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10/05/2026

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में एक्टर विजय (थलपति विजय) की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सरकार बनाने का दावा पेश किया है। विजय ने 10 मई 2026 को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है।
यहाँ समर्थन देने वाली पार्टियों और उनके विधायकों का विवरण दिया गया है (234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 है)
तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK - विजय की पार्टी): 108 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी)।

कांग्रेस (Congress): 5 विधायक।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI): 2 विधायक।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI(M)): 2 विधायक।
विदुथलाई चिरुथाईगल काची (VCK): 2 विधायक।
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML): 2 विधायक। [1, 2, 3, 4, 5, 6]
कुल समर्थन: टीवीके (108) + सहयोगी (13) = 121 या इससे अधिक का समर्थन, जिससे सरकार बनाने का रास्ता साफ हुआ। [1]

उन्होंने 10 मई 2026 को तमिलनाडु के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जिससे दशकों से चल रहे द्रविड़ पार्टियों के दबदबे का अंत हुआ।
शुरुआत में 108 सीटों के साथ, टीवीके को सरकार बनाने के लिए सहयोगियों (कांग्रेस, लेफ्ट, VCK) का सहारा लेना पड़ा।

10/05/2026
सीमांत रक्षक श्री गंगानगर राजस्थान से प्रकाशित बहुजन समाज  दैनिक समाचार पत्र
28/02/2025

सीमांत रक्षक श्री गंगानगर राजस्थान से प्रकाशित बहुजन समाज दैनिक समाचार पत्र

27/02/2025

🟩🟦🟨 *जातीय अत्याचार स्थानीय शासन प्रशासन की नाकामियों का परिणाम, कब लगेगी लगाम*
वीरेंद्र कुमार जाटव

"*मथुरा के करनावली गांव में दबंगों के अत्याचार के कारण बेटियों की शादी टूटने से मचा कोहराम*".

"*विवाह में आए बरातीयों पर भी दबंगो का अत्याचार, गाड़ियों को किया क्षतिग्रस्त*".

*आजादी के 75 वर्ष बाद भी देश में जातिवाद की जड़े इतनी गहरी* हैं कि ग्रामीण अंचलों में जमीदार वर्ग जातीय भेदभाव,अत्याचार एवं उत्पीड़न रोकने में शासन प्रशासन लाचार और असमर्थ है.जातिवाद का घृणित एवं खौफनाक चेहरा मथुरा के करनावली गांव में सामने आया है जब अनुसूचित जाति वर्ग की दो बेटियों की शादी में दबंगों के द्वारा की गई बदतमीजी, बेज्जती और मारपीट की गई और गरीब दलितों के मान सम्मान को रौंदा गया.

*इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है* कि एक गरीब दलित की बेटियों के साथ भी बदतमीजी और उनके चेहरे पर कीचड़ तक फेंकी गई थी. दबंग के द्वारा बारातियों की भी पिटाई की और उनके वाहनों को भी क्षतिग्रस्त किया गया. जिसका परिणाम यह निकला कि शादी खराब हो गई और इस परिवार के मान सम्मान और स्वाभिमान को ठेस लगी है.

*करनावली गांव के दबंगों के द्वारा किया गया यह कृत्य* किसी भी सभ्य समाज को शर्मसार करने वाला है. ऐसी अमानवीय घटनाएं देश के लिए एक कलंक है. ऐसे घृणित अत्याचार की मात्र निंदा करने से बात नहीं बनेगी. ऐसे उपद्घवियों पर कड़ी से कड़ी कानून की धाराएं लगाई जाए और इनको कड़ी सजा सुनिश्चित की जाए .

*यह घटनाक्रम कानून एवं व्यवस्था की ही नहीं* है बल्कि यह एक सामाजिक मुद्दा भी है जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में दलितों को रोज जीना और मरना पड़ता है और अपमान का घूंट पीना पड़ता है जिसका समाधान अभी तक सभी सरकार देने में विफल रही है. आखिर क्या कारण है कि सरकार की कोशिशें के बावजूद दलितों पर अत्याचार लगातार बढ़ते जा रहे हैं.

*भारत की संसद में केंद्रीय मंत्री बन्दी संजय कुमार* के द्वारा बताया गया है कि वर्ष 2020-21- 22 इन दो वर्षों में 1.5 लाख अत्याचार की घटनाएं अनुसूचित जाति वर्ग पर हुई हैं जिनमें से उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 41000 घटनाएं हुई है. इसके बाद राजस्थान एवं मध्य प्रदेश है जहां जातीय क्राइम रेट सबसे अधिक है.
ऐसी घटनाएं सोचने पर मजबूर करती हैं कि देश में जातीय जहर के कारण के कितने परिवार कुर्बान होंगे, कितनी शादियां टूटेगी. ऐसी घटनाओं की बाढ़ आ गई है जहां पर दलितों को घोड़े पर चढ़ने से रोका जाता है, मारपीट की जाती है.पुलिस प्रशासन कभी मदद करने की स्थिति में होता है और कभी नहीं भी होता है. इस तरह की जातिवादी अत्याचार उत्पीड़न और घटनाएं किसी एक जिले और राज्य तक की सीमित नहीं है बल्कि देश के सभी राज्यों में ऐसी घटनाएं होती हैं.

*इस घटनाक्रम पर हालांकि शासन प्रशासन ने मुस्तादी* दिखाते हुए नामजद लोगों को गिरफ्तार किया है. लेकिन कानून व्यवस्था को चुनौती देते हुए गांव के दबंग के द्वारा 2 घंटे से अधिक का तांडव होता रहा जिसके लिए प्रशासन को भी जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सख्त प्रशासन के बारे में जाने जाते हैं इस संदर्भ में भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को स्वत: ही संज्ञान लेते हुए डीएम और एसएसपी को स्पष्ट आदेश दिए जाएं और पीड़ित परिवार अशोक साहब के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए जाएं.

वीरेंद्र कुमार जाटव,
*राजनीतिक विश्लेषक एवं राष्ट्रीय सचेतक समता सैनिक दल*

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