मां के शरीर से पूरी तरह बाहर आ जाए या जब उसकी नाल काटी जाए, वह जन्म का समय है।

लेकिन 8 साल की रिसर्च के बाद सनातन ज्ञानपीठ ने निष्कर्ष निकाला कि गर्भनाल काटने का समय भी जन्म का सही समय नहीं है!

तो फिर जन्म का असली समय क्या है?
योगेश जी स्पष्ट करते हैं— "बच्चा जब पहली बार रोता है, तो वह खेचरी मुद्रा से अपने को सामान्य अवस्था में लाता है। वह जो पहली रोने की आवाज है, वही जन्म का सही समय है!"

रोने के पीछे का ब्रह्मांडीय विज्ञान
जब बच्चा मां के गर्भ में होता है, तो वह अपनी जिह्वा (जीभ) से नासिका (नाक) के छिद्रों को अंदर से बंद किए रहता है। इसे प्राकृतिक 'खेचरी मुद्रा' कहते हैं, ताकि गर्भ का पानी उसके फेफड़ों में ना भर जाए।

जब बच्चा पहली बार रोता है, तो वह इस मुद्रा को छोड़ता है और एक बहुत गहरी सांस (Inhale) लेता है। उस पहली सांस के साथ वातावरण में तैर रही 'ग्रहों की ऊर्जा' उसके अंदर चली जाती है। यह ऊर्जा दिमाग में जाकर 84 लाख तरह के रसायनों (Chemicals) को रिलीज करती है।

अगर सांस लेते वक्त मंगल तीव्र है, तो रसायन इंसान को आक्रामक बना देंगे।

चंद्रमा तीव्र है, तो व्यक्ति आत्म-चिंतनशील होगा।

शनि तीव्र है, तो वैरागी हो जाएगा।

राहु-केतु तीव्र हैं, तो व्यक्ति दुष्ट होगा।

हर बच्चा एक तरह से नहीं रोता!
लग्न के अनुसार बच्चों के रोने का समय और तरीका भी अलग होता है:

मकर लग्न: बच्चा देर से रोएगा।

कर्क लग्न: बच्चा तुरंत जल्दी रो देगा।

कन्या लग्न: बच्चा धीमे से रोएगा।

सिंह लग्न: बच्चा बहुत तेजी से रोएगा।

🚨 चेतावनी: अगर आपकी कुंडली आपके 'पहली बार रोने के समय' के बजाय 'गर्भनाल काटने' या 'अस्पताल की घड़ी' के हिसाब से बनी है, तो आपके ग्रहों की पूरी गणना गलत हो सकती है! क्या आपके शरीर में ग्रहों के वो लक्षण दिख रहे हैं जो कुंडली बता रही है?

99% ज्योतिषी आपको यह वैज्ञानिक और वैदिक रहस्य कभी नहीं बताएंगे। 40,000 कुंडलियों के इस ऐतिहासिक शोध और अपने असली जन्म समय का पूरा गणित समझने के लिए, तुरंत नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और खुद सुनिए! 👇🤯

पूरा वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें: 👇

🚨 आपका पेट सिर्फ 'दो मुट्ठी' के बराबर है! जापानी वैज्ञानिक को 'नोबेल' क्यों मिला? 'कैलोरी' के नाम पर चल रहे मेडिकल माफिय...
26/06/2026

🚨 आपका पेट सिर्फ 'दो मुट्ठी' के बराबर है! जापानी वैज्ञानिक को 'नोबेल' क्यों मिला? 'कैलोरी' के नाम पर चल रहे मेडिकल माफिया का सबसे बड़ा पर्दाफाश! 🚩

हम दिन में 4 बार ठूंस-ठूंस कर खाते हैं, फिर भी बीमार और थके हुए रहते हैं; और दिगंबर जैन संत 24 घंटे में सिर्फ 'एक अंजुली' खाकर मीलों पैदल चलते हैं और कभी अस्पताल नहीं जाते! ऐसा क्यों?

सनातन ज्ञानपीठ के श्री योगेश मिश्रा जी ने मानव शरीर और 'आहार के सूक्ष्म विज्ञान' का ऐसा रहस्य खोला है, जो आपके होश उड़ा देगा। आइए जानते हैं वीडियो के 6 सबसे बड़े खुलासे, बिल्कुल उन्हीं के सटीक शब्दों में:

1. आपका पेट भगवान ने कितना बड़ा बनाया है?
योगेश जी लाइव डेमो देकर कहते हैं— "अपने दोनों हाथों की मुट्ठी को आपस में जोड़ लीजिए; बस इतना ही बड़ा आपका पेट है!" इसमें दो सेब या एक केला आ सकता है। लेकिन हम 6 रोटी, चावल, दाल और 4 बजे समोसा ठूंसकर इसके 'डायफ्राम' को जबरदस्ती खींचकर बड़ा कर देते हैं। शरीर उस अतिरिक्त अनाज को 'फैट' (Fat) में बदलकर स्टोर करने लगता है और हम बलकी (मोटे) हो जाते हैं।

2. 'कैलोरी' (Calories) का सिद्धांत नॉन-साइंटिफिक और बड़ा धंधा है:
दिगंबर जैन संतों को देखिए, वे 24 घंटे में सिर्फ एक बार अपनी अंजुली (हथेलियों) में जितना भोजन आता है, उतना लेते हैं। सबसे ज्यादा कैलोरी पैदल चलने में खर्च होती है और वे मीलों पैदल चलते हैं; फिर भी आज तक कोई जैन संत कुपोषण का शिकार नहीं हुआ! योगेश जी कड़वा सच बोलते हैं— "कैलोरी का सिद्धांत अव्यावहारिक है, यह सिर्फ मेडिसिन माफियाओं का धंधा है।"

3. मर्सिडीज का छोटा पेट्रोल टैंक:
आपकी यह बॉडी एक लक्ज़री 'Mercedes' है। इसका पेट्रोल टैंक बहुत छोटा सा है। आप इसमें दिन में 4 बार जबरदस्ती ओवरफ्लो पेट्रोल (भोजन) भर रहे हैं, और जब एसिडिटी हो रही है तो गोली खाकर फिर भर रहे हैं! ऐसे में कैंसर होना तो स्वाभाविक है।

4. जापानी वैज्ञानिक का 'नोबेल पुरस्कार' और 'प्रदोष व्रत' का विज्ञान:
जापान के एक वैज्ञानिक को 'ऑटोफैगी' (Autophagy) की खोज के लिए नोबेल पुरस्कार मिला। उसने वही बात सिद्ध की जो भगवान शिव की 'शैव जीवन शैली' सदियों से कह रही है— प्रदोष व्रत!
त्रयोदशी को सूर्यास्त से पहले खा लीजिए, फिर 48 घंटे तक कुछ मत खाइए। जब हम बॉडी को खुद की चिकित्सा करने का मौका देते हैं, तो शरीर सबसे पहले अपने अंदर के 'नेगेटिव/कैंसर सेल्स' को खुद खा जाता है और इंसान निरोगी हो जाता है।

5. आहार की 6 रहस्यमयी सीढ़ियां ('विचार आहार' क्या है?):
इंसान की चेतना जैसे-जैसे ऊपर उठती है, उसका आहार सूक्ष्म होता जाता है:

मांसाहार ➔ 2. अन्न आहार (रोटी/चावल) ➔ 3. फलाहार ➔ 4. जलाहार (सिर्फ जूस/पानी) ➔ 5. सुगंध आहार (सिर्फ महक लेकर तृप्त होना) ➔ 6. विचार आहार (Thought Food)!
उच्च कोटि के साधक सिर्फ बैठकर मशरूम की सब्जी खाने का 'विचार' (कल्पना) करते हैं, और उनके ब्रेन से बिना खाए ही वो सारे हॉर्मोन रिलीज हो जाते हैं जो आपके असल में मशरूम खाने पर होते हैं!

6. मुंह सिर्फ एक 'बैसाखी' है, असली ऊर्जा 'मूलाधार' में है:
आपके मूलाधार चक्र में जो कुंडलिनी साढ़े तीन चक्र मारकर बैठी है, उसका एक चक्र 100 साल की ऊर्जा देता है (यानी कुल 360 वर्ष की जीवनी शक्ति)! हमने उस आंतरिक ऊर्जा को छोड़ दिया है और मुंह रूपी 'बैसाखी' से खाकर खुद को पहलवान समझ रहे हैं।

🚨 सबसे कड़वा सच: "जो इंसान दिन में 4 बार पौष्टिक खाना खा रहा है, वह असल में अपनी मौत की तरफ तेजी से बढ़ रहा है!" 99% डॉक्टर आपको 'ऑटोफैगी' और 'विचार आहार' का यह सनातन गणित कभी नहीं बताएंगे। आपके शरीर में सोई हुई 360 साल की ऊर्जा को जगाने वाला यह मास्टरक्लास आपकी पूरी चेतना को झकझोर कर रख देगा। इससे पहले कि यह वीडियो प्राइवेट हो जाए, तुरंत नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और खुद अपनी आंखों से सनातन विज्ञान का यह चमत्कार देखें! 👇🤯

पूरा वीडियो का लिंक पहले कमेंट मे देखें ! : 👇

🚨 बैंक की FD का सबसे खौफनाक चक्रव्यूह! कैसे आपके ही ₹100 से बैंक 70% कमाकर आपको गरीब बना रहा है? 🚩हम सब अपनी आय का एक हि...
21/06/2026

🚨 बैंक की FD का सबसे खौफनाक चक्रव्यूह! कैसे आपके ही ₹100 से बैंक 70% कमाकर आपको गरीब बना रहा है? 🚩

हम सब अपनी आय का एक हिस्सा बचाते हैं, दिन-रात मेहनत करते हैं, फिर भी गरीब के गरीब क्यों रह जाते हैं? और अमीर बिना कुछ किए लगातार अमीर कैसे हो रहे हैं? सनातन ज्ञानपीठ के श्री योगेश मिश्रा जी ने 'वित्तीय प्रबंधन' की इस क्लास में मिडिल क्लास की आर्थिक गुलामी का ऐसा कड़वा सच उजागर किया है, जो आपके होश उड़ा देगा।

आइए जानते हैं आपकी आर्थिक बर्बादी के वे 5 ऐतिहासिक खुलासे, बिल्कुल उन्हीं के सटीक शब्दों में:

1. शेयर बाजार का सबसे बड़ा धोखा (Intraday vs Prime Broker):
शेयर बाजार में जो हम 'इंट्राडे' (Intraday) या 'ऑप्शन ट्रेडिंग' खेलते हैं, वह सिर्फ गरीबों को फंसाने का बाजार है। संपन्न लोगों के 'प्राइम ब्रोकर' अलग होते हैं, जिनका मिनिमम इन्वेस्टमेंट ही 50 करोड़ से शुरू होता है! सॉफ्टवेयर के जरिए उन्हें 5-7 मिनट पहले ही पता चल जाता है कि बाजार कहाँ से 'यू-टर्न' मारेगा। वे एडवांस में प्रॉफिट बुक करके निकल जाते हैं, और गरीब ब्रोकर के माध्यम से हम लोग बस इस ट्रैप में फंसकर अपनी जमा पूंजी स्वाहा कर देते हैं।

2. कार्ल मार्क्स का भ्रम और 'पूंजी' (Capital) का असली अर्थ:
योगेश जी कहते हैं कि पूंजी कोई भौतिक चीज नहीं है! किसी का बैंक बैलेंस, बड़ा मकान, या रखा हुआ सोना पूंजी नहीं है। "पूंजी 'क्रय शक्ति' (Purchasing Power) का संचय है।"
अगर आपकी पूंजी देश की बढ़ती हुई महंगाई दर से धीमे ग्रो कर रही है, तो आप असल में गरीब हो रहे हैं! और अगर आपकी पूंजी महंगाई से तेज़ बढ़ रही है, तभी आप संपन्न हो रहे हैं।

3. आपको निचोड़ने वाले 5 सबसे बड़े लुटेरे (बैंक की 62% वाली लूट का पूरा गणित):
हमारी पूंजी की 'क्रय शक्ति' का सत्यानाश कौन कर रहा है? योगेश जी ने 5 संस्थाओं से तुरंत सावधान होने को कहा है:

बैंकिंग सेक्टर (Banks) की 62% वाली खुली लूट:

योगेश जी ने केनरा बैंक (Canara Bank) का लाइव उदाहरण देकर यह पूरा गणित समझाया है। इसे एकदम बच्चों की तरह ₹100 के उदाहरण से समझिए:

स्टेप 1: आपका पैसा (The Deposit)

आपने बड़ी मेहनत से ₹100 बचाए और बैंक में जाकर उसकी FD करा दी। बैंक ने आपको एक लॉलीपॉप थमाया और कहा— "सर, हम आपको साल का 8% ब्याज देंगे।"

(यानी 1 साल बाद आपको मिलेंगे = ₹108)

स्टेप 2: बैंक का खेल (The Business)

अब आपको क्या लगता है, बैंक आपके ₹100 को अपनी तिजोरी में मखमल के कपड़े पर रखकर Lock कर देता है? बिल्कुल नहीं! बैंक आपकी उस 'क्रय शक्ति' (Capital) को उठाता है और बाजार में उतार देता है:

किसी को 12% पर होम लोन दे दिया।

किसी को 18% पर पर्सनल लोन दे दिया।

किसी को 36% से 40% के भयानक ब्याज पर 'क्रेडिट कार्ड' का लोन दे दिया।

और बाकी पैसा बड़ी-बड़ी कंपनियों के 'प्राइम प्रोजेक्ट्स' में इन्वेस्ट कर दिया।

स्टेप 3: असल मुनाफा (The 70% Growth)

योगेश जी बताते हैं कि जब मार्केट के जानकारों ने केनरा बैंक के शेयर की साल भर की 'फाइनेंशियल ग्रोथ' का विश्लेषण किया, तो पता चला कि बैंक की कुल ग्रोथ 70% थी!

(यानी आपके ₹100 का इस्तेमाल करके बैंक ने बाजार से उसे ₹170 बना लिया)

स्टेप 4: अब 'लूट' का फाइनल गणित देखिए 🧮

बैंक ने आपके पैसे से कुल कमाया = 70%

उसमें से आपको (FD वाले को) थमाया = 8%

बैंक ने सीधा अपनी जेब में डाला = 62% (70 - 8 = 62)

योगेश जी यहाँ सबसे बड़ा तार्किक सवाल पूछते हैं:

"चलो माना कि बैंक ने व्यापार किया है, तो वह अपना 'एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज' (स्टाफ की सैलरी, बिजली का बिल, सिस्टम का खर्च) के नाम पर 5% या 10% ईमानदारी से काट ले! लेकिन 10% की जगह वह 62% खुद हड़प रहा है। पैसा आपका था, और मलाई बैंक खा गया!"

और इस कहानी का 'क्लाइमैक्स' (जले पर नमक) सुनिए:

बैंक ने जो 62% कमाया, वह तो 'कॉर्पोरेट टैक्स' के गणित में एडजस्ट हो जाएगा। लेकिन आपको जो 8% की भीख मिली है, उस चिल्लर पर भी सरकार सबसे पहले 'TDS' (Tax) काट लेगी! और अगर बैंक डूब गया, तो आपके 50 लाख रुपये भी क्यों न जमा हों, सरकारी नियम के मुताबिक आपको सिर्फ 5 लाख रुपये ही वापस मिलेंगे।

यानी: पैसा आपका ➔ जोखिम (Risk) आपका ➔ टैक्स आप दो ➔ और 62% का शुद्ध मुनाफा बैंक का मालिक ले जाए!

इसीलिए योगेश जी ने कहा था कि— "बैंक का मालिक 'संपन्न लोगों की यूनिवर्सिटी' में पढ़ रहा है, और FD कराने वाला आम आदमी 'दरिद्रों की यूनिवर्सिटी' में!" 🤯

टैक्सेशन विभाग: कर प्रणाली का सही ज्ञान न होने से हमारी पूंजी कटती है।

शिक्षण संस्थान: ये दिखावे के नाम पर 2-2 करोड़ फीस लूट लेते हैं और बच्चा बाहर आकर सिर्फ नौकरी ढूंढता है।

डॉक्टर और अस्पताल: प्रकृति आधारित औषधियों का उपयोग करें, अस्पताल पूंजी निचोड़ लेंगे।

ज्योतिषी, तांत्रिक और कोर्ट-कचहरी: अपने अज्ञान और झूठी शान के चक्कर में यहाँ पैसा बर्बाद न करें।

4. 1 लाख से करोड़पति बनने का 'मल्टीप्लाई 2' का गणित:
योगेश जी ने कैलकुलेटर पर सिद्ध किया कि अगर आप सही जगह (निफ्टी 50 की इक्विटी) निवेश करते हैं, तो 1 लाख रुपये को सिर्फ 8 बार 'मल्टीप्लाई 2' (x2) करने पर आप 1 करोड़ 28 लाख के मालिक बन जाएंगे!

5. 2024-25 का कृषि अलर्ट:
2024 और 2025 में अकाल की स्थिति आ सकती है। जिनके पास खेत-खलिहान हैं, वे अरहर की दाल, गेहूं और काला चना स्टोर करें, बेचने की जल्दबाजी न करें, डेढ़ से दोगुना रिटर्न मिलेगा!

🚨 याद रखिए: जो इंसान इस चक्रव्यूह को नहीं समझता, वह जिंदगी भर 8% की भीख के लिए खटेगा और उसका 62% मुनाफा कोई सूट-बूट वाला ले उड़ेगा। अपनी आंखों पर बंधी इस आर्थिक गुलामी की पट्टी को खोलने के लिए, तुरंत नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और खुद सुनिए यह पूरा 'माइंड-ब्लोइंग' खुलासा! 👇🤯

पूरा वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें: 👇

🚨 क्या सच में कोई तांत्रिक मंत्रों से किसी स्त्री को वश में कर सकता है? या यह सिर्फ एक ठगी का बाज़ार है? 🚩आज की पीढ़ी तं...
20/06/2026

🚨 क्या सच में कोई तांत्रिक मंत्रों से किसी स्त्री को वश में कर सकता है? या यह सिर्फ एक ठगी का बाज़ार है? 🚩

आज की पीढ़ी तंत्र-मंत्र का क्या मतलब समझती है? यही कि कोई ऐसा मंत्र मिल जाए जिससे किसी स्त्री को वश में किया जा सके या किसी की संपत्ति हड़प ली जाए। सनातन ज्ञानपीठ के श्री योगेश मिश्रा जी ने इसी मुद्दे पर तंत्र और वशीकरण के नाम पर चल रहे करोड़ों के गोरखधंधे की ऐसी पोल खोली है, जो आपको हिला देगी।

आइए जानते हैं वीडियो के 4 सबसे बड़े खुलासे, बिल्कुल योगेश जी के सटीक शब्दों में:

1. तांत्रिकों की ठगी का कड़वा सच (जर, जोरू, जमीन):
योगेश जी स्पष्ट करते हैं कि अनादि काल से दुनिया में सारे युद्ध 'जर, जोरू और जमीन' (चल संपत्ति, स्त्री और स्थायी संपत्ति) के लिए हुए हैं। आज भी हर व्यक्ति की यही इच्छा है कि— "कोई ऐसी अप्रत्याशित महिला उसके वश में आ जाए, किसी और की संपत्ति हड़प ले, या कोई उसकी जेब में पैसा डाल जाए।" इसी लालच का फायदा उठाकर तांत्रिक ठगी कर रहे हैं। वे कहते हैं— "इस मंत्र से स्त्री प्रभावित होगी, इस मंत्र से मामा का खेत मिल जाएगा"— और आदमी उन्हें एक अच्छा खासा 'हैंडसम अमाउंट' दे देता है। यह बस सिर्फ एक ठगी है!

2. तंत्र का असली अर्थ क्या है? (फाइनल डेफिनेशन):
अगर वशीकरण तंत्र नहीं है, तो असली तंत्र क्या है? योगेश जी ने तंत्र की सबसे सटीक और 'फाइनल डेफिनेशन' दी है— "तंत्र का अर्थ बस सिर्फ इतना है, अपनी 'वृत्ति' (Nature/Mindset) को बदलने की विद्या।" अगर आप अपनी वृत्ति को बदल लेते हैं, तो आप वही बनेंगे जो आप चाहते हैं। कोई यक्षिणी या भूत-प्रेत की सिद्धि आपका जीवन नहीं बदल सकती।

3. आप जीवन में परेशान क्यों हैं? (ईश्वर का असली उद्देश्य):
योगेश जी एक बहुत गहरा दार्शनिक सवाल उठाते हैं— "अगर आप निर्वाह योग्य ऊर्जा लेकर पैदा नहीं हुए होते, तो इस उम्र तक जीवित ही नहीं रह सकते थे।" ईश्वर ने आपको एक उद्देश्य के साथ भेजा था, लेकिन आप क्या कर रहे हैं? आप दुनिया को देखकर अपना उद्देश्य बना रहे हैं— "पड़ोसी का मकान ऐसा है, साले साहब की गाड़ी ऐसी है, उनकी तीन गर्लफ्रेंड हैं तो हमारी दो तो हो ही जाएं।" आप भूल गए हैं कि ईश्वर ने आपको किस काम के लिए भेजा था!

4. जीवन में संघर्ष और कष्ट क्यों आता है?
ईश्वर कह रहा है— "मैंने तुम्हें जिस लिए भेजा था, तुम वह काम नहीं कर रहे, बल्कि दूसरों की नकल कर रहे हो। इसलिए मैं तुम्हें सही रास्ते पर लाने के लिए कष्ट दे रहा हूँ।" अगर उस कष्ट से आपकी चेतना जागृत हो जाए और आप अपनी 'वृत्ति' बदल लें, तो संघर्ष खत्म हो जाएगा। और अगर चेतना नहीं जागी, तो जीवन का संघर्ष बढ़ता चला जाएगा!

स्त्री वशीकरण के तंत्र को और अधिक समझने के लिए विडिओ देखें ! 👇

पूरा वीडियो देखने के लिए लिंक कमेंट box में 👇

🚨 गाय, गंगा, गीता, गायत्री और गुरुकुल! सनातन के 5 'ग' और हमारे ज्ञान की लूट का वह कड़वा सच जो आपको हिला देगा! 🚩क्या आपको...
19/06/2026

🚨 गाय, गंगा, गीता, गायत्री और गुरुकुल! सनातन के 5 'ग' और हमारे ज्ञान की लूट का वह कड़वा सच जो आपको हिला देगा! 🚩

क्या आपको पता है कि हमारे प्राचीन आयुर्वेद और सनातन विज्ञान में ऐसी ताकत थी, जिसे देखकर आज की आधुनिक साइंस भी पानी भरती है? सनातन ज्ञानपीठ के श्री योगेश मिश्रा जी ने एक ऐसा ऐतिहासिक और वैज्ञानिक सच उजागर किया है, जो हर भारतीय को सुनना चाहिए।

आइए जानते हैं वीडियो के 6 सबसे बड़े खुलासे, बिल्कुल योगेश जी के सटीक शब्दों में:

1. जीवक का एक्स-रे (X-ray) वाला आयुर्वेदिक लेप:
प्राचीन वैद्य 'जीवक' ने एक ऐसा रासायनिक घोल तैयार किया था कि जिस जगह हड्डी टूट जाती थी, उस पर वह घोल लगाने से मास पेशियां ट्रांसपेरेंट (पारदर्शी) हो जाती थीं और नीचे जमीन पर पड़ने वाली परछाई में टूटी हुई हड्डी साफ़ दिखाई देने लगती थी!

2. गुरु दीक्षा का असली अर्थ (आयुर्वेद का रहस्य):
जीवक के गुरु ने कहा था कि गुरुकुल के 84 कोस के अंदर कोई ऐसा पदार्थ ढूंढ कर लाओ जिसका आयुर्वेद में इस्तेमाल नहीं होता, तभी मैं तुम्हें योग्य शिष्य मानूंगा। 6 महीने बाद जीवक ने आकर कहा— "गुरुजी ऐसा कुछ भी नहीं है जिसका की आयुर्वेदिक उपयोग नहीं है।" गुरु ने कहा— "यही मेरा योग्य शिष्य है।"

3. सनातन के 5 'ग' की ताकत (गाय, गंगा, गीता, गायत्री, गुरुकुल):

गीता: पृथ्वी पर 13 लाख धर्म ग्रंथ हैं, लेकिन 'श्रीमद् भगवत गीता' ही इकलौता ग्रंथ है जिसे भगवान ने स्वयं अपने मुख से कहा।

गायत्री: महर्षि वशिष्ठ ने गायत्री की ऊर्जा से युगों का क्रम बदल दिया (सतयुग के बाद सीधा त्रेता युग ला दिया)। और विश्वामित्र ने गायत्री की शक्ति से सृष्टि के विपरीत एक 'दूसरे स्वर्ग' का निर्माण शुरू कर दिया था!

गुरुकुल: जहां ज्ञान बेचा नहीं जाता था। हमारे यहाँ कन्यादान, गोदान और ज्ञानदान होता था। आज के गुरु ज्ञान की कीमत लगा रहे हैं और मंडी में बैठे हैं।

4. 1750 से पहले कोई वैज्ञानिक क्यों नहीं पैदा हुआ?
योगेश जी ने सबसे कड़वा सवाल पूछा— "जो जंगलों में नंगे घूमा करते थे, वो आज हमें सभ्यता सिखा रहे हैं? विचार करिए कि 1750 से पहले कोई वैज्ञानिक पैदा क्यों नहीं हुआ?" क्योंकि उन्होंने भारत की चुराई हुई 'पांडुलिपियों' का अध्ययन किया।

5. हिरोशिमा का परमाणु बम असल में 'ब्रह्मास्त्र' था!
दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका ने जो परमाणु बम गिराया, वह उनकी उपलब्धि नहीं थी। जर्मन साइंटिस्ट्स ने भारत की पांडुलिपियों में लिखे 'ब्रह्मास्त्र' के ज्ञान को पढ़कर इसे बनाया था, जिसे बाद में अमेरिका और रूस ले गए।

6. आज का सबसे बड़ा हथियार: सूचना तंत्र (P3 Project):
1957 में पेंटागन में 'P3 प्रोजेक्ट' आया। उन्होंने डिसाइड किया कि अब हथियारों से नहीं, बल्कि मनुष्य के मस्तिष्क (सोच) को बदला जाए। "आज सूचना तंत्र (फेसबुक/यूट्यूब) के हमले में आप सुबह से शाम तक 1200 सूचनाएं पाते हैं, लेकिन चिंतन किसी पर नहीं करते। उन्होंने हमें बौद्धिक रूप से विकलांग बना दिया है।"

हमारे सनातन ज्ञान की लूट और बौद्धिक गुलामी का यह सबसे कड़वा सच आज ही समझें और अपनी अगली पीढ़ी को बचाएं! 👇

पूरा वीडियो देखने के लिए लिंक कमेंट box में 👇

🚨 ओशो को थैलियम जहर किसने दिया? सुकरात और प्रभु जीसस को क्यों मारा गया? देव और असुर शक्तियों का सबसे कड़वा ऐतिहासिक सच! ...
18/06/2026

🚨 ओशो को थैलियम जहर किसने दिया? सुकरात और प्रभु जीसस को क्यों मारा गया? देव और असुर शक्तियों का सबसे कड़वा ऐतिहासिक सच! 🚩

क्या आपको लगता है कि इस पृथ्वी पर सिर्फ देवताओं का अधिकार है? नहीं! सनातन ज्ञानपीठ के श्री योगेश मिश्रा जी ने 'विष्णु पुराण' और विश्व इतिहास का ऐसा गहरा और कड़वा सच उजागर किया है, जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे।

आइए जानते हैं सृष्टि की रचना और महापुरुषों की हत्याओं के पीछे का वह रहस्य, बिल्कुल योगेश जी के सटीक शब्दों में:

1. देव और असुर दोनों एक साथ पैदा हुए:
विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान श्री हरि (विष्णु) के अग्र भाग से 'देवों' की उत्पत्ति हुई और पृष्ठ (पीछे के) भाग से 'असुरों' की। सृष्टि के अंत तक ये दोनों पृथ्वी पर एक साथ एग्जिस्ट करेंगे। घृणा, द्वेष, लोभ और क्रोध मनुष्य के साथ ही पैदा हुए हैं।

2. प्रकृति ने असुरों को भी बेसहारा नहीं छोड़ा!
जब देवता कमजोर पड़ते हैं, तो भगवान कृष्ण जन्म लेते हैं— "यदा यदा हि धर्मस्य..."। लेकिन जब असुर निर्बल होते हैं, तो विष्णु भगवान वामन अवतार (5वां अवतार) लेकर देवताओं के लिए राजा बलि को छलते हैं। प्रकृति ने आसुरी शक्तियों को भी 'शुक्राचार्य' जैसा गुरु दिया, जो जली हुई राख को पानी में घोलकर क्लोनिंग (संजीवनी विद्या) से मरे हुए इंसान को फिर से जिंदा कर देते थे!

3. आज 'आसुरी शक्तियों' का बोलबाला क्यों है?
योगेश जी स्पष्ट कहते हैं कि आज पृथ्वी पर आसुरी शक्तियों का बोलबाला है, लेकिन देव शक्तियां निर्बल नहीं हैं, उन्हें बस संगठित करने की जरूरत है। इतिहास गवाह है कि जब भी सत्य की देव शक्ति उठी, आसुरी शासक घबरा गए। उन्होंने 3 सबसे बड़े ऐतिहासिक उदाहरण दिए:

ओशो (Osho) की हत्या: ओशो अमेरिका गए और वहां की अर्थव्यवस्था को अपने हाथ में ले लिया। अमेरिका का तत्कालीन राष्ट्रपति 'रीगन' घबरा गया। उसने ओशो को एक फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस के केस में फंसाया और 'थैलियम' (Thallium) नाम का धीमा जहर देकर मार दिया।

सुकरात (Socrates) की हत्या: जब सुकरात को मेयर बनाया गया, तो वहां का शासक उनकी न्याय व्यवस्था से घबरा गया और उन्हें भी जहर दे दिया गया।

प्रभु जीसस (Jesus) को सूली: जीसस की धर्म पर चर्चा से वहां के कुटिल धर्माचार्य घबरा गए। उन्होंने शासकों पर दबाव बनाया और परिणाम यह हुआ कि उन्हें क्रूस (सूली) पर लटका दिया गया।

सत्य को दबाने के इस विश्वव्यापी षड्यंत्र और सनातन देव शक्तियों के जागरण का यह पूरा वीडियो हर इंसान को देखना चाहिए! 👇

पूरा वीडियो देखने के लिए लिंक कमेंट box में 👇

Address

Sector/3
Faridabad
121004

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Bhartiya Swadeshi Peeth Trust posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share