हम है आदिवासी

हम है आदिवासी ​हम आदिवासी हैं।
एकजुटता हमारी शक्ति है, जोहार हमारा सम्मान।
हमारी आवाज़ में ही हमारी पहचान है।
जोहार जय आदिवासी ❤️🏹
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उलगुलान जिंदाबाद जय बिरसा मुंडा
01/11/2025

उलगुलान जिंदाबाद जय बिरसा मुंडा

जय जोहार जय आदिवासी 🏹❤️🙏
31/10/2025

जय जोहार जय आदिवासी 🏹❤️🙏

आदिवासी समाजासाठी, 'वळी' म्हणजे जंगलातून मिळणारे कंदमुळे आणि रानभाज्या हे केवळ अन्न नाही, तर ती निसर्गाने दिलेली देणगी आ...
30/10/2025

आदिवासी समाजासाठी, 'वळी' म्हणजे जंगलातून मिळणारे कंदमुळे आणि रानभाज्या हे केवळ अन्न नाही, तर ती निसर्गाने दिलेली देणगी आहे.
पुरातन आहार आणि आरोग्य:
आदिम जीवनशैली: हजारो वर्षांपासून आदिवासी समाज जंगलातून फळे, फुले, पालेभाज्या आणि कंदमुळे गोळा करून त्यावर आपली उपजीविका करत आहेत. हे त्यांचे मूळ आणि पारंपरिक अन्न आहे.
पौष्टिकतेचा खजिना: जंगली कंदमुळांमध्ये (जसे की, रताळी, सुरण, अळकुड्या, कोनफळ, आणि विविध प्रकारचे 'वळी') कार्बोहायड्रेट्स, खनिजे, फायबर्स आणि जीवनसत्त्वे भरपूर प्रमाणात असतात. त्यामुळे आदिवासींचे शरीर नैसर्गिकरित्या काटक आणि निरोगी राहते.
औषधी गुणधर्म: अनेक कंदमुळे आणि रानभाज्यांमध्ये औषधी गुणधर्म असतात, ज्यामुळे ते विविध रोगांवर उपचार म्हणून देखील वापरले जातात.
निसर्गाशी असलेले अतूट नाते:
निसर्ग-पूजक: आदिवासी समाज निसर्गाला देव मानतो. ते कोणत्याही रासायनिक घटकांचा वापर न करता, निसर्गाच्या नियमांनुसार ही कंदमुळे गोळा करतात. यामुळे पर्यावरण आणि वनसंपदा जपली जाते.
पारंपरिक ज्ञान: त्यांना कोणते कंद खाण्यायोग्य आहेत, कोणते विषारी आहेत, ते कधी आणि कसे काढायचे, याचे पिढ्यानपिढ्या चालत आलेले सखोल ज्ञान आहे. 'वळी' गोळा करणे ही त्यांच्यासाठी एक कला आणि परंपरेचा भाग आहे.
सामाजिक आणि सांस्कृतिक ओळख:
उपजीविकेचे साधन: आजही अनेक आदिवासी कुटुंबांसाठी 'वळी' हा त्यांच्या उत्पन्नाचा एक महत्त्वाचा स्त्रोत आहे. ते बाजारात ही कंदमुळे विकून आपल्या कुटुंबाचा उदरनिर्वाह करतात.
सण आणि उत्सव: आदिवासींच्या अनेक सण-उत्सवांमध्ये आणि धार्मिक विधींमध्ये या वनोपजांचा (जंगलातील वस्तूंचा) वापर केला जातो, ज्यामुळे त्यांची सांस्कृतिक ओळख टिकून राहते.
याचा अर्थ: आदिवासी समाज केवळ 'वळी' खात नाही, तर ते जंगल आणि निसर्गाचे संरक्षण करत, आरोग्यदायी आणि टिकाऊ जीवनशैली जगतात. त्यांचे हे ज्ञान आणि ही परंपरा जगासाठी एक अमूल्य ठेवा आहे.
जोहार! जय आदिवासी!

जोहार जय आदिवासी ❤️🏹🙏
27/10/2025

जोहार जय आदिवासी ❤️🏹🙏

लक्ष्मीपूजन निमित्त सर्व जाती-धर्माच्या जीवाभावाच्या मित्रांना हार्दिक शुभेच्छा,  शुभेच्छुक दिपक दशरथ अहिरे शिंदखेडा जि ...
21/10/2025

लक्ष्मीपूजन निमित्त सर्व जाती-धर्माच्या जीवाभावाच्या मित्रांना हार्दिक शुभेच्छा,
शुभेच्छुक दिपक दशरथ अहिरे शिंदखेडा जि धुळे जिल्हा अध्यक्ष आदिवासी काँग्रेस
भिल समाज विकास मंच महा राज्य
मा नगरसेवक शिंदखेडा जि धुळे

27 वर्षीया लहरी बाई आदिवासी समुदाय की एक प्रेरणास्पद और अद्वितीय महिला हैं, जिन्होंने 150 दुर्लभ बीजों का बैंक तैयार किय...
12/10/2025

27 वर्षीया लहरी बाई आदिवासी समुदाय की एक प्रेरणास्पद और अद्वितीय महिला हैं, जिन्होंने 150 दुर्लभ बीजों का बैंक तैयार किया है और हमें उनकी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को स्वीकार करने और प्रोत्साहित करने का अवसर मिला है। जोहार जय आदिवासी कला 🚩❤️🙏🏹

सच्ची कहानी आदिवासी महिला कीजोहार जय आदिवासी ❤️ 🙏 🏹 वी. श्रीपति की कहानी वास्तव में प्रेरणादायक है! वह तमिलनाडु के तिरुव...
10/10/2025

सच्ची कहानी आदिवासी महिला की
जोहार जय आदिवासी ❤️ 🙏 🏹 वी. श्रीपति की कहानी वास्तव में प्रेरणादायक है! वह तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई जिले के जव्वादु हिल्स के पास एक छोटे से गाँव पुलियूर से आती हैं, जो मलयाली आदिवासी समुदाय से हैं और जिसने अपने सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव बाधा को पार किया है। उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर थे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने अपने समुदाय में शिक्षा की कमी को दूर करने के लिए कानून की पढ़ाई की और तमिलनाडु सिविल जज परीक्षा में सफल हुईं। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे मलयाली आदिवासी समुदाय और उन सभी महिलाओं के लिए एक बड़ी जीत है जो अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रही हैं। उनकी कहानी हमें यह याद दिलाती है कि अगर हमारे पास सच्ची लगन और हिम्मत हो, तो हम किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं।

धरती की बेटीजंगल की माटी, लाल रंग की ओढ़नी,माथे पर कौड़ियों का मुकुट सजा।बीच में दर्पण, चमकती आँखें,हँसी दंतकथा, जैसे को...
10/10/2025

धरती की बेटी
जंगल की माटी, लाल रंग की ओढ़नी,
माथे पर कौड़ियों का मुकुट सजा।
बीच में दर्पण, चमकती आँखें,
हँसी दंतकथा, जैसे कोई रितुजा।
गले में लटकते हैं सीके-मोती का हार,
हर दाना कहता है पूर्वजों की पुकार।
नाचती धरती, कदम-कदम पर ताल,
पीछे ढोल-मंजीरे का गूँजता संसार।
खुले मैदान में उत्सव का मेला,
सबके पाँव थिरकें, हर मन अलबेला।
सभ्यता से दूर, प्रकृति के करीब,
ये है आदिवासी जीवन का सच्चा तख़्त।

जीवंत संस्कृति और गौरवशाली परंपरा यह तस्वीर गौरवशाली परंपरा और जीवंत संस्कृति के अद्भुत संगम को प्रदर्शित करती है, जो हम...
10/10/2025

जीवंत संस्कृति और गौरवशाली परंपरा यह तस्वीर गौरवशाली परंपरा और जीवंत संस्कृति के अद्भुत संगम को प्रदर्शित करती है, जो हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी विरासत पर गर्व करने के लिए प्रेरित करती है। इस नर्तकी की आँखों में अपनी जड़ों के प्रति जो गहरा सम्मान और उत्साह दिखाई दे रहा है, वह हमें अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान और गर्व की भावना को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करता है। सूर्य के रंग जैसा पीला और गहन रहस्य जैसा बैंगनी, ये पारंपरिक वस्त्र उसके हर कदम और हाव-भाव को एक अनोखी ऊर्जा दे रहे हैं, जो हमें अपनी संस्कृति की विविधता और समृद्धि की ओर आकर्षित करते हैं। माथे पर बंधा बैंड, और सिर पर लगे रंग-बिरंगे पंख इस बात की घोषणा कर रहे हैं कि यह केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि अपने इतिहास और विरासत का एक शक्तिशाली प्रदर्शन है, जो हमें अपनी संस्कृति के प्रति गर्व और सम्मान की भावना को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है। अपने हाथों में पत्तियों का गुच्छा लिए, वह न केवल एक कहानी कह रही है, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही विरासत को भी जीवित रख रही है, जो हमें अपनी संस्कृति के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान की भावना को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करती है। यह छवि हमें याद दिलाती है कि हमारी संस्कृति और परंपराएं ही हमारी असली पहचान और अमूल्य धरोहर हैं, जो हमें अपनी संस्कृति के प्रति गर्व और सम्मान की भावना को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करती हैं।

भगवान बिरसा मुंडा, जिन्हें 'धरती आबा' भी कहा जाता है, ने ब्रिटिश शासन और ज़मींदारी प्रथा के खिलाफ़ एक साहसिक 'उलगुलान' (...
10/10/2025

भगवान बिरसा मुंडा, जिन्हें 'धरती आबा' भी कहा जाता है, ने ब्रिटिश शासन और ज़मींदारी प्रथा के खिलाफ़ एक साहसिक 'उलगुलान' (विद्रोह) का नेतृत्व किया, जिसने लोगों को सशक्त बनाया और स्वतंत्रता की भावना को जागृत किया। उनकी गिरफ्तारी और रांची जेल में उनके कैद के समय को दिखाता है, जो उनके संघर्ष और बलिदान की कहानी को बयां करता है। उन्हें 1900 ईस्वी में गिरफ्तार किया गया था और 9 जून 1900 को रांची जेल में उनकी मृत्यु हो गई, जिसे लोग आज़ादी की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानते हैं।

10/10/2025

कांहीं चुकतं असेल तर माफी मागतो परंतु विषय आहे जगाच्या पोशिंदा शेतकरीचा धुळे जिल्हाचे आमदारांनी धुळे जिल्हा असेल माझा शिंदखेडा तालुका असे येथिल शेतकरी न्याय मिळाला पाहिजे शेतकरीला कर्जमुक्त केला पाहिजे , नुकसान झालेल्या शेतकऱ्याला भरपाई मिळाली पाहिजे
येणाऱ्या मंगळवार दि १४ रोजी शिंदखेडा तहसील कार्यालयावर आंदोलन शेतकरीसाठी
दिपक दशरथ अहिरे शिंदखेडा जिल्हा धुळे जिल्हाध्यक्ष आदिवासी काँग्रेस विभाग धुळे

सातपुड़ा का जंगल आदिवासी समुदाय के लिए प्रकृति का खजाना है, जो उन्हें साल भर रोजगार प्रदान करता है।जय आदिवासी ❤️🙏
09/10/2025

सातपुड़ा का जंगल आदिवासी समुदाय के लिए प्रकृति का खजाना है, जो उन्हें साल भर रोजगार प्रदान करता है।
जय आदिवासी ❤️🙏

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