14/03/2026
साथियों नमस्कार!
'तरुण विद्यापीठ फाउंडेशन' का जन्म किसी संस्था की नींव रखने से नहीं, बल्कि एक गहरे संकल्प और भावनाओं के आंसुओं से हुआ है। एक फौजी पिता के अनुशासन और मेरी माँ के निस्वार्थ प्रेम ने मुझे हमेशा दूसरों के लिए जीना सिखाया। जीवन के इस सफर में मैंने अपने छोटे भाई स्वर्गीय अरुण के साथ-साथ अपने कई और अजीज लोगों को हमेशा के लिए खो दिया। अपनों के जाने की वह टीस और खालीपन आज भी दिल में है, लेकिन उसी पीड़ा ने मुझे एक नई दिशा दी।
मैंने तय किया कि अब यह जीवन उनकी पावन स्मृति को समर्पित होगा। समाज को आधुनिक, आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना ही मेरे अपनों को मेरी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हमारा सपना एक ऐसे समावेशी समाज का निर्माण करना है, जहाँ कोई भी खुद को अकेला या विकास की दौड़ में पीछे न पाए।
आज के इस आधुनिक युग में, हमारा संकल्प है कि समाज का हर वर्ग—हमारे युवा, महिलाएं, किसान, मजदूर और व्यापारी—आधुनिक ज्ञान और 'नई तकनीक' से जुड़ें। जब एक किसान के पसीने को तकनीक का सही मार्गदर्शन मिलेगा, जब एक मजदूर के हाथों को नया हुनर मिलेगा, जब हमारी मातृशक्ति शिक्षा के दम पर स्वावलंबन के पथ पर चलेंगी, और जब व्यापारी वर्ग अपना अनुभव युवाओं के साथ बांटेगा, तब ज्ञान के इस पवित्र आदान-प्रदान से 'समग्र उत्थान' की एक सच्ची क्रांति जन्म लेगी।
यह केवल इंसानों की उन्नति का सफर नहीं है। इस यात्रा में हमें अपने बुजुर्गों का अमूल्य आशीर्वाद चाहिए, जिनके अनुभवों की छांव के बिना कोई भी नींव मजबूत नहीं हो सकती। इसके साथ ही, हमारी संवेदनशीलता हमारी प्रकृति, हर पेड़-पौधे और हर बेजुबान जीव तक पहुंचनी चाहिए। सच्चा विकास वही है जिसमें पूरी सृष्टि का कल्याण और सम्मान निहित हो।
हमारा ध्येय वाक्य है— "शिक्षा है जड़, कौशल है पंख, उत्थान है हमारी उड़ान।" आइए, अपनी पीड़ा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाएं। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए,
मैं आप सभी से आह्वान करता हूँ कि ज्ञान और तकनीक के इस महायज्ञ में आप भी हमारा हाथ थामें।
मिलकर एक ऐसा सशक्त, संवेदनशील और आत्मनिर्भर समाज गढ़ें, जहाँ हर हाथ में हुनर हो, हर मन में सेवा भाव हो, और कोई भी इस विकास यात्रा में पीछे न छूटे।
आपके स्नेह और सहयोग की प्रतीक्षा में
संस्थापक
तरुण विद्यापीठ फाउंडेशन