भारत स्वाभिमान दल

भारत स्वाभिमान दल स्वस्थ, समृद्ध, शक्तिशाली एवं संस्कारवान भारत का पुनर्निर्माण

भारत स्वाभिमान दल संक्षिप्त परिचय

भारतवर्ष एक ऐसा देश है जो कभी सोने का शेर था ।

हर व्यक्ति आनन्दित, हर परिवार संपन्न, सबके पास अपने काम और सब कामो में व्यस्त, सर्वोच्च स्तर का चरित्र, बौद्धिक स्तर पर भारत का कोई मुकाबला नहीं था, उच्च स्तरीय गुरुकुल शिक्षा पद्धति, आयुर्वेदिक और शल्य चिकित्सा, तकनीकि विज्ञान और खोज में सबसे आगे, सबसे पहले अंतरिक्ष विज्ञान का ज्ञाता, संस्कार और परम्परा में पूरे विश्व का गुरु और सिरमौर कहलाने वाला भारतवर्ष आज वासना, नशा, भ्रष्टाचार और व्याभिचार और आलस्य में डूबा हुआ है।

हर तरफ चोरी, दुश्मनी, हत्या, बलात्कार, धरना प्रदर्शन, मुफ्तखोरी, दलाली, घूसखोरी और अपराध अपने चरम पर है।

कोई संतुष्ट नहीं, सबके अंदर असुरक्षा की भावना घर कर चुकी है, कुछ भी निश्चित नहीं लगता।

जो समाज का नेतृत्व करते है, जिनके इशारे मात्र पर कुछ बदल सकता है, वो स्वाभिमान जागरण, विकास और राष्ट्रीय एकता के स्थान पर, विनाश और साम्प्रदायिक तुष्टिकरण कर विखण्डन की बात करते है, अपने राजनैतिक हित के लिए हमेशा धर्म के आधार पर भेदभाव करते है, जाति और सम्प्रदाय की बातो में उलझाकर, उकसाकर लड़वाया करते है, और वोट की राजनीति करते है, उनके लिए हम वोट बैंक के अलावा और कुछ नहीं।

जो विकास और जानकारी के स्रोत है, जो जन जन तक जानकारी पहुचाने के माध्यम है, वो अश्लीलता परोसकर विदेशी कम्पनियो का व्यापार बढ़ाकर, कमीशन के रूप में पैसा बटोर रहे है, भारत के नागरिकों को संविधानिक रूप से साम्प्रदायिक आधार पर बांटने वाले कानून लागू कर दिये गये है।

जिनके हाथ में देश का भविष्य है, जो पीढ़ियों का निर्माण करते है, जो अपने द्वारा बच्चों को चरित्र, व्यवहार, सामाजिक और भविष्य निर्माण की कला सिखाते है, उनको कानूनों में बांधकर अपंग बना दिया, और थोप दी विदेशी शिक्षा व्यवस्था।

आज सब व्यवस्थाओं में घुन लग गया है, न कुछ स्पष्ट है और न ही सापेक्ष, अपनी मूल प्रकृति को भूलकर दूसरो की व्यवस्था और गंदे संस्कारो से प्रभावित होकर हम विनाश की अंधी दौड़ में शामिल हो गए है जिसका अंजाम शायद एक दिन सीरिया जैसा हो सकता है।

क्या आप चाहते हो कि आप के बच्चे जिन्हें आप अपनी जान से ज्यादा प्यार करते हो, ऐसे माहौल में जिए, ऐसी व्यवस्थाये विनाशकारी है इनको बदलना होगा।

ऐसे में देश के कुछ युवाओ और बुद्धिजीवी लोगो ने मिलकर, अपने देश के स्वर्णिम इतिहास का अध्ययन कर क्रांतिकारी, योगियो और संतो के जीवन से प्रेरणा लेकर "भारत स्वाभिमान दल" संगठन की स्थापना की है, और उन सिद्धांतो पर कार्य करने का निर्णय लिया जिन पर चलकर यह देश खुशहाल, संपन्न, शक्तिशाली, संस्कारवान और विश्वगुरु था। आइये मिलकर संस्कारित, खुशहाल, समृद्ध, दिव्य और तेजस्वी भारत का निर्माण करे।

सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन के लिए संगठित होना अति आवश्यक है।

भारत स्वाभिमान दल देश के हर उम्र के विचारशील, प्रगतिशील और राष्ट्रभक्तों का इस महान कार्य में सहयोग के लिए आवाहन करता है।

सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन के लिए भारत स्वाभिमान दल की ग्यारह सूत्री कार्य योजना:-

1. वर्तमान में चल रही समस्त गलत नीतियों व भ्रष्ट व्यवस्थाओं का राष्ट्र हित में पूर्ण परिवर्तन कराना। भ्रष्टाचार, बलात्कार, दहेज हत्या, गौहत्या, आतंकवाद व मिलावट करने वालों के विरूद्ध मृत्युदण्ड का कानून बनवाकर सम्पूर्ण भारतीयों को सुरक्षा प्रदान करवाना। शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून, अर्थ व कृषि व्यवस्था का पूर्ण भारतीयकरण व स्वदेशीकरण करना।

2. साम्प्रदायिक आधार पर भेदभाव करने वाले कानूनों को निरस्त कर समान नागरिक संहिता लागू करना।

वर्तमान भारतीय संविधान जाति व धर्म के आधार पर भारतीय नागरिकों में भेदभाव करता हैं, यह संविधान धर्म के आधार पर किसी नागरिक को सामान्य, तो किसी नागरिक को विशेषाधिकार देता हैं। इस संविधानिक साम्प्रदायिक भेदभाव के चलते देश में जातीय व साम्प्रदायिक तनाव बढ़ रहा हैं, जो राष्ट्रीय एकता व अखण्डता के लिए घातक हैं, और कालांतर में गृहयुद्ध का कारण भी बन सकता हैं।

राष्ट्र हित में साम्प्रदायिक आधार पर भारतीय नागरिकों में भेदभाव करने वाले कानूनों को निरस्त कर समान नागरिक संहिता लागू की जाए। देश में समानता का अधिकार लागू किया जाना चाहिए।

3. जातिवाद को असंवैधानिक घोषित करना, सरकारी महत्व के अभिलेख विद्यार्थी पंजीकरण, मूल निवास, जॉब पंजीकरण आदि परिपत्रों में जाति लिखने को प्रतिबंधित करना।

4. नौकरी हेतु किसी भी प्रकार के आरक्षण को अवैध घोषित कर उस पर प्रतिबंध लगाना, केवल शिक्षा हेतु आर्थिक आधार पर गरीब विद्यार्थियों को सहायता दी जाए, नौकरी उन्हें उनकी योग्यता के आधार पर मिले।

5. भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना, काले धन को वापस मंगाना, भ्रष्टाचारियों की संपत्ति को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करना व भ्रष्टाचारियों को कठोर दंड का प्रावधान करना।

6. केन्द्रीय गौवंश मंत्रालय बनाकर स्वदेशी गौवंश को प्रोत्साहन की नीति बनाना। केन्द्रीय योजना बनाकर जिला स्तर पर एक एक लाख गौवंश की क्षमता वाली गौशालाएँ बनवाना, उनमें बेसहारा गाय, बैल व सांडों को रखकर गौवंश आधारित उद्योगों की शुरूआत कराना, गैस, बिजली, खाद, औषधि आदि गौवंश से उत्पन्न कर विदेशी मुद्रा बचाना, तथा गाँवों में गौवंश आधारित संयंत्र स्थापित करने के लिए गौवंश पालक किसानों को सबसिडी देने का प्रावधान करना, ग्रामीण भारतीयों को आत्मनिर्भर बनाना।

7. सभी धर्मों के भारतीय नागरिकों के लिए अधिकतम तीन संतान उत्पन्न करने का कठोर जनसंख्या कानून बनाना, इस कानून की अवमानना करने वाले को सभी सरकारी सुविधाओं से वंचित कराना।

8. विद्यालयों में चरित्र निर्माण, व्यवसायिक शिक्षा व सैन्य शिक्षा अनिवार्य करना। तथ्यों के आलोक में भारतीय इतिहास का पुनर्लेखन कराना तथा ताजमहल, लालकिला आदि प्राचीन भवनों के वास्तविक निर्माताओं को श्रेय देकर भारत का सुप्त स्वाभिमान जगाना। काल गणना के लिए युगाब्ध को अपनाकर राष्ट्रीय पंचांग के रूप में लागू करना। केन्द्रिय परीक्षाओं में अंग्रेजी प्रश्नपत्र की अनिवार्यता समाप्त करना तथा संस्कृत, हिन्दी व क्षेत्रिय भाषाओं को वैकल्पिक आधार प्रदान करना।

9. स्वदेशी उत्पादनों को प्रोत्साहित करना। आयुर्वेद को राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करना।

10. उन्नत कृषि एवं पशुपालन को प्रोत्साहित करना तथा राष्ट्रीय किसान आयोग का पुनर्गठन करना।

11. बेरोजगारी, गरीबी, भूख, अभाव व अशिक्षा से मुक्त स्वस्थ, समृद्ध, संस्कारवान व शक्तिशाली भारत का पुनर्निर्माण करना और भारत को विश्व की महाशक्ति तथा विश्वगुरू के रूप में पुन: प्रतिष्ठित करना।

भारत स्वाभिमान दल - समर्पण निधि योजना

राष्ट्र हित व धर्म हित में धरातल पर कार्य करने की इच्छा रखने वाले राष्ट्रभक्तों का भारत स्वाभिमान दल की हित चिंतक योजना में हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन हैं ।

जैसा कि आप सभी लोग जानते है कि देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा व संवर्धन के लिए कार्यरत क्रांतिकारी संगठन भारत स्वाभिमान दल एक राजनीतिक विचारों का गैर राजनीतिक संगठन हैं।

साथियों भ्रष्ट व आसुरी शक्तियों से धर्म और संस्कृति को सुरक्षित करने के लिए ही नहीं, देश की समूचीव्यवस्था को सही तरीके से चलाने के लिए भी अच्छे लोगों का राजनीति में आना जरूरी है। ऐसे ही लोग भ्रष्टाचारी व आसुरी शक्तियों के प्रभाव को दूर कर पाते हैं जो आम जन की अभिलाषाओं को पूरा कर पाने की दिशा में प्रयत्नशील रहते हैं।

हमारे जनतंत्र में चुने हुए लोगों का महत्व बहुत है। सरकार चलाने व व्यवस्था बनाने का काम इन्हीं के हाथ में होता है। लेकिन देखने में यह आता है कि किसी भी तरह चुनाव जीतने वाला इंसान आम जन की सेवा के भाव से नहीं आता। उसके निजी स्वार्थ होते हैं और वह समाज के हर तबके के बारे में प्राय : मानवीय दृष्टि से नहीं सोचना चाहता। यहीं से साम्प्रदायिक तुष्टिकरण का कारोबार शुरू हो जाता है। जो योजनाएं आम जनता के कल्याण के लिए बनाई जानी चाहिए, वे साम्प्रदायिक आधार पर बनाई जाती है, सभी भारतीयों को उनका लाभ मिल ही नहीं पाता।

इस स्थिति को समाप्त करने के लिए यह बहुत आवश्यक है कि राजनीति में समाज सेवा का भाव रखने वाले हिन्दुत्वनिष्ठ लोग अधिक से अधिक आएं। शुरुआत भले ही कम लोग करें , लेकिन उनके राजनीति में प्रवेश से और लोगों का हौसला भी बढ़ेगा। उनके सही जगह पहुंचते ही साधारण नागरिक को भी सरकार पर विश्वास होने लगेगा।

मित्रों नेताओ को कोसने की प्राचीन परंपरा छोडकर अब नई पीढ़ी को राजनीति के शुद्धिकरण का बीड़ा उठाना चाहिए । इसके लिए अच्छे लोगो को राजनीति में आने की जरूरत है । पानी की गहराई किनारे पर बैठ कर नहीं आँकी जा सकती है । अब तो राजनीति में शुद्ध आचार-विचार वाले व्यक्तियों को आना ही होगा ।

भारत स्वाभिमान दल राष्ट्र को एक सशक्त राजनीतिक विकल्प देने जा रहा हैं, जिसके लिए देश भर से हमें समर्पण निधि योजना के तहत सदस्य व हितचिंतक चाहिए, जो भारत स्वाभिमान दल को 1100, 2100, 5100, 11000 रूपयों का आर्थिक अनुदान दे सके। न्यूनतम 1100 से 11000 रूपये तक का अनुदान देने वाले सदस्य संगठन के हितचिंतक कहलाएँगे, हितचिंतकों में से अथवा उनके सुझाव अनुसार ही प्रत्याशियों का चयन किया जायेगा।

सक्रीय राजनीति में उतरने के बाद "भारत स्वाभिमान दल जो घोषणा करेगा, वहीं कार्य करेगा", इसके लिए दल का चुनावी घोषणा पत्र भी नोटरी द्वारा प्रमाणित कराकर जारी किया जाएगा, ताकि अपने वचनों को पूरा न किये जाने की स्थिति में कोई भी भारतीय नागरिक भारत स्वाभिमान दल पर कोर्ट केस कर सकें। इसलिए अनावश्यक सोच विचार छोड़ कर छब्बीस सौ वर्षों की गलतियों को सुधारने के लिए भारत स्वाभिमान दल के हित चिंतक बनें, और व्यवस्था बदलें।

सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन, राजनैतिक शुचिता तथा भारत के पुर्नोत्थान के लिए अधिक से अधिक संख्या में तन- मन- धन के साथ संगठन से जुड़ें।
भारत स्वाभिमान दल आपका हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन करता हैं।

नोट :- दान व सहयोग कैसे करे

सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन, राजनैतिक शुचिता व राष्ट्र- धर्म रक्षा के लिए भारत स्वाभिमान दल की समर्पण निधि योजना में सहयोगी बनने के इच्छुक दानदाता बैंक ऑफ बड़ौदा की स्थानीय सी0बी0एस0 शाखा में पहुंचकर

भारत स्वाभिमान दल
खाता संख्या A/C no :- 08840100020849
IFSC - BARB0FATEAS
Branch Code 0884
(भारत स्वाभिमान दल, बैंक ऑफ बड़ौदा, फतेहगंज पूर्वी, बरेली, उत्तर प्रदेश) के नाम अपना धन जमा कर उसकी जमा पर्ची व अपना नाम, आयु, पिता का नाम, शैक्षणिक योग्यता, पत्र व्यवहार का पता (पिन कोड सहित), व मोबाइल नम्बर हमें 08535004500 पर वाट्सएप्प कर दें।

खाते में धन जमा करवाते समय खाता धारक का नाम एवं शाखा का स्थान अवश्य जांच लें।
सभी प्रकार के दान व सदस्यता किसी भी स्थिति में पूर्णतया अप्रत्यवर्णीय (Not Refundable) हैं।
समर्पण निधि योजना के बारे में अधिक जानने के लिए 8535004500 पर कॉल करें।

वन्दे मातरम्
भारत माता की जय

क्रिमिनल ट्राइब्स में शामिल लगभग 200+ जातियों के मुक्ति दाता 🙏महाशय मसूरियादीन पासी जी को राष्ट्रीय सनातन पार्टी कोटि-को...
01/09/2026

क्रिमिनल ट्राइब्स में शामिल लगभग 200+ जातियों के मुक्ति दाता 🙏

महाशय मसूरियादीन पासी जी को राष्ट्रीय सनातन पार्टी कोटि-कोटि नमन एवं शत-शत प्रणाम करती हैं। 💐
आपके संघर्ष, साहस और योगदान को अनुसूचित जाति जनजाति समाज सदैव याद रखेगा।

भीमराव अम्बेडकर जैसे नेताओं द्वारा क्रिमिनल ट्राइब्स में शामिल जनजातियों को उनका अधिकार, यहां तक की वोट का अधिकार दिए जाने का विरोध किए जाने के बावजूद, आपने क्रिमिनल ट्राइब्स जातियों के अधिकारों की लड़ाई को जारी रखा तथा वंचित एवं शोषित समाजों की मुक्ति के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया।

महाशय मसूरियादीन पासी जी अमर रहें!
🚩 जय सनातन 🚩
#राष्ट्रीय_सनातन_पार्टी
#महाशय_मसूरियादीन_पासी
#क्रिमिनल_ट्राइब्स
#अनुसूचित_समाज
#बौद्ध_धर्म_के_अनकहे_सच

राष्ट्रीय सनातन पार्टी देश की जनता से एक सीधा सवाल पूछना चाहती है—यदि किसी धार्मिक ग्रंथ में स्त्रियों या किसी वर्ग के प...
01/09/2026

राष्ट्रीय सनातन पार्टी देश की जनता से एक सीधा सवाल पूछना चाहती है—

यदि किसी धार्मिक ग्रंथ में स्त्रियों या किसी वर्ग के प्रति भेदभावपूर्ण माने जाने वाले विचारों के विरोध में प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, तो विरोध के मानदंड सभी धर्मों और सभी ग्रंथों के लिए समान क्यों नहीं होने चाहिए?

यदि मनुस्मृति का दहन उसके कथित भेदभावपूर्ण विचारों के विरोध के प्रतीक के रूप में किया जाता है, तो फिर कुरआन, त्रिपिटक, बीजक, बाइबल आदि में मौजूद ऐसे अंशों या व्याख्याओं पर भी समान कसौटी से चर्चा और विरोध क्यों नहीं?

विरोध हो तो समान हो, सवाल हो तो सभी से हो और कसौटी भी सबके लिए एक हो।

राष्ट्रीय सनातन पार्टी का प्रश्न किसी धर्म का अपमान करना नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और विरोध के दोहरे मापदंडों पर सार्वजनिक बहस की मांग करना है।

क्या लोकतंत्र में विरोध के भी अलग-अलग पैमाने होने चाहिए?

योगी आदित्यनाथ के भीमराज में अंबेडकर प्रतिमा के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध है।योगी का चेहरा मीडिया में चमकाने के लिए भरपूर ...
16/08/2026

योगी आदित्यनाथ के भीमराज में अंबेडकर प्रतिमा के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध है।

योगी का चेहरा मीडिया में चमकाने के लिए भरपूर फंड है।

लेकिन बच्चों के स्कूलों व भोजन के लिए फंड की कमी है।

बंद होते प्राथमिक स्कूल और बच्चों के खाने के लिए निर्धारित प्रति छात्र 6 रुपए 78 पैसे का बजट योगी के भीमराज की पोल‌ खोलने के लिए पर्याप्त है।

राष्ट्रीय सनातन पार्टी जानना चाहती है कि आखिर योगी आदित्यनाथ सरकार के पास ऐसा कौन सा जादुई फार्मूला है, जिससे 6-7 रूपए में बच्चों को पौष्टिक आहार मिल रहा हैं!

बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी, उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय सनातन पार्टी की सरकार बनने पर स्कूली शिक्षा तंत्र को मजबूत किया जाएगा तथा खाने का बजट प्रति छात्र 25 रूपए किया जाएगा, ताकि उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था सुधरे तथा बच्चों को पौष्टिक आहार मिल सकें।

https://www.rashtriyasanatanparty.org

*15 अगस्त – अपूर्ण स्वतंत्रता का सच और हिन्दू स्वाभिमान का संकल्प*- विश्वजीत सिंह अनंतराष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय सनातन...
15/08/2026

*15 अगस्त – अपूर्ण स्वतंत्रता का सच और हिन्दू स्वाभिमान का संकल्प*
- विश्वजीत सिंह अनंत
राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय सनातन पार्टी

पंद्रह अगस्त का दिन हमें केवल स्वतंत्रता का उल्लास नहीं, बल्कि अधूरी मुक्ति का स्मरण कराता है। 1947 में अंग्रेज़ भारत छोड़कर नहीं गए थे—बल्कि उन्होंने सत्ता का हस्तांतरण (Transfer of Power) किया था। यह कोई युद्ध में जीती हुई पूर्ण स्वतंत्रता नहीं थी, बल्कि Indian Independence Act, 1947 के तहत एक संधि थी, जिसे ब्रिटिश संसद ने पारित किया और जिसमें स्पष्ट रूप से भारत व पाकिस्तान को “डोमिनियन स्टेट्स” घोषित किया गया।

अर्थात भारत पूर्ण संप्रभु राष्ट्र नहीं, बल्कि ब्रिटिश क्राउन के अधीनस्थ एक राज्य था, जो कॉमनवेल्थ के ढांचे में बंधा हुआ था। यही कारण है कि ब्रिटेन की महारानी आज भी भारत की “मानद नागरिक” जैसी विशेष स्थिति रखती हैं, और बिना वीज़ा के भारत आ सकती हैं, जबकि भारत के प्रधानमंत्री तक ब्रिटेन जाने के लिए वीज़ा लेते हैं।

गुलामी के चिह्न आज भी जीवित हैं

राजा साहब बच्चूसिंह जिन्हें अंग्रेज़ अपनी सत्ता के लिए ख़तरनाक मानते थे, आज़ादी के बाद भी 80 वर्षों बाद भी संसद में उनकी प्रतिमा नहीं लग सकी, भारत रत्न दिया जाना तो बहुत दूर की बात हैं।

भारत का नाम “इंडिया” अंग्रेज़ी उपनिवेशवाद की ईस्ट इंडिया कंपनी की स्मृति को ढोता है। स्वतंत्रता के बाद इसे बदलने का अवसर था, लेकिन सत्ता हस्तांतरण संधि का दबाव हावी रहा।

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जैसे महान योद्धा की वापसी अंग्रेज़ों की शर्तों से रोक दी गई। आज़ाद हिंद फौज को भुला दिया गया।

अखंड भारत का विखंडन और हिन्दू जनसंख्या का संकट

इतिहास प्रमाण है—अखंड भारत की भूमि बौद्ध और इस्लामी आक्रमणों के कारण पहले ही खंडित हो चुकी थी।

बौद्ध लोगों ने म्यांमार, थाईलैंड, श्रीलंका, तिब्बत आदि के रूप में भारत को खंडित कर अपने हिस्से अलग कर लिए।

इस्लामी आक्रमणकारियों ने अफगानिस्तान, कज़ाकिस्तान, ईरान तक कब्ज़ा कर लिया।

१९४७ में शेष भारत से पाकिस्तान और बांग्लादेश अलग हुए।

यदि बौद्ध और मुस्लिम देशों की कुल जनसंख्या व क्षेत्रफल को जोड़ दें, तो वर्तमान भारत भौगोलिक व जनसंख्या की दृष्टि से बहुत छोटा रह गया है। और वास्तविकता यह है कि हिन्दू, बौद्ध+मुस्लिम जनसंख्या के सामने आज अल्पसंख्यक हो चुके हैं।

अल्पसंख्यक विशेषाधिकार – संविधान की विकृति

संवैधानिक धाराएं:

अनुच्छेद 29(1) – किसी भी समुदाय को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को संरक्षित रखने का अधिकार।

अनुच्छेद 30(1) – अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थान स्थापित और संचालित करने का विशेष अधिकार।

अनुच्छेद 30(2) – राज्य किसी भी अल्पसंख्यक-प्रबंधित शैक्षणिक संस्था को सरकारी अनुदान देने में भेदभाव नहीं करेगा।

वास्तविक स्थिति:

इन अधिकारों का लाभ बौद्ध, मुस्लिम और ईसाई समुदाय को मिला।

हिन्दू समाज के मंदिर, शिक्षा संस्थान और दान-पुण्य पर सरकारी नियंत्रण।

सरकारी अनुदान और छूट से वंचित रहना।

समान नागरिक होने के बावजूद धर्म के आधार पर भेदभाव।

राष्ट्रीय सनातन पार्टी का स्पष्ट संकल्प

1. धर्म आधारित अल्पसंख्यक विशेषाधिकार समाप्त – सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार, समान कानून।

2. सनातन धर्म को संवैधानिक संरक्षण – हिन्दू धर्म के अस्तित्व, मंदिरों, परंपराओं और धार्मिक संपत्ति की सुरक्षा हेतु स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान।

3. भारत का वास्तविक स्वराज्य – कॉमनवेल्थ से अलग होकर भारत को पूर्ण संप्रभु राष्ट्र बनाना।

4. भारत नाम की पुनर्स्थापना – उपनिवेशवादी “इंडिया” नाम को हटाकर, “भारत” को ही आधिकारिक और अंतरराष्ट्रीय नाम बनाना।

5. हिन्दू जनसंख्या व संस्कृति की सुरक्षा – जनसंख्या संतुलन नीति, धर्मांतरण विरोधी कानून, और मंदिरों को सरकारी कब्जे से मुक्त करना।

ऐतिहासिक प्रमाण सूची

1. Indian Independence Act, 1947 – ब्रिटिश संसद का रिकॉर्ड (UK Parliament Archives)।

2. Constitution of India – Articles 29 & 30 – भारत का संविधान, मूल पाठ।

3. Commonwealth Charter – UK Government official website।

4. Transfer of Power Agreements, 1947 – National Archives of India।

5. Netaji Subhas Chandra Bose files – National Archives, India (Declassified Documents)।

6. Constituent Assembly Debates – वंदे मातरम् और राष्ट्रगीत पर बहस (Vol. XII, 1949)।

हमारा आह्वान

15 अगस्त हमें केवल सावतंत्रता का उत्सव मनाने के लिए नहीं, बल्कि पूर्ण स्वराज्य और हिन्दू स्वाभिमान की पुनर्स्थापना के लिए संकल्प लेने का दिन बनना चाहिए।
राष्ट्रीय सनातन पार्टी इस अधूरी सावतंत्रता को पूर्ण करने का व्रत लेकर आगे बढ़ रही है—
राष्ट्रहित सर्वोपरि, सनातन धर्म सर्वोपरि।

राजा साहब बच्चूसिंह अमर रहें।

*राष्ट्रीय सनातन पार्टी हिन्दुओ के लिए सर्वोत्तम राजनीतिक विकल्प है। सनातन धर्म को संवैधानिक संरक्षण देकर बहुसंख्यक समाज के धन, धर्म और जीवन की रक्षा करना राष्ट्रीय सनातन पार्टी का मूल ध्येय है। पार्टी से जुडे और राष्ट्रहित की राजनीति करें।*

राष्ट्रीय सनातन पार्टी में अधिक जानने तथा सदस्य बनने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाए

https://www.rashtriyasanatanparty.org

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#राष्ट्रीय_सनातन_पार्टी


भगवान महादेव की पावन कृपा और शिवभक्तों की अटूट श्रद्धा को नमन। कांवर केवल कंधे पर उठाया गया जल नहीं, बल्कि श्रद्धा, संकल...
11/08/2026

भगवान महादेव की पावन कृपा और शिवभक्तों की अटूट श्रद्धा को नमन। कांवर केवल कंधे पर उठाया गया जल नहीं, बल्कि श्रद्धा, संकल्प, संयम और समर्पण का प्रतीक है। इसी भाव को केंद्र में रखते हुए प्रस्तुत है—‘कांवर यात्रा और शिवशक्ति’ पुस्तक की यह प्रस्तावना, जो हमें बाहरी यात्रा के साथ-साथ उस आंतरिक यात्रा की ओर भी ले जाने का विनम्र प्रयास है, जहाँ गंगाजल के साथ मन की निर्मलता और शिवनाम के साथ जीवन में शिवत्व का संचार हो।

हर हर महादेव!

प्रस्तावना

श्रावण आते ही भारत की धरती शिवमय हो उठती है। नगरों और गाँवों से श्रद्धालु कांवर लेकर शिवधाम की ओर निकल पड़ते हैं। कंधे पर कांवर, उसमें पवित्र जल, जिह्वा पर “हर हर महादेव” और हृदय में अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा—यह दृश्य सनातन आस्था की जीवंत अभिव्यक्ति है।

कांवर यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है। यह संकल्प, श्रद्धा, अनुशासन और समर्पण की यात्रा है। भक्त अपने आराध्य के लिए यात्रा करता है, अपने समय और श्रम को समर्पित करता है और अंततः पवित्र जल को भगवान शिव के चरणों में अर्पित करता है।

परंतु इस यात्रा का एक और गहरा पक्ष है—

क्या कांवर केवल कंधे पर उठानी है, या उसके साथ शिवभक्ति को भी हृदय में उठाना है?

यहीं से कांवर साधना का विचार आरंभ होता है।

कांवर में रखा जल श्रद्धा का प्रतीक है। उसे लेकर चलना भक्त के लिए एक साधना हो सकता है। लेकिन साधना का मूल्य केवल बाहरी भार से निर्धारित नहीं होता।

कितना जल है, कांवर कितनी बड़ी है, यात्रा कितनी कठिन है—इनसे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि उस यात्रा में मन कहाँ है।

क्या जिह्वा पर शिवनाम है?

क्या मन में श्रद्धा है?

क्या व्यवहार में संयम है?

क्या मार्ग में सेवा का भाव है?

क्या भीतर अपने दोषों को छोड़ने का संकल्प है?

यदि इन प्रश्नों का स्थान हमारी साधना में बनता है, तो कांवर केवल जल ढोने की प्रक्रिया नहीं रहती; वह शिवचिंतन की यात्रा बन जाती है।

इसलिए इस पुस्तक का उद्देश्य कांवर यात्रा को छोटा करना नहीं, बल्कि उसके आध्यात्मिक अर्थ को बड़ा करना है।

कांवर को छोटा करना नहीं, कांवर की साधना को बड़ा करना—यही इस पुस्तक का उद्देश्य है।

सनातन धर्म में तप, त्याग और अनुशासन का अपना महत्व है। भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार कष्ट सहकर भी भगवान की आराधना करता है। यह श्रद्धा का सुंदर रूप हो सकता है।

लेकिन साधना में विवेक भी आवश्यक है।

यदि बाहरी भार इतना बढ़ जाए कि साधक का अधिकांश ध्यान केवल शरीर की पीड़ा, थकान या उस भार को सँभालने में लगने लगे, तो यह विचार करना उचित है कि कहीं साधना का साध्य पीछे तो नहीं छूट रहा।

शिवभक्ति में सहजता का अर्थ श्रद्धा की कमी नहीं।

संतुलित साधना भी साधना है।

शिव को अर्पित किया गया जल कितना है, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि उसे अर्पित करने वाला हृदय कितना श्रद्धापूर्ण है।

इस पुस्तक में आगे कांवर के जल की मात्रा को लेकर एक विचार रखा गया है—लगभग एक किलो जल को सहज और सात्त्विक साधना की दृष्टि से, पाँच किलो को अधिक बाहरी भार की ओर बढ़ती साधना के रूप में तथा पाँच किलो से अधिक को अत्यधिक भार के संदर्भ में विचार किया गया है।

यहाँ स्पष्ट करना आवश्यक है कि यह कोई प्रमाणित शास्त्रीय किलोग्राम-आधारित नियम नहीं है।

इसे पुस्तक में एक प्रस्तावित साधना-विवेक के रूप में रखा गया है—ऐसा विवेक जो साधक को अपनी सामर्थ्य, स्वास्थ्य, सहजता और शिवचिंतन पर विचार करने के लिए प्रेरित करे।

किसी भक्त की श्रद्धा का मूल्यांकन केवल कांवर के भार से नहीं किया जा सकता।

हमारा उद्देश्य तुलना करना नहीं, संतुलन की ओर प्रेरित करना है।

शिवलिंग पर जल चढ़ाना भक्ति की सुंदर अभिव्यक्ति है।

लेकिन यदि उसी जल के साथ हम अपने भीतर का कोई दोष भी छोड़ने का संकल्प लें, तो पूजा साधना बन सकती है।

जल चढ़ाएँ और क्रोध कम करने का संकल्प लें।

जल चढ़ाएँ और अहंकार छोड़ने का प्रयास करें।

जल चढ़ाएँ और कटु वाणी से बचने का संकल्प लें।

जल चढ़ाएँ और सेवा को जीवन का हिस्सा बनाएँ।

जल चढ़ाएँ और शिवनाम को अपनी दिनचर्या में स्थान दें।

तब जल केवल शिवलिंग पर नहीं चढ़ता—

वह हमारे जीवन को भी स्पर्श करता है।

कांवर यात्रा पूरी होगी।

जल अर्पित होगा।

दर्शन होंगे।

भक्त घर लौट आएगा।

लेकिन क्या साधना भी वहीं समाप्त हो जाएगी?

नहीं।

वास्तव में वहीं से एक नई साधना आरंभ हो सकती है।

घर में दैनिक शिवार्चन।

परिवार में शिवचर्चा।

यथाशक्ति यज्ञ और हवन।

शिवनाम और ध्यान।

सेवा।

जल और प्रकृति की रक्षा।

और सबसे बढ़कर—अपने आचरण में शिव के गुणों को उतारने का प्रयास।

कांवर की यात्रा कुछ दिनों की हो सकती है।

शिवभक्ति की यात्रा पूरे जीवन की हो सकती है।

यह पुस्तक कांवर यात्रा की आलोचना करने के लिए नहीं है।

यह किसी भक्त की श्रद्धा को कम करने के लिए नहीं है।

यह यह बताने के लिए भी नहीं है कि कौन बड़ा भक्त है और कौन छोटा।

यह पुस्तक एक विनम्र आग्रह है—

कांवर को साधना बनाइए।

कंधे पर कांवर हो, तो जिह्वा पर शिवनाम भी हो।

पैर यात्रा कर रहे हों, तो मन शिवचिंतन में भी चले।

शरीर तप करे, तो अहंकार भी थोड़ा पिघले।

जल शिवलिंग पर चढ़े, तो जीवन में भी पवित्रता उतरे।

और यात्रा पूरी होने के बाद भी शिवभक्ति चलती रहे।

जब हम महादेव के धाम से लौटें, तो केवल यह न सोचें—

“मैं कितनी दूर चलकर आया?”

बल्कि स्वयं से पूछें—

“मैं कितना बदलकर लौटा?”

क्या मैं थोड़ा अधिक शांत हूँ?

थोड़ा अधिक विनम्र?

थोड़ा अधिक करुणामय?

थोड़ा अधिक संयमी?

थोड़ा अधिक सेवाभावी?

यदि उत्तर धीरे-धीरे “हाँ” होने लगे, तो समझिए कि कांवर केवल कंधे पर नहीं थी—

वह आपके हृदय की यात्रा बन गई।

कांवर कंधे पर रहे या उतर जाए,

जल अर्पित हो जाए या समाप्त हो जाए,

यात्रा पूरी हो जाए या लौटना पड़ जाए—

शिव हृदय से न उतरें।

यही कांवर साधना है।

यही शिवभक्ति है।

हर हर महादेव!

विश्वजीत सिंह अनंत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय सनातन पार्टी

#कांवर_साधना_और_शिवशक्ति

बुद्ध ने मनु के विचार क्यों अपनाए? | क्या मनुस्मृति को जानबूझकर बदला गया? | बौद्ध धर्म के अनकहे सच
08/08/2026

बुद्ध ने मनु के विचार क्यों अपनाए? | क्या मनुस्मृति को जानबूझकर बदला गया? | बौद्ध धर्म के अनकहे सच

बुद्ध ने मनु के विचार क्यों अपनाए? | क्या मनुस्मृति को जानबूझकर बदल...

07/08/2026
07/08/2026

भगवा केवल एक वस्त्र या रंग नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, सेवा और सनातन संस्कृति का पवित्र प्रतीक है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक ओर भगवा ध्वज के सामने प्रणाम करता है, तो दूसरी ओर भगवा संस्कृति को नष्ट करने का कार्य करता है।

संघ समलैंगिकता का समर्थन करता है, बिना विवाह के सेक्स संबंध (लिव-इन रिलेशनशिप) का समर्थन करता है, सनातन धर्म को अपमानित और कलंकित करने वाले लोगों को अपना प्रात: स्मरणीय मानता है, 50 वर्षों के लिए हिन्दू देवी-देवताओं को भूल जाने की बात करता है, वसुधैव कुटुम्बकम की बात करने वाले हिन्दुओ और संपूर्ण संसार से मूर्ति पूजकों को समाप्त कर दो की भावना रखने वालों का डीएनए समान बताता है, मुसलमान नहीं रहेगा तो हिन्दू भी नहीं रहेगा की बात करता हैं, हिन्दू धर्म के मंदिरों में चोरी कराता है, जिससे भगवा कलंकित होता हैं, संघ का यह चरित्र अत्यंत अनुचित और दुर्भाग्यपूर्ण है।

ऐसी गतिविधियाँ करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करती हैं और समाज में अनावश्यक वैमनस्य पैदा करती हैं।

लोकतंत्र में अभिव्यक्ती का अधिकार सभी को है, लेकिन सनातन धर्म की मर्यादा का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है।

भगवे का सम्मान करें — निजी स्वार्थ के लिए भगवा और सनातन धर्म को अपमानित और कलंकित मत करों।

॥ जय सनातन ॥

विश्वजीत सिंह अनंत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय सनातन पार्टी

https://www.rashtriyasanatanparty.org

04/08/2026

हम जयपुर में UGC का विरोध कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज का कड़ा विरोध करते हैं। BJP मुर्दाबाद
#राष्ट्रीय_सनातन_पार्टी

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