03/09/2026
"श्रीकृष्ण का मूल, वास्तविक और सर्वोच्च स्वरूप एक 'महायोगी', 'योगेश्वर' और 'तत्वज्ञानी' का ही है। महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता में हमें उनके इसी गंभीर, मार्गदर्शक और ब्रह्मांडीय स्वरूप के दर्शन होते हैं, जिन्होंने कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में अर्जुन को जीवन, कर्म और धर्म का शाश्वत उपदेश दिया था।"सांस्कृतिक परंपराओं और लोककथाओं में उनके 'माखनचोर' या 'गोपियों को नचाने वाले' रूपों को बहुत ही सतही ढंग से प्रस्तुत किया जाता है, जो उनके वास्तविक महायोगी स्वरूप की गरिमा के अनुकूल नहीं है। आइए, उनके वास्तविक योगेश्वर रूप को पहचानें और आत्मसात करें। सौजन्य से:प्रदीप पाठक — अद्रिजा ग्रुप ट्रस्ट (Adrija Group Trust)