30/06/2026
"कुरआन मजीद ने हर उस काम को इबादत बताया है जिसमें अल्लाह के आदेश का पालन हो और उसे निष्ठा के साथ अल्लाह को राज़ी करने की भावना से किया जाए। चाहे उसका संबंध विवेक व विचार से हो, आत्मा व जज़्बात से हो या विभिन्न आचरण से। ईमान व विश्वास,, श्रद्धा व भरोसा, सम्मान व इबादत, इंसाफ और दया, हलाल व हराम में भेद, कानूनों और नियमों का पालन, सही कामों का हुक्म देना और गलत कामों से रोकना, सच की गवाही देना और अल्लाह की राह में जिहाद, ये सभी इबादत के काम हैं, बशर्ते उनमें समर्पण और विनम्रता की भावना मौजूद हो। कुरआन मजीद आंतरिक व बाह्य, शारीरिक व मानसिक, आत्मिक व भौतिक का कोई भेद नहीं करता । उसके निकट मन, हृदय और शरीर का प्रत्येक कार्य समान रूप से इबादत है।"
(मक़सद-ए-ज़िन्दगी का इस्लामी तसव्वुर)
मुहम्मद अब्दुल हक अंसारी