27/02/2026
*राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय, संचिया में विद्यालय समय के दौरान धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने पर कड़ी आपत्ति*
डूंगरपुर। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के जिलाध्यक्ष जितेश वरहात ने प्रेस वक्तव्य जारी कर राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय, संचिया में दिनांक 21 फरवरी 2026 को विद्यालय समय (प्रातः 11:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक) “प्राण प्रतिष्ठा नामक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। कार्यक्रम का संचालन कार्यवाहक संस्था प्रधान श्री राकेश पंड्या द्वारा किया गया।
एसएफआई का स्पष्ट आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा पूर्णतः संचालित विद्यालय में इस प्रकार का धार्मिक आयोजन भारतीय संविधान की मूल भावना के विपरीत है। संविधान के अनुच्छेद 28(1) में स्पष्ट प्रावधान है कि राज्य निधि से पूर्णतः संचालित शैक्षणिक संस्थानों में किसी प्रकार की धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी। ऐसे में विद्यालय समय में धार्मिक अनुष्ठान आयोजित करना संवैधानिक प्रावधानों की अवहेलना है।
विद्यालय में लगभग 500 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं तथा 12 शिक्षक कार्यरत हैं। वर्तमान में वार्षिक परीक्षाएं संचालित हो रही हैं, जबकि जानकारी के अनुसार पाठ्यक्रम भी पूर्ण रूप से समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे संवेदनशील समय में शैक्षणिक कार्य बाधित कर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करना विद्यार्थियों के हितों की उपेक्षा दर्शाता है।
स्टूडेंट्स फैडरेशन ऑफ़ इंडिया जिला कमेटी के संज्ञान में आया है कि पिछले दिनों संचिया स्कूल में जो धार्मिक अनुष्ठान किया गया है वह पूरी तरीके से साम्प्रदायिक एजेंडा नजर आ रहा है कि संविधान में कही भी शिक्षण संस्थानों में धार्मिक ग्रंथों मंदिरों मज्जिद्दो गिरजाघरों चर्च को स्थापित करने का जिक्र है न कि ओर सरकारी कार्यालय से कोई लिखित अनिवार्य आदेश है बावजूद इसके इस तरह के आयोजन खुले आम किए जाते हैं केवल संचिया स्कूल ही नही राज्य व जिले की अनेकों स्कूलों में ऐसे आयोजन आम बात हो गई है जबकि शिक्षा विभाग की गाइडलाइन में कही जिक्र नही है न ही ऐसे आयोजनों की अनुमति ली जाती है शिक्षण संस्थानों में अनेकों धर्म जाति समुदाय के विद्यार्थी अधयन्न करते है ऐसे में शिक्षा के क्षेत्र में इस तरीके के आयोजन उचित नही है ऐसे आयोजनों से अन्य धर्मों में विश्वास रखने वाले विद्यार्थियों व आयोजित कार्यक्रम के धर्म के विद्यार्थियों के बीच टकराहट जैसी स्थिति बन सकती है राज्य सरकार लगातार ऐसे कार्यक्रमों को अनदेखा करेंगी तो इसका परिणाम ठीक नही होगा,
एसएफआई ने यह भी कहा कि शासकीय शिक्षण संस्थानों का उद्देश्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक सोच और संवैधानिक मूल्यों का विकास करना है। यदि संस्था प्रमुख स्वयं धार्मिक भूमिका में कार्यक्रम संचालित करते हैं, तो यह पद की मर्यादा और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
एसएफआई एवं संचिया ग्रामवासियों द्वारा संयुक्त रूप से जिला कलेक्टर, डूंगरपुर को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय जांच, कार्यक्रम आयोजन की अनुमति से संबंधित अभिलेखों की जांच तथा जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों के विरुद्ध सेवा नियमों के अंतर्गत सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है, तो एसएफआई एवं स्थानीय नागरिक लोकतांत्रिक एवं चरणबद्ध आंदोलन प्रारंभ करेंगे, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शिक्षा विभाग एवं जिला प्रशासन की होगी।