Virsat -E-Pahad विरासत ए पहाड़

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विरासत ए पहाड़ सिर्फ एक पेज नहीं, ये एक यात्रा है उस धरोहर की जो पीढ़ियों से हमारे पहाड़ों की रगों में बहती आ रही है यहाँ हम सुनाते हैं उन लोककथाओं की गूंज, दिखाते हैं मिट्टी की सौंधी गंध, और संजोते हैं उनपरंपराओं को, जिन्हें अब धीरे-धीरे भुलाया जा रहा है

✨ सुप्रभातम | A Golden Morning from the Lap of the Hills ✨:There is a unique magic in the way the sun kisses the mountai...
01/06/2026

✨ सुप्रभातम | A Golden Morning from the Lap of the Hills ✨
:
There is a unique magic in the way the sun kisses the mountain peaks awake. As the morning mist gently clears, it reveals the timeless beauty of our traditional homes, terraced fields, and the quiet, peaceful rhythm of Pahadi life.
Pour yourself a hot cup of chai, breathe in the crisp, pure mountain air, and take a moment to connect with the roots that ground us. May your day be as bright and serene as this Himalayan sunrise. ⛰️❤️
How is the weather in your part of the world today? Let us know in the comments! 👇

Ek simple sawaal hai aaj... 🙏Agar tum Pahadi ho —Comment mein batao:"Main ___ (apne gaon/pahad ka naam) se hoon" 🏔️Kyunk...
29/05/2026

Ek simple sawaal hai aaj... 🙏

Agar tum Pahadi ho —
Comment mein batao:

"Main ___ (apne gaon/pahad ka naam) se hoon" 🏔️

Kyunki humein apni viraasat par garv hai.
Humara pahad sirf jagah nahi —
wo humari rooh hai. 🌿

Hamaare rasm, hamaari zubaan, hamaara khana,
hamaare tyohaar, hamaare geet —
yeh sab milke bante hain:

VIRAST E PAHAD 🙌

Is post ko share karo —
taaki duniya jaane ki hamaara pahad
kitna khaas hai. ❤️

Apne gaon ka naam zaroor likho neeche 👇🔥

पहाड़ सिर्फ एक भौगोलिक स्थल नहीं होते, बल्कि ये हमारे जीवन को नई दिशा देने वाली प्रेरणा, संघर्षों की एक साहसिक गाथा और अ...
25/05/2026

पहाड़ सिर्फ एक भौगोलिक स्थल नहीं होते, बल्कि ये हमारे जीवन को नई दिशा देने वाली प्रेरणा, संघर्षों की एक साहसिक गाथा और अपनी जड़ों से जुड़ने का एक मजबूत माध्यम होते हैं. जो एक बार पहाड़ों की गोद में पहुँच गया, वह शहरों की भागदौड़ में भी उनकी शांति की तलाश करता है… आपके लिए पहाड़ का क्या अर्थ है? कमेंट में अवश्य बताएं.

27/07/2025

swimming pool 1616

ढोल का इतिहास बहुत प्राचीन और समृद्ध है। यह एक प्रमुख मेम्ब्रेनोफोन (ताल वाद्य) वाद्य यंत्र है, जो भारत के विभिन्न हिस्स...
27/06/2025

ढोल का इतिहास बहुत प्राचीन और समृद्ध है। यह एक प्रमुख मेम्ब्रेनोफोन (ताल वाद्य) वाद्य यंत्र है, जो भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रूपों और नामों से पाया जाता है। लेकिन अगर हम ढोल की उत्पत्ति (origin) की बात करें, तो इसका विकास पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में हुआ और यह संस्कृति, परंपरा, और लोक जीवन का अहम हिस्सा बन गया।



🥁 ढोल की उत्पत्ति (Origin of Dhol):
1. प्राचीन काल में जड़ें:
• ढोल का उल्लेख प्राचीन संस्कृत ग्रंथों, जैसे “नाट्यशास्त्र” में मिलता है, जहाँ इसे ‘अवनद्ध वाद्य’ (जो चमड़े से ढका हो) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
• वैदिक युग में युद्ध और धार्मिक अनुष्ठानों में ढोल जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग होता था।
2. लोक जीवन में प्रवेश:
• जैसे-जैसे समाज विकसित हुआ, ढोल शादी-ब्याह, त्योहारों, और धार्मिक आयोजनों का अभिन्न हिस्सा बन गया।
• यह सिर्फ संगीत का उपकरण नहीं, बल्कि सूचना देने का माध्यम भी था — जैसे गाँवों में सभा बुलाने, आपात स्थिति बताने, या शुभ समाचार फैलाने के लिए ढोल बजाया जाता था।
3. क्षेत्रीय विविधता:
• भारत के अलग-अलग राज्यों में ढोल के अलग रूप हैं:
• पंजाब में: ढोल भांगड़ा का मुख्य वाद्य है।
• महाराष्ट्र में: गणेश उत्सव और गवली परंपरा में प्रयोग होता है।
• उत्तराखंड में: यह ढोल-दमाऊ की जोड़ी में लोकदेवताओं के जगर, लोकनृत्य और पूजा-पाठ में बजता है।
• बंगाल और ओडिशा में भी इसके विशेष रूप हैं।
4. उत्तराखंड का विशेष योगदान:
• उत्तराखंड में ढोल को सिर्फ वाद्य यंत्र नहीं बल्कि देवताओं के संचार का माध्यम माना जाता है।
• ढोल सागर नामक एक प्राचीन ग्रंथ है, जिसमें बताया गया है कि कौन-से अवसर पर किस थाप का प्रयोग किया जाना चाहिए। इसे मौखिक परंपरा से पीढ़ी-दर-पीढ़ी याद रखा गया।



🔍 ढोल की बनावट (Construction):
• ढोल आमतौर पर लकड़ी के खोखले सिलेंडर से बनाया जाता है, जिसके दोनों ओर चमड़ा (आमतौर पर बकरी या भैंस की खाल) कसा जाता है।
• इसे एक हाथ से डंडी (स्टिक) और दूसरे हाथ से खुले हाथ या दूसरी डंडी से बजाया जाता है।



🌍 ढोल की वैश्विक पहुंच:

ढोल अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है — यह ब्रिटेन, कनाडा, अमेरिका आदि देशों में बसे भारतीय और विशेषकर पंजाबी समुदायों के बीच बहुत लोकप्रिय है। ढोल अब फ्यूजन म्यूजिक, बॉलीवुड और अंतरराष्ट्रीय स्टेज पर भी अपनी आवाज़ बिखेर रहा है।

09/06/2025

📿 चार धाम यात्रा 2025 की शुरुआत हो चुकी है!
उत्तराखंड की हिमालयी वादियों में बसे चार पवित्र तीर्थ – यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ – की यात्रा हर हिंदू के लिए आध्यात्मिक अनुभव से कम नहीं।

🌸 इस यात्रा से न केवल मन को शांति मिलती है, बल्कि यह जीवन को एक नया दृष्टिकोण भी देती है।
🙏 कहते हैं कि चार धाम की यात्रा करने से जीवन के पाप कटते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

📍 चार धाम:
1️⃣ यमुनोत्री – यमुना माता का धाम
2️⃣ गंगोत्री – गंगा माता का उद्गम
3️⃣ केदारनाथ – भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग
4️⃣ बद्रीनाथ – भगवान विष्णु का पावन धाम

📅 यात्रा अवधि: मई से अक्टूबर 2025 तक

🚩 अगर आप भी इस दिव्य यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो समय रहते योजना बनाएं।
🔖 संपर्क करें / जानकारी के लिए मैसेज करें।

#भगवान_का_बुलावा

Welcome to Uttarakhand Virasat!From the sacred peaks of Kedarnath to the soulful beats of Chholiya dance — explore the t...
08/06/2025

Welcome to Uttarakhand Virasat!
From the sacred peaks of Kedarnath to the soulful beats of Chholiya dance — explore the timeless traditions, temples, and tales of Devbhoomi.
Join us as we celebrate the heart and soul of Uttarakhand’s rich culture, people, and legacy.

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