Shri Hausila Prasad Singh Ramdulari Shakshik Evam Dharmarth Trust Ayodhya

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Shri Hausila Prasad Singh Ramdulari Shakshik Evam Dharmarth Trust Ayodhya 8G &12A Approved https://hprdtrust.org.in

डिजिटल दुनिया हमारे बच्चों के स्वास्थ्य और विकास को गहराई से प्रभावित कर रही है। यहाँ आपके द्वारा साझा की गई महत्वपूर्ण ...
07/07/2026

डिजिटल दुनिया हमारे बच्चों के स्वास्थ्य और विकास को गहराई से प्रभावित कर रही है। यहाँ आपके द्वारा साझा की गई महत्वपूर्ण जानकारी का हिंदी अनुवाद और सारांश दिया गया है:📱👧 डिजिटल दुनिया हर दिन हमारे बच्चों के स्वास्थ्य को आकार दे रही है।💙 टेक्नोलॉजी बच्चों को सीखने, कुछ नया बनाने, दूसरों से जुड़ने और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पाने में मदद कर सकती है। लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म को किस तरह डिजाइन किया गया है, यह भी बहुत मायने रखता है।शोध बताते हैं कि अत्यधिक डिजिटल एक्सपोज़र (स्क्रीन टाइम), विशेष रूप से संवेदनशील युवाओं में, निम्नलिखित जोखिमों को बढ़ा सकता है:😟 चिंता (Anxiety) और अवसाद (Depression)😴 खराब नींद की आदतें📉 शारीरिक गतिविधियों में कमी🤝 वास्तविक जीवन में सामाजिक संपर्कों की कमी🚨 इसके अलावा, बच्चों को नुकसानदेह कंटेंट, गलत जानकारी, ऑनलाइन शोषण और अस्वस्थ उत्पादों (unhealthy products) के विज्ञापनों का सामना भी करना पड़ सकता है।👨‍👩‍👧‍👦 परिवार क्या कर सकते हैं?✅ स्क्रीन-मुक्त पल (Screen-free moments) बनाएं: विशेष रूप से भोजन के समय और सोने से ठीक पहले स्क्रीन का उपयोग पूरी तरह बंद करें।✅ बाहरी खेलों को बढ़ावा दें: बच्चों को बाहर खेलने, नई हॉबीज अपनाने और परिवार व दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए प्रेरित करें।✅ खुली बातचीत करें: बच्चे ऑनलाइन क्या देखते हैं और क्या करते हैं, इस बारे में उनसे खुलकर बात करें।✅ सुरक्षा सेटिंग्स का उपयोग करें: बच्चों के डिवाइस में उम्र के अनुसार प्राइवेसी और सेफ्टी सेटिंग्स (Parental Controls) लागू करें।✅ गुणवत्ता पर ध्यान दें: याद रखें कि स्क्रीन टाइम की 'क्वालिटी' (वे क्या देख रहे हैं) उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि उसकी 'क्वांटिटी' (वे कितनी देर देख रहे हैं)।❤️ मुख्य उद्देश्य: तकनीक को पूरी तरह से खत्म करना नहीं है—बल्कि बच्चों को इसके फायदों का आनंद लेने में मदद करना है, ताकि वे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों दुनिया में स्वस्थ, सुरक्षित और जुड़े रहकर बड़े हो सकें।यदि आप इस विषय पर कुछ और जानना चाहते हैं, तो कृपया मुझे बताएं:क्या आप बच्चों के लिए स्क्रीन-टाइम गाइडलाइन्स (उम्र के अनुसार) जानना चाहते हैं?क्या आप डिवाइस में पैरेंटल कंट्रोल सेटिंग्स सेटअप करने का तरीका जानना चाहते हैं?क्या आप बच्चों को डिजिटल डिटॉक्स कराने के व्यावहारिक उपाय जानना चाहते हैं?

यह पौधा पेट की लटकती चर्बी, सड़े हुए दाँत, गठिया, आस्थमा, बवासीर, मोटापा, गंजापन, किडनी आदि 20 रोगों के लिए किसी वरदान स...
07/07/2026

यह पौधा पेट की लटकती चर्बी, सड़े हुए दाँत, गठिया, आस्थमा, बवासीर, मोटापा, गंजापन, किडनी आदि 20 रोगों के लिए किसी वरदान से कम नही....

आज हम आपको ऐसे पौधे के बारे में बताएँगे जिसका तना, पत्ती, बीज, फूल, और जड़ पौधे का हर हिस्सा औषधि है, इस पौधे को अपामार्ग या चिरचिटा (Chaff Tree), लटजीरा कहते है।

अपामार्ग या चिरचिटा (Chaff Tree) का पौधा भारत के सभी सूखे क्षेत्रों में उत्पन्न होता है यह गांवों में अधिक मिलता है खेतों के आसपास घास के साथ आमतौर पाया जाता है इसे बोलचाल की भाषा में आंधीझाड़ा या चिरचिटा (Chaff Tree) भी कहते हैं।

अपामार्ग की ऊंचाई लगभग 60 से 120 सेमी होती है आमतौर पर लाल और सफेद दो प्रकार के अपामार्ग देखने को मिलते हैं।

सफेद अपामार्ग के डंठल व पत्ते हरे रंग के, भूरे और सफेद रंग के दाग युक्त होते हैं इसके अलावा फल चपटे होते हैं जबकि लाल अपामार्ग (RedChaff Tree) का डंठल लाल रंग का और पत्तों पर लाल-लाल रंग के दाग होते हैं।

इस पर बीज नुकीले कांटे के समान लगते है इसके फल चपटे और कुछ गोल होते हैं दोनों प्रकार के अपामार्ग के गुणों में समानता होती है फिर भी सफेद अपामार्ग(White chaff tree) श्रेष्ठ माना जाता है।

इनके पत्ते गोलाई लिए हुए 1 से 5 इंच लंबे होते हैं चौड़ाई आधे इंच से ढाई इंच तक होती है।

पुष्प मंजरी की लंबाई लगभग एक फुट होती है, जिस पर फूल लगते हैं, फल शीतकाल में लगते हैं और गर्मी में पककर सूख जाते हैं। इनमें से चावल के दानों के समान बीज निकलते हैं इसका पौधा वर्षा ऋतु में पैदा होकर गर्मी में सूख जाता है।

अपामार्ग तीखा, कडुवा तथा प्रकृति में गर्म होता है। यह पाचनशक्तिवर्द्धक, दस्तावर (दस्त लाने वाला), रुचिकारक, दर्द-निवारक, विष, कृमि व पथरी नाशक, रक्तशोधक (खून को साफ करने वाला), बुखारनाशक, श्वास रोग नाशक, भूख को नियंत्रित करने वाला होता है तथा सुखपूर्वक प्रसव हेतु एवं गर्भधारण में उपयोगी है।

चिरचिटा या अपामार्ग (Chaff Tree) के 20 अद्भुत फ़ायदे ...

1. गठिया रोग....

अपामार्ग (चिचड़ा) के पत्ते को पीसकर, गर्म करके गठिया में बांधने से दर्द व सूजन दूर होती है।

2. पित्त की पथरी ....

पित्त की पथरी में चिरचिटा की जड़ आधा से 10 ग्राम कालीमिर्च के साथ या जड़ का काढ़ा कालीमिर्च के साथ 15 ग्राम से 50 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खाने से पूरा लाभ होता है। काढ़ा अगर गर्म-गर्म ही खायें तो लाभ होगा।

3. यकृत का बढ़ना....

अपामार्ग का क्षार मठ्ठे के साथ एक चुटकी की मात्रा से बच्चे को देने से बच्चे की यकृत रोग के मिट जाते हैं।

4. लकवा....

एक ग्राम कालीमिर्च के साथ चिरचिटा की जड़ को दूध में पीसकर नाक में टपकाने से लकवा या पक्षाघात ठीक हो जाता है।

5. पेट का बढ़ा होना या लटकना....

चिरचिटा (अपामार्ग) की जड़ 5 ग्राम से लेकर 10 ग्राम या जड़ का काढ़ा 15 ग्राम से 50 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम कालीमिर्च के साथ खाना खाने से पहले पीने से आमाशय का ढीलापन में कमी आकर पेट का आकार कम हो जाता है।

6. बवासीर......

अपामार्ग की 6 पत्तियां, कालीमिर्च 5 पीस को जल के साथ पीस छानकर सुबह-शाम सेवन करने से बवासीर में लाभ हो जाता है और उसमें बहने वाला रक्त रुक जाता है।

खूनी बवासीर पर अपामार्ग की 10 से 20 ग्राम जड़ को चावल के पानी के साथ पीस-छानकर 2 चम्मच शहद मिलाकर पिलाना गुणकारी हैं।

7. मोटापा.....

अधिक भोजन करने के कारण जिनका वजन बढ़ रहा हो, उन्हें भूख कम करने के लिए अपामार्ग के बीजों को चावलों के समान भात या खीर बनाकर नियमित सेवन करना चाहिए। इसके प्रयोग से शरीर की चर्बी धीरे-धीरे घटने भी लगेगी।

8. कमजोरी.....

अपामार्ग के बीजों को भूनकर इसमें बराबर की मात्रा में मिश्री मिलाकर पीस लें। 1 कप दूध के साथ 2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित सेवन करने से शरीर में पुष्टता आती है।

9. सिर में दर्द.....

अपामार्ग की जड़ को पानी में घिसकर बनाए लेप को मस्तक पर लगाने से सिर दर्द दूर होता है।

10. संतान प्राप्ति....

अपामार्ग की जड़ के चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में दूध के साथ मासिक-स्राव के बाद नियमित रूप से 21 दिन तक सेवन करने से गर्मधारण होता है। दूसरे प्रयोग के रूप में ताजे पत्तों के 2 चम्मच रस को 1 कप दूध के साथ मासिक-स्राव के बाद नियमित सेवन से भी गर्भ स्थिति की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

11. मलेरिया.....

अपामार्ग के पत्ते और कालीमिर्च बराबर की मात्रा में लेकर पीस लें, फिर इसमें थोड़ा-सा गुड़ मिलाकर मटर के दानों के बराबर की गोलियां तैयार कर लें। जब मलेरिया फैल रहा हो, उन दिनों एक-एक गोली सुबह-शाम भोजन के बाद नियमित रूप से सेवन करने से इस ज्वर का शरीर पर आक्रमण नहीं होगा। इन गोलियों का दो-चार दिन सेवन पर्याप्त होता है।

भारत के हर घर में दही पाया जाता है. दही का सेवन शरीर के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. क्योंकि दही में ऐसे कई पोषक तत्व...
06/06/2026

भारत के हर घर में दही पाया जाता है. दही का सेवन शरीर के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. क्योंकि दही में ऐसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो गर्मियों में आपको फिट रखने के साथ-साथ कई बीमारियों से भी दूर रखते हैं. हम आपको दही के ऐसे ही कुछ फायदे बताने जा रहे हैं.

दही में कैल्शियम, फास्फोरस, प्रोटीन, लैक्टोज, जैसे रासायनिक पदार्थ भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. जो गर्मियों में शरीर के लिए जरूरी माने जाते हैं. इसलिए गर्मी के मौसम में दही खाने की सलाह दी जाती है. खास बात यह है कि दही का इस्तेमाल घर-घर में होता है. यानि दही आपको आपके घर में ही मिल जाएगा.

दोपहर के वक्त खाने में शामिल करें एक कटोरी दही
अगर आप दोपहर के खाने में हर दिन एक कटोरी दही का सेवन करते हैं. तो इससे आपके शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी नहीं होगी. क्योंकि दोपहर के वक्त दही का सेवन करना बहुत फायदेमंद माना जाता है. इसलिए दोपहर के वक्त दही जरूर खाना चाहिए.

वजन कम करने में सहायक
दही वजन कम करने में भी सहायक माना जाता है. दही लो फैट माना जाता है, इसके अलावा दही में हाई प्रोटीन भी पाया जाता है जो शरीर के वजन को कंट्रोल रखता है. इसलिए सभी को दही खाने की सलाह दी जाती है. खास बात यह है कि दही आप रायता और लस्सी के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं. तो देखा दोस्तों आपने गर्मियों में दही का सेवन करने से कितने फायदे मिलते हैं.

दही से इम्यूनिटी होती है मजबूत
दही खाने से शरीर की इम्यूनिटी भी मजबूत रहती है. क्योंकि दही में प्रोबायोटिक्स पोषक तत्व पाया जाता है जो शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखने में काम आता है. इसलिए गर्मियों के सीजन में पुरुषों को दही खाने की सलाह दी जाती है. खास बात यह है कि कई लोग दूध नहीं पी पाते हैं ऐसे में वे इम्यूनिटी को मजबूत रखने के लिए दही का सेवन कर सकते हैं.

पाचन क्रिया होती है ठीक
दही का सेवन हर दिन करने से पाचन क्रिया ठीक रहती है. इसलिए हर दिन एक कटोरी दही खाना फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि दही से पेट साफ रहता है जिससे पाचन क्रिया दिनभर दुरुस्त रहती है. इसलिए सुबह या दोपहर के वक्त दही खाने की सलाह दी जाती है.

गैस और कब्ज की परेशानी से निजात दिलाता है दही
गैस और कब्ज की समस्या आज एक आम बात हो गई है. लेकिन इस परेशानी को दूर करने में दही बहुत सहायक माना जाता है. क्योंकि दही में गैस और कब्ज को दूर करने वाले तत्व पाए जाते हैं. इसलिए हर दिन खाने के साथ दही खाना अच्छा माना जाता है.

ब्लड प्रेशर है नियंत्रित करता है दही
ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में दही का सेवन करने की सलाह दी जाती है. दही में पोटेशियम पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है, जो ब्लड प्रेशर की परेशानी को कम करने में सहायक माना जाता है. ऐसे में जिन लोगों को ब्लड प्रेशर की परेशानी रहती है वह दही का सेवन कर सकते हैं.

हेल्थ रहती है मजबूत
गर्मियों के मौसम में दही का सेवन करना पुरुषों के लिए फायदेमंद माना जाता है. एक रिसर्च के अनुसार दही से पुरुषों में सीमेन क्वालिटी को इम्प्रूव करने में मदद मिलती है. इसके अलावा दही से पुरुषों की हेल्थ भी मजबूत रहती है. जबकि दही कई बीमारियों से भी हमें दूर रखता है. इसलिए पुरुषों को दही का सेवन करने की सलाह दी जाती है.

दही खाने से तनाव भी होता है कम
भागदौड़ भरी लाइफ स्टाइल में हम अपनी सेहत को पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं. जिससे अक्सर तनाव होने लगता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दही का सेवन करने से तनाव से बचा जा सकता है. दही तनाव कम करने में सहायक माना जाता है. क्योंकि दही खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है. जिससे थकान नहीं होती और तनाव भी नहीं होता है. इसलिए जो लोग ज्यादा काम करते हैं उन्हें दही का सेवन करने की सलाह दी जाती है.

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