08/03/2026
✊ जय भीम | जय बिरसा 🌿
“इतिहास केवल तिथियों से नहीं बनता, वह चेतना से बनता है।
मार्च 1927 की स्मृति हमें याद दिलाती है कि अधिकार माँगे नहीं जाते — उन्हें संगठित समाज अर्जित करता है।”
7 मार्च 2026 को मार्च 1927 की ऐतिहासिक स्मृति को स्मरण करते हुए द अम्बेडकर बिरसा युवा वाहिनी की वार्षिक बैठक दिल्ली में आयोजित की गई। यह दिन उस ऐतिहासिक चेतना का प्रतीक है जब बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने सामाजिक समानता और मानवीय गरिमा के संघर्ष को एक नई दिशा दी थी।
बैठक में संगठन के उद्देश्यों जैसे Pay Back to Society, संगठन के विस्तार, आम रेल कर्मचारियों को संगठन से जोड़ने, ग्रुप-D के कर्मचारियों के बच्चों की बेहतर शिक्षा एवं अवसर सुनिश्चित करने की योजनाओं, तथा रेलवे में अनुसूचित जाति और जनजाति को मिल रहे संवैधानिक संरक्षणों पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही इस विषय पर भी गंभीर विचार हुआ कि यदि कुछ अधिकारी इन संवैधानिक संरक्षणों को कुचलने का प्रयास करते हैं तो उन्हें रोकने के लिए उपलब्ध संस्थागत एवं संवैधानिक प्रावधानों का प्रभावी उपयोग किस प्रकार किया जाए।
बैठक के दौरान संगठन से जुड़े नए साथियों को संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने हेतु नई जिम्मेदारियाँ भी प्रदान की गईं।
बैठक की अध्यक्षता द अम्बेडकर बिरसा युवा वाहिनी के अध्यक्ष भाई चन्द्रप्रकाश जी ने की तथा बैठक का संचालन संगठन के महासचिव भाई राजीव मीणा जी ने किया। बैठक के मुख्य अतिथि के रूप में राजनीतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक तथा सोशल मीडिया विषयों के जानकार भाई वीरेन बेनीवाल जी उपस्थित रहे।
बैठक में कई विषयों पर गंभीर मंथन हुआ।
श्री सुमीत जी ने संगठन द्वारा NRMU को दिए गए समर्थन के विषय में अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कहीं समाज हमें NRMU का ही एक अंग न मानने लगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मित्रता, मित्रता ही दिखनी चाहिए — दासता नहीं।
श्री बृजलाल मीणा जी ने सुझाव दिया कि संगठन को अब व्यापक स्तर पर सदस्यता अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों को जोड़ना चाहिए।
श्री हरिओम मीणा जी ने सुझाव दिया कि संगठन के भीतर आपसी सहयोग की एक मजबूत व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। यदि संगठन के किसी सदस्य को बीमारी के कारण वेतन न मिलने जैसी परिस्थिति उत्पन्न होती है तो प्रत्येक माह सहयोग राशि एकत्र कर पीड़ित सदस्य को मासिक भत्ता दिया जाए। इसके अतिरिक्त यदि किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है तो उस स्थिति में संगठन के सभी सदस्य ₹500 का सहयोग एकत्र कर मृतक सदस्य के परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करें।
श्री अशोक गहलोत जी ने भी संगठन को तन-मन-धन से संचालन करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
मुख्य अतिथि भाई वीरेन बेनीवाल जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि संगठन के विस्तार और व्यापकता पर गंभीरता से कार्य करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संगठन को अपनी सदस्यता बढ़ाने और समाज के अधिक से अधिक लोगों तक अपनी वैचारिक पहुँच विकसित करने के लिए संगठित प्रयास करने चाहिए।
संगठन के महासचिव भाई राजीव मीणा जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि संगठन का मूल उद्देश्य समाज के अधिक से अधिक लोगों को जोड़ना है। इसी भावना से इसकी सदस्यता न्यूनतम रखने का प्रयास किया गया है ताकि अधिक से अधिक लोग संगठन से जुड़ सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन की सदस्यता केवल रेल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के आम दलित और आदिवासी साथी भी संगठन के सदस्य बन सकते हैं।
AIRF/NRMU के समर्थन के विषय में उन्होंने कहा कि बाबासाहेब के पदचिन्हों पर चलते हुए एक ऐसी यूनियन को चुना गया है जो दलितों और सवर्णों के हितों की रक्षा में भेदभाव न करे, जिसका वचन AIRF के महासचिव श्री S. G. मिश्र जी द्वारा दिया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि संगठन में 15% अनुसूचित जाति तथा 7.5% अनुसूचित जनजाति प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर सीधे राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग तथा अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण से संबंधित संसदीय समिति को समाज की वेदना से अवगत कराया जाएगा ताकि संवैधानिक संस्थाएँ रेलवे सहित अन्य संस्थानों में हो रहे जातीय भेदभाव की समीक्षा कर न्याय दिलाने में सहायता करें और इन भेदभावों को अपनी वार्षिक रिपोर्ट में प्रतिबिंबित करें।
अध्यक्षीय उद्बोधन में भाई चन्द्रप्रकाश जी ने सभी साथियों द्वारा रखे गए मुद्दों पर अपनी सहमति व्यक्त की तथा सफल बैठक के आयोजन के लिए सभी उपस्थित साथियों का धन्यवाद किया।
“संगठन ही शक्ति है — और जागरूक समाज ही न्याय की सबसे बड़ी गारंटी है।”
✊ जय भीम — जय बिरसा 🌿