शहीद भगतसिंह यादगार कमेटी धारुहेड़ा

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शहीद भगतसिंह यादगार कमेटी धारुहेड़ा सामाजिक जनवादी मंच

काकोरी एक्शन के महान क्रांतिकारी शहीद रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां व रोशन सिंह की प्रतिमाओं ध्वस्त करने की निंदा
13/04/2026

काकोरी एक्शन के महान क्रांतिकारी शहीद रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां व रोशन सिंह की प्रतिमाओं ध्वस्त करने की निंदा

शहीद भगत सिंह यादगार कमेटी धारूहेड़ा, रेवाड़ी के तत्वावधान में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम राष्ट्रीय अखबारों की सुर्खिय...
13/04/2026

शहीद भगत सिंह यादगार कमेटी धारूहेड़ा, रेवाड़ी के तत्वावधान में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम राष्ट्रीय अखबारों की सुर्खियों में

प्रेस नोटधारूहेड़ा - (23 मार्च- 2026)- आजादी आंदोलन के महान क्रांतिकारी योद्धा देश की जनता के सच्चे सपूत शहीद ए आजम भगत ...
13/04/2026

प्रेस नोट
धारूहेड़ा - (23 मार्च- 2026)- आजादी आंदोलन के महान क्रांतिकारी योद्धा देश की जनता के सच्चे सपूत शहीद ए आजम भगत सिंह,राजगुरु व सुखदेव के 95 वें शहीदी दिवस पर शहीद भगतसिंह यादगार कमेटी धारुहेड़ा, रेवाड़ी के तत्वाधान में धारुहेड़ा स्थित शहीद भगत सिंह चौक पर श्रद्धांजलि सभा का कार्यक्रम आयोजित किया गया। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित नगर पालिका के चेयरमैन कंवर सिंह यादव, उपचेयरमैन अजय जांगडा, कमेटी के अध्यक्ष सोशल एक्टिविस्ट कामरेड रमेश चंद्र एडवोकेट, कोषाध्यक्ष प्रेम फौजी, धीरज सैनी सहसचिव, राजकुमार पार्षद,अंतर सिंह पांचाल, गोपाल शोर्या,जीतन शोर्या, नवीन अग्निहोत्री,दलीप सिंह थानेदार,अजय मेहरा,दीपक,रवि व दिनेश गौड़ आदि ने महान शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
इस अवसर पर कमेटी के अध्यक्ष सोशल एक्टिविस्ट कामरेड रमेश चंद्र एडवोकेट ने कहा कि शहीद भगत सिंह राजगुरु व सुखदेव का सपना था कि देश में शोषणमुक्त समाजवादी शासन की स्थापना हो। परंतु आजादी आंदोलन में कांग्रेस के समझोता परस्त नेतृत्व के चलते इन महान शहीदों का सपना बीच मंजिल में ही लूट लिया गया। आजादी के बाद से देश में तेजी से किसान मजदूर व मेहनतकश के हर तबके पर ज़ुल्म अत्याचार बढ़े हैं। पूंजीपतियों की तिजोरियां अकूत मुनाफे से भर रही है और किसान मजदूर वर्ग बदहाली का जीवन जी रहा है। चारों ओर जुल्म अत्याचार व मंहगाई- बेरोजगारी का बोलबाला है। शासक पार्टियां पूंजीपतियों के मुनाफे को बढ़ाने के लिए हर क्षेत्र में निजीकरण, व्यापारी करण की नीतियों को बेरहमी से लागू कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह का उदघोष था पूंजीवादी मुर्दाबाद, साम्राज्यवाद का नाश हो। भगत सिंह ने कहा था कि जब तक दुनिया में पूंजीवाद साम्राज्यवाद रहेगा तब तक बाजार के लिए जनता पर युद्ध थोपें जाते रहेंगे। अमरीकी साम्राज्यवाद द्वारा ईरान पर युद्ध ईरान की सम्प्रभुता पर हमला है तथा मानवता के विरुद्ध है। पूरी दुनिया के मानवतावादी व शांति प्रेमी जनता को इस युद्ध के खिलाफ आवाज बुलंद करनी होगी। तभी हम मानवता को बचा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक वैचारिक विरासत है। भगत सिंह के आदर्श को आधार बनाकर हम तमाम समस्याओं के खिलाफ लड़ सकते हैं। इसलिए आज उनके विचारों को आम जनता में व्यापक स्तर पर फैलाने की जरुरत ताकि शहीद भगत सिंह के सपनों का समाजवादी समाज स्थापित किया जा सके। यही इन महान क्रांतिकारी शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव अमर रहे, इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद का नाश हो, समाजवादी क्रांति जिंदाबाद, इंकलाबी शहीदों के आदर्श को जन जन में फैला दो, जंगखोर अमेरिका व इजराइल ईरान पर युद्ध बंद करे के नारों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ ।
जारी कर्ता
रमेश चंद्र एडवोकेट, अध्यक्ष
शहीद भगत सिंह यादगार कमेटी धारूहेड़ा, रेवाड़ी
मोबाइल नंबर
9416609809
94169 92994

13/04/2026
15/03/2026

भगतसिंह का सन्देश!

यह भयानक असमानता और ज़बरदस्ती लादा गया भेदभाव दुनिया को एक बहुत बड़ी उथल-पुथल की ओर लिये जा रहा है। यह स्थिति अधिक दिनों तक क़ायम नहीं रह सकती। स्पष्ट है कि आज का धनिक समाज एक भयानक ज्वालामुखी के मुख पर बैठकर रंगरेलियाँ मना रहा है और शोषकों के मासूम बच्चे तथा करोड़ों शोषित लोग एक भयानक खड्ड की कगार पर चल रहे हैं।

सभ्यता का यह प्रासाद यदि समय रहते सँभाला न गया तो शीघ्र ही चरमराकर बैठ जायेगा। देश को एक आमूल परिवर्तन की आवश्यकता है। और जो लोग इस बात को महसूस करते हैं उनका कर्त्तव्य है कि साम्यवादी सिद्धान्तों पर समाज का पुनर्निर्माण करें। जब तक यह नहीं किया जाता और मनुष्य द्वारा मनुष्य का तथा एक राष्ट्र द्वारा दूसरे राष्ट्र का शोषण, जिसे साम्राज्यवाद कहते हैं, समाप्त नहीं कर दिया जाता तब तक मानवता को उसके क्लेशों से छुटकारा मिलना असम्भव है, और तब तक युद्धों को समाप्त कर विश्व-शान्ति के युग का प्रादुर्भाव करने की सारी बातें महज ढोंग के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं हैं। क्रान्ति से हमारा मतलब अन्ततोगत्वा एक ऐसी समाज-व्यवस्था की स्थापना से है जो इस प्रकार के संकटों से बरी होगी और जिसमें सर्वहारा वर्ग का आधिपत्य सर्वमान्य होगा। और जिसके फलस्वरूप स्थापित होने वाला विश्व-संघ पीड़ित मानवता को पूँजीवाद के बन्धनों से और साम्राज्यवादी युद्ध की तबाही से छुटकारा दिलाने में समर्थ हो सकेगा।

Ajay Ashu

10/02/2026

रहीम जी का एक प्रसिद्ध दोहा है:
"पावस देखि रहीम मन, कोइल साधे मौन।
अब दादुर वक्ता भए, हमको पूछत कौन

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